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जिस रजत शर्मा ने कभी एनबीए को गैरजरूरी और टीवी टुडे नेटवर्क की जागीर बताया था, वही अब इसके प्रेसिडेंट हैं

Vineet Kumar : जिस रजत शर्मा के इंडिया टीवी ने साल 2008 में मुंबई आतंकवादी हमले की कवरेज के दौरान दुनिया की मशहूर आतंकवादी मामलों की विशेषज्ञ फरहाना अली को आतंकवादी बना दिया था और जिसके कारण एनबीए ने चैनल पर एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया..रजत शर्मा ने ऐसा किए जाने पर एनबीए को गैरजरूरी, अविश्वसनीय और टीवी टुडे की जागीर बताया, अब वही रजत शर्मा इस एनबीए के प्रेसिडेंट है..वो इस हैसियत से टेलीविजन कंटेंट को बेहतर करने के लिए प्रेस रिलीज जारी करेंगे..देश के न्यूज चैनलों को नसीहतें देंगे कि क्या प्रसारित करना राष्ट्रहित में है, क्या नहीं..

Vineet Kumar : जिस रजत शर्मा के इंडिया टीवी ने साल 2008 में मुंबई आतंकवादी हमले की कवरेज के दौरान दुनिया की मशहूर आतंकवादी मामलों की विशेषज्ञ फरहाना अली को आतंकवादी बना दिया था और जिसके कारण एनबीए ने चैनल पर एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया..रजत शर्मा ने ऐसा किए जाने पर एनबीए को गैरजरूरी, अविश्वसनीय और टीवी टुडे की जागीर बताया, अब वही रजत शर्मा इस एनबीए के प्रेसिडेंट है..वो इस हैसियत से टेलीविजन कंटेंट को बेहतर करने के लिए प्रेस रिलीज जारी करेंगे..देश के न्यूज चैनलों को नसीहतें देंगे कि क्या प्रसारित करना राष्ट्रहित में है, क्या नहीं..

इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ उसी रजत शर्मा को न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन का प्रेसिडेंट बनाया गया है जिन्होंने साल 2008 में मुंबई बम धमाका मामले एनीबीए की ओर से एक लाख का जुर्माना लगाए जाने के बाद इस संगठन को गैरजरूरी और मनमानी करनेवाला करार दिया था और इंडिया टीवी को इससे अलग कर लिया था. हुआ यों था कि 26/11 के मुंबई हमले के दौरान इंडिया टीवी ने पाकिस्तान मूल की फरहाना अली जो कि आतंकवादी मामलों की जानकार हैं और सेंट्रल इन्टलीजेंस एजेंसी, यूएसए से जुड़ी रही हैं, उन्हें चैनल ने आतंकवादी मामलों के विशेषज्ञ के बजाय जासूस करार दे दिया जिसका आशय था कि वो आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है. इंडिया टीवी ने ये इंटरव्यू रॉयटर से बिना क्रेडिट दिए प्रसारित किया था और जिसमे फरहाना अली की छवि पूरी तरह डैमेज कर दी थी.

इस बात की शिकायत फरहाना अली ने एनबीए से की और उसके बाद इस संगठन ने एक लाख रुपये का जुर्माना और रात के आठ से नौ के बीच लगातार पांच दिनों तक खेद की अलग से पट्टी चलानी थी..लेकिन चैनल ने ऐसा करने के बजाय एनबीए को टीवी टुडे नेटवर्क की जागीर बताते हुए खुद को इससे 10 अप्रैल 2009 को अलग कर लिया. बाद में 17 जुलाई 2009 को इंडिया टीवी ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए दोबारा से सदस्यता लेने की घोषणा की..इस शर्त के साथ इंडिया टीवी और रजत शर्मा वापस गए कि चैनल के तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी को प्रमुख संपादक की श्रेणी में रखा जाए और रजत शर्मा को स्थायी सदस्य के रूप में स्वीकार किया जाए. एनबीए ने ये मांगे मान ली और इंडिया टीवी की छाती चौडी रह गई.

वैसे तो अपने गठन के बाद से एनबीएन ने जिस तरह के फैलले दिए हैं और जैसी हरकतें की हैं, उस हिसाब से देखें तो रजत शर्मा का चेयरमैन होना हैरानी की बात नहीं है. ये आज न कल होना ही था..लेकिन ऐसे समय में जबकि उनका चैनल और स्वयं वो खुद भी मौजूदा सरकार के बजाय उनके प्रधान सेवक के भक्त बन गए हैं… दो चीजें तो बेहद स्षप्ट और अघोषित ही सही लेकिन तय है- एक तो ये कि एनबीए के चेयरमैन की हैसियत से अब वो इस भक्ति को खुल्लाखेल फरुर्खाबादी बनाने में सक्रिय होंगे. दूसरा किसी भी चैनल या कार्यक्रम को लेकर सवाल नहीं किए जाएंगे जो कि सरकार के पक्ष में किए जाने के बावजूद पत्रकारिता के मानदंड को ध्वस्त करते हों और उन चैनलों और खबरों को कसने की पूरजोर कोशिश होगी जो मोदी सरकार के खिलाफ जाते हैं..कुल मिलाकर आप चाहें तो एनबीए की भूमिका आनेवाले समय में उन चैनलों के लिए सरकारी नियंत्रण जैसी होगी जो मोदी सरकार की गतिविधियों से असहमत होते हैं..वहीं उन चैनलों के लिए आश्वस्त करेंगे कि आप उनके नाम की चाहे जितनी उंची सुर चाहो, लगा सकते हो.. रहा मामला इंडिया टीवी की एंकर तनु शर्मा द्वारा एफआइआर करके चैनल पर उत्पीड़न का मामला दर्ज किए जाने का तो एबीए जैसी संस्था इस तरह की नैतिकता को कब मानता आया है जो इंडिया टीवी मामले में अलग से माने..

मूल खबर :

रजत शर्मा बने न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष

युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.

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