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दो साल से भुगतान के लिए तड़प रहे एनएनआईएस न्यूज एजेन्सी के सैकड़ों श्रमजीवी स्ट्रिंगर

इन दिनो ‘एनएनआईएस न्यूज एजेन्सी’ का हाल-बेहाल है। एजेंसी में कार्यरत स्ट्रिंगर भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। पिछले दो साल से उनको सैलरी के नाम पर सिर्फ तारीख पर तारीख दी जा रही है। वो तारीख कब आएगी, यह कोई बताने वाला नहीं। स्ट्रिंगरों का कहना है कि ये तो भला हो भड़ास4मीडिया का, जिसके माध्यम से अपना दुःख कहने का मौका मिल रहा है अन्यथा चैनल व एजेंसी के अंदर तो स्ट्रिंगरों का दर्द सुनने तक को कोई तैयार नहीं। 

इन दिनो ‘एनएनआईएस न्यूज एजेन्सी’ का हाल-बेहाल है। एजेंसी में कार्यरत स्ट्रिंगर भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। पिछले दो साल से उनको सैलरी के नाम पर सिर्फ तारीख पर तारीख दी जा रही है। वो तारीख कब आएगी, यह कोई बताने वाला नहीं। स्ट्रिंगरों का कहना है कि ये तो भला हो भड़ास4मीडिया का, जिसके माध्यम से अपना दुःख कहने का मौका मिल रहा है अन्यथा चैनल व एजेंसी के अंदर तो स्ट्रिंगरों का दर्द सुनने तक को कोई तैयार नहीं। 

पता चला है कि जब भी स्ट्रिंगर एजेंसी प्रबंधन से अपनी स्टोरी के पेमेंट या सैलरी की बात करते हैं तो कहा जाता है कि जल्द ही आपका पैसा आप तक पहुंच जाएगा लेकिन यह नहीं बताया जाता कि वह ‘जल्द’ आखिर किस दिन तक। यह हालत किसी एक अकेले की नहीं, सैकड़ो स्ट्रिंगरों की हालत एक जैसी है, जो यह सब झेल रहे हैं।

अब तो स्ट्रिंगरों का एजेंसी को स्टोरी आइडिया भी भेजने को मन नहीं करता। काफी संख्या में स्ट्रिंगरों ने तो खबर भेजनी भी बंद कर दी है। पीड़ितों का कहना है कि अब एक आखिरी उम्मीद सिर्फ भड़ास4मीडिया से है, जो उनकी आवाज उन चैनलों व एजेंसी के मालिकों तक पंहुचा सकता है, जिन्हे स्ट्रिंगरों की तकलीफ समझ नहीं आ रही है। भड़ास4मीडिया हमेशा पीड़ितों का पक्ष रहा है। 

एक स्ट्रिंगर द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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