मोदी जी तो सच में अपने उद्योगपति मित्रों को भरपेट खिला रहे हैं!

Suresh Chiplunkar-

एक और मजेदार मामला सामने आया है… गौर करें…. जैसा कि आप जानते हैं, वीडियोकॉन समूह विभिन्न बैंकों के 45000 करोड़ रूपए डुबाकर खुद को दिवालिया घोषित कर चुका है. नए कानूनों के तहत इस समूह का नियंत्रण केन्द्रीय संस्था NCLT ने ले लिया है. अब NCLT ने वीडियोकॉन समूह से वसूली करने के लिए इसके नियंत्रण की बोली लगाने का फैसला किया. यहाँ तक तो सब ठीक है…

अब आगे मामला यूँ बनता है कि पूरा समूह हाथ से जाते देखकर वेणुगोपाल धूत (वीडियोकॉन) ने NCLT से कहा कि उन्हें कुछ समय और छूट दी जाए, तो वे यह समझौता करने को तैयार हैं कि अगले पंद्रह वर्षों में सन 2035 तक किस्तों में 30,000 रूपए लौटा देंगे… यानी प्रतिवर्ष 2000 करोड़ रूपए देंगे… लेकिन NCLT ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया.

अब मामले में वेदांता समूह की ट्विन स्टार टेकनोलोजीस कम्पनी की एंट्री होती है, और वह NCLT को “केवल-केवल” 3000 करोड़ रूपए देकर इस समूह का पूरा नियंत्रण अपने कब्जे में लेने का प्रस्ताव देती है. NCLT इस प्रस्ताव को सहर्ष मान लेती है. यानी देश के तमाम सार्वजनिक बैंकों के डुबाए हुए 45000 करोड़ के कर्जे में से बाकी के 42000 करोड़ रूपए गए “बट्टे-खाते में”… अर्थात आपकी-हमारी जेब से छीने गए टैक्स से बने बैंकों का पैसा अधर में लटक गया… वह भी तब, जबकि धूत परिवार प्रतिवर्ष 2000 करोड़ रूपए देने को तैयार हो गया था.

अब आप स्वयं अपने एक कॉमन सेन्स से एक सवाल खुद से पूछिए कि यदि आपको दो प्रस्ताव मिलें तो आप इनमें से किसे स्वीकार करेंगे?? — १) 15 साल तक हर वर्ष 2000 करोड़ लेकर कम्पनी पुराने मालिक के हवाले… (इसमें यह शर्त भी शामिल हो कि यदि किसी वर्ष 2000 करोड़ नहीं चुकाए, तो NCLT फिर भी ये कम्पनी 3000 करोड़ से अधिक में बेच सकेगी)… या फिर २) एकमुश्त 3000 करोड़ रूपए लेकर कम्पनी नए वाले के हवाले… जिसका खुद का रिकॉर्ड कोई बहुत बेहतर न हो… और बैंकों का पैसा झोल में… तो आप इनमें से कौन सा सौदा पसंद करेंगे??

अब अंतिम बात :- वेदांता समूह अनिल अग्रवाल का है, जो कि 2014 में भाजपा को चन्दा देने वाले Second Biggest उद्योगपति हैं. इसके अलावा वीडियोकॉन समूह रावा ऑइल फील्ड अधिग्रहण की प्रमुख हिस्सेदार है, यानी अब ये भी वेदांता की जेब में गया…

चलिए… अब सरकार का अगला निशाना BPCL (भारत पेट्रोलियम कम्पनी लिमिटेड), पर होगा जो कि फायदे में भी चल रही है, डिविडेंड भी शानदार दे रही है… ये कम्पनी भी सरकार का कोई “प्यारा उद्योगपति” ऐसे ही चुपके से ले उड़ेगा…

साभार :- Darshan Mondkar

Darshan Mondkar की मूल पोस्ट-

Now this is interesting. Videocon Group went into bankruptcy with an outstanding debt of Rs. 46,000 Crores. The control was taken over by the NCLT under the latest bankruptcy laws. Dhoot (the promoter of Videocon) proposed to pay Rs. 30,000 Crores by 2035 in an attempt to retain control of the group.

NCLT REFUSES THE OFFER.

Twin Star Technologies offers to pay Rs. 3000 Crores (approx) to get full control of the Group.

NCLT ACCEPTS!!!

So the Lenders and the NCLT are perfectly okay with being paid Rs. 3,000 Crores right now and lose the rest Rs. 42,000 Crores….

Instead of getting paid Rs. 30,000 Crores in 15 years, which is almost Rs. 2000 Crories every year for the next 15 years???

And they could have sold it off at Rs. 3000 Crores at any point of time, if Dhoot had defaulted on his contractual promise..

Oh wait……

Twin Star Technologies is owned by Anil Agarwal, who also own Vedanta Group, which was the 2nd largest donor to the BJP in 2014 LS elections.

Videocon also has a stake in Ravva oil field and this acquisition will make Vedanta it’s largest stake holder
…. Fir theek hai.

Next target BPCL.

Disclaimer: Business is not funny, but this is definitely Funny Business.

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