कुछ चैनल वाले जिले में स्टिंगर को अपने संस्थान का कुत्ता समझते हैं

‘नेशनल वायस’ के बाराबंकी रिपोर्टर ने उत्पीड़न से दुखी होकर इस्तीफा दिया… ‘नेशनल वायस’ चैनल के बाराबंकी के रिपोर्टर ने इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा से पहले रिपोर्टर ने चैनल के असाइनमेंट ग्रुप में एक पोस्ट डाल कर अपने उत्पीड़न के बारे में विस्तार से लिखा, जिसे नीचे दिया जा रहा है.

आदणीय नेशनल वायस मैनेजमेंट टीम

लखनऊ

विषय : बगैर पगार चैनल के लिए दिनरात भागदौड़ करना और जबरदस्त तनाव के साथ स्टोरी के लिए स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों से दुश्मनी लेना.. खुद अपने खर्च पर न्यूज़ तैयार कर चैनल को उपलब्ध कराना…. बदले में चैनल में कार्ययत कुछ लोगों द्वारा अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए लगातार प्रेशर बनाना और चैनल से हटवा देने की धमकी देना… जब अपनी स्टोरी के पेमेंट के लिए बात की जाती है तो पाँच सौ कारण गिनाकर पेमेंट न भेजना… क्या साहब, चैनल में स्टोरी पेमेंट के लिए 500 कारण से गुजरना पड़ता है.. इन्हें पास करना करना जरूरी है… मुबारक हो मेरा ये पेमेंट… मैं खुद बाराबंकी जिले से नेशनल वायस चैनल से इस्तीफा दे रहा हूँ!

आदणीय महोदय!

मुझे बड़ी खुशी हुयी जब पता चला- ”चैनल को दोबारा चलाने के लिए संस्थान में अच्छे लोग अब आ गए है. जिले से नेशनल वाइस चैनल के शुरुवाती दौर से मेहनत से काम करने वाले रिपोर्टर हटाए नही जाएंगे, वही लोग काम करेंगे और अब उन्हें समय समय पर उनकी स्टोरीज का पेमेंट भी मिलेगा.” यह सब सुनकर मेरे अंदर फिर से उत्साह जगा और फिर से कहीं ज्यादा एनर्जी के साथ हम काम पर लग गए. मुझे विश्वास था हम अच्छे से अच्छा काम करेंगे और हमें हमारी मेहनत का पेमेंट भी मिलेगा. लेकिन चैनल के शुरुवाती दौर में और न​ इधर तीन महीने से कोई पेमेंट चैनल की तरफ से मुझे दिया गया. पेमेंट की बात करता हूँ तो पांच सौ कारण गिनाये जाते हैं न देने के. ​

दीपावली पर उम्मीद थी, वो भी इन्तजार करते करते निकल गयी. चलो पैसे नहीं आये, कोई बात नहीं. हम उसे भूल जाते हैं. लेकिन चैनल में बैठे कुछ लोगों के द्वारा अभद्र व्यवहार, टिप्पणी और बार बार चैनल से हटवा देने का ताने देना अब बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है. फोन पर उल्टी सीधी बातें बोलना. क्यों ये खबर क्यों नहीं आयी? लेट क्यों हो गयी/ डे प्लान की स्टोरी क्यों नहीं आयी? डे प्लान क्यों नहीं भेजा? डे प्लान का डिटेल्स क्यों नहीं भेजा? क्या क्या करोगे,  ये भी लिखो? इस स्टोरी पर अपनी माइक आईडी क्यों नहीं लगी? अरे साहब आपकी इज्जत करते हैं इसलिए हम बिना पेमेंट के पिछले काफी समय से काम तो करते चले आ रहे हैं!

पत्रकारिता के गुरुजनों ने कभी बेईमानी और चाटुकारिता नहीं सिखाई. और, न ही मान सम्मान से समझौता करने की सलाह दी. इसलिए चापलूसी हमें कभी पंसद नहीं आयी. जिनके साथ हमने काम किया और आज भी करता हूँ उन्होंने कभी दुर्व्यवहार और बदतमीजी से बात नहीं की. शायद ऐसे लोगों को हमारे गुरुजनों से सीखना चाहिए जो जिले के स्टिंगर को अपने परिवार के सदस्य की तरह आज भी मानते हैं! ईमानदारी से काम करने वालों के लिए काम की कमी नहीं है. जिले में हम धन उगाही नहीं करते. मीडिया में ​अपनी और अपने संस्थान की ईमानदारी के लिए हम बहुत कुछ अपने निजी संसाधनों से मैनेज करते हैं जिसके बाद ​हम आपको जिले से स्टोरी ​देते हैं.

आपको लगता है जिले में पैसों की बौछार होती है और जिले का रिपोर्टर बहुत मालामाल रहता है. ये सोच आप बदल दीजिये. आपको तो मोटी पगार महीना ख़त्म होते मिल जाती है. लेकिन हम लोग सालों इंतजार में समय खर्च कर देते है. सोचते हैं चलो, कभी न कभी तो चैनल से पेमेंट आ ही जाएगा. मेरा भी परिवार है. मेरे भी खर्चे हैं. अगर इतने लम्बे समय में दो से तीन बार हमारे खाते में अगर तीन से चार हजार रूपये चैनल की तरफ से आ भी गए तो उतने रूपये में हमारा खराब कैमरा भी तो नहीं बनेगा. आपतो संस्थान से छुट्टी लेकर परिवार के साथ बाहर घूमने भी चले जाते हो. मुझसे उम्मीद करते हो कि 24 घंटे जिला छोड़कर न जाएं और हर खबर भेजते रहें. हमे लगता है जो लोग फ्री में काम करवाना चाहते हैं उन्होंने जिले से कुछ ख़ास पत्रकारिता सीखी है और हमसे भी वही उम्मीद करते हैं!

इसमें चैनल मालिक और प्रबंधक की कोई गलती नहीं है. गलती उनकी है जो लोग झोलाछाप पत्रकार बनकर संस्थान में हेकड़ी दिखाने लगे हैं. अगर आपको कुछ सीखना है तो कुछ बड़े ब्रांड न्यूज़ चैनल में काम करने वाले लोगों से सीखना चाहिए. जिनका प्रदेश और देश की पत्रकारिता में बहुत नाम है. उनके साथ काम करते हुए मुझे आजतक एहसास नहीं हुआ. कभी तनाव न कभी प्रेशर! आप तो ये भी कहते हो मेरे चैनल में काम करना है तो दूसरे चैनल का काम हम न करें. लेकिन ये बातें हमारे इन बड़े ब्रांड में काम करने वाले साहब नहीं कहते हैं जिनके साथ काम करते हुए एक लंबा समय गुजार दिया.

आपने कभी अपने चैनल से मेरी मान्यता प्राप्त करवाने के बारे में नहीं सोचा होगा लेकिन हमारे इस बड़े चैनल ने हमें बहुत पहले से सरकारी मान्यता प्राप्त पत्रकार का दर्जा दिलवा रखा है! टीआरपी और सबसे आगे दिखाने के लिए आपने कभी जिले के रिपोर्टर के बारे में नहीं सोचा होगा कि वो अपनी जान जोखिम में डालकर और टेंशन लेकर आपके चैनल के लिए खबर कवरेज करने निकला है. उस दौरान भी आप फोन के ऊपर फोन लगाते रहते हो जबकि वो तेज तफ्तार से बाइक पर चल रहा होता है! जब पेमेंट की बात होती हैं तो 500 कारण गिनाए जाते हैं. एक भी कमी निकलने पर पेमेंट देने से मना कर दिया जाता है. कुछ चैनल वाले जिले में स्टिंगर को अपने संस्थान का कुत्ता समझते हैं. वो चाहते हैं कि उनके इशारे पर वो अपनी दुम हिलाये. उनके इशारे पर वो भोंके. उनके कहते ही तत्काल उन्हें खबर उपलब्ध करवा दे.

ऐसे लोगों से मेरा अनुरोध है आपने एक माइक आईडी उसे पकड़ा दी और कह दिया जाओ, तुम जिले के शेर हो, उसकी ये कर देना उसकी वो कर देना, उसकी फाड़ देना, हमे सबसे पहले एक्सक्लेसिव फुटेज देना, वो भी अपने चैनल की माइक आईडी पर… अरे साहब, आपने एक माइक आईडी पकड़ा दी लेकिन न उसे संस्थान से कैमरा दिया और न ही उसे कैमरामैन मुहैया कराया. इतना ही नहीं, उसके पास शायद कम्प्यूटर और अच्छा फोन है या नहीं, ये भी आपने साहब जानने की कोशिश नहीं की. उसने कैसे मैनेज किया होगा, पता नहीं किया. उसे न आने जाने का साधन दिया न खर्चा. आपने महीना पूरा होने पर उसके द्वारा भेजी गयी स्टोरी का पैसा तक नहीं दिया.

इसके बावजूद आप लोग चाहते हो वो हर स्टोरी पर आपके चैनल की माइक आईडी लगाए, डे प्लान देकर अच्छी पीटीसी वाक् थ्रू करके फटाफट खबर भेजता रहे. साहब, वो इंसान है, मशीन नहीं है. मै भी इंसान हूँ. मशीन नहीं. तनाव मुक्त और ईमानदारी के साथ इज्जत से पत्रकारिता करने वाला इंसान हूँ! मुझे जिन गुरुजनों ने मीडिया की एबीसीडी सिखाई, उन्होंने कभी मान सम्मान से समझौता करना नहीं सिखाया. जिस संस्थान के लोग पांच सौ कारण गिनाकर जिले के रिपोर्टरो का पेमेंट काट लें, उन्हें ये पैसा मुबारक हो… हां, पत्रकारिता में अपने उसी संस्थान के साथ बेहद खुश हूँ जहां मान सम्मान के साथ साथ महीने की शुरुवात होते ही खाते में पैसा आ जाता है.. पैसे न मिले तो ठीक… मान सम्मान से कोई समझौता नहीं… नेशनल वाइस न्यूज़ परिवार को बहुत बहुत बधाई… सभी को मेरा प्रणाम!

जय हिन्द

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‘न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया’ चैनल ने एक साल से स्ट्रिंगरों को पैसे नहीं दिए

कई राज्यों में बांटी फ्रेंचाइजी, चैनल की नैया डूबने के कगार पर…  एक साल पहले बड़े जोर शोर से रीलॉन्च किया गया कांग्रेस नेता और बिजनेसमैन नवीन जिंदल का न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया चैनल की नैया डूबने के कगार पर है। पिछले 1 साल से चैनल ने देश भर के स्टिंगरों को उनकी स्टोरी के पैसे नहीं दिए। बिचारे स्ट्रिंगर चैनल में पैसे के लिए बार-बार फोन करके हताश हो गए हैं। पूरा 1 साल होने के बाद भी पैसे नहीं मिलने के कारण ईमानदार स्टिंगरों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है।

चैनल की आर्थिक हालत इतनी खराब हो गई है कि मैनेजमेंट ने कई लोगो को मध्यप्रदेश, छतीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र में फ्रेंचाइजी भी बाटी है. जिन लोगों को फ्रेंचाइजी दी है, वो पैसे लेकर चैनल का लोगो और आईडी बेचने में जुटे हुए हैं।

जी मीडिया समूह से लड़ने के लिए नवीन जिंदल चैनल में हर 6 महीने में एक नया एडिटर लाकर चैनल को टीआरपी में लाने का असफल प्रयास करते रहते हैं और इस प्रक्रिया में चैनल में करोड़ों रुपये का निवेश कर चुके हैं लेकिन चैनल को टीआरपी की दौड़ तो छोड़ दीजिये, चैनल का नाम भी देश में कुछ गिने-चुने लोग ही जानते हैं.

फिलहाल चैनल के एडिटर अनिल राय हैं जो इसके पहले सहारा में रह चुके हैं लेकिन वो भी चैनल को मेनस्ट्रीम मीडिया लाने में असफल हुए हैं. चैनल छोड़ चुके मीडियाकर्मियों की मानें तो चैनल चलता तो रहेगा लेकिन इसकी स्थिति में कोई सुधार होना अब संभव नहीं है. कई स्ट्रिंगरों ने चैनल को स्टोरी भेजना बंद कर दिया है.

भड़ास के पास आई एक मेल पर आधारित.

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छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की आड़ में कैसा खेल, बिना वेतन जिलों में काम कर रहे पत्रकार

चैनल की माइक आईडी की लग रही बोली, वसूली और धमकी का चल रहा खेल, अनशन-शिकायतों का लगा अंबार, सोशल नेटवर्क का बेजोड़ इस्तेमाल, पीएमओ तक हो रही शिकायत

2016 का साल बीत चला। अगर आपका यह साल खराब बीता हो। तो आप नए साल की बेहतरी के लिए कई तरीकों का इजाद करेंगे। इन तरीकों में चैनल की माइक आईडी सबसे बेहतर और कारगर उपाय है। आप माइक आईडी लीजिए और आप हो गए पावरफुल। चाहे आपको पत्रकारिता के मापदंड मालूम हो या नहीं। इस माइक आईडी के साथ वाट्सग्रुप, फेसबुक, ट्वीटर जैसे सोशल नेटवर्क आपके पास हथियार हैं। इन सबके बावजूद आपको और पावरफुल होना है तो आप सामाजिक कार्यकर्ता, भ्रस्टाचार उन्मूलन संगठन, मानवाधिकार संगठन से अपना नाता जोड़ लें। समाज के लिए आप कुछ करें या ना करें। लेकिन आप अपने एशो-आराम के लिए तमाम वो उपाय करेंगे जिससे आपकी जिंदगी लग्जरी हो जाए। कुछ इसी तरह का रास्ता इन दिनों छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की आर में चल रहा है। कोई आवाज उठाता है। तो उसको मिलती है धमकी। रूसवाई। अपमान। मानसिक प्रताड़ना। शिकायतों का अंबार। ऊँची पहुँच की धौंस। और क्या न क्या।

ऐसे बहुत सारे मामलों का अंबार है। नक्सल प्रभावित इस राज्य में। ठीक है। आप मुद्दों को उठाओ, उसकी गहराई तक पहुँचो। जो माध्यम है। उन माध्यमों के जरिए पीड़ितों को हक दिलाओ न कि अपनी रोटी सेंको। पैसा बनाओ। लग्जरी जीवन-यापन करो। कुल मिलाकर आप जिस पर दलाली का आरोप लगाते नजर आते हो। वो खुद अपना गिरबां देख लें। वो क्या कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला का खरसिया का क्षेत्र। जहां 2015 में एक वैष्णव परिवार काफी सुर्खियों में रहा। एफआईआर हुआ। जेल की सलाखों के बीच पहुँचा परिवार। कई सारी अफवाहें भी आई। इन अफवाहों में जून 2015 में एक रायगढ़ जिला जेल में खरसिया के वैष्णव दंपत्ति के अनशन की खबर भी थी। जो सिर्फ और सिर्फ अफवाह निकली थी। अजाक पुलिस ने एक पुराने मामले मेंं खरसिया निवासी भूपेंद्र किशोर वैष्णव एवं उसकी पत्नी आरती वैष्णव को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के पूर्व वैष्णव दंपत्ति खरसिया एसडीएम आफिस के बाहर आमरण अनशन पर बैठे हुए थे। ऐसे में, उनकी गिरफ्तार व जेल दाखिले की पुलिसिया कार्रवाई के बाद भी जेल अंदर उनके अनशन की खबर फैलाई जा रही थी। जिसे जेल प्रशासन ने खारिज किया था।

2015 का साल जैसे-तैसे इस परिवार के लिए बीता। 2016 की शुरूआत में श्री मां प्रकाशन कंपनी के तहत साधना न्यूज के लिए आरती वैष्णव ने 25 हजार रूपए चेक एवं 25 हजार चेक के जरिए अपनी नियुक्ति पत्र ले ली। जिस व्यक्ति ने इस नियुक्ति की मध्यस्थता की। उसने 10 हजार रूपए का कमीशन भी लिया। आरती वैष्णव ने साल में चैनल के लिए विज्ञापन भी किया। एक स्कूल में धमकी-चमकी का मामला भी आया। ऐसी शिकायतों की अंबार लग गई। लेकिन चूंकि चैनल दो कंपनियों की आपसी द्वंद में फंसा था। ऐसे में छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले पर किसी की नजर नहीं गई। श्री मां प्रकाशन से साधना न्यूज का एग्रीमेंट खत्म हुआ। लेकिन संस्थान ने पिछली कंपनी द्वारा नियुक्त किसी भी व्यक्ति को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया।

आरती वैष्णव साधना न्यूज रायगढ़ के लिए नियुक्त थी। लेकिन वो अपने पति को संस्थान से जुड़ने के लिए दबाव बनाती रही। जिस पर प्रबंधन ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसी बीच खरसिया के कुनकुनी जमीन घोटाला सुर्खियों में आया। इसको लेकर आरती वैष्णव ने संस्थान प्रमुख को खबरों को हो रही अपडेट में कोई जानकारी नहीं दी। इसके अलावाा आरती वैष्णव तो संस्थान के लिए नियुक्त थी। लेकिन काम करते नजर आते थे भूपेन्द्र वैष्णव। कुनकुनी जमीन घोटाला में शिकायतों का दौर शुरू हो चुका। जो गलत है। वो गलत है। पीएमओ तक यह मामला पहुँचा है। आरती वैष्णव से बात करने की कोशिश की तो पहले उन्होंने फोन नहीं उठाया। और बाद में जिस फोन से रिकार्डिंग होती है, उससे फोन कर स्टेट हेड पर ही उलटा आरोप जड़ दिया गया। फिलहाल इस मामले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। पुलिस में शिकायत हो चुकी है। आरती वैष्णव सामाजिक कार्यकर्ता हैं। मानवाधिकार एवं भ्रष्टाचार उन्मूलन संगठन में छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव नियुक्त हैं। राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा मंच मानवाधिकार की जन सूचना अधिकारी भी है। इस लेख के साथ ऑडियो भी है। कुछ वॉटसअप क्लिप भी हैं। इस लेख की अगली किस्त का इंतजार कीजिए जिसमें कुछ अहम कड़ियां और भी सामने आने वाली हैं।

लेखक आरके गाँधी साधना न्यूज में बतौर स्टेट हेड नियुक्त हैं। संपर्क : gandhirajeevrohan@gmail.com

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‘ओके इंडिया’ न्यूज चैनल नहीं दे रहा अपने पत्रकारों को पैसा

‘ओके इण्डिया’ नामक न्यूज चैनल कर रहा पत्रकारों का शोषण. आठ महीनों से नहीं दिए न्यूज का पेमेंट. अपने आपको नेशनल न्यूज चैनल बताने वाला ओके इण्डिया न्यूज चैनल फरवरी से आनएयर   हो गया था और तभी से न्यूज पत्रकारों से ली जा रही थी. पहली मीटिंग में जोगिन्द्र दलाल जो मालिक हैं, ने 200 रूपये पर न्यूज की बात की थी परन्तु आज आठ महीनों से हरियाणा के स्ट्रिंगरों को एक भी पैसा नहीं दिया.

दिवाली भी काली मनाई गई! सिर्फ असाइनमेंट वाले खबर मांगते हैं. पेमेंट की बात की जाये तो पता नहीं होता, कहते हैं मालिक जानें. अब हालात ये है कि हरियाणा का एक और नया ब्यूरो चंडीगढ़ में  बिठा दिया है जो न्यूज माँगता है. शिव शर्मा हरियाणा बुलेटिन के लिए रखा गया है परन्तु पेमेंट की बात नहीं करता है. चैनल की तरफ से कोई बात नहीं की जा रही है कि कब पेमेंट दी जाएगी.

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कई चैनलों के स्ट्रिंगर के घर नही जलेंगे दीपावली पर चूल्हे!

मीडिया की रीढ़ कहे जाने वाले स्ट्रिंगरों के घर दीपावली का जश्न फीका होने की आशंका है। मिली जानकारी अनुसार कई चैनल पहले से ही घाटे में हैं। उनके पास स्ट्रिंगर्स को देने लिए आश्वासन  के सिवाय कुछ नहीं है। इसमें कुछ चैनल ऐसे हैं जो मीडिया इंडस्ट्री में कई सालों से स्थापित है और कुछ हाल हीमें उभरे हैं। लेकिन सबसे खास बात यह कि सभी चैनल जनता के सामने अपने को सबसे आगे बताने काम करते हैं। कुछ चैनल उस कतार में शामिल हैं जो आज भी 90 रुपए से 150 रुपए ही भुगतान करते हैं। ऐसे में स्ट्रिंगर बड़ी मुश्किल से 3000 रुपए प्रति माह ही कमा पाता है।

आप खुद अंदाज़ लगाए कि इस दौर में स्ट्रिंगर अपने परिवार को कैसे पालेगा और क्या बचायेगा? चैनल के संपादकों को आप ने बड़े बड़े हुनरमंद लोगों को पछाड़ते हुए छोटे पर्दे पर देखा होगा लेकिन यह कभी अपने स्ट्रिंगरों की बातों से पार नहीं पा सके हैं। ऐसे में इन चैनलों की पब्लिक के बीच क्या छवि होगी, आप समझ सकते हैं। सरकार भी चैनल के मालिकों के डर से कुछ भी बोलने से परहेज करती है। यदि सरकार चाहे तो दो मिनट में पता चल सकता है कौन कौन से चैनल भुगतान कर रहे हैं और कितना कर रहे हैं। सावधान हो जाओ स्ट्रिंगर भाईयों… वरना जिंदगी भर चैनलों के मालिकों के शोषण का शिकार होते रहोगे… लड़ना सीखो… एक बार एकजुट होकर दुनिया को सच बताओ… तभी ये सब सभ्य भेड़िये एक दम ठीक हो सकेंगे.

आपका स्ट्रिंगर भाई

बलवीर
बरेली
webnewzindia@gmail.com

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‘हिन्दी खबर’ चैनल को पत्रकार नहीं, दलाल चाहिए!

चैनल ‘हिंदी खबर’ के प्रबंधन को एक स्ट्रिंगर ने लिखा करारा पत्र

डिअर टीम ‘हिन्दी खबर’

मेरा नाम सैय्यद शकील है. मैं आपके कुछ दिन पहले पैदा हुए चैनल के लिए आगरा से 18 दिन में 86 से ज्यादा खबर भेज चुका हूँ. कई खबरों पर फोनो भी हुए हैं. आपकी टीम के कई अधिकारियों की तरफ से फोन पर अच्छे काम को लेकर बधाई भी मिली है, और आप की टीम के जो हेड हैं उन्होंने कई बार फोन पर बातचीत के दौरान छोटा भाई कहकर संबोधित किया और कहा कि तुम्हारा काम अच्छा है, तुम काम करो.

फिर एक दिन अचानक बिना बताये, बिना किसी बजह के, बिना किसी गलती के मुझे ‘हिन्दी खबर’ के असाइनमेंट ग्रुप से रिमूव कर दिया जाता है. मेरी जगह कोई अन्य व्यक्ति आगरा में ब्यूरो चीफ बनकर चला आता है. चैनल में कई लोगों से बात होती है तो नतीजा एक ही निकलता है कि वो बिजनेस देगा इसलिए उसे रखा गया है. इसका मतलब साफ है कि ‘हिन्दी खबर’ चैनल को पत्रकार नहीं,  दलाल चाहिए. आपकी सोच को सलाम, जो आपने मेरे काम को तुरंत पहचानते हुए मुझे ग्रुप से निकाल दिया.

आपको पता था कि मैं आपके चैनल को खबर तो दे सकता हूँ, लेकिन रुपया नहीं. आपका निर्णय बहुत सही है. आप जैसे बड़े लोगों की छोटी सोच को मेरा सलाम. आप लोग मेरे बड़े हैं, मैं आपका सम्मान करता हूँ. करता रहूँगा, लेकिन आप लोगों के निर्णय से मुझे काफी दुःख हुआ. खासकर आपके व्यवहार से. एक तरफ तो मुझे काम करने की हिदायत देते रहे और दूसरी तरफ आगरा से दलाली करने वालों की तलाश करते रहे.

जब मुझसे काम नहीं कराना था तो मुझे शुरू में ही मना कर दिया होता. लेकिन जो किया आप लोगों ने, इस तरह की हरकत धोखे की श्रेणी में आती है. खैर, आपने नौकरी न दी न सही, लेकिन खबरों का पैमेंट तो दे दीजिए. और हां, अगर हो सके तो मुझे मेरी गलती भी बता दीजियेगा कि आखिर और क्या वजह थी कि मुझे ग्रुप से निकाल दिया गया.

कुछ दिनों पहले पैदा हुए चैनल का एक्स स्ट्रिंगर…

सैय्यद शकील
आगरा

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साधना न्यूज (एमपी-सीजी) के ठग संचालकों से बच कर रहिए, पढ़िए एक पीड़ित स्ट्रिंगर की दास्तान

संपादक
भड़ास4मीडिया
महोदय

मुझसे साधना न्यूज (मध्यप्रदेश छत्तीसगढ) के नाम पर 8 माह पूर्व विनोद राय के निजी खाते में 20 हजार रुपये ट्रांसफर कराए गए थे. इस रकम को खुद मैंने अपने खाते से भेजा था. परन्तु साधना न्यूज ने एक माह बाद ही किसी दूसरे को नियुक्त कर दिया. विनोद राय (इन्दौर, डायरेक्टर, साधना न्यूज) से रुपये वापस मांगने पर वे नये नये तरीके से टालते रहते हैं और आज कल करके कई प्रकार के बहाने से मुझे राशि लौटने से इनकार कर रहे हैं. मैं इसके लिए कई बार इन्दौर का चक्कर काट चुका हूं.

इस विषय में आदित्य तिवारी और एमके तिवारी को सूचित कर चुका हूं जो कि लोकायत पत्रिका एवं साधना न्यूज़ मध्य प्रदेश छत्तीसग़ढ के संचालक हैं. परन्तु मुझे राशि नहीं लौटाई जा रही है. मेरे द्वारा मोबाइल से फोन किए जाने पर फोन नहीं उठाया जाता और अब मेरा नंबर ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया है. इसके पहले शिवराज सिंह के भोपाल कार्यक्रम के लिए मैंने 80 हजार रुपये साधना न्यूज में दिया था, वह भी मैंने विज्ञापनदाता को वापस किया था, उसका भी कुछ निर्णय नहीं हो रहा.

विनोद राय के कहे अनुसार मैंने किसी को चेक दे दिया था परन्तु अब मेरे उपर वह व्यापारी चेक बाउन्स का केस कर देगा. बडी मुश्किल से शुक्रवार को विनोद राय से मेरी बात हुई थी  जिसमें उन्होंने सोमवार को राशि डालने का वादा किया था परन्तु आज भी समय निकल गया है. फोन नम्बर रिजेक्शन लिस्ट में डाल दिया है. मेरे पास तमाम सबूत हैं जिसके सहारे मैं इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने जा रहा हू. साथ ही पूरे मामले की जानकारी मीडिया जगत को भड़ास4मीडिया के माध्यम से देने जा रहा हूं.

धन्यवाद
आपका
राजेंद्र अग्रवाल
छिन्दवाडा, मध्य प्रदेश
मोबाइल नंबर : 9479906598, 810972555 , मेल : raj.agrawal011@gmail.com


ठगी का सुबूत यह आडियो है जिसमें विनोद राय पैसे लौटाने की बात तो करता है लेकिन लौटाता नहीं है… इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक करके सुनिए… https://www.youtube.com/watch?v=BoTbx28diNg

ये हैं कुछ चैट जिससे साफ पता चलता है कि विनोद राय पैसे हड़पने का आरोपी है और पैसे लौटाने से इनकार कर रहा है….

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‘समाचार प्लस’ चैनल ने मुझ स्ट्रिंगर का छह महीने का पैसा मार लिया!

समाचार प्लस चैनल की रीयल्टी. पत्रकारों का शोषण करने वाला चैनल. न्यूनतम वेतन से भी कम देने वाला चैनल. छ माह की तनख्वाह खा जाने वाला चैनल. असभ्य और बदमिजाज एडिटर वाला चैनल. अपनी बात से बार बार पलटने वाले सम्पादक. स्ट्रिगरों का हक मारने वाले. खबर के लिए चौबीस घण्टे फोन करने वाले. वेतन के लिए फोन नहीं उठाने वाले. रोज शाम राजस्थान की जनता को ज्ञान बॉटने वाले सम्पादक महोदय. एक स्ट्रिगर के सवालों का जवाब नहीं दे पाते. राजस्थान के दर्जनों पत्रकारों के मेहनत के पैसे खा जाने वाले. पत्रकारो को आईडी कार्ड नहीं देने वाले. ऐसा चैनल जिसमे एकाउण्ट और एचआर डिपार्टमेन्ट नहीं हो. गेजुएट, पोस्ट गेजुएट और बीजेएमसी पास युवाओं को मजदूर से कम वेतन देने वाले, वह भी चार माह की देरी से. ये सब करता है समाचार प्लस चैनल.

एसाइनमेंट डेस्क से अनुरोध है कि नीचे लिखे गए मैसेज को साहनी सर तक पहुंचा दें…

साहनी सर

नमस्ते

मैं विमलेश कुमार शर्मा पूर्व स्ट्रिंगर समाचार प्लस राजस्थान, दौसा। मुझे मिस्टर अजय झा जी ने फोन पर निर्देश देकर चैनल के लिए काम करने से मना कर दिया और चैनल आईडी नव नियुक्त स्ट्रिंगर एचएन पाण्डे को देने के लिए कहा गया। मैंने अजय सर के निर्देश की पालना की। मुझे मेरे लगभग 80 दिनों के बकाया भुगतान के लिए इन्तजार करने के लिए कहा गया। अगस्त माह के शुरुआत में राजस्थान के सभी साथियों का भुगतान कर दिया गया पर मेरा भुगतान नहीं किया गया।

मैंने अजय सर से फोन पर बात की तो उन्होंने कहा कि आपके खाते मे अमाउण्ट डाल दिया गया है। मैंने उन्हें बताया कि मुझे पेमेन्ट नहीं मिला है और मैने बैंक की पूरी डिटेल उन्हें मेल कर सारी स्थिति से साफ साफ अवगत करा दिया। अब बीते तीन चार सप्ताह से अजय सर मेरा फोन अटेण्ड नहीं कर रहे हैं। मैंने दर्जनों बार डेस्क पर फोन कर अजय जी सर से बात करनी चाही पर बात नहीं हो पा रही है। मैने हाशिम जी सर, अमरेश जी सर, दीपक जी सर, जयपुर में चन्द्रशेखर जी और आप से भी एक बार फोन करके पूरी स्थिति से अवगत करा चुका हूं। आपसे अनुरोध है कि मुझ  स्ट्रिंगर के बकाया भुगतान को दिलवाने की मेहरबानी करें।

आपका
विमलेश कुमार शर्मा
9414036436
vimleshdausa@gmail.com

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जी न्यूज से निकाले गए 26 स्ट्रिंगर और रिपोर्टर जाएंगे कोर्ट

जी न्यूज के 26 स्ट्रिंगरों को पूर्व सूचना और उनके बकाया देय के भुगतान के बिना हटा दिया जाना चैनल प्रबंधन को भारी पड़ सकता है। बताया गया है कि चैनल हेड दिलीप तिवारी, इनपुट हेड विकास कौशिक और भोपाल ब्यूरो प्रमुख आशुतोष गुप्ता ने षड्यंत्र पूर्वक हटा दिया। स्ट्रिंगरों ने 31 जुलाई तक खबरें भेजी थीं, लेकिन यह कहकर होल्ड रखा गया कि खबरें नहीं चलाई गईं। वहीं खबरें अन्य एजेंसी से लेकर प्रसारित की जाती रहीं। 

मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के  रीजनल न्यूज चैनल जीएमपी सीजी में उठापठक का दौर जारी है , चैनल हैड राजेन्द्र शर्मा के इस्तीफे के बाद से ही चैनल में तानाशाही का दौर प्रारम्भ हो गया था। सबसे पहले नोएडा डेस्क पर कार्य करने वालो की रवानगी हुई, उसके बाद भोपाल और इंदौर के रिपोर्टरों को निशाना बनाया गया। अब  26 स्ट्रिंगरों पर गाज गिरी है, जिन्हें चैनल ने बिना कारण बताये एकाएक हटा दिया और उन्हें नोएडा आफिस में चैनल आईडी जमा करने का फरमान एचआर द्वारा मेल से भेजा गया। 

चैनल में किये जा रहे बदलाव का खामियाजा ईमानदार और कर्मठ लोगो को उठाना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार हटाये गए लोगों के स्थान पर अपने मोहरे बैठाने की तैयारी की जा रही है।  जीएमपी सीजी में किये जा रहे फेर-बदल और चैनल में चल रही आंतरिक कलह की तमाम जानकारी चैयरमेन सहित एक्सेल ग्रुप से जुड़े सभी पदाधिकारियों को भेजी जा चुकी है, जिसकी जाँच करने एचआर टीम भोपाल भी पहुंची थी, लेकिन रिजल्ट उन्ही के पक्ष में गया जो तानाशाही पर आमादा हैं।

मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ से भी स्टिंगर हटाये दिए गए है। प्रताड़ित रिपोर्टरों को गत चार अगस्त को मेल से सूचित किया गया कि उनको एक जून 2015 से हटाया गया है। सभी स्ट्रिंगर प्रबंधन के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर चुके हैं। उनका आरोप है कि बिना पूर्व सूचना और पेमेंट के उन्हें अकारण कैसे हटा दिया गया। 

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अगर इस नए चैनल से जुड़ना चाहते हैं तो ये-ये काम करने होंगे (सुनें टेप)

: सेलरी नहीं देंगे, सेक्युरिटी मनी लेंगे, जहां का स्ट्रिंगर बनोगे वहां खुद आन एयर कराओगे चैनल :  एमपी-सीजी यानि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से एक नया न्यूज चैनल आ रहा है, IND-24 नाम से. पी7 ग्रुप का एमपीसीजी चैनल बंद होने के बाद काफी सारे स्ट्रिंगर सड़क पर आ गए थे. मैंने अपने एक साथी को IND-24 के बारे में जानकारी दी और नौकरी के लिए बात करने को कहा. कुछ समय बाद उस स्ट्रिंगर का फोन मेरे पास आया और उसने मुझे बताया कि वहां सिक्युरिटी मनी की आड़ में काफी पैसे की मांग की जा रही है.

चैनल मालिकान ने चैनल चलाने की जिम्मेदारी हमारे जानकार नवीन पुरोहित जी को दे रखा है. आरोपों की जांच के लिए मैंने IND-24 के भोपाल स्थित ऑफिस में कॉल किया. वहां से मुझे एक मोबाईल न. 9425916463 दिया गया. मैने इस मोबाईल पर जांजगीर चापा के लिए स्ट्रिंगर बनने के लिए बात की. जिनसे मेरी मोबाईल पर बात हो रही थी वो कोई नवीन श्रीवासतव थे.

उनसे हमारी जो बातें हुई उसका ऑडियो नीचे अटैच कर भेज रहा हूं. नवीन ने मेरे सामने स्ट्रिंगर बनने के लिए जो शर्तें रखीं वो आप भी सुनें. पहली शर्त- चैनल को अपने क्षेत्र में ऑन एयर करवाना होगा, उसके लिए कंपनी पैसा नहीं देगी. दूसरी शर्त- कुछ पैसे सिक्युरिटी मनी के रूप में जमा कराना होगा, वह तय नहीं है बात टेबल पर बैठ कर होगी. और तीसरी शर्त- आपके मेहनताने के बदले चैनल कोई भुगतान नहीं करेगा. तो ये है आजकल के नए चैनलों का हाल. ये क्या करेंगे पत्रकारिता और कैसे कहलाएंगे चौथा खंभा. इनकी पूरी दुकान ब्लैकमेलिंग पर ही जब आधारित होगी तो ये खुद में सच बोलने का कितना नैतिक साहस रख पाएंगे.

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर आप उपरोक्त आडियो क्लिप नहीं सुन पा रहे हैं तो इस लिंक पर क्लिक कर सुनें या डाउनलोड कर लें : (सुनें डाउनलोड करें IND24 आडियो टेप)

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इंडिया न्यूज़ के स्ट्रिंगर ने किया लाखों का फर्जीवाड़ा, रिपोर्ट दर्ज, आरोपी फरार

इंडिया न्यूज़ (म.प्र.) के स्ट्रिंगर अनिल पटेल के खिलाफ डिंडोरी जिले के शाहपुर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज़ कराया गया है। आरोपी स्ट्रिंगर श्रमजीवी पत्रकार संघ का जिला महासचिव भी है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद वह अपने ठिकाने से फरार हो गया है। पुलिस उसे तलाश रही है। 

उस पर आरोप है कि उसने मृत व्यक्तियों के नाम से फ़र्ज़ी दस्तावेज तैयार कराने के बाद किसान क्रेडिट कार्ड बनाकर बैंक को लाखों रुपए का चूना लगाया है। पुलिस ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद आरोपी पत्रकार फरार हो गया है। उसकी तलाश की जा रही है।  

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हिंदुस्तान और डीएलए पेपर की स्ट्रिंगरशिप लेते ही अपने क्षेत्र का वो बेताज बादशाह हो गया!

अभी तक आदमी पुलिस के आंतक से परेशान सुना जाता था लेकिन अब पत्रकारों का आतंक भी जीने नहीं दे रहा है। ये हाल है रायबरेली के लालगंज तहसील और आसपास के गांव वालों का। दरअसल मानवेंद्र पांडेय नाम के एक शख्स ने किसी तरह से हिंदुस्तान और डीएलए नाम के पेपर की स्ट्रिंगरशिप ले ली। इसकी बाद से मानो वो अपने क्षेत्र का बेताज बादशाह हो गया है। किसी को भी सरेआम गाली देना, मुकदमे में फंसाने की धमकी देना, पुलिस से प्रशासन से बेइज्जती कराने की धमकी देना उसकी आदत हो गई है। 

हाल ही में एक प्रॉपर्टी को गैर-कानूनी तरीके से खरीदने की कोशिश में उसके खिलाफ लालगंज कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज हो गया है। खास बात है कि हिंदुस्तान और डीएलए ने इस शख्स को रेलकोच फैक्टरी एरिया कवर करने के लिए तैनात किया है। जबकि रेल कोच फैक्टरी से मात्र  5 किमी दूरी पर लालगंज के लिए हिंदुस्तान ने अलग रिपोर्टर रखा हुआ है।

यही नहीं पत्रकारिता जैसे प्रतिष्ठित पेशे के लिए कलंक साबित हो रहे मानवेंद्र पांडेय नाम का ये शख्स जिले के ऐहार इंटर कॉलेज में माली की नौकरी करता है। लेकिन अब पहुंच की धौंस देकर उसने पूरे कॉलेज प्रबंधन को मुट्ठी में कर रखा है, जिसकी वजह से वो कॉलेज में कोई काम नहीं करता है। सवाल इस बात का नहीं है कि वो क्या करता है। सवाल सिर्फ इस बात पर है कि क्या हिंदुस्तान और डीएलए की पत्रकारिता का यही असली रूप है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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अपनी लगातार खराब होती टीआरपी से परेशान इंडिया टीवी ने स्ट्रिंगरों को तंग करना शुरू किया

इंडिया टीवी की टीआरपी पिछले लगभग एक वर्ष से गिरती ही जा रही है. तमाम कोशिशों के बावजूद भी चैनल है की चढ़ाई चढ़ ही नहीं पा रहा है. ख़बरों के मामले में भी चैनल के पास लगातार सूखा ही पड़ता जा रहा है, जिसकी वजह से चैनल ने अपनी झुंझलाहट निकालते हुए स्ट्रिंगरों का पैसा मारना शुरू कर दिया है. लगातार स्ट्रिंगरों के बिल काटे जा रहे हैं. मेहनताने के नाम पर उन्हें सिर्फ अठन्नी चवन्नी थमाई जा रही है. अब इस चैनल के बुरे दिन आये हैं या कुछ और मामला है, मगर इंडिया टीवी में सब ठीक नहीं चल रहा है, यह तय है.

दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अधिकांस स्ट्रिंगरों ने अब इंडिया टीवी से किनारा कर लिया है. इन लोगों को खबर के नाम पर तो जम कर तंग किया जाता है, मगर जब पैसे देने का समय आता है तो ठेंगा दिखा दिया जाता है. स्ट्रिंगर को खबर के बदले में भले ही 1000 रुपये देने की बात की गई है मगर जब बिल बनाये जाते हैं तब इनकी ख़बरों की सूची काट-छांट कर इतनी छोटी कर दी जाती है कि इन्हें इतना पैसा भी नहीं मिल पा रहा है कि इंटरनेट का बिल पूरा हो जाय. ऐसे में लगभग सभी स्ट्रिंगर इंडिया टीवी से ऊब गए हैं. किसी समय चैनल को अच्छी श्रेणी का चैनल माना जाता था, मगर आज चैनल के दिन शायद खराब हो गए हैं.

चैनल के अंदर के लोग कहते हैं कि देश भर के स्ट्रिंगरों ने चैनल को ख़बरें भेजना बंद कर दिया है. हर राज्य से इक्का दुक्का स्ट्रिंगर ही ख़बरें भेज रहे हैं. चैनल भी अधिकांश ख़बरें ब्यूरो के जरिये ही ले रहा है. ऐसे में चैनल का एक खेमा नाराज है, क्योंकि दूर दराज की खबर अगर स्ट्रिंगर नहीं करेगा तो खबर कैसे आएगी. ब्यूरो हर खबर के लिए दौड़ नहीं लगा सकता. मगर एक खेमा ये मानता है कि एएनआई न्यूज एजेंसी के जरिये चैनल ख़बरों की भरपाई करेगा. मगर इससे ये तो साफ़ हो गया है कि चैनल की टीआरपी आगे भी गिरने बाली है. हो सकता है आने वाले कुछ महीनों में इंडिया टीवी पांचवें या छठे स्थान पर उतर जाय.

इंडिया टीवी के एक स्ट्रिंगर द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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दो साल से भुगतान के लिए तड़प रहे एनएनआईएस न्यूज एजेन्सी के सैकड़ों श्रमजीवी स्ट्रिंगर

इन दिनो ‘एनएनआईएस न्यूज एजेन्सी’ का हाल-बेहाल है। एजेंसी में कार्यरत स्ट्रिंगर भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। पिछले दो साल से उनको सैलरी के नाम पर सिर्फ तारीख पर तारीख दी जा रही है। वो तारीख कब आएगी, यह कोई बताने वाला नहीं। स्ट्रिंगरों का कहना है कि ये तो भला हो भड़ास4मीडिया का, जिसके माध्यम से अपना दुःख कहने का मौका मिल रहा है अन्यथा चैनल व एजेंसी के अंदर तो स्ट्रिंगरों का दर्द सुनने तक को कोई तैयार नहीं। 

पता चला है कि जब भी स्ट्रिंगर एजेंसी प्रबंधन से अपनी स्टोरी के पेमेंट या सैलरी की बात करते हैं तो कहा जाता है कि जल्द ही आपका पैसा आप तक पहुंच जाएगा लेकिन यह नहीं बताया जाता कि वह ‘जल्द’ आखिर किस दिन तक। यह हालत किसी एक अकेले की नहीं, सैकड़ो स्ट्रिंगरों की हालत एक जैसी है, जो यह सब झेल रहे हैं।

अब तो स्ट्रिंगरों का एजेंसी को स्टोरी आइडिया भी भेजने को मन नहीं करता। काफी संख्या में स्ट्रिंगरों ने तो खबर भेजनी भी बंद कर दी है। पीड़ितों का कहना है कि अब एक आखिरी उम्मीद सिर्फ भड़ास4मीडिया से है, जो उनकी आवाज उन चैनलों व एजेंसी के मालिकों तक पंहुचा सकता है, जिन्हे स्ट्रिंगरों की तकलीफ समझ नहीं आ रही है। भड़ास4मीडिया हमेशा पीड़ितों का पक्ष रहा है। 

एक स्ट्रिंगर द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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न्यूज नेशन यूपी के स्ट्रिंगर भुखमरी के कगार पर, तीन माह से सैलरी नहीं

लखनऊ : इस समय न्यूज नेशन यूपी के स्ट्रिंगरों की हालत खराब है। समय पर चैनल प्रबंधन मीडिया कर्मियों को सैलरी नहीं दे रहा है। ऊपर से विज्ञापन के लिए भी दबाव बनाया जा रहा है। जो विज्ञापन के आर्डर ले आने से मना कर रहा है, उसको नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है। इस हालात से पूरे यूपी में न्यूज नेशन के स्ट्रिंगर परेशान हैं।

गौरतलब है कि न्यूज नेशन ने यूपी चैनल की शुरूआत बड़े जोरदार तरीके से की थी। तब सभी स्ट्रिंगरों से चैनल ने एक समझौता कराया था, जिसमें बताया गया था कि चैनल आपको एक स्टोरी का 200 रुपये और खबर पैकेज का 400 रुपये दिया जाएगा| शुरुआत के चार माह चैनल ने स्ट्रिंगरों को पेमेंट किए लेकिन सितम्बर माह से कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा है। स्ट्रिंगरों को स्टोरी के हिसाब से कुछ भी नहीं मिल रहा है जबकि स्ट्रिंगरों ने  दिन रात मेहनत करके चैनल को टॉप पर पहुंचा दिया। 

अब चैनल स्ट्रिंगरों का खून चूसने में लगा है। चैनल से सही समय पर पेमेंट नहीं मिल रहा, जिससे सभी स्ट्रिंगर परेशान हैं। एक माह में स्ट्रिंगर लगभग 60 से अधिक खबर चैनल को देता है जिसमें 20 पैकेज खबर होती हैं लेकिन चैनल से पेमेंट सिर्फ 3 हजार या फिर ज्यादा से ज्यादा 4 हजार उसके खाते में आता  है। पिछले 3 माह से वह भी नहीं दिया जा रहा है। सभी स्ट्रिंगर परेशान हैं। वही सभी स्ट्रिंगरों पर विज्ञापन के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। चैनल से धमकी भी दी जा रही है कि जो 30 से कम विज्ञापन देगा, उसको चैनल से निकाल दिया जाएगा।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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भुखमरी की कगार पर पहुँच गए जी पुरवइया के स्ट्रिंगर

बिहार में जी ग्रुप ने रीजनल चैनल शुरू किया ज़ी पुरवइया लेकिन चैनल सिर्फ स्ट्रिंगरों का खून चूस रहा है। 16 जनवरी 2014 को चैनल की शुरआत हुई थी। स्ट्रिंगरों को सैलरी का पेमेंट जून 2014 से दिया गया। छह माह तक स्ट्रिंगरों को मंगनी में खटवाया गया। 

आश्वासन के तौर पर उस समय जी ग्रुप के पुरवइया चैनल प्रबंधन ने स्ट्रिंगरों से यहा कहा था कि इन छह महीनों की उनकी सैलरी का पेमेंट निकट भविष्य में कर दिया जाएगा तब से स्ट्रिंगर अपने वेतन का बकाया नहीं पा सके हैं। मौजूदा समय में एक बार फिर वही शोषण की दास्तान नये तरीके से दुहराई जा रही है। बीते छह महीनों से किसी भी जिले के स्ट्रिंगर का पेमेंट नहीं दिया गया है।  

चैनल प्रबंधन की इस मनमानी से स्ट्रिंगरों में गहरा असंतोष और रोष है। चैनल के पटना मुख्यालय में बैठे आकाओं की अपनी सैलरी समय पर आ जाती है लेकिन बाकी जो रीढ़ की हड्डी हैं, उन स्ट्रिंगरों को ठेंगा दिखाकर काम कराया जा रहा है।  

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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स्टिंगरों से अब खबर की जगह सरपंचों के फ़ोन नंबर मांगे जा रहे हैं

ज़ी मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के नए चैनल हेड दिलीप तिवारी न जाने कौन सी दुश्मनी अपने ही चैनल के स्टिंगरों से निकाल रहे हैं. खबर तो दूर, चैनल में न्यूज़ स्क्रॉल तक नहीं चलाये जा रहे हैं. गिनती की स्टोरी पकड़ कर तीन-तीन दिनों तक रगड़ी जा रही हैं और कई मामलों में तो मीडिया ट्रायल तक किया जा रहा है. वो चाहे खंडवा के कलेक्टर द्वारा नरेंद्र मोदी के आगमन पर किये गए खर्च का मामला हो या बैतूल में एक व्यक्ति द्वारा एड्स की आशंका में परिवार की हत्या का फॉलोअप.

स्टिंगरों से अब खबर की जगह सरपंचों के फ़ोन नंबर मांगे जा रहे हैं और न देने पर चैनल से निकाल देने की धमकी दी जा रही है. ज़ी मीडिया के लिए अब तक लोग यही जानते थे कि यह बड़ा ग्रुप है और यहां शोषण नहीं होता. लेकिन जिस प्रकार से नए चैनल हेड अपनी गतिविधि अंजाम दे रहे हैं, वे निश्चित रूप से ग्रुप की पालिसी के विरूद्ध है. कई लोग अब परेशान हो कर चैनल के मालिक सुभाष चंद्रा तक बात पहुंचाने की कोशिस कर रहे हैं.

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आईबीएन7 और ईटीवी वालों ने स्ट्रिंगरों को वेंडर बना डाला! (देखें फार्म)

अंबानी ने चैनल खरीद लिया तो जाहिर है वह एक तीर से कई निशाने साधेंगे. साध भी रहे हैं. मीडिया हाउस को मुनाफे की फैक्ट्री में तब्दील करेंगे. मीडिया हाउस के जरिए सत्ता की दलाली कर अपने दूसरे धंधों को चमकाएंगे. मीडिया हाउस के जरिए पूरे देश में रिलायंस विरोधी माहौल खत्म कराने और रिलायंस पक्षधर दलाली को तेज कराने का काम कराएंगे. इस कड़ी में वे नहीं चाहते कि जिले से लेकर ब्लाक स्तर के पत्रकार कभी कोई आवाज उठा दें या रिलायंस की पोल खोल दें या बागी बन जाएं. इसलिए रिलायंस वाले खूब विचार विमर्श करने के बाद स्ट्रिंगरों को वेंडर में तब्दील कर रहे हैं. यानि जिले स्तर का आईबीएन7 और ईटीवी का स्ट्रिंगर अब वेंडर कहलाएगा और इस बाबत दिए गए फार्मेट पर हस्ताक्षर कर अपने डिटेल कंपनी को सौंप देगा.

इस वेंडरशिप के जरिए रिलायंस की योजना यह है कि जिले स्तरीय पत्रकार को वेंडर बनाकर उससे कंटेंट डिलीवर कराने के नाम पर समझौता करा लिया जाएगा. इस समझौते में कई अन्य पेंच भी हैं. लेकिन अंततः यह पूरा समझौता पत्रकारिता के बुनियादी नियमों के खिलाफ है. अब स्ट्रिंगर अपने को कंपनी चैनल का आदमी नहीं बता पाएगा. उसकी अपनी खुद की सारी जिम्मेदारी होगी. वह बस कंटेंट देगा और बदले में पैसे लेगा. इसके अलावा वह कहीं कोई क्लेम दावा नहीं कर सकता. आईबीएन7 और ईटीवी के स्ट्रिंगरों में इस बात की नाराजगी है कि अब तो उन्हें कंपनी वाले स्ट्रिंगर भी नहीं रहने दे रहे, वेंडर बना दिया है, जिसका पत्रकारिता से कोई मतलब नहीं है. सूत्रों का कहना है कि रिलायंस वाले पत्रकारों को वेंडर बनाने का काम सिर्फ आईबीएन7 और ईटीवी में ही नहीं कर रहे हैं बल्कि कंपनी के दूसरे न्यूज चैनलों में भी कर रहे हैं.

आईबीएन7, सीएनएन-आईबीएन और ईटीवी को जिस ढंग से इन दिनों चलाया जा रहा है, उससे अब सबको पता चल गया है कि आखिर कारपोरेट के चंगुल में आने पर पत्रकारिता का क्या हाल होता है. उमेश उपाध्याय जो कभी पीआर का काम देखा करते थे, इन दिनों कंटेंट हेड के बतौर चैनलों में डंडा चला रहे हैं. इनके भाई सतीश उपाध्याय बीजेपी के दिल्ली अध्यक्ष हैं. इन दोनों के बारे में कहा जाता है कि ये अंबानी के इशारे पर काम करने वाले हैं. अंबानी की लूट के खिलाफ आवाज उठाने वाले केजरीवाल व इनकी पार्टी के बारे में कोई भी सकारात्मक खबर, बाइट दिखाने पर चैनल में पाबंदी है. इस तरह ये मीडिया हाउस देखते ही देखते सत्ता तंत्र और मुनाफा तंत्र का औजार बन गया है. इसमें अब वही लोग काम करने के लिए बचे रहेंगे जिन्हें पत्रकारिता से नहीं बल्कि पैसा से मतलब है.

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आज तक के स्ट्रिंगर शरद के खिलाफ डकैती का मुकदमा झूठा निकला

यशवंत भाई आदाब,  अभी कुछ समय पहले ‘भड़ास 4 मीडिया’ पर एक समाचार प्रकाशित हुआ था जिसका शीषर्क था- ‘आज तक के स्ट्रिंगर के खिलाफ डकैती का  मुकदमा दर्ज’.  ये खबर मुरादाबाद से आज तक के जिला संवादाता शरद गौतम के लिये उनके चाहने वालों ने भड़ास पर पोस्ट कराई थी और उनकी मंशा ये रही होगी कि इस खबर से आजतक समूह  शरद गौतम को बाहर का रास्ता दिखा देगा लेकिन हुआ इसका उलट. 14  oct 2014 को ये  मुकदमा संभल जनपद के चंदोसी कोतवाली में दर्ज हुआ और 18 OCT 2014 को जाँच अधिकारी ने मुकदमा झूठा पाया और एक्सपंज कर दिया.

जानकारी के मुताबिक़ संभल जनपद के कुछ प्रिंट के लोग जो फर्जी नामों से न्यूज़ चैनल के लिए भी काम करते हैं, शरद गौतम से खुन्नस रखते हैं. वो ये चाहते हैं कि शरद गौतम संभल जनपद की खबरें न कवर करें ताकि वो अपने हिसाब से खबरों को मैनज कर सकें और कुछ कमाई कर सकें. लेकिन ऐसे दलाल टाइप पत्रकार विफल हो गए हैं. मुझे उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास है कि ऐसे टुच्चे पत्रकार मेरी पोस्ट पड़कर फर्जी नाम से टिप्पणी करेंगे वो इसलिये कि वो उनकी आदत में शामिल है. ऐसे घटिया लोगों ने मुरादाबाद में न जाने कितने पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज करा कर थूक कर चाटा है. और, अब ये ही काम जनपद संभल और मुरादाबाद के कुछ चुटिया टाइप पत्रकारों ने अंजाम दिया है.  शरद गौतम के खिलाफ दर्ज मुक़दमे में एक्सपंज रिपोर्ट की छायप्रति भी पोस्ट कर रहा हूं जिसको जहां जरूररत हो इस्तेमाल कर सकता है.

अब्दुल वाजिद

मुरादाबाद

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हां हम अयोग्य हैं, इसीलिए पत्रकार हैं क्योंकि….

”अयोग्य लोग ही इस पेशे में आते हैं, वे ही पत्रकार बनते हैं जो और कुछ बनने के योग्य नहीं होते..” आज स्थापित हो चुके एक बड़े पत्रकार से कभी किसी योग्य अधिकारी ने ऐसा ही कहा था… कहां से शुरू करूं… मुझे नहीं आता रोटी मांगने का सलीका… मुझे नहीं आता रोटी छीनने का सलीका… हां मैं अयोग्य हूं… योग्य तो वो हैं जो जिले में दाग लेकर आये थे और दाग लेकर चले गए… वो दूध, आटा, दाल और आलू का भाव नहीं बता सकते क्योंकि अपनी मोटी तनख्वाह से उन्होंने जिले में रहते कभी रोटी खरीदी ही नहीं…  हां योग्य तो वो हैं जो जिले से जाते जाते जिले में अपना एक फ़ार्म हाउस बना गये और अपने लखनऊ वाले घर के लिए मुफ्त में शीशम की लकड़ी भी ले गए,आखिर हक़ बनता था उनका क्योंकि वृक्षारोपण में काफी बढ़चढ़ के हिस्सा लेते थे वो… 

हां योग्य तो वो भी हैं जिनका तबादला गैरजनपद हो गया फिर भी वो जिले में बंद गाड़ी में कई बार भटकते देखे गए…. हां योग्य तो वो हैं जो झंडे के नीचे कसम ले के आये थे लिहाजा जिले में आते ही निभा दी अपने कसम की रस्म… अरे योग्य तो वो भी हैं जिनकी कभी प्रतियोगिता परीक्षाओं की पुस्तकों पर फ्रंट पेज पर फ़ोटो छपी थी और वो अपनी अति योग्यता की बदौलत जेल में हैं… हाँ वो योग्य हैं क्योंकि उनके नाक के नीचे जिले में गौकशी और नशे का कारोबार बिना किसी अड़चन के चल रहा है… हां वो योग्य हैं क्योंकि नहर में सिल्ट की सफाई कब हो जाती है और कब पानी आ जाता है उन्हें पता ही नहीं लगता…. हाँ वो योग्य हैं क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता कि सार्वजानिक वितरण प्रणाली में बंटने वाला राशन गरीब की थाली तक पहुंचा या नहीं…. हां वो योग्य हैं क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता कि इलाज के अभाव में वो महिला तड़प तड़पकर कर मर गई… हाँ वो योग्य हैं क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता कि स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डाक्टर अपनी क्लीनिक पर देश सेवा में लगा है…. हां वो योग्य हैं क्योंकि वो कार्रवाई करते हैं और हम छापते हैं उनकी तारीफ़… हां वो योग्य हैं तभी तो हम नहीं जान पाते कि जिन पर कार्रवाई हुई थी वो कब और कैसे बहाल हो गये?

….और हम अयोग्य हैं, क्या हुआ जो वो बूढी माँ आज भी दुआएं देती है जिसकी पेंशन सिर्फ इस वजह से बंद थी कि उसका नाम विधवा और वृद्धावस्था दोनों में चढ़ गया था और वो महीनों से चक्कर काट रही थी इन योग्य लोगों के…. हाँ हम अयोग्य हैं, क्या हुआ जो उसके एक फोन पर जान हथेली पर ले के उस गाँव चले गए थे खबर बनाने जहां दबंगों ने पूरी दलित बस्ती का जीना हराम कर रखा था… बहु बेटियाँ तक सुरक्षित न थीं, जो आज हैं…. हां हम अयोग्य हैं, क्या हुआ जो उस गरीब दलित को उसका नौ बिस्वा पट्टा वापस मिल गया जिस पर दबंगों का कब्ज़ा था…. हां हम अयोग्य हैं जो हमने पूछ लिया था कि आनन फानन में ये सड़क किस मद से बनाई जा रही है मुख्यमंत्री के आगमन पर…. हां हम अयोग्य हैं जो हमने पूछ लिया था कि कार्य समाप्ति का बोर्ड लगने के बावजूद ये चौदह किलोमीटर की सड़क केवल तीन किलोमीटर ही क्यों बनी है?… हां हम अयोग्य हैं जो देखने चले गए वो गांव जहां मुख्यमंत्री के आने का अंदेशा था और सारे योग्य काम पर यूं लग गए थे मानो बंद नालियाँ और खड़ंजे एक ही दिन में बन जायेंगे… हां हम अयोग्य हैं जो हमने पूछ लिया था कि आपने राष्ट्रगान का अपमान क्यों किया ?

…….जैसे इनकी योग्यता के किस्से कभी खत्म नहीं हो सकते वैसे हमारी अयोग्यता भी कभी न खत्म होने वाली है…. ये पल पल अपनी योग्यता दिखाएँगे और हम अपनी अयोग्यता… ये हमारी अयोग्यता ही है जिसकी बदौलत कई योग्य वहां हैं जहाँ रोटी भी मुफ्त में मिलती है… हम अपनी अयोग्यता सिद्ध करते रहेंगे आप अपनी योग्यता सिद्ध करते रहिये… आप हमसे कत्तई डरिये नहीं क्योकि आप योग्य हैं और हम अयोग्य….. ऐसे ही किसी मोड़ पर अपनी अयोग्यता सिद्ध करते फिर मुलाक़ात होगी, तब तक के लिए अंतराल भरा नमस्कार…

लेखक दिनकर श्रीवास्तव यूपी के अमेठी जिले के टीवी जर्नलिस्ट हैं. उनसे संपर्क 09919122033 के जरिए किया जा सकता है.

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