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सियासत

खामोशी से बाज आओ पत्रकारों वरना ये सिलसिला अब थमने वाला नहीं

इस देश में क्या हो रहा है, कहीं कोर्ट परिसर में मर्डर तो कहीं जर्नलिस्ट का मर्डर तो कहीं ४२० के केस में पुलिस एनकाउंटर करती है, तो कहीं पुलिस मर्डर के अभियुक्त को समोसे खिलाती है, आखिर कितने जगेंद्र सिंह जैसे बेगुनाह और कलम के सिपाहियों की बलि लेगा ये देश।

इस देश में क्या हो रहा है, कहीं कोर्ट परिसर में मर्डर तो कहीं जर्नलिस्ट का मर्डर तो कहीं ४२० के केस में पुलिस एनकाउंटर करती है, तो कहीं पुलिस मर्डर के अभियुक्त को समोसे खिलाती है, आखिर कितने जगेंद्र सिंह जैसे बेगुनाह और कलम के सिपाहियों की बलि लेगा ये देश।

जब नेता को बचाना होगा तो जांच कर या कह दिया जायेगा कि पत्रकार की एक्टिविटी अच्छी नहीं थी। आखिर कब तक सत्ता और नेताओं के दलाल अपने घर में ही अपनों की हत्या होते देख मजे लेंगे। आज जगेंद्र सिंह तो कल कभी प्रदीप भाटिया, राजेश वर्मा, मूलचंद यादव, दिनेश पाठक ऐसे करीब 36 से ज्यादा कलम के सिपाहियों की हत्या देश के नेताओं ने करवाईं और पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट में यही कहा कि इन पत्रकारों की एक्टिविटी अलग थी।

आखिर क्यों ऐसी नौबत आई कि उनकी हत्या करनी पड़ी, आखिर कितने, कब तक और कौन-कौन? अगला अटैक आपके घर पर भी हो सकता है। भगत सिंह के पड़ोसी के घर पैदा होने का इंतज़ार न करें। आप अपने घर का खुद भगत सिंह होने जज्बा पैदा करें अपने अंदर। वरना कहीं आप भी अगला निशाना इन नामों में शामिल न हो जायं। कलम के सिपाही अब तो चेत जाएं ? 

लेखक एवं अधिवक्ता, प्रबंध संपादक लीगल बाउंड्री सत्य प्रकाश से संपर्क [email protected]

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