कोर्ट ने कुछ पत्रकारों के अवैध कब्जे से रायपुर प्रेस क्लब को मुक्त कराया, देखें बिलासपुर हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोट बिलासपुर का फैसला रायपुर प्रेस क्लब एडहॉक कमेटी के फेवर में, अध्यक्ष दामू आम्बेडारे के कार्यकाल को नकारा, फर्म एवं सोसायटी और एडहॉक कमेटी को चुनाव कराने के निर्देश

रायपुर। प्रेस क्लब रायपुर के एक साल के निर्वाचित कार्यकाल के आय-व्यय के ऑडिट समेत अतिरिक्त एक साल तक नियम विरुद्ध पद पर बने रहने के खिलाफ हाईकोर्ट बिलासपुर ने अपना फैसला सुनाया है। अध्यक्ष दामू आम्बेडारे के अतिरिक्त कार्यकाल को नकारते हुए नए सिरे से जल्द से जल्द चुनाव कराने का निर्देश उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया है। हाईकोर्ट ने फर्म सोसायटी और रायपुर प्रेस क्लब में सदस्यों की सहमति से बनी एडॉहक कमेटी को जल्द से जल्द चुनाव प्रक्रिया पूर्ण कराने का निर्देश दिया है।

बता दें कि रायपुर प्रेस क्लब का वार्षिक चुनाव आखिरी बार 2018 में हुआ था। कार्यकाल पूर्ण होने के बाद नियमानुसार सभी निर्वाचित पदाधिकारियों का एक साल का कार्यकाल 2019 में समाप्त हो चुका है। लेकिन रायपुर प्रेस क्लब के संविधान के विरुद्ध पूर्व अध्यक्ष दामू आम्बेडारे और कथित तौर पर कोषाध्यक्ष शगुफ्ता शिरीन पद पर बने रहे। यही नहीं, इन दोनों के साथ इनके अवैध कार्यकाल के हर फैसले में पांच सदस्यीय कार्यकारिणी सदस्यों की समिति भी पद पर बनी रही। असंवैधानिक प्रक्रिया और नए चुनाव के अलावा सालाना आय-व्यय का ऑडिट तथा आम सभा के लिए प्रेस क्लब के वरिष्ठ सदस्यों ने (हस्ताक्षर संख्या 315) सर्वसम्मति से 11 वरिष्ठ सदस्यों की एडहॉक कमेटी को प्रेस क्लब के संचालन, नए चुनाव कराने तक का जिम्मा सौंपा था।

लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्यरत एडहॉक कमेटी के अस्तित्व को नकारते हुए पूर्व अध्यक्ष दामू आम्बेडारे, कोषाध्यक्ष शगुफ्ता शिरीन, 5 कार्यकारिणी सदस्यों ने इस्तीफा नहीं दिया। अवैध कार्यकाल को कथित तौर पर सहयोग करने के लिए प्रेस क्लब के दो सदस्यों क्रमश: डी.बैरागी व विक्की पंजवानी ने उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के समक्ष सबसे पहले रिट याचिका क्रमांक डब्ल्यूपीसी-4327/2019 प्रस्तुत किया था। इसकी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 29 नवंबर 2019 के अपने आदेश में संचालक रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटी को आदेशित किया कि विधिवत मतदाता सूची तैयार कर नियमानुसार चुनाव कराएं। लेकिन फर्म एवं संस्थाएं ने आदेश पारित होने के बाद भी कोई ठोस पहल नहीं की।

डी.बैरागी व विक्की पंजवानी की याचिका के बाद भी मतदाता सूची अपग्रेड करने की आड़ में अवैध कार्यकाल चलता रहा। मजबूरन रायपुर प्रेस क्लब की 11 वरिष्ठ सदस्यों की एडहॉक कमेट की अनुमति से कमेटी समन्वयक सदस्य क्रमांक 302 सुकांत सिंह राजपूत ने हाईकोर्ट बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के समक्ष रिट याचिका क्रमांक डब्ल्यूपीसी-1013/2020 प्रस्तुत किया। हाईकोर्ट ने क्लब का चुनाव जल्द से जल्द करवाने का फैसला और निर्देश 20 मई 2020 को जारी किया। कोरोना महामारी और लॉकडाउन में भी क्लब की एडहॉक कमेटी की रिट याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय के जज पी.सैम कोसी की अदालत ने फैसला सुनाया। इस फैसले के साथ ही रायपुर प्रेस क्लब में अवैध तरीके से अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के अलावा 5 कार्यकारिणी सदस्यों का अवैध कार्यकाल खत्म हो गया।

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One comment on “कोर्ट ने कुछ पत्रकारों के अवैध कब्जे से रायपुर प्रेस क्लब को मुक्त कराया, देखें बिलासपुर हाईकोर्ट का फैसला”

  • प्रज्ञावतार साहू says:

    आर्डर में तो रजिस्ट्रार को निर्देशित किया गया है कि शिकायत पर नियमानुसार कार्यवाही करें। adhoc committee का ज़िक्र नही है ।

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