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राजस्थान में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ बिना सरकारी एप्रूवल के कुछ नहीं लिख सकते!

बीजपी की वसुंधरा सरकार ने अध्यादेश लाकर एक खतरनाक नियम बना दिया है…

राजस्थान में अगर किसी सरकारी अफ़सर, जज या मजिस्ट्रेट ने कोई ग़लत काम या भ्रष्टाचार किया हो तो सरकार के अप्रूवल के बिना आप कुछ नहीं कर सकते। बीजपी की वसुंधरा सरकार ने अध्यादेश लाकर एक खतरनाक नियम बना दिया है। मान लीजिए उदयपुर के जिलाधिकारी ने घोटाला किया और ख़ूब पैसे बनाये। ऊपर मंत्री, मुख्यमंत्री और पार्टी के नेताओं तक भी पैसा पहुँचाया। लेकिन किसी नागरिक या संस्थान ने सरकार के घपले को पकड़ लिया। अगले ही दिन सबूतों के साथ शिकायत की जाती है।

बीजपी की वसुंधरा सरकार ने अध्यादेश लाकर एक खतरनाक नियम बना दिया है…

राजस्थान में अगर किसी सरकारी अफ़सर, जज या मजिस्ट्रेट ने कोई ग़लत काम या भ्रष्टाचार किया हो तो सरकार के अप्रूवल के बिना आप कुछ नहीं कर सकते। बीजपी की वसुंधरा सरकार ने अध्यादेश लाकर एक खतरनाक नियम बना दिया है। मान लीजिए उदयपुर के जिलाधिकारी ने घोटाला किया और ख़ूब पैसे बनाये। ऊपर मंत्री, मुख्यमंत्री और पार्टी के नेताओं तक भी पैसा पहुँचाया। लेकिन किसी नागरिक या संस्थान ने सरकार के घपले को पकड़ लिया। अगले ही दिन सबूतों के साथ शिकायत की जाती है।

उसके बाद मीडिया इस भ्रष्टाचार की कहानी को जनता तक पहुंचाने का काम करती है। भ्रष्टाचारियों पर जाँच मुकदमा चलता है। अन्य पार्टियां सड़क पर उतर जाती हैं और सरकार के ख़िलाफ़ माहौल बनता है। सरकार में बैठे चोरों और घोटालेबाजों को समझ नहीं आता कि सब कुछ तो ठीक ठाक चल रहा था, एकाएक बात बाहर कैसे आ गयी! अब क्या करें! बाकी के भ्रष्टाचारी जो अब तक पकड़ में नहीं आये हैं, वो भी घबरा जाते हैं। उन्हें भी देश का पैसा डकारने में थोड़ा डर लगता है। जनता, मीडिया और देश ख़ुद को ताकतवर महसूस करता है। लेकिन राजस्थान में अब ऐसा नहीं होगा।

बीजपी की वसुंधरा सरकार ने अध्यादेश लाकर एक खतरनाक नियम बना दिया है। अगर किसी सरकारी अफ़सर, जज या मजिस्ट्रेट ने कोई ग़लत काम या भ्रष्टाचार किया हो तो सरकार के अप्रूवल के बिना आप कुछ नहीं कर सकते। यानी भ्रष्टाचारी अधिकारी के ख़िलाफ़ जाँच तभी होगी जब सरकार अनुमति दे। सरकार ने आवेदनों पर अनुमति देने के लिए 6 महीने का लंबा समय अपने पास रखा है। इतना ही नहीं, जब तक सरकार इजाज़त ना दे तब तक कोई भी टीवी, अख़बार, मीडिया वाले ख़बर की रिपोर्टिंग नहीं कर सकते। अफ़सर नेताओं के नाम और उनके भ्रष्टाचार का ज़िक्र नहीं कर सकते।

यानी किसी भी घोटाले की जाँच सरकार के इजाज़त के बाद होगी। और चोरों के पास 6 महीने का टाईम होगा फ़ाइल, कागज़ात इधर उधर करके मामला सेट करने में। तब तक मीडिया भी आप तक कुछ नहीं पहुंचा सकेगी। अब बताइये…

• क्या किसी सरकार को ये तय करने का अधिकार होना चाहिए कि अदालतों में किस मामले की जाँच हो और किसकी नहीं?

• ऐसी कोई सरकार होगी क्या जो अपने ही ख़िलाफ़ किसी घोटाले की जाँच होने देगी? नहीं ना?!

• और अगर सरकार जाँच करने की इजाज़त दे भी दे तो 6 महीनों में चोर और घोटालेबाज़ लोग सेटिंग और फ़ाइल कागज़ात की तैयारी नहीं कर लेंगे?

• क्या किसी सरकार को ये अधिकार होना चाहिए कि वो मीडिया रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध लगाए?

• तो क्या ऐसे चलेगा अब हमारा देश? राजस्थान की ये महारानी कोरिया वाले किम जोंग की महिला अवतार से कम है क्या?

बाकी आप ढोल पीटते रहिये कि इस सरकार में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। बीजेपी की मर्ज़ी इसी तरह चलती रही तो आगे भी आपको किसी भ्रष्टाचार का पता नहीं चलने वाला।  अब इसको नहीं तो और किसे कहते हैं ‘अच्छे दिन’?

लेखक अनुपम ‘स्वराज अभियान’ के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं.

भाजपा यानि भ्रष्टों को बचाने और मीडिया पर बैन लगाने वाली पार्टी… सुनिए भड़ास संपादक यशवंत सिंह का ये आंख खोलने वाला वक्तव्य… पूरा सुनिए… पूरा देखिए… क्लिक करिए…

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