संसद में तकरार: वैदिक के बहाने सरकार के ‘हिडेन’ एजेंडे का सवाल!

वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक इन दिनों खासी चर्चा में आ गए हैं। पिछले दिनों वैदिक ने पाकिस्तान यात्रा के दौरान लाहौर में कट्टरवादी संगठन जमायत-ए-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद से मुलाकात की थी। उन्होंने इस मुलाकात की फोटो अपने फेसबुक अकाउंट पर खुद अपलोड की है। इसके बाद राजनीतिक हल्कों में खासी सनसनी बढ़ गई। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने पत्रकार वैदिक और भारत के मोस्टवॉन्टेड आतंकी हाफिज सईद के मुद्दे को तूल देने की कोशिश शुरू कर दी है। इस मुद्दे को लेकर सोमवार को राज्यसभा में कांग्रेस के नेताओं ने हंगामा करने को कोशिश की। इसके चलते दो बार सदन को कुछ-कुछ देर के लिए स्थगित भी करना पड़ा। विपक्षी सदस्य इस मामले में सरकार की नीयत पर सवाल उठाते रहे। यह कहते रहे कि हाफिज से मुलाकात के पीछे उच्च स्तर पर सरकार की भूमिका जरूर रही है। ऐसे में, वे चाहते हैं कि सरकार इस सच्चाई को देश के सामने रखे कि आखिर उसे चुपचाप मुंबई आतंकी हमले के सबसे बड़े साजिशकर्ता से संवाद शुरू करने की जरूरत क्यों पड़ी?

कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह तो इस मामले में काफी आक्रामक मुद्रा में दिखाई पड़े। उन्होंने तो यह भी मांग कर दी कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले में पत्रकार वैदिक को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। हिरासत में लेकर उनसे यह पड़ताल होनी चाहिए कि आखिर, वे कैसे और किस अंदरूनी चैनल के जरिए आतंकी हाफिज सईद तक पहुंचे? इसमें किन-किन लोगों ने मदद की? दरअसल, वैदिक चर्चित योगगुरू बाबा रामदेव के काफी करीबी माने जाते हैं। लंबे समय से वे रामदेव के तमाम आंदोलनों और अभियानों में ‘सारथी’ की भूमिका निभाते आए हैं। इसी के चलते टीम मोदी से भी उनके तार जुड़े माने जाते हैं। कांग्रेसी सांसदों का आरोप यही है कि संघ परिवार के जरिए सरकार ने अपने ‘हिडेन’ एजेंडे के तहत हाफिज से चुपके-चुपके संवाद शुरू किया है। इसमें सरकार काफी कुछ छिपाने की कोशिश कर रही है।
 
उल्लेखनीय है कि स्वतंत्र पत्रकार वैदिक पाकिस्तान के एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के न्यौते पर वहां गए थे। इस न्यौते पर कांग्रेसी नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद और मणिशंकर आदि भी गए थे। लेकिन, वैदिक ने एनजीओ के कार्यक्रम में हिस्सेदारी के बाद वहां अपनी तरह की ‘पत्रकारिता’ भी कर डाली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से भी उन्होंने मुलाकात की। इसके साथ ही विपक्ष के कई नेताओं से भी वैदिक ने मुलाकात की है। 2 जुलाई को उन्होंने लाहौर में नवंबर 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद से मुलाकात कर डाली। इसी को लेकर विवाद बढ़ गया है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने हाफिज को मोस्टवॉन्टेड अभियुक्त करार कर रखा है। पाकिस्तान सरकार को आतंकी साजिश में उसकी भागीदारी के तमाम सबूत दिए गए थे। इसके बाद भी इस्लामाबाद की सरकार ने कोई कारगर कार्रवाई नहीं की। सरकार लगातार बहानेबाजी करती आई है। इसी का नतीजा है कि यह आतंकी आका देशभर में खुले आम घूमकर भारत के खिलाफ जहर उगलता रहता है। वह सीमावर्ती इलाकों का दौरा करके जेहाद के नाम पर मुस्लिम युवाओं को कश्मीर सहित कई भारतीय इलाकों में हिंसा के लिए उकसाता रहता है।
 
भारतीय खुफिया एजेंसी लगातार जानकारी दे रही है कि सईद के नेतृत्व में चलने वाले संगठन जम्मू-कश्मीर में हिंसक गतिविधियां बढ़ाने के लिए साजिश करते रहते हैं। इस आतंकी आका को वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना के अफसरों का भी साथ मिलता है। इसके बावजूद पाकिस्तान के हुक्मरान हाफिज के मामले में लगातार झूठ बोलते हैं। मीडिया और राजनीतिक हल्कों में मुलाकात प्रकरण पर विवाद बढ़ने के बाद वैदिक ने मीडिया में अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि उन्होंने एक पत्रकार के नाते सईद से मुलाकात की। क्योंकि, पहले भी वे कई बार पाकिस्तान का दौरा कर चुके हैं। ऐसे में, उनके तमाम संपर्क सूत्र यहां पर दशकों से बने हुए हैं। इस बार पाकिस्तान के एक प्रमुख टीवी चैनल के एंकर ने इस मुलाकात को कराने में सूत्रधार की भूमिका निभाई। उनकी मदद से ही लाहौर में हाफिज सईद से मुलाकात का समय तय हुआ। 2 जुलाई को यह भेंट शहर के ही एक घर में हुई।
 
वैदिक ने मीडिया को इस मुलाकात के संदर्भ में तमाम विवरण दिया है। उन्होंने जानकारी दी कि शुरुआती बातचीत में वह शख्स बहुत सतर्क और असहज लग रहा था। लेकिन, जब अनौपचारिक बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा, तो वह सहज होता गया। मुलाकात की टेबल पर खाने-पीने की तमाम चीजें रखी गई थीं। हाफिज ने एक अच्छे मेजबान की तरह उनसे कहा कि आप खाइए, लेकिन मैंने इसके जवाब में यही कहा कि रमजान का पाक महीना चल रहा है। मुझे मालूम है कि आप कुछ खाने पीने वाले नहीं हैं। ऐसे में, मुझे यह अच्छा नहीं लगेगा कि मैं आपके सामने कुछ खाऊं या पीयूं। इस बात पर हाफिज को हंसी आई। इसके बाद मुलाकात सहजता की ओर बढ़ी। इतना ही नहीं हाफिज ने अनौपचारिक माहौल बनाने के लिए उनसे बीवी-बच्चों के बारे में जानकारी ली, तो प्रतिउत्तर में उन्होंने भी सवाल कर लिया कि आप कुंवारे हैं या शादी-शुदा?
 
इस पर जवाब मिला कि उनके घर में तीन बीवियां हैं। मैंने चुहल करने के अंदाज में कह दिया कि इनमें से कौन बीवी ज्यादा अच्छी है? कौन कम? इस बात पर हाफिज ने ठहाका लगाया और कहा कि आप तो उसके घर में ही रार करा देंगे। खुदा के लिए ऐसे सवाल न पूछिए। वैदिक का दावा है कि हाफिज ने उनसे नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सोच के बारे में तमाम तल्ख सवाल पूछ डाले। उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि मोदी उस तरह के सोच के व्यक्ति नहीं है, जिस तरह की धारणा आप लोगों ने बना ली है। वे तो हिंदू, मुस्लिम, सिख व ईसाई सबको साथ लेकर चलने की बात कर रहे हैं। ऐसे में, गलतफहमी को जितना जल्दी निकालेंगे, उतना ही अच्छा रहेगा। वैदिक ने दावा किया है कि एक घंटे की मुलाकात में तमाम मुद्दों पर खुलकर बात हुईं। जब बातचीत पूरी हुई, तो हाफिज शिष्टाचारवश उन्हें कार तक पहुंचाने आए। चलते-चलते यह अनुरोध किया कि तमाम मुद्दों पर दोनों तरफ से ‘संवाद’ हो, तो अच्छा रहेगा। यदि आप लोग उन्हें बातचीत के लिए भारत आने का न्यौता दें, तो वे वहां आना चाहेंगे। वैदिक का मानना है कि इस मुलाकात के बाद उन्हें लगा कि हाफिज जैसे शख्स से भी अच्छे संवाद की गुंजाइश है।
 
वैदिक को हैरानी है कि कांग्रेस के तमाम नेता इस मुलाकात को लेकर इतना बवाल क्यों कर रहे हैं? पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरुर को भी लगता है कि इस मामले में सरकार कुछ न कुछ छिपा रही है। इसीलिए, हम चाहते हैं कि सरकार इस प्रकरण में साफ-साफ जवाब दे। आखिर, बताए कि वैदिक किसके दूत के रूप में आतंकी हाफिज से संवाद के लिए भेजे गए थे? पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भी इस तरह के सवाल उठाए। उन्होंने कहा है कि क्या किसी भारतीय नागरिक को मोस्टवॉन्टेड आंतकी से मेल-मुलाकात की अनुमति दी गई थी? क्योंकि, यह विश्वास करना सहज नहीं है कि सरकार को इस मुलाकात के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं रही होगी।
 
इस बारे में केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में जवाब दिया कि आतंकी हाफिज सईद से पत्रकार वैदिक की मुलाकात से भारत सरकार का कोई दूर-दूर तक लेना-देना नहीं है। एक पत्रकार के रूप में वैदिक ने मुलाकात की है। वे खुद कह चुके हैं। ऐसे में, सरकार की नीयत पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए। भारत सरकार, हाफिज सईद जैसे आतंकी से किसी चैनल के जरिए कोई संवाद करने का इरादा नहीं रखती। ऐसे में, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं स्वाभिमान से जुड़े इस मुद्दे पर छिछली राजनीति नहीं की जानी चाहिए। बहरहाल, इस मामले को लेकर कांग्रेस के लोग सरकार को घेरने की मुहिम में हैं। कांग्रेस के एक राष्ट्रीय सचिव ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि वैदिक पिछले कई महीनों से बाबा रामदेव के रणनीतिकार के रूप में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में, संदेह करने के पर्याप्त कारण हैं कि हाफिज से मुलाकात के मामले में सरकारी तंत्र के तार कहीं न कहीं जुड़े हैं। वैसे भी संघ परिवार के लोग ‘हिडेन’ एजेंडा चलाने में पहले से ही माहिर हैं।

 

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क virendrasengardelhi@gmail.com के जरिए किया जा सकता है।

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