मजीठिया वेज बोर्ड : बांबे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फिर से अखबारों की जांच करने का आदेश दिया

छह सप्ताह में सौंपनी होगी क्रियान्यवन रिपोर्ट… महाराष्ट्र के समाचार पत्र कर्मियों के लिये एक बड़ी खबर आ रही है। बांबे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के लेबर कमिश्नर को स्पष्ट आदेश दिया है कि जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ज मामले में फिर से राज्य के सभी समाचार पत्रों और न्यूज एजेंसियों की 6 सप्ताह के अंदर जांच की जाये और पूरी रिपोर्ट एफिडेविट के साथ सौंपी जाए। इसके साथ ही स्पेशल स्क्वायड बनाया जाए। उधर बांबे हाईकोर्ट को महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त द्वारा सूचित किया गया कि वह राज्य में समाचार पत्र और समाचार एजेंसी प्रतिष्ठानों में मजीठिया वेज बोर्ड अवार्ड के कार्यान्वयन का एक नया सर्वेक्षण करेगा।

बृहन्मुंबई यूनियन आफ जर्नलिस्ट (बीयूजे) द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच जस्टिस अकिल कुरैशी और जस्टिस एस.एस. कथावला ने कहा कि सर्वेक्षण छह सप्ताह के भीतर पूरा किया जाना चाहिए और एक हलफनामे के साथ रिपोर्ट अदालत को सौंपी जानी चाहिए।

इसके अलावा सरकारी वकील ने अदालत को सूचित किया कि श्रम विभाग ने राज्य भर के सभी समाचार पत्रों और समाचार एजेंसी कार्यालयों का निरीक्षण करने के लिए पांच दस्तों का गठन किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई बृहन्मुंबई यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स (बीयूजे) की तरफ से पेश हुए। बीयूजे के अध्यक्ष एम.जे. पांडे ने इस खबर की पुष्टि करते हुये कहा कि राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले की फिर से जांच के लिये उन्होने पांच स्क्वायड बनाया है और यह सभी समाचार पत्र और न्यूज एजेंसियों की जांच करेंगी। इस जांच में स्थायी और ठेका कर्मचारियों को भी जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ और एरियर मिला है या नहीं इसकी भी जांच का आदेश दिया गया है।

मुंबई से वरिष्ठ पत्रकार और मजीठिया क्रांतिकारी शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क- 9322411335

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Comments on “मजीठिया वेज बोर्ड : बांबे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फिर से अखबारों की जांच करने का आदेश दिया

  • Abhay Panchpatkar says:

    As per Justice Majithiya wage board those who are come under above wage board they are not getting as per recommendations of board. Their basic payment was not settled as per their designations and class of newspaper. Morever the worst part of it is that the yearly increament is locked since ther are elligible for the wage board. Anyway it should be seettled down wothin 6 months time.

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  • M. Shakil Anjum says:

    Atiyant khush ki bat hai ki court ne sngiyan liya hai. koshishe kabhi bekar nhi jati hain.mehnat zarur rang lati hai

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