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फर्जी इस्तीफा कांड में कोर्ट ने दिया दैनिक भास्कर को झटका, साइबर पुलिस हुई सक्रिय

दैनिक भास्‍कर चंडीगढ़ में न्याय के लिए लड़ रहे मीडियाकर्मी सुधीर श्रीवास्तव को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुधीर श्रीवास्तव का एक फर्जी इस्तीफा बनाकर इनकी अनुपस्थिति में इन्हीं की मेल से दैनिक भास्‍कर चंडीगढ़ एडीशन के एचआर एंड एडिमन विभाग के हेड मनोज मेहता और उनके मातहतों ने सेंड कर दिया था. इसी मामले में पुलिस-अखबार गठजोड़ के खिलाफ कोर्ट गए सुधीर को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से राहत मिली है.

हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया है कि श्रीवास्तव के साथ जो भी हुआ है उसकी तफसील से जांच करके आगामी 21 अगस्त को एफिडेविट के साथ कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट पेश करें. इस बाबत सम्मन मनोज मेहता को भी तामील करवाया गया है. इसके बाद चंडीगढ़ की साइबर पुलिस ने मेहता को तलब कर लिया है. 28 जुलाई 2020 के अपने आदेश में हाई कोर्ट ने जो कहा है उसका जरूरी अंश इस प्रकार है :—

CRM M-19383 of 2020

Notice of motion for 21.08.2020

Senior Superintendent of Police, UT, Chandigarh will file an affidavit regarding the status of investigation in FIR No. 0196, dated 28.09.2019 under Section 66 (C) and 66 (D) of the Information Technology Act, 2000, registered at Police Station West Sector 11, Chandigarh (P-7), by next date of hearing.

ज्ञात हो कि दैनिक भास्‍कर चंडीगढ़ एडीशन के एचआर डिपार्टमेंट के कुशल कर्मचारी सुधीर श्रीवास्‍तव का कुसूर महज इतना रहा है कि उन्‍होंने अपनी पगार मजीठिया वेज बोर्ड की संस्‍तुतियों के हिसाब से करवाने के लिए आवाज उठा दी। पहले तो उन्‍होंने अपने हाकिमों के समक्ष अपना वेतन बढ़ाने की डिमांड रखी। जब उनकी मांग अनसुनी हो गई तो उन्होंने वर्किंग जर्नलिस्‍ट एवं नॉन जर्नलिस्‍ट एक्‍ट के दफा 17 का सहारा लेते हुए लेबर कमिश्‍नर और लेबर कोर्ट का रुख कर लिया। मैनेजमेंट, खासकर एचआर के मुखिया मनोज मेहता को जब पता चला तो उसने अपने मातहतों की मदद से सुधीर की गैर मौजूदगी में सुधीर का आफिशियल ई-मेल खोलकर उनका इस्तीफा भास्‍कर के आला अधिकारियों को भेज दिया। दरअसल सुधीर के सिस्‍टम और आफिशियल मेल का पासवर्ड एक ही है जिसकी जानकारी उनके साथ काम करने वाले सभी लोगों को थी।

यह साइबर क्राइम 20 जून 2019 को शाम साढ़े 8 बजे सुधीर के आफिस का काम समाप्त करके घर जाने के बाद किया गया। अगले दिन 21 जून को सुधीर जब ड्यूटी के लिए भास्‍कर पहुंचे तो सिक्‍योरिटी गार्ड ने उन्‍हें गेट पर यह कह कर रोक लिया कि आपको अंदर जाने की मनाही है। बाद में मनोज मेहता और एक अन्य मैनेजर हरीश कुमार बाहर गेस्‍ट रूम में आकर मातमपुर्सी के अंदाज में सुधीर से मिले। दोनों कहने लगे, ‘अरे, तुमने तो इस्‍तीफा दे दिया है।’

इतना सुनते ही सुधीर का माथा ठनका और कहा, ‘मैंने इस्‍तीफा कहां दिया है’। सुधीर को जब सब मामला समझ आया तो उन्होंने कहा- अच्‍छा, तो तुम लोगों ने मेरा मेल खोलकर इस्‍तीफा डाल दिया। ठीक है, कोई बात नहीं।

दुखी सुधीर घर चले गए और बाद में पुलिस केस कर दिया।

इस साइबर क्राइम केस से बचने के लिए मनोज मेहता और उसके संगी साथियों ने अखबारी दबंगई का भरपूर इस्तेमाल किया। उसके इस आपराधिक कार्य में चंडीगढ़ भास्कर के संपादकीय मठाधीशों ने भरपूर साथ दिया। नतीजतन चंडीगढ़ की साइबर पुलिस मामले की जांच करने, सबूत जैसे फुटेज आदि हासिल करने की बजाय निष्क्रिय होकर शांत हो गई। अपने साथ हुई इस ज्यादती, इस अपराध की शिकायत सुधीर ने दैनिक भास्कर के मालिकों सुधीर अग्रवाल, गिरीश अग्रवाल और पवन अग्रवाल सबसे की, लेकिन किसी ने भी इसका संज्ञान नहीं लिया।

उल्टे डीबी कॉर्प के एक वाइस प्रेसीडेंट रिव गुप्ता ने उस फुटेज को ही मुख्यालय भोपाल मंगा लिया जिसमें मनोज मेहता और उसके मातहतों के कारनामों के सबूत कैद थे।

इंसाफ के लिए सुधीर श्रीवास्तव ने पुलिस के छोटे से लेकर बड़े, सभी अधकारियों के दरवाजे खटखटाये। जब राहत देने, इंसाफ दिलाने की बजाय सारे पुलिसियों ने मुंह फेर लिया तो सुधीर ने अदालत की चौखट पर दस्तक दे दी। अदालत के आदेश के बाद वही पुलिसिये हिरण गति से अपनी कार्रवाई में मशगूल हो गए हैं।

पूरे प्रकरण को समझने के लिए इन्हें भी पढ़ें-

भास्कर चंडीगढ़ में मजीठिया मांगने पर ईमेल हैक कर रिजाइन भेजा, पुलिस में शिकायत

मजीठिया मांगा तो भास्कर खुलेआम साइबर क्राइम पर उतर आया

दैनिक भास्कर में मेल हैक कर जबरन इस्तीफा लेने पर पुलिस ने किया केस दर्ज

https://youtu.be/k_-UMuQvDy8
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