आज़म खान जौहर शोध संस्थान मामले में हाईकोर्ट में पीआईएल

लखनऊ : सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने आज अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आज़म खान द्वारा बिना किसी नियम, शर्त और प्रक्रिया के राज्य सरकार के अल्प संख्यक विभाग के मौलाना जौहर अली शोध संस्थान रामपुर की बेशकीमती भूमि और भवन को स्वयं की निजी संस्था मौलाना जौहर अली ट्रस्ट को मात्र 100 रुपये वार्षिक लीज पर दिए जाने के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में पीआईएल दायर किया है.

पीआईएल में कहा गया है कि आज़म खान ने निजी लोगों को सरकारी भूमि दिए जाने के सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सौरभ गांगुली, सुभाष घई और कुशाभाई ठाकरे ट्रस्ट मामलों में प्रतिपादित सिद्धांतों को तार-तार करते हुए बीच शहर में करीब 1500 वर्गगज जमीन और उस पर 9.83 करोड़ में बने सरकारी भवन को अपनी निजी संस्था को दिए जाने का फैसला करा लिया है, जो पद का सीधा दुरुपयोग है.

डॉ ठाकुर ने कहा है कि तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ देवेश चतुर्वेदी ने इसे हितों का टकराव बताते हुए यह सरकारी भूमि और भवन विभागीय मंत्री की निजी संस्था को देने का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें विभाग से हटा दिया गया और सरकारी मशीनरी पर दबाव डाल कर यह विधिविरुद्ध फैसला कराया गया. अतः उन्होंने याचिका में इस आवंटन को निरस्त करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही किये जाने की मांग की है.

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें –  

PIL in Azam Khan Jauhar Shodh Sansthan case  

Social activist Dr Nutan Thakur today filed a PIL in Lucknow bench of Allahabad High Court against Minorities welfare minister Azam Khan getting allotted government land and building of Maulana Jauhar Ali Shodh Sansthan at Rampur to his private Maulana Jauhar Ali Trust at abysmal annual lease rent of Rs. 100, in blatant disregard to the rules and regulations, without following the mandatory transparent process.

The PIL says that Azam Khan pressurized the government authorities to grant 1500 sq yard government land and building built at the cost of Rs. 9.83 crores to his private trust, while completely ignoring the law formulated by the Supreme Court in identical matters of land allotment to Sourav Ganguli, Subhash Ghai and Kushabhai Thakare memorial Trust.

Dr Thakur said that the then Principal Secretary Dr Devesh Chaturvedi had strongly opposed this move calling it a case of direct conflict of interest after which he was removed from the post and the government machinery was forced to get this illegal order passed.

Hence, in the petition she has sought quashing of the allotment order, along with action against guilty officials.

सामाजिक कार्यकर्ता डा. नूतन ठाकुर का संपर्क नंबर 094155-34525

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