विजयवर्गीय पिता-पुत्र के खिलाफ खबर प्रधानमंत्री की छवि बनाने का हिस्सा तो नहीं?

जर्नलिज्म ऑफ करेज ने इस खबर को लीड बनाया है तो इसे डैमेज कंट्रोल एक्सरसाइज भी कह सकते हैं!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विधायक पुत्र आकाश विजयवर्गीय के बारे में जो कहा वह पहले पन्ने पर होगा इसका अनुमान तो मुझे था पर इंडियन एक्सप्रेस इस खबर को लीड बनाएगा इसका अनुमान बिल्कुल नहीं था। एक्सप्रेस का शीर्षक है, (अनुवाद मेरा), “जूनियर विजयवर्गीय पर प्रधानमंत्री : बेटा चाहे जिसका हो, व्यवहार अस्वीकार्य है”। एक्सप्रेस ने इस खबर का फ्लैग शीर्षक लाल रंग में लगाया है, “पार्टी को सख्त संदेश भेजा”। ‘जर्नलिज्म ऑफ करेज’ यानी साहस की पत्रकारिता करने वालों का यह हाल है तो बाकी का क्या बताऊं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने लीड नहीं बनाया है लेकिन टॉप पर दो कॉलम में शीर्षक है, “मोदी स्लैम्स वीआईपी ब्रैट्स, सेज बैड बिहेवियर नॉट ऑन” (मोदी ने वीआईपी बिगड़ैलों को लताड़ा, कहा खराब व्यवहार नहीं चलेगा)। हिन्दुस्तान टाइम्स में भी यह खबर फोल्ड के ऊपर तीन कॉलम में है। शीर्षक का अनुवाद कुछ इस तरह होगा, “बल्ला हमला पर पीएम : क्या लोगों ने हमें इसीलिए वोट दिया है”।

राजस्थान पत्रिका में लीड

अंग्रेजी के तीन बड़े अखबारों के इन शीर्षकों से स्पष्ट हो जाता है कि अभी प्रधानमंत्री ने कहा ही है, कार्रवाई कोई नहीं हुई है। हुई होती तो वही शीर्षक होता या होना चाहिए। कम से कम खबर में हाईलाइट तो होता ही। पर टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस खबर का जो अंश हाइलाइट किया है वह इस प्रकार है, “मनमानी नहीं चलेगी। कोई हो, किसी का बेटा हो ऐसी उद्दंडता (हिन्दी अखबारों ने घमंड लिखा है, अंग्रेजी में एरोगेंस) नहीं चलेगी”। तीनों (जो मैंने देखे) अंग्रेजी अखबारों में यह खबर बाईलाइन वाली है। यानी अखबारों (आप संपादक या संपादकीय विवेक पढ़िए) ने इसे एक्सक्लूसिव खबर मानकर प्रमुखता दी है। संभावना यह भी है कि बैठक में मौजूद भाजपा नेताओं ने पत्रकारों को एक्सक्लूसिव अंदाज में यह खबर ‘लीक’ की हो और पत्रकार वाकई गच्चा खा गए हों या फिर पत्रकारों की भाजपा नेताओं से मिलीभगत हो और आपके साथ वही किया गया हो जो अखबार लंबे समय से करते आए हैं।

समझना आपको है और नहीं समझने या मानने के लिए आप स्वतंत्र हैं। हिन्दी अखबारों में यह खबर सिर्फ दैनिक भास्कर में एजेंसी की है बाकी सब में बाईलाइन नहीं है पर खबर ब्यूरो या विशेष संवाददाता की है। मोटा-मोटी आप मान सकते हैं कि हिन्दी पट्टी के नेताओं द्वारा ‘लीक’ की जाने वाली खबर अंग्रेजी अखबारों में बाईलाइन होती है। प्रेस विज्ञप्ति होती तो बाईलाइन कोई नहीं लेता। पर हिन्दी में बाईलाइन नहीं होना और अंग्रेजी में होना – अखबारों में (सकारात्मक) खबरें छपवाने की रणनीति भी बताती है। द टेलीग्राफ में यह खबर पहले पन्ने पर दो कॉलम में है। जेपी यादव की बाईलाइन भी है पर शीर्षक से पता चल रहा है कि यहां गच्चा खाने जैसा कुछ नहीं है। इस खबर का शीर्षक है, प्रज्ञा अब भी खेल में, प्रधानमंत्री का ध्यान बल्लेबाज पर।

आप अपने-अपने अखबार पढ़िए और देखिए अखबारों ने यह पता करने और बताने की कोशिश की है कि नहीं कि कार्रवाई क्या हुई या होगी भी कि नहीं। इस संबंध में दैनिक भास्कर में एक खबर है, पीएम के बयान के बाद आकाश गायब, भाजपा के सदस्यता अभियान की बैठक में नहीं पहुंचे। दूसरे बड़े नेता भी बयान देने से बचते रहे। द टेलीग्राफ ने भी लिखा है कि मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह से संपर्क करने की कोशिशों में कामयाबी नहीं मिली। और प्रधानमंत्री ने जिस बैठक में यह सब कहा उसके बाद संसद में पत्रकारों ने बड़े आकाश के पिता कैलाश विजयवर्गीय से संपर्क किया तो उन्होंने प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया। भाजपा के मध्य प्रदेश इन-चार्ज, विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा, राज्य इकाई इसके लिए प्राथमिक इकाई है। मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। अखबार के मुताबिक, पार्टी सूत्रों ने कहा है कि आकाश को एक कारण बताओ नोटिस दिया जा सकता है और इसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने इंदौर नगर निगम को उस बिल्डिंग को गिराने की अनुमति दे दी है जिसपर कैलाश विजयवर्गीय के बेटे ने बल्ला चलाया था। अखबार ने लिखा है कि दिल्ली के सख्त संदेश ने इंदौर भाजपा को मुश्किल में डाल दिया है और ज्यादातर नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ (आकाश का स्वागत करने के लिए) कार्रवाई के बारे में कुछ भी बोलने से मना कर दिया है। इस खबर से लगता है कि आज अगर प्रधानमंत्री वाली खबर नहीं होती तो इस खबर को ज्यादा प्रमुखता मिलती। वैसे, दूसरे अखबारों में कोई छापता ही नहीं, छापना होता तो इंडियन एक्सप्रेस की तरह छाप ही सकते थे। इंडियन एक्सप्रेस की यह खबर भी बाईलाइन है इसलिए मुमकिन है दूसरे अखबारों को खबर ही न हो। दैनिक भास्कर में यह खबर पहले पन्ने पर दो कॉलम में है। फ्लैग शीर्षक है, कैलाश विजयवर्गीय के बेटे के बैटकांड पर पीएम सख्त। मुख्य शीर्षक है, घमंड-दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं, एक विधायक कम होगा तो क्या हो जाएगा? : मोदी।

आइए, देखें हिन्दी अखबारों ने इसे कितनी प्रमुखता दी है और क्या शीर्षक लगाया है। नवभारत टाइम्स में यह खबर लीड है। इससे इस खबर का मूल अंश पेश है। अखबार ने शीर्षक लगाया है, बैट-मार विधायक पर मोदी का बाउंसर। इसके साथ जो अंश हाईलाइट किया गया है वह इस प्रकार है, अगर किसी को गलतफहमी है कि वो बड़े बाप का बेटा है तो मैं इसकी परवाह नहीं करता। बेटा किसी का हो, मनमानी नहीं चलेगी -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। विशेष संवादाता की खबर इस प्रकार है, पार्टी संसदीय दल की बैठक में मोदी ने नाम लिए बिना कहा कि बेटा किसी का हो, मनमानी नहीं चलेगी। किसी भी तरह का दुर्व्यवहार, जो पार्टी का नाम कम करता है, अस्वीकार्य है। अगर किसी ने कुछ गलत किया है तो कार्रवाई की जानी चाहिए। यह बात सभी पर लागू हो। पीएम ने यह भी कहा कि दुर्व्यवहार करने वाले और ऐसे लोगों का स्वागत करने वालों को पार्टी से बाहर निकाल देना चाहिए। मोदी ने जिस वक्त यह नाराजगी जताई, कैलाश विजयवर्गीय भी बैठक में थे। अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है, कोई भी पार्टी की इमेज खराब करेगा तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। माफी मांगने के बजाय ऐसा कर रहे हैं, जैसे कोई बड़ा युद्ध जीतकर आ रहे हैं।

दैनिक हिन्दुस्तान में यह खबर लीड है। फ्लैग शीर्षक है, मोदी का नेता पुत्रों पर प्रहार, कहा – ऐसे लोगों की पार्टी में कोई जगह नहीं। चार कॉलम में दो लाइन का शीर्षक है, “चेतावनी : बेटा किसी का भी हो मनमानी नहीं चलेगी”। शीर्षक से आप खबर और तेवर का अंदाजा लगा सकते हैं। नवोदय टाइम्स में यह खबर चार कॉलम में है। फ्लैग शीर्षक है, प्रधानंमत्री मोदी ने आकाश विजयवर्गीय की करतूत पर दिखाई सख्ती, कहा – बेटा किसी का भी हो निकाल देना चाहिए। इंट्रो है, सभी को दी नसीहत, पार्टी की छवि खराब करने वाले बर्दाश्त नहीं। ऐसे में आप चाहिए का मतलब समझ सकते हैं। फिर भी यह खबर लीड है। क्यों, आप समझ सकते हैं।

अमर उजाला में यह खबर चार कॉलम में लीड है। दो लाइन का शीर्षक है, “अहंकार, दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं चाहे किसी का बेटा हो : मोदी। दो उपशीर्षक हैं, भाजपा संसदीय दल की बैठक में पीएम का सख्त संदेश और आकाश विजयवर्गीय को निलंबित कर सकती है पार्टी। अखबार ने वक्त की पाबंदी और सदन में उपस्थिति पर नसीहत शीर्षक से एक खबर अलग से छापी है। तीन कॉलम में एक और खबर है जिसका एक लाइन का शीर्षक है, कहा – ऐसे नेता का समर्थन करने वालों को भी पार्टी से निकालें। इसमें हाईलाइटेड है, एक विधायक कम होने से क्या फर्क पड़ेगा।

दैनिक जागरण में यह चार कॉलम में लीड है। मुख्य शीर्षक है, किसी की मनमानी नहीं चलेगी। (मेरा मानना है कि साध्वी प्रज्ञा को टिकट देना मनमानी ही है पर किसकी पता नहीं।) उपशीर्षक है, दो टूक – बेलगाम भाजपा नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी का सख्त संदेश। जागरण ब्यूरो ने अपनी खबर में स्रोत का खुलासा किया है और लिखा है, भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूड़ी के अनुसार, प्रधानमंत्री ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि अमर्यादित आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस खबर के अनुसार प्रधानमंत्री ने यह भी कहा बताते हैं कि, क्या होगा अगर एक विधायक कम हो जाएगा।’पर यह सवाल सांसद के मामले में भी है और संयोग से वह भोपाल का मामला है और यह इंदौर का। दोनों मध्य प्रदेश के बड़े शहर हैं। जागरण ने अंदर के पन्ने पर दो और खबर छापी है। एक का शीर्षक है, मोदी के बाउंसर से बैकफुट पर आकाश विजयवर्गीय। और दूसरी का शीर्षक है, विधायक को जारी होगा कारण बताओ नोटिस। इसके साथ अखबार ने एक सिंगल कॉलम की खबर छापी है, पीएम को आकाश के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। आप कह सकते हैं कि अखबार ने सभी पहलुओं को छापा है पर कार्रवाई हो सकती है यह छवि निर्माण योजना का अगला चरण है। क्योंकि कार्रवाई हो गई तो कोई बात ही नहीं, नहीं हुई तो खंडन होना नहीं है। आपको आज की खबर दमदार लगेगी।

राजस्थान पत्रिका में भी यह चार कॉलम की लीड है पर शीर्षक दो लाइन की है। फ्लैग शीर्षक है, “बल्लामार विधायक पर सख्ती : पीएम ने बिना किसी का नाम लिए कहा, ‘बेटा किसा का भी हो मनमानी नहीं चलेगी, समर्थकों को भी करें बाहर’। यहां गौर करने वाली बात है कि प्रधानमंत्री ने नेतापुत्र विधायक के बारे में तो कहा (और उसकी खबर कुछ ज्यादा ही छपी है) पर गिरिराज सिंह ने जब नीतिश कुमार की इफ्तार पार्टी पर टिप्पणी की थी तो अमित शाह ने मोर्चा संभाला था। इससे पहले, अमित शाह ने कहा था कि भोपाल से साध्वी प्रज्ञा को भाजपा का टिकट देना फर्जी भगवा आतंकवाद के खिलाफ बीजेपी का सत्याग्रह है। इसके बाद प्रज्ञा ठाकुर ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोड्से को देशभक्त को बताया तो शाह ने कुछ नहीं कहा (मैंने नहीं सुना / पढ़ा)। और अखबारों में छपा ‘देशभक्त गोडसे’ वाले बयान पर पीएम मोदी नाराज, ‘प्रज्ञा को मन से नहीं करूंगा माफ’ तभी यह भी छपा था, अनंत हेगड़े को भी नहीं कर पाऊंगा माफ-पीएम। पर क्या हुआ? इसके बावजूद आज यह खबर – इतनी प्रमुखता से।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट

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