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सुख-दुख

तो क्या अब कपिल शर्मा की बारी है!

आलोक प्रियदर्शी-

भारतीय समाज स्त्रियों के सम्मान के बारे बड़ी बड़ी बातें करता है। स्त्री को देवी का रूप माना गया है। पत्नी को आधा अंग का दर्जा दिया गया है। उसे अर्द्धांगिनी कहा गया है। लेकिन वास्तविकता क्या है?

वास्तविकता ये है कि कपिल शर्मा नाम का एक शो बनता है, जिसका आधार ही स्त्री अपमान, पत्नी अपमान है और विडंबना देखिए, भारतीय समाज ने स्त्री अपमान के उस नाटक को सुपर डुपर हिट करवा के छोड़ा है।

अब विदेशियों की महिलाओं के प्रति सोच देखिए..! कल ऑस्कर अवार्ड के दौरान एक एंकर ने विश्वप्रसिद्ध अभिनेता विल स्मिथ की पत्नी पर हास्य बाण छोड़े, जो ह्र्दय को चीरने वाले थे, स्त्री को अपमानित करने वाले थे। एंकर के शब्द विल स्मिथ की पत्नी को अपमानित कर रहे थे।

विल स्मिथ ने वहीं उसी शो में उस एंकर को कूट दिया। खींच के थप्पड़ दे मारा। क्या किसी भारतीय अभिनेता से आप उम्मीद कर सकते हैं कि वह कपिल शर्मा की बदतमीजी पर उसे थप्पड़ मार सकें? दरअसल धर्म और अधर्म का निर्णय जिस दिन होगा, हम सबके सिर झुके हुए मिलेंगे।

अणुशक्ति सिंह-

आप तो केवल मज़ाक़ करते हैं और लोग इस मज़ाक़ से त्रस्त होकर आत्महत्या कर लेते हैं। इस हिंसा को किस श्रेणी में रखा जाएगा?

विल स्मिथ को थप्पड़ नहीं मारना चाहिए था पर यह बात ज़ोर और बहुत ज़ोर से सुनी जाए कि क्रिस रॉक केवल मज़ाक़ नहीं कर रहा था। उसकी बातें विल की क्रिया से कम हिंसक नहीं थीं।

शाब्दिक हिंसा भी हिंसा होती है।यह कई ज़िंदगी ले लेती है।

(जो आपके लिए मज़ाक़ भर है, किसी की ख़ातिर ज़िंदगी भर की अवमानना का सबब बन सकता है)

आप किसी के होठों का मज़ाक़ उड़ाने पर हँसते हैं। किसी की आँखों पर तो किसी के मोटापे पर… किसी की छोटी हाइट तो किसी का गंजापन मज़ाक़ का विषय है।

सच यह है कि इनमें से कुछ भी मज़ाक़ की बात नहीं है। क्रिस रॉक को लगे विल स्मिथ के थप्पड़ ने वही तय किया। हाँ हिंसा नहीं होनी चाहिए थी पर… यह ‘पर’ हमेशा छूट जाता है।

वैसे क्रिस वही घटिया स्टैंड अप कॉमेडियन हैं जिन्होंने रिहाना के लिए घटिया सेक्सिट जोक कहा था और महिलाओं के द्वारा दायर यौन शोषण शिकायतों का भी मज़ाक़ उड़ाया था।

क्रिस रॉक के भारतीय वर्ज़न का नाम कपिल शर्मा है। मैं इसे पसंद करने वाले लोगों को ना जाने क्यों जज करने लगती हूँ…

शम्भूनाथ शुक्ला-

अपने देश में कपिल शर्मा ने फूहड़ कॉमेडी की शुरुआत की। ख़ासकर किसी की भिन्न शारीरिक बनावट का ख़ूब मज़ाक़ उड़ाया। आज भी ऐसी हरकतें करता है। महिलाओं के बारे में ख़ूब टुच्ची बातें करता है पर कोई कुछ नहीं बोलता। विल स्मिथ ने ऐसे ही एक कॉमेडियन क्रिस रॉक्स को थप्पड़ धर कर इसका जवाब दिया है। लेकिन यहाँ तो सिद्दू से लेकर कई राजनेता ऐसी हरकतें करते हैं और सब सुनते हैं। शायद इसलिए भी कि न तो यहाँ के लोगों में आत्म सम्मान है न अपनी पत्नियों से आत्मीयता है न समाज में ख़ुद से भिन्न शारीरिक बनावट अथवा किसी बीमारी से शरीर में जो बदलाव आता है, उसे आदर की निगाह से देखा जाता है।

सचिन श्रीवास्तव-

घटना: एक मूर्ख कॉमेडियन क्रिस रॉक आस्कर के मंच से घटिया जोक मारता है। पुरस्कृत सर्वश्रेष्ठ अभिनेता विल स्मिथ पहले हंसते हैं। फिर करीब बैठी पत्नी की ओर देखते हैं। उसके चेहरे की तनी त्योरियों में अपनी हंसी को तौलते हैं और फिर विल मंच पर पहुंचकर क्रिस रॉक को थप्पड़ जड़ देते हैं।

दर्शक सन्न। दुनिया हैरान। और फिर कमेंट और पक्ष विपक्ष में खड़े होने का सिलसिला।

क्या सच में यह इतना ही सादा, सीधा और उसी क्रम में भद्दा, बर्बर और आतंकी है।

क्रिस रॉक की आलोचना होनी चाहिए। नारीवाद से लेकर सामान्य कला सौंदर्य तक की सामान्य समझ रखने वाला कोई भी व्यक्ति क्रिस रॉक की ओर खड़ा नहीं हो सकता।

लेकिन विल? उनके पक्ष में क्यों खड़ा हुआ जाए।

थप्पड़ मारने का हक किसने दिया विल को? क्या यह उनका मर्दवादी अहंकार है? क्या हम हर गलत पर इसी तरह थप्पड़ जड़ने के लिए तत्पर हैं और हैं, तो क्या उसे सही भी मानते हैं।
आप कहेंगे कि यह जल्दबाद, त्वरित प्रतिक्रिया है?
तो क्या त्वरित प्रतिक्रियाएं सही ही होती हैं। आनर किलिंग से लेकर मारपीट और रोजमर्रा बहसों से लेकर संस्थागत भ्रष्टाचार तक पर आप ऐसे ही प्रतिक्रिया देंगे?
विल की गलती में अपने आप को मत छिपाइये? आप हिंसक हैं। यह समाज हिंसक है। आप ताकत से हर मसले को सुलझाना चाहते हैं। आपके तर्क खत्म हो चुके हैं, तब आप ताकत का इस्तेमाल करते हैं।
यकीन मानिये आप बीमार हैं। क्रिस रॉक जितना बीमार शख्स है, उससे कम नहीं हैं आप।
आप जल्द स्वस्थ हों।

दूरी बनाइये। त्वरित प्रतिक्रियाओं के खिलाफ सोच समझकर अपना पक्ष चुनिये। उम्मीद है सही नतीजे पर पहुंचेंगे।

संजय झा-

ऑस्कर समारोह में एक होस्ट ने विल स्मिथ की पत्नी के गंजेपन पर टिप्पणी कर दी। इसके बाद विल बुरी तरह भड़क गए और उसे घूँसा जड़ दिया। इसके बाद से कई लोग खासकर महिलाएं विल स्मिथ के इस कदम की खूब सराहना कर रही हैं। यह ठीक बात नहीं है। विरोध जताने के अन्य तरीके भी हो सकते हैं। हालांकि यह तरीका क्या हो इसे जानने में मेरी खूब दिलचस्पी है। क्योंकि मुझे रोज कोई न कोई काला, करिया, कालू कह जाता है। तो मैं क्या करूँ? सबको मुक्के मारता फिरूँ?

चंदन पांडेय-

खराब चुटकुलों पर न हँसना ही प्रतिकार है। पर्याप्त प्रतिकार।

विल स्मिथ पहले खुद उस वाहियात चुटकुले पर हँसता है और जब पत्नी की तरफ देखता है तब पाता है कि वह उस चुटकुले से नाखुश है। यानी खुद विल स्मिथ को नहीं पता कौन सा चुटकुला भला है और कौन सा बुरा? पत्नी की प्रतिक्रिया कॉमेडियन से अधिक विल स्मिथ को ऑफ गॉर्ड कर देती है और घबराकर वह कलाकार को थप्पड़ मार आता है।

इसमें विल स्मिथ उन लोगों से कहाँ अलग है जो मुन्नवर फारुखी या कुणाल कामरा को पीटने का मंसूबा पाले हुये हैं? कल को वे विल स्मिथ के प्रशंसक कैसे खुश होंगे जब भारतीय कलाकार फासिस्टों द्वारा प्रताड़ित किये जायेंगे?

विल स्मिथ में साहस होता तो वह एकडेमी यानी ऑस्कर अवार्ड वापस करता। वह सब वास्तविक इंतकाम होता है। ये क्या कि जिसको कमजोर देखा उसे थप्पड़ जड़ दिया।

अपडेट: विल स्मिथ ने थप्पड़ मारने की माफी मांग ली है। अगर थप्पड़ न मारा होता तो अभी तक क्रिस रोक्स अपने चुटकुले के लिये माफी मांग रहा होता।

पुष्प रंजन-

जब ऑस्कर जैसे मंच पर थप्पड़ मारने की घटना होती है. ये कैसा सभ्य समाज है?

क्रिस रॉक अमेरिकन कॉमेडियन है. विलियार्ड क्रिस्टोफर “विल” स्मिथ, जूनियर एक अमरीकी अभिनेता, फिल्म-निर्माता और रैपर हैं। ऑस्कर पुरस्कार समारोह मंच पर विल स्मिथ की पत्नी का मजाक जब कॉमेडियन क्रिस रॉक ने उड़ाया, तो विल स्मिथ ने उन्हें थप्पड़ जड़ दिया.

शुक्र मनाइये दोनों अफ्रीकी मूल के अमेरिकी नागरिक हैं. वरना थप्पड़ की इस घटना को रंगभेद का मुद्दा बनते देर नहीं लगती. रविवार को हुई इस अप्रिय दृश्य से सब अवाक थे. आयोजकों की भद्द उड़ी है. ऑस्कर अकादमी ने इसे बुरा माना है. देखते हैं, क्या कार्रवाई होती है.

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1 Comment

1 Comment

  1. रवीन्द्र नाथ कौशिक

    March 30, 2022 at 12:34 pm

    विल स्मिथ पर फिर पड़े ये लोग वाकई किसी मां की औलाद लगते हैं? हां, कपिल,कामरा और मुनव्वर फारूखी भी थप्पड़ खाने लायक ही हैं। अगर आपको विनोद करना नहीं आता तो पेट भरने को कोई और व्यवसाय करिये। विनोद एक बेहद गंभीर कला है जिसे हर कोई नहीं साध सकता

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