बेव चैनल ‘फर्स्ट आई न्यूज’ को मीडियाकर्मियों की तलाश, साक्षात्कार 30 एवं 31 अगस्त को

इस वेब चैनल को चाहिए सम्पूर्ण देश में जुझारू साथी… यूपी के हर जिले में बनेगा नेटवर्क… देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वेब चैनल ‘फर्स्ट आई न्यूज़’ एवं मासिक पत्रिका ‘फर्स्ट आई’ को सभी राज्यों में पत्रकारिता में रूचि रखने वाले स्टेट हेड एवं यूपी के प्रत्येक जिले में ब्यूरो चीफ व तहसील एवं ब्लाक स्तर पर संवाददाताओं की आवश्यकता है।

लखनऊ शहर के सभी वार्डों में उत्साही युवा संवादसूत्र के रूप जुड़ने के लिए सम्पर्क करें। जिनमें टीम के गठन एवं भ्रष्टाचार से लड़ने की क्षमता हो, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा राजधानी लखनऊ सहित जिला स्तर पर मार्केटिंग हेड चाहिए। इस पद के लिए आवेदक के पास कम से कम दस वर्ष तक का मार्केटिंग के काम का अनुभव हो।

पर्दाफाश, खोजपरक और एन्टी करप्शन न्यूज को प्रमुखता से लिखने का जुनून रखने वाले युवक एवं युवतियां अपना आवेदन एक सप्ताह के अंदर निम्न मेल आई-डी पर भेज सकते हैं-

firsteye28@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें- 0522-4330066
साक्षात्कार तिथि- 30 एवं 31 अगस्त 2019 (आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपने खर्च पर आएं)
समय- 11 बजे प्रातः से शाम 5 बजे
स्थान- फर्स्ट आई न्यूज, एफ24, ईश्वरी दयाल काम्प्लेक्स, लाटूश रोड, नियर बांसमंडी चैराहा, चारबाग, लखनऊ।

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Comments on “बेव चैनल ‘फर्स्ट आई न्यूज’ को मीडियाकर्मियों की तलाश, साक्षात्कार 30 एवं 31 अगस्त को

    • jayprakash bakelal mishra says:

      सर,
      नमस्कार मैं जयप्रकाश बी मिश्रा महाराष्ट्र राज्य के अकोला जिले से हूं। मैं इस समय दैनिक भास्कर के अकोला संस्करण में क्राईम रिर्पोटर के रूप में विगत 10 वर्षों से कार्य कर रहा हूं। मुझे आपके बेव चैनल में भी काम करने का इच्छुक हूं उम्मीद करता हूं कि आप मुझे कार्य करने का एक अवसर प्रदान करेंगे।

      Reply
      • सर,
        मैंने NIMC से डिप्लोमा किया है अभी ‘गाँव कनेक्शन’ में ट्रेनी के तौर पर काम कर रही थी। आपका मोटिव यूनिक नहीं है पर इंट्रेस्टिंग है इसलिए मैं जुड़ना चाहती हूं। होप यू कंसीडर इट।
        मेरा संपर्क नम्बर- 8448524560
        9305703410,

        Reply
      • SHIV KUMAR SHUKLA says:

        श्रीमान जी! मैं पेशे से एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ। मेरी खोजी पत्रकारिता में बहुत रूचि है लेकिन कभी अवसर नहीं मिला। आप यदि मौका दें तो निश्चित ही समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, कुरीतियों एवं लालफीताशाही पर काम करना चाहूँगा।
        हलांकि अपनी संस्था के माध्यम से यह कार्य कर रहा हूँ लेकिन यदि एक मजबूत प्लेटफार्म मिले तो निश्चित रूप से अपने देश व समाज के लिए कुछ अच्छा कर सकूंगा।

        Reply
    • मोहम्मद आरिफ सम्पादक "सैटेलाइट न्यूज़" पाक्षिक पत्रिका says:

      अगर बेबाक़ लेख और खोजी पत्रकारिता पर भरोषा है और दलित पिछड़ो की दर्द से हमदर्दी तो एक बार अवशर अवश्य दें धन्यवाद।
      नमूने के तर्ज पर यह मेरा आज का लेख देख सकते हैं गांजा व्यापार पर

      स्लग-पुराने कस्बे के नए युवा कही धुंए की कस में उड़ा न दें नई जिंदगी।
      एंकर- शहर पुराना है पर ये युवक नए है जो गांजे के कस में जिंदगी के हसीन पलों को कसमोकस में डाल रहे हैं।
      हम बात कर रहे हैं गुलजार शहरों में नए युवाओं के चिल्लम छाप जिंदगी के जन्म ले चुके नए ट्रेंड की
      गांजे की कस में गिरफ्त युवाओं की जिन्दगी के जहरीले सच की
      चढी भवें और सुर्ख लाल आंखों में गुम होती नौजवानी और मां बाप के हसीन सपनों की ।
      जिसे गांजे की धुंध धूमिल कर रही है।

      वीओ-यह शहर है और शहर इन चौड़ी
      सड़कों के बाद सकरी और फिर तंग गलियों को चला जाता है।
      यह रास्ता पुनः इन्ही तंग गलियों से सकरी और फिर चौड़ी सड़क पर भागती जिंदगी के भीड़ में कहीं गुम सा हो जाता है
      हर दिन कोई एक हम सबके बीच से कम हो जाता है लेकिन जिंदगी के इन कतारों में कितने कम हुए और कितने नए जन्म हुए उसे कोई नही जानता है

      सिवाए इन शहरों और सकरी से तंग हुई पगडंडियो के
      उसी शहरों में जमती है मौत की मंडी
      जिंदगी को मौत के धुएं में ढ़केलने की भट्ठी।
      जिसे पालता रुपये का लालच और रातों रात अमीर बनने का सपना।

      जिसे साकार करने के लिए शहर में कई रसूखदार लोग तो अधिकारी करते हैं जिंदगी ही नही जिंदगियों को जहर के नाम रुपयों से बदलने और चमड़ी को चांदी का चमक देने के लिए सूखे हरे पत्ते के गांजे का काला कारोबार

      एफवीओ-बात तब तक ठीक थी जब तक छुप छुपा कर चल रही थी चोरी छुपे धुएं के इस कारोबार का धंधा फल फुल रहा था पर इस कारोबार को पुरा खुला बाजार मिल रहा है वह भी कहीं और नही प्रशासन की गोंद में और वह भी खुलेआम दिन के उजाले में थाने गेट पर पुलिस का अब इसमें संरक्षण नही है यह कहना कितना जायज है या कितना नाजायज यह तो शहर के सिपाह सालार ईमानदार जानते होंगे पर जिस तरह सबके सामने और ठीक थाने गेट पर पूर्वमध्यमिक विद्यालय मिडिल परिषर में दो झोपड़ियों में यह धुएं छोड़ने का धंधा फलफूल रहा है उससे तो यही प्रतीत हो रहा है कि यह पुलिस के संरक्षण में कारोबार चल रहा है। जनपद महराजगंज के निचलौल से मो0 आरिफ की रिपोर्ट।
      मो0- 9918107850

      Reply
  • Deepak Kumar says:

    सर, मैडम नमस्कार
    मैं दीपक कुमार उदयपुर राज. से आपके न्यूज़ वेब चैनल पर काम करना चाहता हूं ।
    मेरे से सम्पर्क करे :6376744016

    Reply
  • मोहम्मद आरिफ सम्पादक "सैटेलाइट न्यूज़" पाक्षिक पत्रिका says:

    अगर बेबाक़ लेख और खोजी पत्रकारिता पर भरोषा है और दलित पिछड़ो की दर्द से हमदर्दी तो एक बार अवशर अवश्य दें धन्यवाद।
    नमूने के तर्ज पर यह मेरा आज का लेख देख सकते हैं गांजा व्यापार पर

    स्लग-पुराने कस्बे के नए युवा कही धुंए की कस में उड़ा न दें नई जिंदगी।
    एंकर- शहर पुराना है पर ये युवक नए है जो गांजे के कस में जिंदगी के हसीन पलों को कसमोकस में डाल रहे हैं।
    हम बात कर रहे हैं गुलजार शहरों में नए युवाओं के चिल्लम छाप जिंदगी के जन्म ले चुके नए ट्रेंड की
    गांजे की कस में गिरफ्त युवाओं की जिन्दगी के जहरीले सच की
    चढी भवें और सुर्ख लाल आंखों में गुम होती नौजवानी और मां बाप के हसीन सपनों की ।
    जिसे गांजे की धुंध धूमिल कर रही है।

    वीओ-यह शहर है और शहर इन चौड़ी
    सड़कों के बाद सकरी और फिर तंग गलियों को चला जाता है।
    यह रास्ता पुनः इन्ही तंग गलियों से सकरी और फिर चौड़ी सड़क पर भागती जिंदगी के भीड़ में कहीं गुम सा हो जाता है
    हर दिन कोई एक हम सबके बीच से कम हो जाता है लेकिन जिंदगी के इन कतारों में कितने कम हुए और कितने नए जन्म हुए उसे कोई नही जानता है

    सिवाए इन शहरों और सकरी से तंग हुई पगडंडियो के
    उसी शहरों में जमती है मौत की मंडी
    जिंदगी को मौत के धुएं में ढ़केलने की भट्ठी।
    जिसे पालता रुपये का लालच और रातों रात अमीर बनने का सपना।

    जिसे साकार करने के लिए शहर में कई रसूखदार लोग तो अधिकारी करते हैं जिंदगी ही नही जिंदगियों को जहर के नाम रुपयों से बदलने और चमड़ी को चांदी का चमक देने के लिए सूखे हरे पत्ते के गांजे का काला कारोबार

    एफवीओ-बात तब तक ठीक थी जब तक छुप छुपा कर चल रही थी चोरी छुपे धुएं के इस कारोबार का धंधा फल फुल रहा था पर इस कारोबार को पुरा खुला बाजार मिल रहा है वह भी कहीं और नही प्रशासन की गोंद में और वह भी खुलेआम दिन के उजाले में थाने गेट पर पुलिस का अब इसमें संरक्षण नही है यह कहना कितना जायज है या कितना नाजायज यह तो शहर के सिपाह सालार ईमानदार जानते होंगे पर जिस तरह सबके सामने और ठीक थाने गेट पर पूर्वमध्यमिक विद्यालय मिडिल परिषर में दो झोपड़ियों में यह धुएं छोड़ने का धंधा फलफूल रहा है उससे तो यही प्रतीत हो रहा है कि यह पुलिस के संरक्षण में कारोबार चल रहा है। जनपद महराजगंज के निचलौल से मो0आरिफ की रिपोर्ट।

    Reply
  • मोहम्मद आरिफ सम्पादक "सैटेलाइट न्यूज़" पाक्षिक पत्रिका says:

    अगर बेबाक़ लेख और खोजी पत्रकारिता पर भरोषा है और दलित पिछड़ो की दर्द से हमदर्दी तो एक बार अवशर अवश्य दें धन्यवाद।
    नमूने के तर्ज पर यह मेरा आज का लेख देख सकते हैं गांजा व्यापार पर

    स्लग-पुराने कस्बे के नए युवा कही धुंए की कस में उड़ा न दें नई जिंदगी।
    एंकर- शहर पुराना है पर ये युवक नए है जो गांजे के कस में जिंदगी के हसीन पलों को कसमोकस में डाल रहे हैं।
    हम बात कर रहे हैं गुलजार शहरों में नए युवाओं के चिल्लम छाप जिंदगी के जन्म ले चुके नए ट्रेंड की
    गांजे की कस में गिरफ्त युवाओं की जिन्दगी के जहरीले सच की
    चढी भवें और सुर्ख लाल आंखों में गुम होती नौजवानी और मां बाप के हसीन सपनों की ।
    जिसे गांजे की धुंध धूमिल कर रही है।

    वीओ-यह शहर है और शहर इन चौड़ी
    सड़कों के बाद सकरी और फिर तंग गलियों को चला जाता है।
    यह रास्ता पुनः इन्ही तंग गलियों से सकरी और फिर चौड़ी सड़क पर भागती जिंदगी के भीड़ में कहीं गुम सा हो जाता है
    हर दिन कोई एक हम सबके बीच से कम हो जाता है लेकिन जिंदगी के इन कतारों में कितने कम हुए और कितने नए जन्म हुए उसे कोई नही जानता है

    सिवाए इन शहरों और सकरी से तंग हुई पगडंडियो के
    उसी शहरों में जमती है मौत की मंडी
    जिंदगी को मौत के धुएं में ढ़केलने की भट्ठी।
    जिसे पालता रुपये का लालच और रातों रात अमीर बनने का सपना।

    जिसे साकार करने के लिए शहर में कई रसूखदार लोग तो अधिकारी करते हैं जिंदगी ही नही जिंदगियों को जहर के नाम रुपयों से बदलने और चमड़ी को चांदी का चमक देने के लिए सूखे हरे पत्ते के गांजे का काला कारोबार

    एफवीओ-बात तब तक ठीक थी जब तक छुप छुपा कर चल रही थी चोरी छुपे धुएं के इस कारोबार का धंधा फल फुल रहा था पर इस कारोबार को पुरा खुला बाजार मिल रहा है वह भी कहीं और नही प्रशासन की गोंद में और वह भी खुलेआम दिन के उजाले में थाने गेट पर पुलिस का अब इसमें संरक्षण नही है यह कहना कितना जायज है या कितना नाजायज यह तो शहर के सिपाह सालार ईमानदार जानते होंगे पर जिस तरह सबके सामने और ठीक थाने गेट पर पूर्वमध्यमिक विद्यालय मिडिल परिषर में दो झोपड़ियों में यह धुएं छोड़ने का धंधा फलफूल रहा है उससे तो यही प्रतीत हो रहा है कि यह पुलिस के संरक्षण में कारोबार चल रहा है। जनपद महराजगंज के निचलौल से मो0 आरिफ की रिपोर्ट।
    मो0- 9918107850

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  • मोहम्मद आरिफ सम्पादक "सैटेलाइट न्यूज़" पाक्षिक पत्रिका says:

    ——— Forwarded message ———
    From: ISLAM relisoin of a pees Tahir
    Date: Sun, 4 Aug, 2019, 09:26
    Subject: Resume Mohammad Aarif
    To:

    एक स्क्रिप्ट भेज रहा हूँ देख सकते हैं।

    स्लग-पुराने कस्बे के नए युवा कही धुंए की कस में उड़ा न दें नई जिंदगी।
    एंकर- शहर पुराना है पर ये युवक नए है जो गांजे के कस में जिंदगी के हसीन पलों को कसमोकस में डाल रहे हैं।
    हम बात कर रहे हैं गुलजार शहरों में नए युवाओं के चिल्लम छाप जिंदगी के जन्म ले चुके नए ट्रेंड की
    गांजे की कस में गिरफ्त युवाओं की जिन्दगी के जहरीले सच की
    चढी भवें और सुर्ख लाल आंखों में गुम होती नौजवानी और मां बाप के हसीन सपनों की ।
    जिसे गांजे की धुंध धूमिल कर रही है।

    वीओ-यह शहर है और शहर इन चौड़ी
    सड़कों के बाद सकरी और फिर तंग गलियों को चला जाता है।
    यह रास्ता पुनः इन्ही तंग गलियों से सकरी और फिर चौड़ी सड़क पर भागती जिंदगी के भीड़ में कहीं गुम सा हो जाता है
    हर दिन कोई एक हम सबके बीच से कम हो जाता है लेकिन जिंदगी के इन कतारों में कितने कम हुए और कितने नए जन्म हुए उसे कोई नही जानता है

    सिवाए इन शहरों और सकरी से तंग हुई पगडंडियो के
    उसी शहरों में जमती है मौत की मंडी
    जिंदगी को मौत के धुएं में ढ़केलने की भट्ठी।
    जिसे पालता रुपये का लालच और रातों रात अमीर बनने का सपना।

    जिसे साकार करने के लिए शहर में कई रसूखदार लोग तो अधिकारी करते हैं जिंदगी ही नही जिंदगियों को जहर के नाम रुपयों से बदलने और चमड़ी को चांदी का चमक देने के लिए सूखे हरे पत्ते के गांजे का काला कारोबार

    एफवीओ-बात तब तक ठीक थी जब तक छुप छुपा कर चल रही थी चोरी छुपे धुएं के इस कारोबार का धंधा फल फुल रहा था पर इस कारोबार को पुरा खुला बाजार मिल रहा है वह भी कहीं और नही प्रशासन की गोंद में और वह भी खुलेआम दिन के उजाले में थाने गेट पर पुलिस का अब इसमें संरक्षण नही है यह कहना कितना जायज है या कितना नाजायज यह तो शहर के सिपाह सालार ईमानदार जानते होंगे पर जिस तरह सबके सामने और ठीक थाने गेट पर पूर्वमध्यमिक विद्यालय मिडिल परिषर में दो झोपड़ियों में यह धुएं छोड़ने का धंधा फलफूल रहा है उससे तो यही प्रतीत हो रहा है कि यह पुलिस के संरक्षण में कारोबार चल रहा है। जनपद महराजगंज के निचलौल से मो0 आरिफ की रिपोर

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  • मोहम्मद आरिफ सम्पादक "सैटेलाइट न्यूज़" पाक्षिक पत्रिका says:

    एक स्क्रिप्ट भेज रहा हूँ देख सकते हैं।

    स्लग-पुराने कस्बे के नए युवा कही धुंए की कस में उड़ा न दें नई जिंदगी।
    एंकर- शहर पुराना है पर ये युवक नए है जो गांजे के कस में जिंदगी के हसीन पलों को कसमोकस में डाल रहे हैं।
    हम बात कर रहे हैं गुलजार शहरों में नए युवाओं के चिल्लम छाप जिंदगी के जन्म ले चुके नए ट्रेंड की
    गांजे की कस में गिरफ्त युवाओं की जिन्दगी के जहरीले सच की
    चढी भवें और सुर्ख लाल आंखों में गुम होती नौजवानी और मां बाप के हसीन सपनों की ।
    जिसे गांजे की धुंध धूमिल कर रही है।

    वीओ-यह शहर है और शहर इन चौड़ी
    सड़कों के बाद सकरी और फिर तंग गलियों को चला जाता है।
    यह रास्ता पुनः इन्ही तंग गलियों से सकरी और फिर चौड़ी सड़क पर भागती जिंदगी के भीड़ में कहीं गुम सा हो जाता है
    हर दिन कोई एक हम सबके बीच से कम हो जाता है लेकिन जिंदगी के इन कतारों में कितने कम हुए और कितने नए जन्म हुए उसे कोई नही जानता है

    सिवाए इन शहरों और सकरी से तंग हुई पगडंडियो के
    उसी शहरों में जमती है मौत की मंडी
    जिंदगी को मौत के धुएं में ढ़केलने की भट्ठी।
    जिसे पालता रुपये का लालच और रातों रात अमीर बनने का सपना।

    जिसे साकार करने के लिए शहर में कई रसूखदार लोग तो अधिकारी करते हैं जिंदगी ही नही जिंदगियों को जहर के नाम रुपयों से बदलने और चमड़ी को चांदी का चमक देने के लिए सूखे हरे पत्ते के गांजे का काला कारोबार

    एफवीओ-बात तब तक ठीक थी जब तक छुप छुपा कर चल रही थी चोरी छुपे धुएं के इस कारोबार का धंधा फल फुल रहा था पर इस कारोबार को पुरा खुला बाजार मिल रहा है वह भी कहीं और नही प्रशासन की गोंद में और वह भी खुलेआम दिन के उजाले में थाने गेट पर पुलिस का अब इसमें संरक्षण नही है यह कहना कितना जायज है या कितना नाजायज यह तो शहर के सिपाह सालार ईमानदार जानते होंगे पर जिस तरह सबके सामने और ठीक थाने गेट पर पूर्वमध्यमिक विद्यालय मिडिल परिषर में दो झोपड़ियों में यह धुएं छोड़ने का धंधा फलफूल रहा है उससे तो यही प्रतीत हो रहा है कि यह पुलिस के संरक्षण में कारोबार चल रहा है। जनपद महराजगंज के निचलौल से मो0 आरिफ की रिपोर

    Reply
  • डॉ के आर गोदारा says:

    सर,
    नमस्कार मैं डॉ के आर गोदारा जोधपुर राजस्थान से हूं, पत्रकारिता में 25 वर्षों से कार्यरत, पत्रकारिता में पीएचडी हूं, वर्तमान में राजस्थान खोज खबर जोधपुर में काम कर रहा हूं, में आपके वेब न्यूज में काम करना चाहता हूं। मोबाइल 9414118855 है।

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