चाटुकार या पत्रकार, आप तय कीजिए आपको क्या बनना है ?

प्रवेश चौहान-

जीवन में जो इंसान जैसा कर्म करता है वैसा ही वह फल भी पाता है और उसी कर्म के आधार पर इंसान को उसके मरने के बाद याद किया जाता है। मरने के बाद इंसान को उसकी अच्छाई और बुराई के हिसाब से लोग याद करते हैं। अगर उस इंसान ने अच्छा कर्म किया होगा तो लोग उसकी अच्छाई के लिए याद रखेंगे, अगर उस इंसान ने बुरे कर्म किए होंगे तो लोग उसको बुरा भला मरने के बाद भी कहेंगे।

यही हाल आज की पत्रकारिता का भी है। कुछ पत्रकार ऐसे हैं। उनके मरने के बाद अगर आज याद किया भी जाता है तो केवल उनकी चाटुकारिता की वजह से, और कुछ पत्रकार ऐसे भी हैं जिनको मरने के बाद याद किया जा रहा है तो उनकी पत्रकारिता की वजह से। वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के निधन के बाद अगर आप सोशल मीडिया में उनको लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं पढेंगे, तो आपको पता चल जाएगा कि विनोद दुआ का पत्रकारिता में कितना बड़ा योगदान रहा है और अपनी 3 दशकीय पत्रकारिता में उन्होंने जो नाम कमाया है, उसीलिए लोग आज उन्हें याद कर रहे हैं।

इससे पहले रिपब्लिक भारत चैनल के पत्रकार विकास शर्मा का जब निधन हुआ था तो उनको सोशल मीडिया पर लोगों की जो प्रतिक्रियाएं मिली वह बेहद ही निराशाजनक थीं क्योंकि लोगों ने मरने के बाद पत्रकार नहीं चाटुकार कहकर अपना गुस्सा जाहिर किया था। इसी तरह आज तक के मशहूर एंकर रोहित सरदाना की मृत्यु के बाद अगर लोगों ने उनको याद किया भी तो केवल चाटुकार के रूप में। इन दोनों पत्रकारों ने पत्रकारिता के क्षेत्र में जिस तरह का नाम कमाया, उसी तरह से लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली। यह चाहते तो जिस तरह आज विनोद दुआ को निधन के बाद आज याद किया जा रहा है, उसी तरह से इन दोनों पत्रकारों को भी याद किया जा सकता था। मगर ऐसा बिल्कुल ना हुआ और आज पत्रकारिता जगत में इन दोनों पत्रकारिता का दूर दूर कहीं कोई भी नामोनिशान नहीं है।

सबसे अहम बात, विनोद दुआ ने जिस भी प्लेटफार्म पर काम किया, वह चाहे सरकारी चैनल दूरदर्शन हो, नेशनल न्यूज़ चैनल हो या यूट्यूब चैनल, उनका रुख वही रहा जिसके लिए वह जाने जाते हैं। उन्होंने सरकार से सवाल पूछना, निडर होकर अपनी बात रखना और देश के लोगों की समस्याएं उठाना, हमेशा जारी रखा। उन्होंने कभी प्लेटफार्म्स की परवाह नहीं की। प्लेटफार्म कोई भी था मगर उनके हौसले बुलंद थे। विनोद दुआ का पत्रकारिता जगत में जो बहुमूल्य योगदान रहा इसके लिए पत्रकारिता के इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में जरूर लिखा जाएगा।

जो चाटुकार पत्रकार इस लेख को पढ़ रहे होंगे वो वक्त रहते खुद को बदल लें। समय हर किसी को मौका देता है। ऐसा मौका आज आपको भी मिल रहा है। पत्रकारिता के पेशे को अपनी चाटुकारिता से बर्बाद मत कीजिए। सरकार की वैलिडिटी मात्र 5 वर्ष की होती है। मगर पत्रकारिता आपका करियर है जो जीवन भर के लिए है।

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