नफरत फैलाने वाले एंकरों पर मुक़दमा चलाने की मांग करने वाली महिला पत्रकार को अरुण पुरी ने नौकरी से निकाला

Shweta R Rashmi : शर्मनाक और घटिया शुरुआत है ये… टीवी टुडे की पत्रकार को इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि उसने पत्रकारिता में सिखाये ऊसूल को याद रखते हुए आस पास देख कर सच लिखा और ट्वीट किया। प्रबंधन ने उस पर दवाब डाला कि वो ट्वीट डिलीट करे। ऐसा न करने पर नौकरी से टर्मिनेट कर दिया गया। टीवी टुडे ग्रुप में घटी इस घटना से पहले बॉबी घोष को भी नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि एक खबर पर सत्ता पक्ष को ऐतराज़ था। अब सवाल ये है कि टीवी टुडे के, या अन्य मीडिया संस्थानों के मैनेजमेंट को दंगा करवाने पर आमादा, बिक़े और गलत सूचना फ़ैलाने वाले झींगुर क्यों नहीं दिखते।

ये है टीवी टुडे समूह का आधिकारिक बयान…

ये

Samar Anarya :  इंडिया टुडे ने झूठी ख़बरें और नफ़रत फैलाने वाले ऐंकरों, पत्रकारों को न रोकने वाले मीडिया मालिकों पर वैमनस्य फैलाने के लिए मुक़दमा चलाने की माँग करने वाली अंगशुकांता चक्रबर्ती को नौकरी से निकाला। ठीक ही किया, भले अंगशुकांता ने किसी समूह का नाम न लिया हो, इंडिया टुडे जानता है कि उसने रोहित सरदानाओं और राहुल कँवलों को नौकरी पे रखा ही हुआ है! नए भारत में स्वागत है।

India Today fires journalist for asking for prosecution of promoters (read owners of channels) allowing hate-mongering, fake news spreading news anchors, as hate speech enablers-profiteers. She hadn’t named anyone but then owners know that they have Rohit RSS Sardanas and Rahul RSS Kanwals doing exactly that! Welcome to New India.

भारतीय मीडिया आज: यूएई दूतावास टाइम्स काऊ, जी न्यूज़ और अन्य मीडिया समूहों को अबू धाबी के राजकुमार के बारे में ‘जय सिया राम’ बोलने की फ़र्ज़ी ख़बर चलाने पर भड़का, चेतावनी दी कि ऐसी हरकतें डालेंगी संबंधों पर असर। इंडिया टुडे ने फ़र्ज़ी न्यूज़ चलाने वाले, नफ़रत फैलाने वाले मीडिया समूहों के ख़िलाफ़ कार्यवाही की माँग करने वाली पत्रकार को बर्खास्त किया। नए भारत में स्वागत है।

Indian Media Today: UAE embassy slams Times Cow, Zee News, others for faking news about crown prince of Abu Dhabi chanting Jai Siya Ram, warns that such fake news will affect relationships. India Today fires journalist who sought action against media houses mongering hate, promoting fake news.

पत्रकार श्वेता आर रश्मि और अविनाश समर की एफबी वॉल से.

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जी न्‍यूज छोड़कर आजतक पहुंचे रोहितेश्‍वर

ज़ी न्यूज़ के प्रबंधन से परेशान एक और कर्मचारी ने संस्थान को अलविदा कह दिया है. प्रोमो विभाग में 8 साल से कार्यरत रोहितेश्वर सहाय ने आजतक ज्वाइन कर लिया है. रोहित ग्राफिक्स और क्रिएटिव्स के विशेषज्ञ हैं. ज़ी न्‍यूज से पहले दूरदर्शन का हिस्सा हुआ करते थे.रोहितेश्वर सहाय ज़ी न्‍यूज के ज़रा सोचिए से लेकर तमाम अवॉर्ड विनिंग प्रोमोज़ की टीम का हिस्सा रहे हैं. रोहितेश्वर सहाय बिहार के रहने वाले हैं और आजतक में प्रोमो टीम में ही उन्होंने बतौर सीनियर प्रोड्यूसर ज़िम्मेदारी संभाली है.

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आजतक के कई बड़े पत्रकार 26 को यूपी विधानसभा में होंगे पेश, जाएंगे जेल या मिलेगी माफी?

Ambrish Kumar : मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित आजम खान को लेकर हुए स्टिंग आपरेशन में मीडिया खासकर इलेक्ट्रानिक चैनल के कई पत्रकारों को 26 फरवरी को विधान सभा में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं. इन पत्रकारों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153 a, 295 a, 200, 463, 454, 465, 469 और 471 लगाई गई है. इतनी बड़ी संख्या में संभवतः पहली बार चैनलों के पत्रकार विधान सभा में पेश होंगे.

विधान सभा चाहे तो उन्हें माफ़ भी कर सकती है. बसपा के स्वामी प्रसाद मौर्य ने उन सभी चैनल वाले पत्रकारों पर राष्ट्रद्रोह की धारा लगाने को भी कहा है जिन्होंने फर्जी स्टिंग के जरिए आजम खान को फंसाने का प्रयास किया. इन पत्रकारों को अब 26 फरवरीको विधान सभा में भी पेश होना है क्योंकि इन्हें विधान सभा की समिति ने दोषी पाया है.

वरिष्ठ पत्रकार अंबरीश कुमार के फेसबुक वॉल से.

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Will India Today’s gamble to rebrand its Headlines Today television channel pay off?

Media watchers and market analysts are observing the recent rebranding of Headlines Today as India Today TV with keen interest. As rebrandings go, this exercise is undoubtedly bold, running many risks. Is India Today a strong enough brand to work magic in the visual and print media together? Can a print brand’s appeal be superimposed on a television network to get better TRPs? Will core readers of India Today, the flagship 30-year-old magazine, switch to watching the India Today TV channel, snubbing NDTV and Times Now or News X?

 

Marketing mandarins believe that a brand provides the pull and the marketing the push. In this case, there seems to be some confusion between the branding and marketing strategy. The rebranding is the brainwave of Kalli Purie, the new group editorial director, who has said the main intention behind the exercise is to serve as a “credibility booster” for the 12-year-old channel Headlines Today. She said India Today would bring a web philosophy to the television screen as well as “snappy headlines”. What this means is native advertising, shorter advertisement breaks, etc. It is difficult to imagine viewers being won over with snappy headlines, which has been a long-running philosophy of the India Today group.

In media, we know that a print publication develops a readership that does not necessarily render into TV viewership of a TV channel. Brands in each segment are viewed separately. As Hector Pottie of the branding company Prophet London said in the Guardian: “In today’s world brands live or die on what they do. If the experience is poor then loyalty won’t last long. There’s a lot of choice and if the minute a brand isn’t giving me what I need I’m not likely to stick around.”

So the question really here is what will India Today TV give what Headlines Today couldn’t? What does India Today stand for that Headlines Today didn’t? Rajdeep Sardesai’s stint as an anchor of a prime time show and Karan Thapar’s show has given the channel some heft and viewership. But will this be enough?

Already, the channel has plunged headlong into a battle for TRPs with Times Now. It claimed to have toppled Times Now (on the back of its coverage of the Lalit Modi story and interview), while its editor Rahul Kanwal accused Times Now of trying to reclaim the top spot by “hook or by crook”.

According to BARC India, an industry body that measures television audiences, India Today TV became the top channel in the last week of May, with a viewership of 354 (000’s sum, a unit used to calculate reach) to Times Now’s 264. Till late last year, NewsX was the top channel based on TRPs in the six metros. Ratings by different agencies differ and are based on different parameters.

It is debatable whether the India Today print brand has grown additional sinews in the last decade to pass on excess pulling muscle to its TV network. The magazine and the group began to lose prominence in the last decade when the digital churn started. This was because the group chairman Aroon Purie believed there was “no point sending the good money after the bad”, as he often said about digital investments. Still, India Today tried several digital strategies, most of which didn’t work too well. The main portal was once put behind a pay wall, then a website with “snappy headlines” was launched, and then a commerce website only for invitees was set up – all with lukewarm success.

Connecting brand identities

Cross-connecting brand identities is a risky business. Times Now takes its brand equity from its print variant but that was no rebranding. Today, the channel and the newspaper travel different paths. Times Now today is a big brand in its own right and does not need rebranding as Times of India TV. Zee’s newspaper is DNA, where no effort is made to link the brands as one family. It is what you provide that matters and not the branding.

Aaj Tak has done well without the India Today logo hanging anywhere near it. At the same time, some regional editions of India Today with the same branding have shut down, showing that in regional languages the brand pull doesn’t work. So where does this brand equity work?

In the case of the TV channel rebranding, many will argue that the magazine was the weaker brand among the two and actually the magazine should have been renamed as Headlines Today, with the bright future of TV and the dismal future of print in mind. Both the television channel and the magazine need to rejuvenate in the coming years. That anxiety has set in in the group is evidenced by the fact that India Today magazine has had four editors in the last two-three years. The TV rebranding too can be seen as part of this struggle to regain its pre-eminence.

साभार- स्कॉल डॉट इन

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अरुण पुरी ने बेटी कली पुरी को बना दिया ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर

अरुण पुरी यानि आजतक, इंडिया टुडे समेत कई चैनलों पत्रिकाओं के मालिक ने अब अपनी बेटी कली पुरी को ग्रुप का एडिटोरियल डायरेक्टर बना दिया है. इंडिया टुडे ग्रुप में कली पुरी अब ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्‍टर के बतौर ब्रॉडकास्‍ट और न्‍यू मीडिया का काम देखेंगी. इससे पहले कली पुरी ग्रुप सिनर्जी और क्रिएटिव ऑफिसर पद पर थीं.

खुद अरुण पुरी इंडिया टुडे ग्रुप के अध्‍यक्ष और एडिटर इन चीफ हैं. अरुण पुरी ने ग्रुप के कर्मचारियों को कली पुरी को नई जिम्‍मेदारी दिए जाने के बाबत मेल किया है. कली पुरी 1996 से मीडिया में सक्रिय हैं. सबसे पहले वह इंडिया टुडे मैग्जीन में मार्केटिंग एग्जिक्‍यूविट और रिपोर्टर बनीं. बाद में प्रिंट, टेलिविजन और डिजिटल में विभिन्‍न पदों पर काम किया. वर्ष 2011 से वह इंडिया टुडे कॉन्क्‍लेव के डायरेक्‍टर की भूमिका निभा रही हैं.

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अमिताभ सिन्हा आजतक छोड़ आईबीएन7 पहुंचे, तुषार बनर्जी ने ‘बीबीसी’ और अभिषेक ने ‘खबर मंत्र’ छोड़ा

आजतक में कई वर्षों से कार्यरत पत्रकार अमिताभ सिन्हा ने दुखी मन से इस्तीफा दे दिया है. चर्चा है कि अमिताभ खुद की उपेक्षा से नाराज थे. पिछले तीन वर्षों से उनको प्रमोशन नहीं दिया गया था. वे भाजपा बीट कवर करते थे और नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू ले पाने में टीवी टुडे ग्रुप से अमिताभ सिन्हा ही सफल हो पाए थे. बताया जाता है कि नरेंद्र मोदी ने खुद इच्छा जताई थी कि वो अगर टीवी टुडे में किसी को इंटरव्यू देंगे तो वो अमिताभ सिन्हा होंगे.

अमिताभ सिन्हा ने जब अपना इस्तीफा चैनल प्रबंधन को भेजा तो कली पुरी से लेकर सुप्रिय प्रसाद तक उन्हें मनाने में जुट गए. भाजपा इन दिनों सत्ता में है और भाजपा बीट पर अमिताभ सिन्हा अच्छी पकड़ रखते हैं, इसलिए उन्हें खोने के लिए चैनल प्रबंधन तैयार न था. लेकिन अमिताभ सिन्हा नहीं माने. उनकी पहले ही बात आईबीएन7 में हो गई थी. उन्होंने राजनीतिक संपादक पद पर आईबीएन7 ज्वाइन किया है.

बीबीसी हिंदी आनलाइन में कार्यरत पत्रकार तुषार बनर्जी ने इस्तीफा दे दिया है. वे राघव बहल के नए लांच होने वाले आनलाइन न्यूज वेंचर के हिस्से हो गए हैं. तुषार ने बनारस स्थित बीएचयू से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कई संस्थानों के साथ कार्य किया. न्यूज और टेकनालजी की बेहतरीन समझ रखने वाले तुषार ने बीबीसी में कार्य के दौरान कई बड़ी खबरें ब्रेक की. बीबीसी में हुए विदाई समारोह के बारे में तुषार बनर्जी अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं: ”Big thanks to wonderful souls at the BBC for organising this lavish send-off…..My stint has been truly enriching and has helped me transform into a more professional individual. I will miss my office, colleagues, and those readers’ mails where I often got mentioned….But to move on is life….A short break awaits me before I take up the new responsibility at a newer place…Blessings awaited 🙂 ”

रांची के अखबार ‘खबर मंत्र’ से सूचना है कि अभिषेक कुमार राय ने सब एडिटर पद से रिजाइन दे दिया है. उन्होंने इस्तीफा देने के बाद अखबार के अंदर की तस्वीर को मेल के जरिए उजागर किया है. उन्होंने लिखा है कि एक बिल्डर अखबार का संपादक बनकर वहां अपने काले ब्लैक कारनामों को वाइट करने में जुटा है. चिरौंदी की जमीन, उसके द्वारा रैयतों को दिया गया चेक और उसमें गड़बड़ी, जमीन मामले में उनकी कंपनी को बचाने के लिए अखबार का यूज किया गया. जब सारा कुछ सध गया तो वे खुद संपादक बन बैठे हैं. अब वहां का माहौल काम करने लायक नहीं रहा है इसलिए प्रतिष्ठा के साथ वे बाहर आए गए, अपना त्यागपत्र देकर. अभिषेक ने लिखा है कि खबर मंत्र अब जी-हजूरी करनेवालों का दरबार बन गया है.

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ITA अवॉर्ड्स : आजतक ने जीता चार एवार्ड

खबरों के मामले में आपको हमेशा सबसे आगे रखने वाला आपका चहेता आजतक एक बार फिर देश का सर्वश्रेष्ठ न्यूज चैनल चुना गया है. शनिवार को मुंबई में हुए ITA (इंडियन टेलीविजन अकैडमी) अवॉर्ड्स में आजतक को लगातार 14वीं बार बेस्ट न्यूज चैनल का अवॉर्ड मिला. आजतक की झोली में कुल 4 अवॉर्ड्स आए. आजतक के साप्ताहिक कार्यक्रम ‘सीधी बात’ को बेस्ट टॉक शो का अवॉर्ड मिला. इसके लिए इंडिया टुडे ग्रुप के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल को बेस्ट एंकर का अवॉर्ड दिया गया. आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप को बेस्ट एंकर का अवॉर्ड दिया गया.

आज तक की एंकर अंजना ओम कश्यप ने अवॉर्ड के साथ अपनी तस्वीर ट्वीट की है. उन्होंने अवॉर्ड मिलने पर खुशी जताई है. “@anjanaomkashyap: life’s overwhelming moment ! Feel honoured to get the ITA Award. pic.twitter.com/MiQJZDhKch”you are truly deserved it…..
    — love_you (@fond_care) November 1, 2014

राहुल कंवल इस अवॉर्ड फंक्शन में पहुंच नहीं पाए. उन्होंने ट्वीट किया- Thanks also to all the guests over the years who gave us time and took on the toughest & trickiest of questions. Best Talk Show #SeedhiBaat
    — Rahul Kanwal (@rahulkanwal) November 1, 2014

‘जीतेगा भई जीतेगा’ शो को बेस्ट न्यूज एंड करंट अफेयर्य शो चुना गया और इसके लिए शम्स ताहिर खान को अवॉर्ड मिला. 2001 से आजतक को बेस्ट हिंदी न्यूज चैनल का अवॉर्ड मिल रहा है.

उपरोक्त खबर आजतक की वेबसाइट पर प्रकाशित है. वहीं से साभार.

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ऑफिसियल ट्रिप है, ऐश कीजिए कंपनी के खर्चे पर… कोई पत्रकारिता नहीं है यह सब…

Sanjaya Kumar Singh : भड़ास पर छपी ‘पुण्य प्रसून बाजपेयी, सुप्रिय प्रसाद, राहुल कंवल और दीपक शर्मा कल क्यों जा रहे हैं लखनऊ?‘ खबर को पढ़कर एक पुरानी घटना याद आ गई। जनसत्ता के लिए जब मेरा चुनाव हुआ उन्हीं दिनों जमशेदपुर से निकलने वाले एक अंग्रेजी अखबार के संवाददाता की हत्या हो गई थी। पत्रकारिता को पेशे के रूप में चुनने से पहले मुझे यह तय करना था कि कितना खतरनाक है यह पेशा। मैंने जमशेदपुर के एक बहुत ही ईमानदार पत्रकार से इस बाबत बात की। उनसे लगभग सीधे पूछा था कि जिस पत्रकार की हत्या हुई उसकी तो कोई खबर मुझे याद नहीं है। दूसरी ओर आप एक से बढ़कर एक खबरें लिखते हैं – क्या आपको डर नहीं लगता धमकी नहीं मिलती।

तब उन्होंने कहा था कि अगर आप अपना काम करो, ईमानदारी से करो तो कोई बुरा नहीं मानता, कोई खुंदक नहीं पालता। लेकिन आप खबरें करने में सेलेक्टिव होगे, किसी के खिलाफ लिखोगे, किसी के खिलाफ नहीं तो स्थिति खराब होगी। उस समय तो मुझे लगा था कि उन्होंने पॉलिटिकली करेक्ट जवाब दे दिया था – अब लगता है कि मामला ऐसा ही है। पहले ईमानदारी से खबरें की जाती थीं और जब कोई प्रेस के खिलाफ होता था तो सभी प्रेस वाले मिलकर विरोध करते थे। अब आप सुविधा भी लोगे और खिलाफ भी लिखोगे – विज्ञापन ज्यादा चाहिए, प्लॉट कोने वाला चाहिए, वेज बोर्ड नहीं देने की आजादी चाहिए तो फिर विरोध कैसा। और फिर सामने वाला प्लॉट की कीमत याद दिलाएगा तो दूसरा क्यों साथ दे। यह सब किसी खास संस्थान में काम करने की कीमत है – ऑफिसियल ट्रिप है, ऐश कीजिए कंपनी के खर्चे पर। कोई पत्रकारिता नहीं है यह सब।

जनसत्ता समेत कई अखबारों में वरिष्ठ पद पर काम कर चुके पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

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जिस रजत शर्मा ने कभी एनबीए को गैरजरूरी और टीवी टुडे नेटवर्क की जागीर बताया था, वही अब इसके प्रेसिडेंट हैं

Vineet Kumar : जिस रजत शर्मा के इंडिया टीवी ने साल 2008 में मुंबई आतंकवादी हमले की कवरेज के दौरान दुनिया की मशहूर आतंकवादी मामलों की विशेषज्ञ फरहाना अली को आतंकवादी बना दिया था और जिसके कारण एनबीए ने चैनल पर एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया..रजत शर्मा ने ऐसा किए जाने पर एनबीए को गैरजरूरी, अविश्वसनीय और टीवी टुडे की जागीर बताया, अब वही रजत शर्मा इस एनबीए के प्रेसिडेंट है..वो इस हैसियत से टेलीविजन कंटेंट को बेहतर करने के लिए प्रेस रिलीज जारी करेंगे..देश के न्यूज चैनलों को नसीहतें देंगे कि क्या प्रसारित करना राष्ट्रहित में है, क्या नहीं..

इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ उसी रजत शर्मा को न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन का प्रेसिडेंट बनाया गया है जिन्होंने साल 2008 में मुंबई बम धमाका मामले एनीबीए की ओर से एक लाख का जुर्माना लगाए जाने के बाद इस संगठन को गैरजरूरी और मनमानी करनेवाला करार दिया था और इंडिया टीवी को इससे अलग कर लिया था. हुआ यों था कि 26/11 के मुंबई हमले के दौरान इंडिया टीवी ने पाकिस्तान मूल की फरहाना अली जो कि आतंकवादी मामलों की जानकार हैं और सेंट्रल इन्टलीजेंस एजेंसी, यूएसए से जुड़ी रही हैं, उन्हें चैनल ने आतंकवादी मामलों के विशेषज्ञ के बजाय जासूस करार दे दिया जिसका आशय था कि वो आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है. इंडिया टीवी ने ये इंटरव्यू रॉयटर से बिना क्रेडिट दिए प्रसारित किया था और जिसमे फरहाना अली की छवि पूरी तरह डैमेज कर दी थी.

इस बात की शिकायत फरहाना अली ने एनबीए से की और उसके बाद इस संगठन ने एक लाख रुपये का जुर्माना और रात के आठ से नौ के बीच लगातार पांच दिनों तक खेद की अलग से पट्टी चलानी थी..लेकिन चैनल ने ऐसा करने के बजाय एनबीए को टीवी टुडे नेटवर्क की जागीर बताते हुए खुद को इससे 10 अप्रैल 2009 को अलग कर लिया. बाद में 17 जुलाई 2009 को इंडिया टीवी ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए दोबारा से सदस्यता लेने की घोषणा की..इस शर्त के साथ इंडिया टीवी और रजत शर्मा वापस गए कि चैनल के तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी को प्रमुख संपादक की श्रेणी में रखा जाए और रजत शर्मा को स्थायी सदस्य के रूप में स्वीकार किया जाए. एनबीए ने ये मांगे मान ली और इंडिया टीवी की छाती चौडी रह गई.

वैसे तो अपने गठन के बाद से एनबीएन ने जिस तरह के फैलले दिए हैं और जैसी हरकतें की हैं, उस हिसाब से देखें तो रजत शर्मा का चेयरमैन होना हैरानी की बात नहीं है. ये आज न कल होना ही था..लेकिन ऐसे समय में जबकि उनका चैनल और स्वयं वो खुद भी मौजूदा सरकार के बजाय उनके प्रधान सेवक के भक्त बन गए हैं… दो चीजें तो बेहद स्षप्ट और अघोषित ही सही लेकिन तय है- एक तो ये कि एनबीए के चेयरमैन की हैसियत से अब वो इस भक्ति को खुल्लाखेल फरुर्खाबादी बनाने में सक्रिय होंगे. दूसरा किसी भी चैनल या कार्यक्रम को लेकर सवाल नहीं किए जाएंगे जो कि सरकार के पक्ष में किए जाने के बावजूद पत्रकारिता के मानदंड को ध्वस्त करते हों और उन चैनलों और खबरों को कसने की पूरजोर कोशिश होगी जो मोदी सरकार के खिलाफ जाते हैं..कुल मिलाकर आप चाहें तो एनबीए की भूमिका आनेवाले समय में उन चैनलों के लिए सरकारी नियंत्रण जैसी होगी जो मोदी सरकार की गतिविधियों से असहमत होते हैं..वहीं उन चैनलों के लिए आश्वस्त करेंगे कि आप उनके नाम की चाहे जितनी उंची सुर चाहो, लगा सकते हो.. रहा मामला इंडिया टीवी की एंकर तनु शर्मा द्वारा एफआइआर करके चैनल पर उत्पीड़न का मामला दर्ज किए जाने का तो एबीए जैसी संस्था इस तरह की नैतिकता को कब मानता आया है जो इंडिया टीवी मामले में अलग से माने..

मूल खबर :

रजत शर्मा बने न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष

युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.

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गलती राजदीप सरदेसाई की है, खुद पहले गाली दी और खुद पहले हमला किया (देखें नया वीडियो)

Yashwant Singh : इतना बड़ा फ्रॉड निकलेगा राजदीप सरदेसाई, मुझे अंदाजा नहीं था. नया वीडियो साबित कर रहा है कि पहले गाली राजदीप सरदेसाई ने दी और पहले हमला भी राजदीप सरदेसाई ने किया. लेकिन कांग्रेसी और अंबानी परस्त इस पत्रकार ने घटनाक्रम के वीडियो को अपने हिसाब से संपादित कर केवल वो हिस्सा रिलीज कराया जिसमें उन (राजदीप) पर एनआरआई हमला करते हुए दिख रहा है. इसे देखकर मुझे भी लगा कि किसी पत्रकार पर कोई कैसे भला हमला कर सकता है, वो भी अमेरिका जैसी जगह में. पर अब जब दूसरा पक्ष सामने आ रहा है, पूरा वीडियो सामने आ रहा है तो पता चल रहा है कि राजदीप ने खुद सब तमाशा क्रिएट किया, गाली-हमले की शुरुआत करके.

इस प्रकरण को वैचारिक चश्मे से देखने वालों को उनका चश्मा मुबारक. न मुझे कभी संघ से प्रेम रहा है और न मोदी से. न मुझे अब वामपंथ से प्रेम है और न ही कांग्रेस परस्त क्रांतिकारिता से. इसलिए मैं कह सकता हूं कि राजदीप सरदेसाई ने खुद को टीआरपी दिलाने, खुद को ट्विटर पर ट्रेंड कराने, खुद को कांग्रेस की नजरों में चढ़ाने के लिए ये सब हरकत की होगी. सुब्रमण्य स्वामी ने सब कुछ विस्तार से सामने रख दिया है. इसे http://goo.gl/2El989 पढ़-देख सकते हैं. राजदीप अपनी चाल में कामयाब भी रहे. मोदी की अरबों रुपये वाली पीआर मायाजाल में सेंध लगा गए और ट्विटर पर ट्रेंड करने लगे, और मोदी की ट्रेंडिंग न्यूज से होड़ लेने लगे. एक नहीं बल्कि दो-दो हैश टैग ट्रेंड करने लगा, एक पक्ष में एक विपक्ष में. देखते ही देखते एक खेमा राजदीप को हीरो मानने लगा और उन पर कथित हमले को मीडिया पर, अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला मानने लगा और मोदी-संघ को गरियाने लगा. मोदी और संघ परस्त खेमा राजदीप पर हमले को उचित बताने लगा और राजदीप के कांग्रेसी अतीत व मोदी विरोधी अतीत का हवाला देने लगा.

इन दोनों छोरों की सरगर्मी चल ही रही थी कि असली सच्चाई सामने आई. राजदीप किस तरह गाली दे रहे हैं और जवाबी गाली सुन रहे हैं, राजदीप किस तरह हमला कर रहे हैं और जवाबी हमला पा रहे हैं, इसका वीडियो सामने आ गया. इस लिंक http://goo.gl/7lPcEp पर क्लिक करके वीडियो देख सकते हैं. इसे देखने के बाद अंबानी के इशारे पर सैकड़ों मीडियाकर्मियों की नौकरी खाने वाले राजदीप से सिर्फ घृणा ही की जा सकती है. राजदीप का काम किसी राजनेता जैसा है जो अपने फायदे के लिए उल्टा-सीधा करके जनमत को पोलराइज करता है. अगर राजदीप को राजनीति ही करनी है तो उन्हें पत्रकारिता छोड़कर सीधे कांग्रेस का दामन थाम लेना चाहिए और मैदान में उतर जाना चाहिए. एमजे अकबर ने भाजपा का दामन थामा, उसी तरह राजदीप को कांग्रेस वाला हो जाना चाहिए. संसद घूस कांड के स्टिंग को हजम कर जाने वाले राजदीप के पाप कम नहीं हैं.

विचारधारा के चश्मे से चीजों को देखने वालों के लिए सब कुछ आग्रह-दुराग्रह के हिसाब से गलत-सही होता है. इसीलिए अब भी कई लोग राजदीप पर हमले की निंदा कर रहे हैं. मैं अपने पुराने वक्तव्य को वापस लेता हूं. अब मैं कहूंगा कि राजदीप सरदेसाई ने जो हरकत की है वह परम निंदनीय है. ऐसे अपराध को अंजाम देने वाले राजदीप को टीवी टुडे ग्रुप से मुक्त हो जाना चाहिए या कर दिया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने पत्रकारिता की स्वस्थ और गंभीर परंपरा को दागदार किया है. उनके जैसे वरिष्ठ पत्रकार से ये कतई अपेक्षा नहीं की जाती कि वे किसी को गाली देंगे और फिर उस पर हमला करेंगे. इस प्रकरण से संबंधित अन्य खबरों के लिए इन लिंक पर क्लिक कर सकते हैं…

http://goo.gl/qe2moy

http://goo.gl/jdwJo2

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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न्यूयार्क में राजदीप सरदेसाई को सरेआम थप्पड़ मारा, मीडिया जगत स्तब्ध

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अंबानी के दलाल और पत्रकारों की नौकरी खाने वाले राजदीप की ताज़ा गुंडई के दीदार करें

 

 

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राजदीप सरदेसाई टीवी टुडे समूह के साथ जुड़े, पढ़िए अरुण पुरी का वेलकम लेटर

Dear all,

I am pleased to welcome Rajdeep Sardesai to the India Today Group. He will join us in the capacity of Consulting Editor. Rajdeep needs no introduction: he has been an asset to whichever team he has belonged to, including the cricketing ones. Oxford and St. Xavier’s educated, Rajdeep started his television career in 1994 and was a founding member of NDTV and, subsequently, CNN-IBN. Prior to TV, he worked with TOI for 6 years and was the city editor of its Mumbai edition. Rajdeep has served as the Editor-in-Chief of IBN18 Network, including CNN-IBN, IBN-7 and IBN-Lokmat for the last 9 years.

He has just finished his first book based on the historic 2014 elections; its release is much awaited. Rajdeep has won several national and international awards for journalism, including the Padma Shri in 2008. As a start, Rajdeep will be doing a marquee show for Headlines Today and contributing to the revamp of the Channel and its alignment with digital. Rajdeep, welcome. Great to have you with us. I know you will hit the ball out of the park for Team India Today. All the best in your new innings.

Aroon Purie

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