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अमर उजाला और हिंदुस्तान ने रसूखदार चिकित्सक के आगे टेके घुटने

हिंदी दैनिक हिंदुस्तान की टैगलाइन है ‘तरक्की को चाहिए नया नजरिया’ और अमर उजाला कहता है- ‘ताकि सच जिन्दा रहे’। लेकिन उत्तर प्रदेश के जनपद चंदौली में दोनों ही अखबार अपने स्लोगन को ठेंगे पर रखकर कार्य कर रहे हैं। जिले में मुगलसराय स्थित पराहुपर में अर्बन हेल्थ केअर सेंटर में सोमवार को डाक्टर के खिलाफ शिकायतों की जांच करने पहुंची संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक के सामने ही आरोपी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने शिकायतकर्ता की पिटाई कर दी।

हिंदी दैनिक हिंदुस्तान की टैगलाइन है ‘तरक्की को चाहिए नया नजरिया’ और अमर उजाला कहता है- ‘ताकि सच जिन्दा रहे’। लेकिन उत्तर प्रदेश के जनपद चंदौली में दोनों ही अखबार अपने स्लोगन को ठेंगे पर रखकर कार्य कर रहे हैं। जिले में मुगलसराय स्थित पराहुपर में अर्बन हेल्थ केअर सेंटर में सोमवार को डाक्टर के खिलाफ शिकायतों की जांच करने पहुंची संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक के सामने ही आरोपी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने शिकायतकर्ता की पिटाई कर दी।

इस पूरे प्रकरण को अमर उजाला और हिंदुस्तान अखबार के ब्यूरो प्रभारियों ने न सिर्फ पलट दिया बल्कि आरोपी डाक्टर का बेशर्मी से बचाव किया। दैनिक जागरण और जनसंदेश टाइम्स ने चिकित्सक के कुकृत्यों को उजागर किया। दरअसल प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की दोनों अखबारों हिंदुस्तान और अमर उजाला के ब्यूरो प्रभारियों से खूब छनती है। आरोपी चिकित्सक अखबार और जिला प्रशासन में सेटिंग गेटिंग के जरिये जिले में अपना रसूख कायम रखे हुए। पराहुपुर में स्थित सरकारी अस्पताल में चिकित्सक की तैनाती संविदा पर लगभग एक वर्ष पूर्व हुई थी। लेकिन अपना अल्ट्रा साउंड  सेंटर चलाने के कारण यह चिकित्सक अपनी ड्यूटी पर बहुत ही कम आता था जिसका नतीजा यह हुआ कि वहां के कर्मचारी भी लापरवाह हो गए।

क्षेत्र के मरीज अस्पताल के गेट पर ताला लटका देख वापस लौट जाते थे। इस पर पराहुपुर निवासी व सामाजिक कार्यकर्ता राजीव गुप्ता ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से की। सोमवार को ज्वाइंट डायरेक्टर हेल्थ वाराणसी मंडल डॉ मनीषा सिंह जांच के लिए अस्पताल आ गयीं और राजीव गुप्ता भी वहां पहुँच कर उनसे वार्ता करने लगे। तभी डॉ मनीष चौधरी आये और जांच अधिकारी के सामने ही राजीव गुप्ता से उलझ कर मारपीट शुरू कर दी।

सूचना के बाद कई मीडियाकर्मी खबर को कवर करने पहुंचे। इस दौरान डॉ मनीषा सिंह ने चिकित्सक द्वारा मारपीट किए जाने की पुष्टि मीडियाकर्मियों से की। लेकिन अमर उजाला और हिंदुस्तान अखबारों के ब्यूरो चीफों ने मुख्य घटना को ही उलट दिया। दैनिक जागरण और जनसंदेश ने खबर की नब्ज को समझते हुए वैसा ही प्रकाशित किया जैसी घटना घटी थी। आखिर ऐसी कौन सी मज़बूरी जो इन्होंने खबर को उलट दिया? पीड़ित इसकी लिखित शिकायत प्रेस काउंसिल को भेजने की तैयारी में है। इस प्रकरण को चारों अखबारों ने किस तरह कवर किया है, यह देखकर आप खुद तय कर सकते हैं कि कौन अखबार बिक गया और किसने सच सच पूरे घटनाक्रम को उजागर किया।

अखबारों में छपी खबरों को पढ़ने के लिए अगले पेज पर जाने हेतु नीचे क्लिक करें >

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1 Comment

1 Comment

  1. inkalaab

    March 22, 2016 at 2:31 pm

    yha bhi yhi hota h jnab kya kre

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