भारत के मीडिया घराने अब पत्रकारों की बजाय मैनेजरों के हाथों में हैं!

योगी आदित्‍यनाथ ने बजरंग बली को लोकदेवता, वनवासी, गिरवासी, दलित और वंचित भी बताया, लेकिन मीडिया को बेचे जाने लायक ‘माल’ केवल ‘दलित’ शब्‍द में नजर आया…. इसके बाद शुरू हो गई पीसीआर से इस खबर और शब्‍द पर ‘खेलने’ की तैयारी… लखनऊ। क्‍या भारत का शीर्ष मीडिया पत्रकारों की बजाय मैनेजरों के हाथ में …

रवीश कुमार ने पूछा- मीडिया क्यों सरकार से दलाली खा रहा है?

Ravish Kumar : नागरिक निहत्था होता जा रहा है…. राजस्थान के डॉक्टरों की हड़ताल की ख़बर पर देर से नज़र पड़ी। सरकार ने वादा पूरा नहीं किया है।हमने प्रयास भी किया कि किसी तरह से प्राइम टाइम का हिस्सा बना सकें। मगर हम सब ख़ुद ही अपने साथियों से बिछड़ने की उदासी से घिरे हुए थे। हर दूसरे दिन संसाधन कम होते जा रहे हैं। हम कम तो हुए ही हैं, ख़ाली भी हो गए हैं। साथियों को जाते देखना आसान नहीं था। वर्ना डॉक्टरों को इनबाक्स और व्हाट्स अप में इतने संदेश भेजने की ज़रूरत नहीं होती। आगरा से आलू किसान और दुग्ध उत्पादक भी इसी तरह परेशान हैं। दूध का दाम गिर गया है और आलू का मूल्य शून्य हो गया है। इन ख़बरों को न कर पाना गहरे अफसोस से भर देता है। कोई इंदौर से लगातार फोन कर रहा है।

बड़े मीडिया हाउसों के पास है बड़े कारपोरेट घरानों का निवेश और सरकार का समर्थन : सिद्धार्थ वरदराजन

DUJ SEMINAR ON ‘DEMOCRACY IN DANGER : UNETHICAL REPORTING / ATTACKS ON INDEPENDENT JOURNALISM AND JOURNALISTS’

In a sharp counter to the BJP Sangh Parivar’s campaign, Kerala Chief Minister Pinarayi Vijayan said the state has been targeted as it champions the values of secularism, socialism and democracy. He was speaking at a function organized by the Delhi Union of Journalists in the national capital on ‘Democracy in Danger : Unethical Reporting/ Attacks on Independent Journalism and Journalists’ on 15 October at Kerala House. The Chief Minister said slogans like ‘Love Jehad’ have been used to disrupt the state’s centuries old communal harmony but the RSS will not succeed in its game plan. He slammed several media houses for ferociously targeting Kerala and congratulated those journalists who are standing up for the truth despite pressure from employers.

बाबा की गुफा से आ रहे पैसों से अब तक मीडिया की आंख पर पट्टी बंधी हुई थी!

..पत्रकार कर रहे दो जून की रोटी का संघर्ष… लेकिन उनका दर्द किसी को नहीं दिख रहा… अगर न्यूज चैनलों के नाम ‘आया राम‘ और ‘गया राम‘ हो जाये और इनकी टैग लाइन भ्रष्टाचार, अनियमितता, ‘ब्लैक मेलिंग के बादशाह‘ या फिर ‘लूटने के लिए ही बैठे हैं’…. हो जाये तो आश्चर्य मत कीजियेगा… क्योंकि न्यूज़ चैनल इस रूप में सामने आने भी लगे हैं.. वो भी बिल्कुल कम कपड़ों के साथ, जिसमें उसका काला तन साफ नजर आ रहा है… कोई चैनल बीजेपी समर्थित तो कोई कांग्रेस, तो कोई बाबाओं की चरणों की धूल खाकर जिंदा है। सभी चैनल लगभग अपने उद्योगपति आकावों की जी हुजरी में लगे हैं।

दो मीडिया हाउसों के एचआर की कहानी- ”किसी की पैरवी है आपके पास?”

Hi all,

Although I didn’t want to share with you but now I feel it is must to share that how people from Hr Department waste job seeker candidates time. I guess they believe that they are equal to God and all job seekers are beggars.

मीडिया से सावधान रहने का वक्त आ गया है!

Dinesh Choudhary : कथित पत्रकारों के साथ लालू यादव की क्या झड़प हुई है, मुझे नहीं मालूम। लालू बहुत डिप्लोमेटिक हैं और प्रेस से भागते भी नहीं। भागने वाले तो 3 साल से भाग रहे हैं। लालू मुलायम की तरह ढुलमुल भी नहीं रहे और उनका स्टैंड हमेशा बहुत साफ़ रहा। पर थोड़ी बात आज की पत्रकारिता पर करनी है, जो बहुत थोड़ी बची हुई है।

जैन मुनि को भी झांसा देने से नहीं चूके अजमेर के फर्जी पत्रकार!

अजमेर। कभी आदर्श पत्रकारिता की पहचान रहा राजस्थान का अजमेर शहर अब पत्रकारिता के पतन का वायस बन गया है। अब यहां सिर्फ सम्बन्धों को पाला-पोसा जा रहा है। पत्रकार खुद फर्जी पत्रकारों की जमात खड़ी कर रहे हैं। बुधवार को तब हद हो गई जब प्रख्यात जैन मुनि प्रसन्न सागर महाराज ने अजमेर में मंगल प्रवेश करने के बाद प्रेस वार्ता की। बाकी पत्रकारों की तरह देश के एक बड़े अखबार का स्थानीय चीफ रिपोर्टर खुद भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचा और अपने पड़ोसी (प्रोपर्टी डीलर) को भी फर्जी पत्रकार बनाकर साथ ले गया। उस रिपोर्टर ने अपने पड़ोसी को बाकायदा पत्रकार बताते हुए मुनि श्री से मिलवाया और उनसे बतौर गिफ्ट चांदी का सिक्का भी दिलवाया।

छत्तीसगढ़ में ‘देशबंधु’ के अलावा बाकी सभी अखबार हुए नपुंसक, सरकार विरोधी विज्ञापन छापने से किया इनकार, कांग्रेस ने की शिकायत

मीडिया वाले खुद भक्ति में इतने ली हो गए हैं कि उन्हें यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि वे कितने पतित होंगे. छत्तीसगढ़ में अखबार वालों ने कांग्रेस के उस विज्ञापन को ही छापने से मना कर दिया जिसमें भाजपा सरकार के शासनकाल को लेकर सवाल उठाए गए थे. सिर्फ देशबंधु अखबार ने विज्ञापन छापा. बाकी सभी अखबार नपुसंक साबित हो गए. इस प्रकरण से ये भी पता चलता है कि भाजपा सरकारें किस तरह मीडिया का मुंह बंद करते हुए गला दबाए रहती हैं. छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर अखबारों की इस भक्तिपूर्ण हरकत की शिकायत की है.

सभी चैनलों औऱ अखबारों के मालिक चोर हैं, सबके घर छापा पड़ना चाहिए!

Ramesh Chandra Rai : एनडीटीवी के मालिक के घर छापे पर हाय तौबा मची है। दरअसल सभी चैनलों औऱ अखबारों के मालिक चोर है। इसलिए सभी अखबार और चैनल मालिकों के घर छापा पड़ना चाहिए ताकि उनकी काली कमाई का पता चल सके। यह सभी पत्रकारों का उत्पीडन करते हैं। मोदी सरकार ने गलती यही की है कि एक ही घर पर छापा डलवाया है। यह पक्षपात है इसलिए हम इसकी निंदा करते हैं। सभी के यहां छापा पड़ता तो निंदा नहीं करता। दूसरी बात जितने लोग एक चैनल मालिक के यहां छापे पर चिल्ला रहे हैं वे लोग पत्रकारों के उत्पीड़न पर आज तक नहीं बोले हैं। कई पत्रकारों की हत्या कर दी गयी कई नौकरी से निकाल दिए गए औऱ उन्होंने आत्महत्या कर ली, उनका परिवार आज रोटी के लिए मारा मारा घूम रहा है लेकिन किसी ने आवाज़ नहीं उठाई। जहां तक पत्रकारिता की स्वतंत्रता की बात है तो पत्रकार नहीं बल्कि मालिक स्वतन्त्र हैं। आज पत्रकारों की औकात नही है कि मालिक की मर्जी के खिलाफ कुछ लिख सके।

बाबा रामदेव द्वारा सेना को घटिया आंवला जूस सप्लाई करने की खबर को न्यूज चैनलों ने दबा दिया

पतंजलि और बाबा रामदेव के अरबों-खरबों के विज्ञापन तले दबे मीडिया हाउसेज ने एक बड़ी खबर को दबा दिया. भारतीय सेना ने बाबा रामदेव द्वारा सप्लाई किए जा रहे आंवला को घटिया पाया है और इसकी बिक्री पर फौरन रोक लगा दी है. यह खबर दो दिन पुरानी है लेकिन इस मुद्दे पर किसी न्यूज चैनल में कोई चीखमचिल्ली नहीं है. सब बड़े आराम से चूं चूं के मुरब्बा की तरह इस बड़ी खबर को पी गए और देश को बांटने वाले विषयों पर हो-हल्ला जारी रखे हुए हैं.

मालिक के मरने पर सारे तनखइया पत्रकार मिलकर आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं!

किसी अखबार का मालिक मर जाए तो सब पत्रकार मिलकर उसकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हैं… तनखइया पत्रकार की मजबूरियां आप क्या जानें साहब… है तो कड़वा सच… मालिक की मौत की खबर से अख़बार रंग दिए जाते हैं और अगर अख़बार कर्मचारी-पत्रकार की मौत हो तो दो अलफ़ाज़ की श्रद्धांजलि भी उनके अख़बार में नहीं छापी जाती… अख़बार वाले का कोई कार्यक्रम हो, प्रेस की कोई बैठक हो तो जनाब अख़बार से खबर गायब रहती है…..

पेशेवर लठैत बन चुका है मीडिया

बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कि अंग्रेज तो चले गए लेकिन चाय छोड़ गये। इसी तरह सामंतवाद समाप्त हो गया लेकिन लठैत छोड़ गया है। ये लठैत अपने सामंत के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे। आज भी लठैत हैं। बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि, मीडिया से बड़ा लठैत कौन है। हालांकि तब (1988 के आस पास) मुझे भी खराब लगता था। अब भी खराब लगता है जब मीडिया को बिकाऊ, बाजारू या दलाल कहा जाता है। माना कि देश की आजादी में मीडिया का योगदान सबसे अधिक नहीं तो सबसे कम भी नहीं था। तब अखबार से जुड़ने का मतलब आजादी की लड़ाई से जुड़ना होता था। अब देश आजाद है। मीडिया की भूमिका भी बदल गई। पहले मिशन था अब व्यवसाय हो गया है। पहले साहित्यकार व समाजसेवक अखबार निकालते थे अब बिल्डर और शराब व्यवसायी (भी) अखबार निकाल रहे हैं।

पत्रकार से लेकर संपादक तक अपने मालिकों के धंधों की रक्षा में लगे रहते हैं (संदर्भ : शरद यादव का रास में मीडिया पर भाषण)

Deshpal Singh Panwar : शरद यादव मीडिया को लेकर संसद में बोले और सच बोले। मीडिया मालिकों के हालात बेहतर से बेहतर और पत्रकारों की हालत बदतर। केवल 10 फीसदी ही बेहतर हालत में। आखिर मीडिया पूंजीपतियों का गुलाम कैसे हो गया.. इसका जवाब वही नेता दे सकते हैं जो इस समय सत्ता में हैं। याद करिए 2003 का दौर। मीडिया को गुलाम बनाने की नींव रखने वाले महाजन, जेटली और सुषमा ने विदेशी पूंजी निवेश के नाम पर मीडिया के दरवाजों पर कालिख पोत डाली थी।

पंडितों की फतवानुमा बातों पर चैनल वाले हांय हांय क्यों नहीं करते?

Mrinal Vallari : गाजियाबाद के जिस इलाके में मैं रहती हूं वहां बहुत से मंदिर हैं और बहुत से पंडी जी भी हैं। कभी-कभी इन पंडी जी की बातों को सुनने का मौका भी मिलता है। अगर लड़कियों और औरतों के बारे में इनकी बातों पर ध्यान देने लगें तब तो हो गया। जींस पहनीं मम्मियां भी मंदिर आती हैं पंडी जी की बात सुनती हैं, और जो मानना होता है उतना ही मानती हैं।

मीडिया ने बसपा और मायावती जैसी कद्दावर ताकत को चुनावी लड़ाई से बाहर कर दिया!

Ashwini Kumar Srivastava : अद्भुत है मीडिया और उसमें काम कर रहे तथाकथित पत्रकार। वरना बसपा और मायावती जैसी कद्दावर ताकत को ही इस बार के चुनाव में लड़ाई से बाहर कैसे कर देता! वैसे मुझे तो इसका कोई आश्चर्य नहीं है। क्योंकि एक दशक से भी ज्यादा वक्त तक दिल्ली और लखनऊ में देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थानों में बतौर पत्रकार नौकरी करने के बाद मैं अच्छी तरह से जानता हूँ कि ख़बरें और सर्वे कैसे बनाये-बिगाड़े जाते हैं। इसका एक बहुत बड़ा उदाहरण भी मैं अपने ही निजी अनुभव से आगे बताऊंगा। लेकिन सबसे पहले बात बसपा और मायावती की करते हैं।

मीडिया दलाल है तो क्यों?

मीडिया दलाल है… मीडिया बिका हुआ है… आज इस तरह के आरोपों से मीडिया चौतरफा घिरा हुआ है। अब तो खबरिया चैनलों के एंकर भी बहस के दौरान इस बात का उलाहना देने लगे हैं कि “आप की निगाह में हम तो दलाल हैं ही”। ऐसा नहीं कि मीडिया (अखबारों) पर पहले कभी आरोप नहीं लगे। खबरों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का ठीकरा आज भी मीडिया पर फोड़ा जाता है और मीडिया झेलता रहा है। आज अतीत का रोना रोने का समय नहीं है। मीडिया के दलाल होने के आरोप पर तो किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाना और फरमान सुना देना संभव नहीं है फिर भी इस पर मंथन जरूरी है कि समाज के हर कोने से दलाल होने के आरोप लग रहे हैं तो क्यों?

चैनल वन न्यूज का धंधा जारी : एक-एक लाख लेकर ब्यूरो की नियुक्ति!

चण्डीगढ़। चैनल वन न्यूज आज कल पूरी तरह धंधागिरी पर उतरा हुआ है। पंजाब के चुनावों में उम्मीदवारों से पेड खबरों के बदले धन लेने के लिए जीभ लपलपाने वाले इस चैनल की असलियत कुछ यूं भी है। गुजरs 10 नवंबर, 2016 को इस चैनल ने पंजाब के लिए एक ही समय दो-दो ब्यूरो सुनील सहारण और जगरूप शेहरावत नियुक्त किये और बदले में दोनों से एक-एक लाख रूपये बतौर सिक्युरिटी लिये। चैनल ने मौखिक रूप से चण्डीगढ़ या उसके आस-पास कार्यालय लेने, कार्यालय में स्टॉफ की नियुक्ति करने, पंजाब में चैनल के प्रचार के लिए होर्डिंग लगाने और पंजाब में पांच वाहन चलाने का हुक्म भी दिया।

ये मीडिया को ‘विलेन बनाने’ का दौर है

Dilnawaz Pasha : ये मीडिया को ‘विलेन बनाने’ का दौर है. भारत में ‘प्रेस्टीट्यूट’ शब्द को स्वीकार कर लिया गया है और एक धड़ा जमकर इसका इस्तेमाल कर रहा है. सरकार ने मंत्रालयों में पत्रकारों की पहुंच कम कर दी है. यहां तक कि प्रधानमंत्री अपनी यात्राओं में पत्रकारों को साथ नहीं ले जा रहे हैं, जैसा कि पहले होता था.

यूपी में सत्ता के करीबी बड़े अफसरों में भी अंदरखाने शह-मात देने की खूब हो रही लड़ाई!

कल किसी वक्त चर्चा बहुत तेज छिड़ गई कि मुलायम सिंह यादव फिर से सीएम बनेंगे और सारे झगड़े को शांत कराएंगे तो देखते ही देखते यह खबर भी दौड़ने लगी कि मुलायम के सीएम बनने पर दीपक सिंघल तब मुख्य सचिव बनाए जाएंगे. इसके बाद तो कई बड़े अफसरों की हालत पतली होने लगी. दबंग और तेजतर्रार अफसर की छवि रखने वाले दीपक सिंघल की इमेज खराब करने के लिए कई अफसरों की टीम अलग अलग एंगल से सक्रिय हो गई.

सलमान खान पर सवाल पूछने वाले टीवी पत्रकार को जस्टिस काटजू ने जमकर हड़काया

जस्टिस मार्कंडेय काटजू इंदौर गए हुए थे. इंदौर इंस्टीट्यूट आफ लॉ में उनका कार्यक्रम था. वहां एक पत्रकार माइक कैमरा लेकर आया और उनसे पूछ बैठा कि सलमान खान ने ज्यादा शूटिंग करने के बाद रेप्ड वोमेन टाइप फील करने वाला जो बयान दिया है, उस पर आपका कहना है. इतना सुनते ही जस्टिस काटजू भड़क पड़े और कहा कि तुम्हें शर्म नहीं आती कि एक एक्टर को तुम लोग हाइलाइट कर रहे हो. देश में भुखमरी से लेकर किसान आत्महत्या और महंगाई जैसे ढेरों प्रमुख सवाल हैं जिन पर बात करनी चाहिए लेकिन ज्यादातर मीडिया वाले इन जेनुइन मु्ददों को साइडलाइन कर देते हैं.

अखिलेश यादव ने दंगाई मानसिकता वाले न्यूज चैनलों को कहा- ‘तुम्हारा मुंह काला हो!’ (देखें वीडियो)

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आते देख केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने अपना दंगाई एजेंडा लागू करना शुरू कर दिया है. उसके इस काम में कुछ राष्ट्रीय और कुछ क्षेत्रीय चैनल इस हद तक सहयोग कर रहे हैं जैसे उनके मैनेजिंग एडिटर कोई और नहीं बल्कि खुद अमित शाह हों. कैराना को कश्मीर बताने दिखाने पर आमादा न्यूज चैनलों की हरकत से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बेहद नाराज दिखे. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपनी नाराजगी न छिपाते हुए प्रदेश में आग लगाने की फिराक में जुटे चैनलों का मुंह काला होने की बददुआ दे डाली. उन्होंने इन चैनलों को बेशर्म करार दिया.

भास्कर का संपादक निकला 100 करोड़ के फर्जी नक्शे का मास्टरमाइंड, एफआईआर दर्ज

जांच के बाद इंदौर के थाना एमजीरोड़ में दर्ज हुई 420 की एफआईआर, इंदौर यूनिट के बड़े पदों पर बैठे लोग बचाने में लगे

लगातार कई सालों से इंदौर दैनिक भास्कर के डीबी स्टार में कार्यरत मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ का संपादक मनोज बिनवाल इंदौर के 100 करोड़ रुपए के तुलसी नगर प्लाट घोटाले का मास्टर माइंड निकला। यह वही शख्स है जिसकी इस मामले में करीब आठ माह पहले मैनेजमेंट को शिकायत हुई और जांच बैठी। मगर खास बात यह है सारे सबूत होने के बाद भी इंदौर में बैठे इसके आकाओं (कल्पेश याग्निक और हेमंत शर्मा) ने तमाम प्रयास कर इसे बचा लिया। बचाने के लिए मैनेजमेंट को गलत जानकारी दी गई, क्योंकि कई मामलों में तीनों की पार्टनशिप जगजाहिर है।

पांच साल बाद हर पत्रकार अंबानी की मुट्ठी में… सुनिये सम्मानित पत्रकार पी. साइनाथ के आशंकित मन की आवाज़

लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ यानी मीडिया के साथ एक समस्या यह है कि चारों स्तंभों के बीच यही इकलौता है जो मुनाफा खोजता है। भारत का समाज बहुत विविध, जटिल और विशिष्ट है लेकिन उसके बारे में जो मीडिया हमें खबरें दे रहा है, उस पर नियंत्रण और ज्यादा संकुचित होता जा रहा है। आपका समाज जितना विविध है, उतना ही ज्यादा एकरूप आपका मीडिया है। यह विरोधाभास खतरनाक है। बीते दो दशकों में हमने पत्रकारिता को कमाई के धंधे में बदल डाला है। यह सब मीडिया के निगमीकरण के चलते हुआ है। आज मीडिया पर जिनका भी नियंत्रण है, वे निगम पहले से ज्यादा विशाल और ताकतवर हो चुके हैं।

जानिए, मोदी का मूड बिगड़ा तो किस तरह चौटाला के बगल वाली बैरक में पहुंच जाएंगे मुलायम!

ये ‘सीबीआई प्रमाड़ित ईमानदार’ क्या होता है नेताजी?

सौदेबाज मुलायम का कुनबा 26 अक्टूबर 2007 से वाण्टेड है, क़ानूनी रूप में सीबीआई की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद 40 दिनों में एफआईआर हो जानी चाहिए थी. चूँकि सीबीआई सत्ता चलाने का टूल बन चुकी है, सो सीबीआई कोर्ट पहुँच गई एफआईआर की परमीशन मांगने। उस वक्त मुलायम के पास 39 सांसदों की ताकत थी। खुली लूट की आजादी में रोड़ा बन रहे वामपंथियों से मनमोहन का गिरोह छुटकारा चाहता था और अपने आकाओं के इशारे पर हरहाल में न्यूक्लियर डील कराने पर आमादा था।

अमर उजाला और हिंदुस्तान ने रसूखदार चिकित्सक के आगे टेके घुटने

हिंदी दैनिक हिंदुस्तान की टैगलाइन है ‘तरक्की को चाहिए नया नजरिया’ और अमर उजाला कहता है- ‘ताकि सच जिन्दा रहे’। लेकिन उत्तर प्रदेश के जनपद चंदौली में दोनों ही अखबार अपने स्लोगन को ठेंगे पर रखकर कार्य कर रहे हैं। जिले में मुगलसराय स्थित पराहुपर में अर्बन हेल्थ केअर सेंटर में सोमवार को डाक्टर के खिलाफ शिकायतों की जांच करने पहुंची संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक के सामने ही आरोपी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने शिकायतकर्ता की पिटाई कर दी।

कोर्ट ने डॉ. अब्दुल करीम टुंडा को बाइज्जत बरी किया तो फिर मीडिया वालों के लिए वह आतंकी कैसे हो गये? देखिए शर्मनाक रिपोर्टिंग

Shameer Aameen Sheikh : डॉ. अब्दुल करीम टुंडा, पिलखुवा (यूपी) के एक होम्योपैथी चिकित्सक, जिनको 16 अगस्त’ 2013 को भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार किया गया था, 1996-1998 के बीच 40 से अधिक बम ब्लास्ट करने का आरोप था इन पर| 3 साल बाद अभी न्यायालय ने करीम साहब को बाइज्जत बरी कर दिया| फिर भी दैनिक हिंदुस्तान लिखता है “लश्कर आतंकी टुंडा बम विस्फोटों से जुड़े मामले में बरी”।

जेएनयू को बदनाम करने वाले ‘इंडिया न्यूज’ और ‘जी न्यूज’ का गेस्ट बनने से शीबा असलम फ़हमी का इनकार

Sheeba : आज सुबह से इंडिया न्यूज़ और ज़ी न्यूज़ की तरफ से फ़ोन आते रहे पैनल में बैठने के लिए. दोनों किसी मुस्लिम-महिला केंद्रित घटना पर बहस में आमंत्रित कर रहे थे. मैंने विरोध जताते हुए मना कर दिया की जेएनयू को आपने जिस तरह षड्यंत्र कर के बदनाम किया उसके बाद हम आपके चैनल की टीआरपी की ग़ुलामी में सहयोग देने नहीं आएँगे.

जी न्यूज, इंडिया न्यूज और टाइम्स नाऊ की पीत पत्रकारिता के खिलाफ केजरीवाल ने कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीत पत्रकारिता करने वाले तीन न्यूज चैनलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं. ये चैनल हैं- जी न्यूज, इंडिया न्यूज और टाइम्स नाऊ. दिल्ली सरकार पहले इन चैनलों से पूछेगी कि बिना किसी जांच पड़ताल के आपने कैसे कन्हैया से जुड़े वो वीडियो चलाए जो फेक थे. साथ ही यह भी पूछा कि जांच के बाद जब यह बात साफ हो गई कि वीडियो फर्जी थे तो इस पीत पत्रकारिता पर आपने क्या सार्वजनिक रूप से माफी मांगी?

जोधपुर में ब्लैकमेलर पत्रकारों का हुआ भंडाफोड़ : ”तुम चाहते हो खबर रोक दी जाए तो 60 हजार रुपये दे दो”

जोधपुर : शिव सेना जिला प्रमुख नेमाराम पटेल ने जोधपुर में कार्यरत प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तीन पत्रकारों पर ब्लैकमेल कर पैसे मांगने का लगाया आरोप। नेमाराम ने दैनिक भास्कर के रिपोर्टर रणबीर चौधरी, मनोज वर्मा और सहारा समय न्यूज़ चैनल के प्रदीप जोशी के खिलाफ महा मंदिर थाने में रिपोर्ट दी। इसमें कहां गया है कि उक्त व्यक्तियों ने उसकी एक वीडियो क्लिपिंग दिखाकर कहा कि यह खबर अखबार और इलेक्टॉनिक मीडिया में आ गई तो तुमारा राजनैतिक कैरियर समाप्त हो जाएगा। अगर तुम चाहते हो कि खबर रोक दी जाए तो हम यह खबर रोकने के एवज में पैसे लेंगे। फिर उन्होंने पहले 60 हजार और उसके बाद इसकी दुगनी राशि रिश्वत में मांगी। शिव सेना नेता की दी हुई इस रिपोर्ट पर महामंदिर पुलिस कर रही है जांच।

मीडिया वाले गढ़ते हैं झूठी खबरें और करते हैं सत्य की हत्या, सुनिए प्रो. आनंद प्रधान की जुबानी एक सच्ची कहानी

इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मास कम्यूनिकेशन यानि आईआईएमसी में छात्रों को लंबे समय से पत्रकारिता की पढ़ाई पढ़ा रहे प्रोफेसर आनंद प्रधान एक जमाने में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे हैं. 19 फरवरी को जब जवाहरलाल यूनिवर्सिटी के छात्रों की बैठक छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के समर्थन में हुई तो इसमें जाने माने पत्रकार पी. साईंनाथ समेत कई पत्रकारों ने अपने विचार रखे.