उपेंद्र राय के खिलाफ एक और एफआईआर, सीबीआई रिमांड दो दिन बढ़ी

आपराधिक षडयंत्र और धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार पत्रकार उपेंद्र राय के खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज की गई है. सीबीआई द्वारा दर्ज इस एफआईआर में जबरन उगाही का आरोप है. इसमें उपेन्द्र राय के अलावा उनके सहयोगी राहुल शर्मा भी आरोपी हैं. आरोप है कि उपेंद्र और राहुल दोनों ने स्वयं को आयकर विभाग का ‘पावर ब्रोकर’ बताकर मुंबई के बिल्डर से 15 करोड़ रुपये वसूले थे. सीबीआई का कहना है कि मुंबई के व्हाइट लायन रियल एस्टेट डेवेलॉपर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों में से एक बलविन्दर सिंह मल्होत्रा ने राय के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी है.

सीबीआई के मुताबिक, दोनों पक्षों में हुए समझौते के तहत बिल्डर ने बांद्रा स्थित एक्सिस बैंक के अपने खाते से 15.19 करोड़ रुपये की राशि राय के एचडीएफसी बैंक के खाते में डाली. यह लेन – देन अक्तूबर 2017 से अप्रैल 2018 के बीच हुआ.

ज्ञात हो कि सीबीआई ने उपेन्द्र राय और उनके सहयोगियों के आठ ठिकानों पर दिल्ली मुंबई और लखनऊ में छापेमारी की थी. उपेन्द्र राय पर आरोप है कि उन्होंने एयरवन एयरलांइस में खुद को क्वालिटी कंट्रोल का डायरेक्टर बता कर देश के सभी एयरपोर्टों में घुसने के लिए सुरक्षा पास बनवा लिया था जबकि उनके पास ऐसी कोई योग्यता नहीं थी इसके अलावा उनका नाम डीजीसीए ने भी एप्रूव्व नहीं किया था. उपेन्द्र राय पर आरोप है कि उन्होंने पीआईबी से अपने पत्रकार होने का पास लेते समय भी धोखाधड़ी की और पीआईबी को यह नहीं बताया कि वो एयर वन में बतौर क्ववालिटी कंट्रोल निदेशक हैं. पीआईबी ने भी उपेन्द्र राय का नाम अपनी वेबसाइट से हटा दिया है.

उपेंद्र राय पर आरोप है कि शैल कंपनियों के जरिए उनके पास करोड़ों रुपये आए और इनमें सहारा कंपनी से भी 18 करोड़ रुपये आने का जिक्र है. सीबीआई के मुताबिक उपेन्द्र राय के यहां से मिली मनी ट्रेल की जानकारी को अन्य जांच एजेंसियो ईडी और आयकर विभाग के साथ भी साझा किया जा रहा है.

सीबीआई उपेन्द्र राय से तीन दिनों से लगातार पूछताछ कर रही है. ताजी सूचना है कि उपेंद्र राय की रिमांड अवधि दो दिन के लिए बढ़ा दी गई है. दिल्ली की एक अदालत में उपेंद्र राय के वकील ने तर्क रखा कि उपेंद्र राय न तो कुछ छिपा रहे हैं और न ही वह कहीं भागने वाले हैं. ऐसे में उन्हें सीबीआई रिमांड पर रखना जरूरी नहीं है. सीबीआई के वकील ने उपेंद्र राय को रिमांड बढ़ाने के लिए जरूरी तर्क रखे. दोनों वकीलों को सुनने के बाद अदालत ने दो दिन की रिमांड बढ़ा दी.

कोर्ट में उपेंद्र राय के वकील का कहना है कि यदि पैसों का कोई लेनदेन किया गया है तो इसमें सीबीआई को क्या परेशानी है? सीबीआई का कोर्ट के सामने तर्क था कि जिस तरह से उपेंद्र राय ने एयरपोर्ट का पास हासिल किया और उनके खाते में संदिग्ध करोड़ों रुपये आए उसके पीछे की आपराधिक साजिश का पता करना है. यदि उपेंद्र राय को छोड़ा जाता है तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं.

उपेंद्र राय के वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने सीबीआई की एफआईआर पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीबीआई ने केवल सोर्स इन्फॉरमेशन पर मुकदमा दर्ज कर लिया. मुकदमे में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं. लेकिन एक भी सरकारी अधिकारी का नाम ना तो एफआईआर में है और ना ही किसी को गिरफ्तार किया गया है. साथ ही उपेंद्र के खिलाफ आज तक एयरपोर्ट पास का दुरुपयोग किए जाने की कोई शिकायत भी नहीं है. वकील ने कहा कि उपेंद्र राय ने ईडी और सीबीआई के कुछ अधिकारियों की शिकायत की थी जिसके चलते उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. वकील ने यह भी कहा कि सीबीआई ने अपनी एफआईआर में 100 करोड़ रुपये का जिक्र किया है लेकिन उनके मुवक्किल ने यदि पैसों का कोई लेनदेन किया है तो इसमें सीबीआई को क्या परेशानी है?

ज्ञात हो कि उपेंद्र राय ने अपनी गिरफ्तारी से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका लगाई थी. इसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उन्हें गिरफ्तारी से बचाया जाए. उनका तर्क था कि प्रवर्तन निदेशालय के एक अधिकारी के खिलाफ अखबार में लिखने के कारण उन्हें साजिशन फंसाया जा रहा है और उन पर झूठे आरोप मढ़े जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका का खारिज कर दिया और गिरफ्तारी से बचाव के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया.

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