कुतियों को सोशलिज्म (देखें वीडियो)

-Yashwant Singh-

दो जासूस करें महसूस… दुनिया बहुत खराब है…..

आजकल दुनिया की खराबी से उकताकर मैं गांव भाग आया हुआ हूं… पंद्रह बीस दिन हो गए होंगे…. रात आठ नौ बजे तक नींद में चला जाता हूं…. सुबह सूरज निकलते वक्त हम भी आंंख खोल रहे होते हैं… पंपिंग सेट में घंटे दो घंटे नहाना… कुत्तों कुतियों संग खेलना बतियाना….

ये सारी भूमिका इसलिए ताकि आप मेरे उस वीडियो को देख पाएं जो यूं ही बन गया लेकिन अब लग रहा कि ये तो ठीकठाक बन गया है….

दो माताएं हैं… कुत्ता संप्रदाय की…. इन्हें कुतियाएं कहेंगे हम… कुतिया या कुत्ता वर्ड हम मनुष्यों ने खराब किया है…. पर असल में हम मनुष्य ज्यादा गंदे हैं…ज्यादा स्वार्थी हैं… गैर-मनुष्यों के सारे हिस्से हड़प लिए हैं हमने…. हड़पते जा रहे हैं…. उनके रहने के ठिकाने जल जंगल पहाड़ हवा सब नाश करते जा रहे हैं…

खैर, भाषण कभी बाद में…. फिलहाल तो एक बात…

दो कुतिया माताएं इतनी ग़ज़ब सखी हैं दोस्त हैं कि वे मिल जुल कर अपने दोनों के बच्चे पाल रही हैं…

पंद्रह दिन से साथ हूं तो इनके हर क्षण को जिया देखा हूं…. पारले जी बिस्किट सुबह शाम खिलाने के साथ साथ दही रोटी दाल रोटी आदि इत्यादि खिलाते रहता हूं….

इनके प्रेम को देखिए…. मैं खुद दंग रह गया…

हां, इस वीडियो का द एंड ग़ज़ब है… मुझे नहीं पता था कि ये किसी बाइक वाले को मिलजुल कर ऐसे दौड़ा लेंगी…

देखें वीडियो-

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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