अंग्रेजी पत्रकारिता की गरिमा को सबसे ज्यादा नुकसान चंदन मित्रा व स्वपन दासगुप्ता जैसे पत्रकारों ने पहुंचाई!

जितेंद्र कुमार-

चंदन मित्रा का गुजरना…बीजेपी के पूर्व सांसद व वर्तमान में तृणमुल कांग्रेस के नेता व पॉयनियर अखबार के मालिक-संपादक चंदन मित्रा का निधन हो गया.

चंदन मित्रा कुछ उन ‘बड़े बौद्धिकों’ में शामिल थे जिसने बीजेपी को पढ़े-लिखे वर्गों में वैधता दिलाई थी. उनके बीजेपी के पक्ष में खुलकर आने से पहले तक उन तबकों को बीजेपी का समर्थन करने में (खुले तौर पर) झिझक होती रही थी. और वह दौर निश्चित रूप से मंडल का दौर था.

वह पहला व्यक्ति था जिसने टाइम्स ऑफ इंडिया में नौकरी करते हुए संपादकीय पेज पर मंडल आयोग के अनुशंसा के खिलाफ अनगिनत लेख लिखा था.अपने एक लेख में तो उसने वी पी सिंह को ‘कैंसर ऑफ इंडियन सोसाइटी’ (भारतीय समाज का कैंसर) कहकर संबोधित किया था.

चंदन मित्रा के बीजेपी के समर्थन में आने से तथाकथित भारतीय सवर्ण बौद्धिक समाज तेजी से बीजेपी की तरफ भागे. इसके बाद तो सवर्ण पढ़े-लिखे लोग खुलकर बीजेपी का समर्थन करने लगे. चंदन मित्रा के साथ-साथ स्वप्न दासगुप्ता जैसे अनगिनत सवर्ण बौद्धिक भी उसी समय बीजेपी से जुड़े.

अंग्रेजी पत्रकारिता की गरिमा को भी सबसे ज्यादा नुकसान चंदन मित्रा व स्वपन दासगुप्ता जैसे ‘पढ़े-लिखे’ पत्रकारों ने ही पहुंचायी जब वे दोनों सार्वजनिक रूप से जहां-तहां लालकृष्ण आडवाणी के पांव छूने लगे!

कुल मिलाकर चंदन मित्रा जैसे लोगों ने भारतीय संविधान के प्रीएम्बल्स की गरिमा को नुकसान पहुंचाने में महती भूमिका निभाई है.


दीपक शर्मा-

इतिहास, राजनीति और साहित्य की बहतरीन समझ रखने वाले जाने माने सम्पादक और राज्य सभा सांसद चंदन मित्रा का यूं अलविदा कहना बेहद दुखद। उन्हें गुस्से में, अवसाद में कभी नहीं देखा। हमेशा उनके चेहरे पर विनम्र स्माइल रही।

Statesman, Hindustan Times, Times of India The Pioneer के सम्पादन के अलावा चंदन मित्रा जी ने राज्य सभा में अपने डिबेट से राजनीति को भी प्रभावित किया। सेंट स्टीफन कालेज से पढ़ाई करने वाले मित्रा साहब को आक्सफोर्ड से डाक्टरेट की उपाधी मिली थी ।

वे कुछ समय से बिमार थे और बीते महीने उनकी तबीयत ज्यादा ही बिगड़ती चली गई। वे पडगांवकर, एमजे अकबर, नाईनन की कतार में खड़े सम्पादक थे। ओम शांति !

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप परBWG7

आपसे सहयोग की अपेक्षा भी है… भड़ास4मीडिया के संचालन हेतु हर वर्ष हम लोग अपने पाठकों के पास जाते हैं. साल भर के सर्वर आदि के खर्च के लिए हम उनसे यथोचित आर्थिक मदद की अपील करते हैं. इस साल भी ये कर्मकांड करना पड़ेगा. आप अगर भड़ास के पाठक हैं तो आप जरूर कुछ न कुछ सहयोग दें. जैसे अखबार पढ़ने के लिए हर माह पैसे देने होते हैं, टीवी देखने के लिए हर माह रिचार्ज कराना होता है उसी तरह अच्छी न्यूज वेबसाइट को पढ़ने के लिए भी अर्थदान करना चाहिए. याद रखें, भड़ास इसलिए जनपक्षधर है क्योंकि इसका संचालन दलालों, धंधेबाजों, सेठों, नेताओं, अफसरों के काले पैसे से नहीं होता है. ये मोर्चा केवल और केवल जनता के पैसे से चलता है. इसलिए यज्ञ में अपने हिस्से की आहुति देवें. भड़ास का एकाउंट नंबर, गूगल पे, पेटीएम आदि के डिटेल इस लिंक में हैं- https://www.bhadas4media.com/support/

भड़ास का Whatsapp नंबर- 7678515849

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

code