प्रधान सेवक ने जिस जज को काले धन पर एसआईटी का सदस्य बनाया उसी ने आयकर माफी योजना का लाभ लिया!

संजय कुमार सिंह-

काले धन की 15 लाख वाली योजना यहां फंसी? इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित यह खबर “दूध की धुली” सरकार के स्वंयसेवकों का हाल बता रही है और भक्त बेचारे अपने 15 लाख भूलकर ेदश भर को मिले चंदे से परेशान हैं। अलग मिट्टी के बने प्रधान सेवक मित्र को ठेका दिला रहे हैं और कमीशन, चंदा, दलाली, सेवा के लिए पीएम केयर्स पहले से है। विशेष जांच दल के जज साब माफी पा गए। एकतरफा डिपार्टमेंट जांच राहुल गांधी की कर रहा है। प्रचारक जनता पार्टी राहुल गांधी को बदनाम करने में लगी है। तथ्यों से अनजान, भक्त बेचारे माथा धुन रहे हैं। मुझे राहुल गांधी की एक घनघोर प्रशंसक ने यह खबर भेजी और कहा कि आज आपने इंडियन एक्सप्रेस क्यों नहीं देखा। वाकई, भक्तों रह गया था। बतौर सजा / जुर्माना हिन्दी अनुवाद आपकी सेवा में ….

काले धन पर 2014 से पहले के प्रचार के बाद क्या हुआ?

काले धन पर दो सदस्यों की जांच दल के एक सदस्य ने 1.06 करोड़ रुपये की आय की ‘गलत रिपोर्टिंग’ की, आम माफी योजना का लाभ लिया; आईटी आदेश के अनुसार मध्यस्थता से हुई 3.66 करोड़ रुपये की आय; जज साब ने कहा, सुलझे हुए मामले को क्यों उठाएं

इंडियन एक्सप्रेस ने आज, बुधवार, 15 जून को उपरोक्त आशय की एक खबर छापी है। रितु सरीन और जय मजूमदार की यह खबर मैंने इंटरनेट से ली है इसे आज अपराह्न 3:51: 06 पर अपडेट किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत, काले धन पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) के सदस्य थे। आप उन लोगों में से एक हैं, जिन्होंने आयकर अधिकारियों द्वारा आय की गलत रिपोर्टिंग पकड़े जाने पर सरकार की माफी योजना का लाभ उठाया था। इंडियन एक्सप्रेस को यह पता चला है।

न्यायमूर्ति पसायत को मई 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कैबिनेट निर्णय के तहत दो सदस्यों की एसआईटी का सदस्य बनाया गया था। इस टीम के अध्यक्ष थे, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एमबी शाह हैं। काले धन पर बनी इस एसआईटी ने आठ साल में सुप्रीम कोर्ट को कई स्टेटस रिपोर्ट सौंपी हैं। इस टीम के कार्यों की प्रगति की निगरानी सुप्रीम कोर्ट ही करती है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, नवंबर 2020 में, आयकर विभाग की कटक इकाई ने 2017-18 के लिए एक आदेश भेजकर बताया कि उन्होंने अपनी आय को 1.06 करोड़ रुपये कम बताया था या गलत रिपोर्ट की थी। यह आदेश मिलने के एक साल बाद, न्यायमूर्ति पसायत ने सरकार की माफी योजना का लाभ उठाया।

इस योजना की शुरुआत (प्रत्यक्ष) डायरेक्ट टैक्स विवाद से विश्वास अधिनियम 2020 की शुरुआत के बाद की गई थी। इस योजना को 2021 तक बढ़ा दिया गया था और इसे केवल वीएसवी योजना कहा जाता है। इसका संक्षिप्त शीर्षक इसे “विवादित कर के समाधान” के लिए एक योजना के रूप में वर्णित करता है और इसकी धारा छहमें विस्तार से बताया गया है कि जो लोग इसका लाभ उठाते हैं उन्हें “अपराध” के संबंध में कार्यवाही से “छूट” मिलती है।

सरकारी अधिकारियों ने कहा कि न्यायमूर्ति पसायत ने वीएसवी योजना के तहत 38.28 लाख रुपये के “विवादित” कर के लिए 37.90 लाख रुपये का भुगतान किया।

योजना के प्रावधानों के तहत, न्यायमूर्ति पसायत के “विवादित” कर की गणना इस सूत्र के अनुसार की गई: आय में जोड़े गए अतिरिक्त कर का 30% (31.94 लाख रुपये); 15% अतिरिक्त अधिभार (4.79 लाख रुपये) और 3% शिक्षा और उच्च शिक्षा उपकर (1.10 लाख रुपये) तथा धारा 234 के तहत ब्याज (43,616 रुपये।)

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा इस बारे में पूछे जाने पर, न्यायमूर्ति पसायत ने पुष्टि की कि उन्होंने नवंबर 2020 में वीएसवी योजना का लाभ उठाया और 37.90 लाख रुपये का भुगतान किया।

उन्होंने आगे कहा: “मुझे नहीं पता कि 2019 का एक निजी आयकर आदेश कैसे लीक हो गया है … यह किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया हो सकता है जो मेरे द्वारा पारित आदेश से आहत हुआ हो। मैंने आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी, लेकिन तब मुझे वीएसवी योजना का लाभ उठाने, कर का भुगतान करने और मामले को समाप्त करने की सलाह दी गई थी। उन्होंने सवाल किया सुलझे हुए मामले को अभी क्यों उठाया जाना चाहिए?”

31 दिसंबर, 2019 को आयकर उपायुक्त, कटक द्वारा पारित न्यायमूर्ति पसायत के खिलाफ 21 पृष्ठ के आदेश की जांच से पता चलता है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की “रिटर्न” आय में 1,06,49,760 रुपये जोड़ दिये गए थे। सुप्रीम कोर्ट जज और काले धन पर एसआईटी के उपाध्यक्ष की आय में यह राशि “मध्यस्थता और विवाद समाधान कार्य के मद में खर्च ज्यादा होने का दावा किए जाने के कारण किया गया।”

विस्तृत आदेश से पता चलता है कि, ऐसेसमेंट वर्ष 2017-18 के लिए, न्यायमूर्ति पसायत ने वेतन से (एसआईटी पर अपनी स्थिति के लिए सरकार से) 26.85 लाख रुपये और मध्यस्थता तथा विवाद समाधान कार्य से 3.66 करोड़ रुपये की आय घोषित की थी। लेकिन, आदेश में कहा गया है, उन्होंने इस राशि को “अन्य स्रोतों से आय” के तहत घोषित किया था न कि “पेशेवर आय” के रूप में।

आयकर विभाग द्वारा अपने आदेश में जो अन्य आपत्ति उठाई गई, वह यह कि पूर्व न्यायाधीश के बैंक खातों की जांच और आईटी द्वारा तैयार किए गए फंड-फ्लो को उनकी मध्यस्थता के लिए उनके द्वारा दिखाए गए 2.01 करोड़ रुपये के खर्च के दावे को बेमेल पाया गया और विवाद समाधान कार्य तथा दावा किए गए खर्चों के लिए कोई बिल और वाउचर नहीं थे। साथ ही, न्यायमूर्ति पसायत के बैंक खातों में उनकी बेटी को ऋण/उपहार के रूप में 1.34 करोड़ रुपये के भुगतान का खुलासा हुआ, जिसे आदेश में एक वकील और सीबीआई लोक अभियोजक बताया गया है।

अंतिम ऐसेसमेंट के रूप में, आईटी आदेश में कहा गया है: “उक्त व्यय को अस्वीकार करने का एक वास्तविक कारण यह है कि व्यय का ऐसा दावा किसी भी सबूत से प्रमाणित नहीं होता है, न ही व्यय का समर्थन करने के लिए कोई बैंक/नकद निकासी है। इसलिए, 1,06,49,760 रुपये की उक्त राशि आईटी अधिनियम की धारा 57 (iii) के तहत कटौती के योग्य नहीं है। तदनुसार, इसे ऐसेसी की रिटर्न बताई गई आय में वापस जोड़ दिया जाता है।”
गौरतलब है कि इस “रिटर्न” आय को जोड़ने के अलावा, विभाग ने “अलग से” जुर्माना कार्यवाही (आईटी अधिनियम की धारा 270 ए (1) के तहत) 1,06,49,760 रुपये की आय की गलत रिपोर्टिंग के लिए शुरू की।

न्यायमूर्ति पसायत ने स्वीकार किया है, उन्होंने कटक में आयकर आयुक्त (अपील) के पास आदेश के खिलाफ अपील दायर की, लेकिन एक बार वीएसवी योजना का लाभ उठाने का फैसला करने के बाद, उस अपील को स्थगित कर दिया गया था।

आईटी ऑर्डर ने क्या कहा

*जस्टिस पसायत ने एसआईटी वेतन घोषित किया: 26.85 लाख रुपए
*मध्यस्थता से आय, विवाद समाधान: 3.66 करोड़ रुपये
*बिना बिल के दावा किया गया खर्च: 2.01 करोड़ रुपए

  • बैंक/नकद रिकॉर्ड द्वारा समर्थित व्यय: 95.15 लाख रुपये
  • ‘रिटर्न’ आय में वृद्धि: 1.06 करोड़ रुपये
  • वीएसवी निपटान के लिए विवादित कर: 38.28 लाख रुपये

इस मामले में सबसे अनैतिक है, बेटी को ऋण/उपहार के रूप में 1.34 करोड़ रुपये का भुगतान जज साब के बैंक खाते में पाया जाना। पर जो है सो है। मेरी उत्सुकता यह जानने में है कि जज साब का यह घपला नहीं पकड़ा जाता तो विदेश से काला धन लाने की प्रधानमंत्री की घोषणा कामयाब होती कि नहीं और हमें 15 लाख मिलता या नहीं। हालांकि इससे महत्वपूर्ण बात यह है कि काले धन पर इतना आदर्श बघारने के बाद प्रधान सेवक ने जिसे एसआईटी का सदस्य बनाया उसी ने आयकर माफी योजना का लाभ लिया। जय हो।



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