दैनिक भास्कर में नौकरी करने वाला शख्स वकालत कैसे कर सकता है, देखें ये पत्र

श्री सुधीर अग्रवाल जी, श्री गिरीश अग्रवाल जी, श्री पवन अग्रवाल जी,

आपको अवगत कराना है कि आपके विधि विभाग के काबिल अधिकारी श्री सचिन गुप्ता द्वारा संस्थान में नौकरी भी कर रहे हैं और वकालत भी कर रहे हैं। जिससे वो Dual Employment की श्रेणी में आते हैं। आपकी कम्पनी डीबी कॉर्प लि. / दैनिक भास्कर के प्रावधानों के अनुसार कोई भी कर्मचारी या अधिकारी Dual Employment में संस्थान में कार्य नहीं कर सकता है। श्री सचिन गुप्ता डीबी कॉर्प लि. / दैनिक भास्कर की तरफ से अधिकृत अधिकारी की हैसियत से विभिन्न न्यायालयों में वकालत नामा हस्ताक्षर करके दाखिल करते हैं। श्री सचिन गुप्ता के एनरोलमेंट सर्टिफिकेट एवं सर्टिफिकेट ऑफ़ प्रैक्टिस की प्रति संलग्न है जिसके अनुसार वो वकालत करते हैं।

एक वकील या तो वकालत कर सकता है या नौकरी कर सकता है। दोनों कार्य एक साथ नहीं कर सकता है। यदि नौकरी करता है तो उसको उसका प्रैक्टिस का लाइसेंस सस्पेंड करवाना होता है। जिसकी जानकारी कर्मचारी/अधिकारी को उसके संस्थान को भी देनी होती है। इसी के सम्बन्ध में विधि अधिकारी श्री विकास धारीवाल की श्री सचिन गुप्ता द्वारा HR हेड श्री मनोज मेहता के माध्यम से बार कॉउन्सिल चंडीगढ़ में शिकायत कराई गई थी।

श्री सचिन गुप्ता द्वारा यदि उनकी Bachelor of Law की डिग्री रेगुलर कोर्स से ली गई होगी तो उसके लिये भी उनके द्वारा संस्थान से लिखित अनुमति ली जनि चाहिये थी। आपके द्वारा डीबी कॉर्प लि. / दैनिक भास्कर में अधिकारियों हेतु नौकरी में दोहरे मापदंड अपनाये जा रहे हैं।

श्री सचिन गुप्ता द्वारा हर केस में कम्पनी की तरफ से उनका बोर्ड रेसोलुशन एवं वकालतनामा लगाया जाता था, परन्तु मेरे केस में श्री सचिन गुप्ता द्वारा खुद की अथॉरिटी न लगा के कंपनी की तरफ से HR विभाग से मिनाक्षी चौधरी को बोर्ड रेसोलुशन दिलाया गया है, जो कि मेरे समकक्ष ही कार्यरत हैं और नियमानुसार जाँच या बोर्ड रेसोलुशन उच्चस्थ अधिकारी का ही मान्य होता है। लेकिन श्री सचिन गुप्ता बिना ज्ञान और अनुभव के अक्सर इसी तरह के तुगलकी फरमान जारी करते रहते हैं। क्योकि उन्हें विवाद ख़तम करने की जगह विवाद बढ़ाने में विश्वास है। ये मेरी ईमानदारी एवं काबिलियत का ही प्रमाण है कि श्री सचिन गुप्ता आज दिनांक तक मेरे विचाराधीन मुकदमे में न तो सामने आये और न ही आज तक मैनेजमेंट को पूर्व में लिखी गई मेरी किसी भी ईमेल का उन्होंने जवाब दिया है। मेरी पूर्व में लिखी गई सभी ईमेल में लिखे गये सभी तथ्य आज दिनांक तक निर्विरोध साबित हैं।

आपको यह भी अवगत करना है कि लगभग 10 साल मैंने श्री सचिन गुप्ता के साथ काम किया आप या तो मेरा सम्पूर्ण ईमेल रिकॉर्ड चेक कर लें या इनका चेक कर लें या अन्य राज्यों में विधि विभाग में कार्यरत अधिकारियों का या विधि अधिकारी का कार्य कर रहे HR विभाग के अधिकारी का ईमेल रिकॉर्ड चेक कर लें, इनके द्वारा मेरे नौकरी में रहने तक किसी भी केस में ईमेल पर अगली तारीख लेने के अलावा कोई भी केस लड़ने के आधार/तरीके बताये गये हों। यदि इनको किसी भी HR या विधि विभाग के द्वारा केस को लड़ने हेतु यदि दिशा निर्देश मांगे गये होते थे तो ये अधिकांश ईमेल का जवाब ही नहीं देते थे या फिर केवल इतना लिख देते थे कि “Take a long adjournment and send me brief note” और ब्रीफ नोट आने के बाद फिर से शांति हो जाती थी।

यह सब इसलिये होता है क्योकि आपके ग्रुप लीगल हैड श्री सचिन गुप्ता पद पर तो 2011 से काबिज हैं लेकिन कानून की डिग्री उन्होंने वर्ष 2017 में बिना क्लास अटेंड किये प्राप्त की है। श्री सचिन गुप्ता द्वारा आज दिनांक तक किसी भी राज्य में लेबर कोर्ट अटेंड नहीं की गई है, आप चाहें तो इनके साथ जाकर खुद देख सकते है कि ये आपको लेबर कोर्ट तक पंहुचा पाते है या नहीं।

कम्पनी द्वारा जो भी मुकदमे जीते गए हैं वो सभी उस राज्य के विधि विभाग या HR विभाग के अधिकारी एवं वहां के लोकल वकील की मेहनत से संभव हुआ है न कि श्री सचिन गुप्ता के प्रयासों द्वारा। क्योकि श्री सचिन गुप्ता हाल ही में 2 – 3 साल पहले ही कागजों में वकील बने हैं। ऐसे में कंपनी के लिये काम करने वाले योग्य एवं अनुभवी वकीलों से इनकी कभी भी बनी ही नहीं।जिनको कम्पनी की तरफ से केसेस से हटा दिया गया एवं मै और विकास धारीवाल भी कम्पनी हित में काम करने के कारण ही कम्पनी से बहार किये गये।

क्योकि श्री सचिन गुप्ता हमेशा ये कहा करते थे कि “केसेस हमेशा चलते रहने चाहिये, अगर केसेस खत्म हो जायेंगे तो कम्पनी में हमारी जरुरत भी खत्म हो जायेगी।” और इसी वजह से केस करने वाले कर्मचारियों से समझौते को बुलाकर बदतमीजी व गाली गलौज कर उन्हें आक्रोशित किया जाता रहा है ताकि केसेस बढ़ते रहें। इनके काले कारनामों की मय सबूत जानकारी अगली ईमेल में साझा करूँगा।

सादर
जितेन्द्र कुमार सिंह
एम्प्लाई कोड 16698
उप प्रबंधक विधि
विधि विभाग दिल्ली
दैनिक भास्कर/डीबी कॉर्प लि.
09313422277

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Comments on “दैनिक भास्कर में नौकरी करने वाला शख्स वकालत कैसे कर सकता है, देखें ये पत्र

  • धर्मेन्द्र प्रताप सिंह says:

    आपके एक-एक शब्द से सहमत हूं, क्योंकि मुंबई में इसका चूतियापा मैं स्वयं 12 फरवरी, 2018 को देख चुका हूं… बीकेसी पुलिस स्टेशन में इसने मेरे खिलाफ एनसी भी की, क्योंकि इसका चूतियापा देख कर मुझे पता चल गया था कि कुछ देर और भी बात हुई तो मारपीट हो जाएगी ! आस्तीन चढ़ाते हुए यह भंड़वा ऐसे बात कर रहा था, मानो मैनेजमेंट की नाजायज औलाद हो !!

    Reply
  • This not first case in Rajasthan Patrika south also employ doing the same yes difference is this that in spite of Govt. dept. he doing in Print media and getting the salary form both paper like Patrika as well as Local paper even in south every local employs doing side business or job in the kind mercy of local boss.

    Reply

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