कुछ चैनल वाले जिले में स्टिंगर को अपने संस्थान का कुत्ता समझते हैं

‘नेशनल वायस’ के बाराबंकी रिपोर्टर ने उत्पीड़न से दुखी होकर इस्तीफा दिया… ‘नेशनल वायस’ चैनल के बाराबंकी के रिपोर्टर ने इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा से पहले रिपोर्टर ने चैनल के असाइनमेंट ग्रुप में एक पोस्ट डाल कर अपने उत्पीड़न के बारे में विस्तार से लिखा, जिसे नीचे दिया जा रहा है.

‘न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया’ चैनल ने एक साल से स्ट्रिंगरों को पैसे नहीं दिए

कई राज्यों में बांटी फ्रेंचाइजी, चैनल की नैया डूबने के कगार पर…  एक साल पहले बड़े जोर शोर से रीलॉन्च किया गया कांग्रेस नेता और बिजनेसमैन नवीन जिंदल का न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया चैनल की नैया डूबने के कगार पर है। पिछले 1 साल से चैनल ने देश भर के स्टिंगरों को उनकी स्टोरी के पैसे नहीं दिए। बिचारे स्ट्रिंगर चैनल में पैसे के लिए बार-बार फोन करके हताश हो गए हैं। पूरा 1 साल होने के बाद भी पैसे नहीं मिलने के कारण ईमानदार स्टिंगरों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है।

छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की आड़ में कैसा खेल, बिना वेतन जिलों में काम कर रहे पत्रकार

चैनल की माइक आईडी की लग रही बोली, वसूली और धमकी का चल रहा खेल, अनशन-शिकायतों का लगा अंबार, सोशल नेटवर्क का बेजोड़ इस्तेमाल, पीएमओ तक हो रही शिकायत

‘ओके इंडिया’ न्यूज चैनल नहीं दे रहा अपने पत्रकारों को पैसा

‘ओके इण्डिया’ नामक न्यूज चैनल कर रहा पत्रकारों का शोषण. आठ महीनों से नहीं दिए न्यूज का पेमेंट. अपने आपको नेशनल न्यूज चैनल बताने वाला ओके इण्डिया न्यूज चैनल फरवरी से आनएयर   हो गया था और तभी से न्यूज पत्रकारों से ली जा रही थी. पहली मीटिंग में जोगिन्द्र दलाल जो मालिक हैं, ने 200 रूपये पर न्यूज की बात की थी परन्तु आज आठ महीनों से हरियाणा के स्ट्रिंगरों को एक भी पैसा नहीं दिया.

कई चैनलों के स्ट्रिंगर के घर नही जलेंगे दीपावली पर चूल्हे!

मीडिया की रीढ़ कहे जाने वाले स्ट्रिंगरों के घर दीपावली का जश्न फीका होने की आशंका है। मिली जानकारी अनुसार कई चैनल पहले से ही घाटे में हैं। उनके पास स्ट्रिंगर्स को देने लिए आश्वासन  के सिवाय कुछ नहीं है। इसमें कुछ चैनल ऐसे हैं जो मीडिया इंडस्ट्री में कई सालों से स्थापित है और कुछ हाल हीमें उभरे हैं। लेकिन सबसे खास बात यह कि सभी चैनल जनता के सामने अपने को सबसे आगे बताने काम करते हैं। कुछ चैनल उस कतार में शामिल हैं जो आज भी 90 रुपए से 150 रुपए ही भुगतान करते हैं। ऐसे में स्ट्रिंगर बड़ी मुश्किल से 3000 रुपए प्रति माह ही कमा पाता है।

‘हिन्दी खबर’ चैनल को पत्रकार नहीं, दलाल चाहिए!

चैनल ‘हिंदी खबर’ के प्रबंधन को एक स्ट्रिंगर ने लिखा करारा पत्र

डिअर टीम ‘हिन्दी खबर’

मेरा नाम सैय्यद शकील है. मैं आपके कुछ दिन पहले पैदा हुए चैनल के लिए आगरा से 18 दिन में 86 से ज्यादा खबर भेज चुका हूँ. कई खबरों पर फोनो भी हुए हैं. आपकी टीम के कई अधिकारियों की तरफ से फोन पर अच्छे काम को लेकर बधाई भी मिली है, और आप की टीम के जो हेड हैं उन्होंने कई बार फोन पर बातचीत के दौरान छोटा भाई कहकर संबोधित किया और कहा कि तुम्हारा काम अच्छा है, तुम काम करो.

साधना न्यूज (एमपी-सीजी) के ठग संचालकों से बच कर रहिए, पढ़िए एक पीड़ित स्ट्रिंगर की दास्तान

संपादक
भड़ास4मीडिया
महोदय

मुझसे साधना न्यूज (मध्यप्रदेश छत्तीसगढ) के नाम पर 8 माह पूर्व विनोद राय के निजी खाते में 20 हजार रुपये ट्रांसफर कराए गए थे. इस रकम को खुद मैंने अपने खाते से भेजा था. परन्तु साधना न्यूज ने एक माह बाद ही किसी दूसरे को नियुक्त कर दिया. विनोद राय (इन्दौर, डायरेक्टर, साधना न्यूज) से रुपये वापस मांगने पर वे नये नये तरीके से टालते रहते हैं और आज कल करके कई प्रकार के बहाने से मुझे राशि लौटने से इनकार कर रहे हैं. मैं इसके लिए कई बार इन्दौर का चक्कर काट चुका हूं.

‘समाचार प्लस’ चैनल ने मुझ स्ट्रिंगर का छह महीने का पैसा मार लिया!

समाचार प्लस चैनल की रीयल्टी. पत्रकारों का शोषण करने वाला चैनल. न्यूनतम वेतन से भी कम देने वाला चैनल. छ माह की तनख्वाह खा जाने वाला चैनल. असभ्य और बदमिजाज एडिटर वाला चैनल. अपनी बात से बार बार पलटने वाले सम्पादक. स्ट्रिगरों का हक मारने वाले. खबर के लिए चौबीस घण्टे फोन करने वाले. वेतन के लिए फोन नहीं उठाने वाले. रोज शाम राजस्थान की जनता को ज्ञान बॉटने वाले सम्पादक महोदय. एक स्ट्रिगर के सवालों का जवाब नहीं दे पाते. राजस्थान के दर्जनों पत्रकारों के मेहनत के पैसे खा जाने वाले. पत्रकारो को आईडी कार्ड नहीं देने वाले. ऐसा चैनल जिसमे एकाउण्ट और एचआर डिपार्टमेन्ट नहीं हो. गेजुएट, पोस्ट गेजुएट और बीजेएमसी पास युवाओं को मजदूर से कम वेतन देने वाले, वह भी चार माह की देरी से. ये सब करता है समाचार प्लस चैनल.

जी न्यूज से निकाले गए 26 स्ट्रिंगर और रिपोर्टर जाएंगे कोर्ट

जी न्यूज के 26 स्ट्रिंगरों को पूर्व सूचना और उनके बकाया देय के भुगतान के बिना हटा दिया जाना चैनल प्रबंधन को भारी पड़ सकता है। बताया गया है कि चैनल हेड दिलीप तिवारी, इनपुट हेड विकास कौशिक और भोपाल ब्यूरो प्रमुख आशुतोष गुप्ता ने षड्यंत्र पूर्वक हटा दिया। स्ट्रिंगरों ने 31 जुलाई तक खबरें भेजी थीं, लेकिन यह कहकर होल्ड रखा गया कि खबरें नहीं चलाई गईं। वहीं खबरें अन्य एजेंसी से लेकर प्रसारित की जाती रहीं। 

अगर इस नए चैनल से जुड़ना चाहते हैं तो ये-ये काम करने होंगे (सुनें टेप)

: सेलरी नहीं देंगे, सेक्युरिटी मनी लेंगे, जहां का स्ट्रिंगर बनोगे वहां खुद आन एयर कराओगे चैनल :  एमपी-सीजी यानि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से एक नया न्यूज चैनल आ रहा है, IND-24 नाम से. पी7 ग्रुप का एमपीसीजी चैनल बंद होने के बाद काफी सारे स्ट्रिंगर सड़क पर आ गए थे. मैंने अपने एक साथी को IND-24 के बारे में जानकारी दी और नौकरी के लिए बात करने को कहा. कुछ समय बाद उस स्ट्रिंगर का फोन मेरे पास आया और उसने मुझे बताया कि वहां सिक्युरिटी मनी की आड़ में काफी पैसे की मांग की जा रही है.

इंडिया न्यूज़ के स्ट्रिंगर ने किया लाखों का फर्जीवाड़ा, रिपोर्ट दर्ज, आरोपी फरार

इंडिया न्यूज़ (म.प्र.) के स्ट्रिंगर अनिल पटेल के खिलाफ डिंडोरी जिले के शाहपुर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज़ कराया गया है। आरोपी स्ट्रिंगर श्रमजीवी पत्रकार संघ का जिला महासचिव भी है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद वह अपने ठिकाने से फरार हो गया है। पुलिस उसे तलाश रही है। 

हिंदुस्तान और डीएलए पेपर की स्ट्रिंगरशिप लेते ही अपने क्षेत्र का वो बेताज बादशाह हो गया!

अभी तक आदमी पुलिस के आंतक से परेशान सुना जाता था लेकिन अब पत्रकारों का आतंक भी जीने नहीं दे रहा है। ये हाल है रायबरेली के लालगंज तहसील और आसपास के गांव वालों का। दरअसल मानवेंद्र पांडेय नाम के एक शख्स ने किसी तरह से हिंदुस्तान और डीएलए नाम के पेपर की स्ट्रिंगरशिप ले ली। इसकी बाद से मानो वो अपने क्षेत्र का बेताज बादशाह हो गया है। किसी को भी सरेआम गाली देना, मुकदमे में फंसाने की धमकी देना, पुलिस से प्रशासन से बेइज्जती कराने की धमकी देना उसकी आदत हो गई है। 

अपनी लगातार खराब होती टीआरपी से परेशान इंडिया टीवी ने स्ट्रिंगरों को तंग करना शुरू किया

इंडिया टीवी की टीआरपी पिछले लगभग एक वर्ष से गिरती ही जा रही है. तमाम कोशिशों के बावजूद भी चैनल है की चढ़ाई चढ़ ही नहीं पा रहा है. ख़बरों के मामले में भी चैनल के पास लगातार सूखा ही पड़ता जा रहा है, जिसकी वजह से चैनल ने अपनी झुंझलाहट निकालते हुए स्ट्रिंगरों का पैसा मारना शुरू कर दिया है. लगातार स्ट्रिंगरों के बिल काटे जा रहे हैं. मेहनताने के नाम पर उन्हें सिर्फ अठन्नी चवन्नी थमाई जा रही है. अब इस चैनल के बुरे दिन आये हैं या कुछ और मामला है, मगर इंडिया टीवी में सब ठीक नहीं चल रहा है, यह तय है.

दो साल से भुगतान के लिए तड़प रहे एनएनआईएस न्यूज एजेन्सी के सैकड़ों श्रमजीवी स्ट्रिंगर

इन दिनो ‘एनएनआईएस न्यूज एजेन्सी’ का हाल-बेहाल है। एजेंसी में कार्यरत स्ट्रिंगर भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। पिछले दो साल से उनको सैलरी के नाम पर सिर्फ तारीख पर तारीख दी जा रही है। वो तारीख कब आएगी, यह कोई बताने वाला नहीं। स्ट्रिंगरों का कहना है कि ये तो भला हो भड़ास4मीडिया का, जिसके माध्यम से अपना दुःख कहने का मौका मिल रहा है अन्यथा चैनल व एजेंसी के अंदर तो स्ट्रिंगरों का दर्द सुनने तक को कोई तैयार नहीं। 

न्यूज नेशन यूपी के स्ट्रिंगर भुखमरी के कगार पर, तीन माह से सैलरी नहीं

लखनऊ : इस समय न्यूज नेशन यूपी के स्ट्रिंगरों की हालत खराब है। समय पर चैनल प्रबंधन मीडिया कर्मियों को सैलरी नहीं दे रहा है। ऊपर से विज्ञापन के लिए भी दबाव बनाया जा रहा है। जो विज्ञापन के आर्डर ले आने से मना कर रहा है, उसको नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है। इस हालात से पूरे यूपी में न्यूज नेशन के स्ट्रिंगर परेशान हैं।

भुखमरी की कगार पर पहुँच गए जी पुरवइया के स्ट्रिंगर

बिहार में जी ग्रुप ने रीजनल चैनल शुरू किया ज़ी पुरवइया लेकिन चैनल सिर्फ स्ट्रिंगरों का खून चूस रहा है। 16 जनवरी 2014 को चैनल की शुरआत हुई थी। स्ट्रिंगरों को सैलरी का पेमेंट जून 2014 से दिया गया। छह माह तक स्ट्रिंगरों को मंगनी में खटवाया गया। 

स्टिंगरों से अब खबर की जगह सरपंचों के फ़ोन नंबर मांगे जा रहे हैं

ज़ी मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के नए चैनल हेड दिलीप तिवारी न जाने कौन सी दुश्मनी अपने ही चैनल के स्टिंगरों से निकाल रहे हैं. खबर तो दूर, चैनल में न्यूज़ स्क्रॉल तक नहीं चलाये जा रहे हैं. गिनती की स्टोरी पकड़ कर तीन-तीन दिनों तक रगड़ी जा रही हैं और कई मामलों में तो मीडिया ट्रायल तक किया जा रहा है. वो चाहे खंडवा के कलेक्टर द्वारा नरेंद्र मोदी के आगमन पर किये गए खर्च का मामला हो या बैतूल में एक व्यक्ति द्वारा एड्स की आशंका में परिवार की हत्या का फॉलोअप.

आईबीएन7 और ईटीवी वालों ने स्ट्रिंगरों को वेंडर बना डाला! (देखें फार्म)

अंबानी ने चैनल खरीद लिया तो जाहिर है वह एक तीर से कई निशाने साधेंगे. साध भी रहे हैं. मीडिया हाउस को मुनाफे की फैक्ट्री में तब्दील करेंगे. मीडिया हाउस के जरिए सत्ता की दलाली कर अपने दूसरे धंधों को चमकाएंगे. मीडिया हाउस के जरिए पूरे देश में रिलायंस विरोधी माहौल खत्म कराने और रिलायंस पक्षधर दलाली को तेज कराने का काम कराएंगे. इस कड़ी में वे नहीं चाहते कि जिले से लेकर ब्लाक स्तर के पत्रकार कभी कोई आवाज उठा दें या रिलायंस की पोल खोल दें या बागी बन जाएं. इसलिए रिलायंस वाले खूब विचार विमर्श करने के बाद स्ट्रिंगरों को वेंडर में तब्दील कर रहे हैं. यानि जिले स्तर का आईबीएन7 और ईटीवी का स्ट्रिंगर अब वेंडर कहलाएगा और इस बाबत दिए गए फार्मेट पर हस्ताक्षर कर अपने डिटेल कंपनी को सौंप देगा.

आज तक के स्ट्रिंगर शरद के खिलाफ डकैती का मुकदमा झूठा निकला

यशवंत भाई आदाब,  अभी कुछ समय पहले ‘भड़ास 4 मीडिया’ पर एक समाचार प्रकाशित हुआ था जिसका शीषर्क था- ‘आज तक के स्ट्रिंगर के खिलाफ डकैती का  मुकदमा दर्ज’.  ये खबर मुरादाबाद से आज तक के जिला संवादाता शरद गौतम के लिये उनके चाहने वालों ने भड़ास पर पोस्ट कराई थी और उनकी मंशा ये रही होगी कि इस खबर से आजतक समूह  शरद गौतम को बाहर का रास्ता दिखा देगा लेकिन हुआ इसका उलट. 14  oct 2014 को ये  मुकदमा संभल जनपद के चंदोसी कोतवाली में दर्ज हुआ और 18 OCT 2014 को जाँच अधिकारी ने मुकदमा झूठा पाया और एक्सपंज कर दिया.

हां हम अयोग्य हैं, इसीलिए पत्रकार हैं क्योंकि….

”अयोग्य लोग ही इस पेशे में आते हैं, वे ही पत्रकार बनते हैं जो और कुछ बनने के योग्य नहीं होते..” आज स्थापित हो चुके एक बड़े पत्रकार से कभी किसी योग्य अधिकारी ने ऐसा ही कहा था… कहां से शुरू करूं… मुझे नहीं आता रोटी मांगने का सलीका… मुझे नहीं आता रोटी छीनने का सलीका… हां मैं अयोग्य हूं… योग्य तो वो हैं जो जिले में दाग लेकर आये थे और दाग लेकर चले गए… वो दूध, आटा, दाल और आलू का भाव नहीं बता सकते क्योंकि अपनी मोटी तनख्वाह से उन्होंने जिले में रहते कभी रोटी खरीदी ही नहीं…  हां योग्य तो वो हैं जो जिले से जाते जाते जिले में अपना एक फ़ार्म हाउस बना गये और अपने लखनऊ वाले घर के लिए मुफ्त में शीशम की लकड़ी भी ले गए,आखिर हक़ बनता था उनका क्योंकि वृक्षारोपण में काफी बढ़चढ़ के हिस्सा लेते थे वो…