वामपंथी बुढ़ऊ

Ajay Prakash : एक हैं अच्यूतानंदन। उम्र है 92 साल। कम्युनिस्ट पार्टी के हैं और कांग्रेस सरकार से पहले केरल के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। अबकी फिर वहां सीपीएम गठबंधन जीत गयी है। पता है आपको बुढ़ऊ की आखिरी ख्वाहिश क्या है। वह फिर से एक बार केरल के मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। सोचिए, जिस देश की आधी से अधिक आबादी 25 से 40 वर्ष की हो वहां ये वामपंथी बुढ़ऊ मुख्यमंत्री बनेंगे। मतलब नारा—पोस्टर—बैनर—चंदा—जेल जाने के लिए लौंडे—लफाड़ी और राज्य को संभालने का जिम्मा उनपर जो अपना नाजुक बदन भी न संभाल सकें। ऊपर से तुर्रम यह कि ई कम्युनिस्ट पार्टी वाले देश को दिशा देंगे। चंपक कहीं के!

xxxx

मेरी पिछली पोस्ट से आहत वामपंथी मित्रों। 92 साल की उम्र में केरल के मुख्यमंत्री बनने जा रहे अच्युतानंदन को मैंने अबतक कोई गाली नहीं दी है वामपंथी बुढ़ऊ ही कहा है। यह एक राजनीतिक निहितार्थ बताने वाली शब्दावली है। ठीक वैसे ही जैसे लोग कहते हैं कांग्रेस के पप्पू या आरएसएस का पालतू। वामपंथ के सन्दर्भ में यह उस नारे के बरक्श है जो आप वामपंथी लगाते हैं…नौजवान ही नेतृत्व करेगा, परिवर्तन का पहिया उसी के कंधे पर आगे बढ़ेगा।

पर आपके यहाँ नेतृत्व में सफ़ेद बालों वाले सीताराम येचुरी से अधिक नौजवान कोई दिखता नहीं। कन्हैया का नाम नहीं चलेगा क्योंकि वह एक संयोग है। और संयोगों को भौतिकवादी लोग कहाँ मानते हैं। वैसे भी उसे आपने अभी कुछ दिया नहीं है, जो दे रहा है वही एकतरफा दे रहा है। आगे सुनिए। कन्हैया की ही पार्टी के एक एबी बर्धन थे। वाम एकता के आखिरी निशानी। उनकी पैठ जंगल से लेकर संसद में ‘साम्प्रदायिकता’ को लेकर चुनौती दे रहे वामपंथियों में समान रूप से थी। वे मरने के चंद साल पहले तक सीपीआइ के मुखिया बने रहे। जाने का समय नजदीक आ गया तो उन्होंने सुधाकर रेड्डी नाम के एक सफ़ेद बाल वाले सज्जन को पार्टी का मुखिया बनवा दिया। सुधाकर रेड्डी को अजय भवन के आसपास के लोग भी जानते होंगे इसमें संदेह है।

पर बर्धन साहब को इससे संतोष न हुआ। वह जबतक जिए पार्टी मुखिया की तरह ही जिए। उससे पहले तक सुधाकर रेड्डी साइड में लगते रहे। अभी भी कहीं साइड में ही लगे होंगे। इसलिए मित्रों लगे हाथ कुछ और भी कह देना चाहता हूँ। आहत होने और विचार विरोधी मान लेने जैसे आसान उपाय अपने हिस्से में कर लेने की बजाय जनता से जुड़ने के दस उपाय सोचिये। आलोचकों और विरोधियों को बौद्धिकता का चाबुक दिखाने में तो आपलोग सदा से माहिर रहे हैं लेकिन एकाध दशक उनसे जुड़ाव और मोहब्बत पाने के भी प्रयास में लगाइये कामरेड। यकीन मानिये देश बदलेगा।

पत्रकार अजय प्रकाश के एफबी वॉल से.

भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप- BWG-10

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate

भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code