मां-पत्नी के कोरोना पाजिटिव होने के बाद मजीठिया क्रांतिकारी शशिकांत ने मीडियाकर्मियों को दी ये नेक सलाह

शशिकांत सिंह

दोस्तों, मेरी माता जी और पत्नी की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. उन्हें मुंबई के नालासोपारा के एक निजी कोविड अस्पताल में भर्ती करा दिया है। आप सबकी दुआ से दोनों लोगों की हालात में सुधार है।

महाराष्ट्र में जिस हिसाब से कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है, मुझे लग रहा है आप पैसे लेकर खड़े रहेंगे मगर आपको बेड नहीं मिलेगा। स्थिति काफी भयावह होने वाली है यहाँ। वसई विरार में मेरी माता जी को पूरे 30 घंटे तक बेड के लिए वेटिंग में रखा गया क्योंकि कहीं पर भी बेड खाली नहीं थे।

मेरा बेटा शशांक और उसके दोस्त बारिश में भीग भीग कर हर अस्पताल का चक्कर काटते रहे। कहीं कहीं तो कोविड अस्पताल का उद्घाटन सिर्फ कागज पर हुआ दिखा। वहाँ जाने पर जमीन पर कोई अस्पताल ही नहीं दिखा। हर जगह सीट फुल है। 30 घंटे की वेटिंग के बाद माता जी को कोविड अस्पताल में बेड मिला।

कोविड की जांच के नाम पर भी आपको लूटा जाएगा। कोविड की जांच लैब सीधे नहीं करते। एक बड़ा सिंडिकेट है। लैब को एमबीबीएस या एमडी डॉक्टर का लेटर और उनका एक फिलअप फार्म चाहिए। महाराष्ट्र में कोविड की टेस्टिंग फीस 2800 रुपये है मगर बिना एमबीबीएस या एमडी डॉक्टर के लेटर के आपका कुछ नहीं होगा।

अब एमबीबीएस या एमडी डॉक्टर को क्या पड़ी है कि आपको लेटर दे। सो आप पहले उनके अस्पताल में भर्ती होइए। दुनिया भर का फीस भरिये फिर आपका कोविड टेस्ट कराया जाएगा।

अगर आपको कोविड पॉजिटिव आ गया तो प्राइवेट कोविड अस्पताल अपना चार्ज बताएंगे कि आपको 15 हजार रुपये प्रतिदिन देना है। टेस्टिंग का जो लगेगा सो अलग से। अगर आक्सीजन लगा तो चार्ज होगा 25 हजार रुपये पर डे। एडवांस भी आपको जमा करना पड़ेगा, लगभग 50 हजार से एक लाख।

सरकारी अस्पतालों की क्या स्थित है किसी से छिपी नहीं है।

इस लूटपाट से बचना है आपको तो सिर्फ और सिर्फ एक काम कर दीजिए। उधार लेकर ही सही अपने पूरे परिवार का कम से कम 5 लाख का मेडिक्लेम ले लीजिए। अगर आप महाराष्ट्र से बाहर हैं तो प्लीज़ वहीं रुके रहिये। मैंने फेमिली का मेडिक्लेम पॉलिसी रिनुअल नहीं कराया था। आज इस गलती के लिए पछतावा हो रहा है।

और हां, मेरे टेस्ट का रिजल्ट आ गया है. मेरी रिपोर्ट निगेटिव आई है. आप सभी का धन्यवाद.

लेखक शशिकांत सिंह मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार हैं. शशिकांत देश भर के प्रिंट मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड के तहत हक दिलाने के लिए लगातार संघर्ष करने, सलाह देने, अदालतों के चक्कर लगाने, तकनीकी-कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर मीडिया मालिकों के दांवपेंच का तोड़ निकालने के लिए चर्चित हैं. शशिकांत के परिजनों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भड़ास4मीडिया टीम करती है.

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