सरकारी दावा और ढिंढोरची अखबार

केंद्र सरकार ने कल (शुक्रवार, 31 अगस्त को) अर्थव्यवस्था से संबंधित आंकड़े जारी किए और इनके आधार पर दावा किया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक विकास की दर, उम्मीद से ज्यादा 8.2 प्रतिशत रही। आज ज्यादातर अखबारों में यह खबर प्रमुखता से छपी है। इसके साथ खबर यह भी थी कि रुपया और गिरा तथा अब एक डॉलर 71 रुपए के बराबर हो गया है।

कुछ अखबारों ने इसे भी उतनी ही प्रमुखता दी है जबकि कुछ इस तथ्य को पी गए। जहां तक अर्थव्यवस्था के बेहतर होने का दावा है उसपर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम का ट्वीट है जिसे ‘नवोदय टाइम्स’ ने खबर के साथ प्रमुखता से छापा है। इसके मुताबिक, “आधारभूत प्रभाव आगे चलकर इतना अनुकूल नहीं रहेगा। जब हम तीसरी और चौथी तिमाही में पहुंचेंगे, वृद्धि दर गिर सकती है और पूरे वित्त वर्ष की वृद्धि दर पिछले साल की ही तरह रह सकती है।”

पूर्व वित्त मंत्री की यह टिप्पणी तथ्यों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है पर बड़े अखबारों में इसे न छापना क्या दर्शाता है। आम तौर पर रिपोर्टिंग का नियम है कि ऐसी प्रचारात्मक खबरों पर प्रतिक्रिया ली जाए। बजट के लोकलुभावन वादों पर आम आदमी से और विपक्षी नेताओं से प्रतिक्रिया लेने की पुरानी परंपरा है। पहले यह काम मुश्किल था फिर भी होता था। अब यह बहुत आसान है फिर भी नहीं किया जा रहा है। जैसे अर्थव्यवस्था में वृद्धि पर सरकारी दावे की खबर के साथ पूर्व वित्त मंत्री की टिप्पणी मिल जाए तो उससे अच्छा क्या हो सकता है। अब इसके लिए आपको उनका फोन नंबर जानने और उनके सचिवालय के जरिए उन तक पहुंचने का श्रम करने की जरूरत नहीं है। ट्वीटर हैंडल देख लीजिए – मिल जाएगा। पर इतना भी नहीं करना कैसी पत्रकारिता है?

खासकर तब जब इस सरकार के बारे में यह सर्वविदित है कि वह आंकड़ों से खेल करती है। आधार वर्ष अपनी सुविधा से चुनती है आदि आदि। इस मामले में भी ऐसा है। पर आम रिपोर्टर इतना जानकार या अनुभवी न हो तो क्या सरकारी दावा जैसे का तैसे छापकर बल्ले बल्ले करना ही पत्रकारिता है? आइए, पहले यह देखें कि इस खबर में खेल क्या है। हमेशा की तरह इस बारे में सबसे सूचनाप्रद खबर द टेलीग्राफ में है। अखबार के मुताबिक, द टेलीग्राफ ने अपनी इस खबर का शीर्षक ही लगाया है, ग्रोथ सर्ज ऑन बेस इफेक्ट यानी आधार के प्रभाव से विकास में वृद्धि। टेलीग्राफ के रिपोर्टर द्वय जयंत राय चौधुरी और आर सूर्यमूर्ति ने पहले ही पैरे में लिखा है कि यह (8.2 प्रतिशत की वृद्धि) दो साल में सबसे ज्यादा है और इससे भारत ने सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे रहने का अपना खिताब बनाए रखा है और इसमें चीन को पीछे छोड़ दिया है जिसकी विकास दर इसी तिमाही में 6.7 प्रतिशत है।

खबर पढ़ते ही खटका होता है, चीन की विकासदर 6.7 प्रतिशत और भारत की 8.2 प्रतिशत? यह 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर से ज्यादा बड़ी बात है पर क्या ऐसा दावा किया गया। शायद नहीं। क्यों? क्योंकि इससे बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी। टेलीग्राफ के मुताबिक, असल में गए साल इसी तिमाही में आर्थिक विकास घटकर 5.6 प्रतिशत रह गया था औऱ यह मई 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद सबसे कम था। यह विमुद्रीकरण के झटके के बाद था। इसके बाद गए साल एक जुलाई से जैसे तैसे जीएसटी लागू कर दिया गया था। इससे भी मंदी आई थी, उत्पादन कम हुआ था। खपत कम हुआ। इससे अप्रैल-जून 2017 की तिमाही में जीवीए (ग्रॉस वैल्यू ऐडेड) 1.8 प्रतिशत कम हो गया। इससे निर्माण क्षेत्र का विकास बहुत ज्यादा 13.5 प्रतिशत रहा और इससे जीडीपी की विकास दर बढ़ गई। टेलीग्राफ ने इस बारे में कई जानकारों से बात करके विस्तार से खबर दी है। पर ऐसा सभी अखबारों में नहीं है और जाहिर है आप जो अखबार पढ़ेंगे वैसी ही सूचना पाएंगे।

हिन्दी के बड़े अखबारों में एक, दैनिक जागरण ने इस खबर को पी चिदंबरम के ट्वीट और रुपए के गिरते मूल्य के बिना अलग से, प्रमुखता से छापा है। इसमें जेटली जी का कोट हाइलाइटेड है जो इस प्रकार है, “यह विकासदर नए भारत की क्षमता को दर्शाती है। सुधार और राजकोषीय अनुशासन का परिणाम बेहतर रहा है। भारत एक नए मध्यम वर्ग का साक्षी बन रहा है।” पहले पेज की इस खबर के साथ बिजनेस पेज पर संबंधित खबरें और संपादकीय होने की सूचना भी है। बिजनेस पेज की खबरें भी सरकारी हैं और सिर्फ प्रशंसा ही प्रशंसा है। संपादकीय टिप्पणी भी एकतरफा है। अर्थव्यवस्था में उछाल शीर्षक से संपादकीय में कहा गया है, “अपेक्षा से अधिक विकास दर यानी जीडीपी के आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब नोटबंदी पर रिजर्व बैंक की ओर से पेश किए गए आंकड़ों को लेकर सरकार विपक्ष के निशाने पर थी।”

लेखक संजय कुमार सिंह लंबे समय तक जनसत्ता अखबार में वरिष्ठ पद पर रहे हैं. वे काफी समय से बतौर उद्यमी ‘अनुवाद कम्युनिकेशन’ का संचालन करते हैं. संजय सोशल मीडिया पर बेबाक लिखने के लिए जाने जाते हैं. उनसे संपर्क anuvaad@hotmail.com के जरिए किया जा सकता है.


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