भाजपा के हत्यारे विधायक चंदेल के चक्कर में दो जज हो चुके हैं बर्खास्त

जेपी सिंह

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हमीरपुर में 22 साल पहले राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में हुए पांच लोगों के सामूहिक हत्याकांड में निचली अदालत से बरी भाजपा विधायक अशोक सिंह चंदेल समेत सभी 10 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इन सभी आरोपियों को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हमीरपुर ने दोषमुक्त कर दिया था।

दोषमुक्ति के आदेश को प्रदेश सरकार और वादी मुकदमा भाजपा नेता राजीव शुक्ला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। वर्ष 2002 में दाखिल अपील पर शुक्रवार को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति दिनेश सिंह की खंडपीठ ने अपीलों को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए सभी सजा का आदेश दिया। कोर्ट ने सभी अभियुक्तों को सीजेएम हमीरपुर की अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया है। अशोक सिंह चंदेल जमानत देने के साथ ही सत्र न्यायालय से रिहा करने वाले न्यायधीश को हाइकोर्ट पहले ही बर्खास्त कर चुका था। निचली अदालत ने विधायक को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने विधायक को बरी करने वाले जज अश्विनी कुमार को जांच के बाद बर्खास्त कर दिया था।

गौरतलब है कि 26 जनवरी 1997 की शाम हमीरपुर के सुभाषनगर मोहल्ले में भाजपा नेता राजीव शुक्ल के भाइयों राजेश कुमार शुक्ल और राकेश कुमार शुक्ल सहित अंबुज उर्फ गुड्डा, श्रीकांत पांडेय व वेद प्रकाश की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के चश्मदीद राजीव शुक्ल ने विधायक अशोक सिंह चंदेल व अन्य को नामजद करते हुए थाने में हत्या व हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना के बाद विधायक अशोक सिंह चंदेल के अलावा रघुवीर सिंह, डब्बू सिंह, उत्तम सिंह, प्रदीप सिंह, नसीम, श्याम सिंह, साहब सिंह, झण्डू और भान सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 302,149, 307,149, 404 व 379 (, बलवा, हत्या, हत्या का प्रयास चोरी आदि)और 25/30 शस्त्र अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की थी ।

विचारण के बाद अपर जिला व सत्र न्यायाधीश ने 17 जुलाई 2002 को इस बहुचर्चित सामूहिक हत्याकांड के सभी 10 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था । सेशन कोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज कराने में विलंब के साथ ही घटना के चश्मदीद गवाह राजीव शुक्ल के बयान व चुटहिल रविकांत पांडेय की घटना के वक्त उपस्थिति तथा फोरेंसिक रिपोर्ट को संदेहास्पद माना था। हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के फैसले को गलत मानते हुए सभी आरोपियों को हत्या के अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही आर्म्स एक्ट के आरोप से बरी कर दिया।

दो जज हो चुके है बर्खास्त

इस मामले में अशोक चंदेल, रुक्कू को सेम डे बेल देने में स्पेशल जज आरबी लाल बर्खास्त हुए थे। मुख्य आरोपी चंदेल सहित 10 को इस केस में बरी करने में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार भी बर्खास्त हुए थे।

एक बार सांसद और चार बार विधायक रहे

अशोक चंदेल का जन्म हमीरपुर के कुरौरा गांव हुआ था। शिक्षा-दीक्षा के लिए वह गांव से हमीरपुर आ गए और राजनीति में कूद गए। अशोक सिंह चंदेल 1989 में निर्दलीय विधायक चुने गए। इसके बाद 1993, 2008 में भी विधायक रहे। वर्ष 1999 में बसपा से सांसद चुने गए। इसके बाद वर्ष 2017 से भाजपा के टिकट से विधायक चुने गए। अशोक चंदेल लगभग सभी मुख्य दलों में रह चुके हैं और हर दल के बड़े-बड़े नेताओं से उनके अच्छे संबंध रहे हैं। 2017 में मोदी लहर को देख अशोक चंदेल भाजपा में शामिल हो गए। उस दौरान भाजपा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री उमा भारती समेत तामम भाजपा नेताओं ने इनका विरोध किया, लेकिन यूपी संगठन में बैठे नेताओं आगे उनकी एक नहीं चली थी।

विधायक कानपुर में भी हत्या के मामले में आरोपित

भाजपा विधायक अशोक चंदेल और उसके साथियों को हत्या में आजीवन कारावास की सजा सुनाए के बाद मामला पुरानी यादें फिर ताजा हो गई हैं। विधायक अशोक सिंह चंदेल तो कानपुर के किदवई नगर में कारोबारी रणधीर गुप्ता की दिनदहाड़े हत्या के मामले में भी आरोपित है। उसके ऊपर सीओ के साथ दबंगई दिखाने का मामला गोविंद नगर थाने में दर्ज है।

इलाहाबाद से वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट.

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