हाईकोर्ट ने कहा- IFS अफसरों के निलंबन व विभागीय कार्यवाही से जुड़ी सूचना सार्वजनिक नहीं की जा सकती!

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा है कि भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अफसरों के निलंबन तथा विभागीय कार्यवाही से जुडी सूचना उनकी व्यक्तिगत सूचना होती है तथा इस कारण उसे जन सूचना अधिकार में दिए जाने की जरुरत नहीं है.

जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल तथा जस्टिस रजनीश कुमार की बेंच ने यह आदेश याची एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर, राज्य सरकार के अधिवक्ता क्यू एच रिज़वी तथा राज्य सूचना आयोग के अधिवक्ता शिखर आनंद को सुनने के बाद दिया.

नूतन ने आईएफएस अफसरों के बारे में यह जानकारी मांगी थी जो वन विभाग तथा राज्य सूचना आयोग द्वारा मना कर दी गयी थी. उन्होंने कहा था कि उनके प्रार्थनापत्र को ख़ारिज करने का कोई कारण नहीं बताया गया था तथा उन्हें सूचना मिलनी चाहिए.

सूचना आयोग के अधिवक्ता शिखर आनंद ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने गिरीश रामचंद्र देशपांडे, सी एस श्याम तथा अन्य केस में यह स्पष्ट कर दिया है कि एक कर्मी का प्रदर्शन मुख्य रूप से नियोक्ता तथा कर्मी के बीच का मामला होता है और यह सामान्यतया सेवा नियमावली से बंधा होता है, जो व्यक्तिगत सूचना में आता है, जिसका लोक कार्य या लोकहित से कोई संबंध नहीं होता है.

हाई कोर्ट ने कहा कि नूतन ने 01 जनवरी 2008 से सूचना देने की तिथि तक आईएफएस अफसरों के विषय में जो सूचना मांगी है, वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित नियमों की परिधि में आता है तथा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8(1)(जे) में व्यक्तिगत सूचना होने के कारण निषिद्ध है.

HC : Dept action of IFS officers is personal information

The Lucknow bench of Allahabad High Court has said that information about suspension and departmental action of Indian Forest Service (IFS) Officers is personal information and hence it need not be provided under Right to Information (RTI).

The bench of Justice Pankaj Kumar Jaiswal and Justice Rajnish Kumar passed this order after hearing petitioner activist Dr Nutan Thakur, State Government counsel Q H Rizvi and State Information Commission’s counsel Shikhar Anand.

Nutan had sought this information about IFS officers, which had been refused by the Forest department and Information Commission. She said that no reason has been disclosed regarding rejection of the prayer and submitted that information shall be provided to her.
In reply, Commission’s counsel Shikhar Anand said that the Supreme Court has made it clear in Girish Ramchandra Deshpande, C S Shyam and other cases that performance of an employee in an organization is primarily a matter between the employee and the employer and normally those aspects are governed by the service rules which fall under personal information, the disclosure of which has no relationship to any public activity or public interest.

The High Court said that Nutan is seeking the information right from 01 January 2008 till the date of application in respect of IFS officers, which would fall in ratio of law laid down by the Supreme Court and is exempted from disclosure under Section 8(1)(j) of the Right to Information Act, 2005 as being personal information.

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