IAS दंपत्ति का भी पक्ष लिया जाना चाहिए था कि उन्हें स्टेडियम में क्यों टहलना पड़ता था!

संजय कुमार सिंह-

अपनी खबर से आईएएस दंपत्ति का तबादला करा देने की खबर!

पुराने समय में कोई ऐसा करता नही और करता तो संपादक के नाम पत्र ही काफी होता। अब फोटो के साथ खबर छपी तो तबादला भर हुआ और लोग खुश हैं। इससे समझ में आता है कि आईएएस दंपत्ति के खिलाफ खबरें छपना कितना मुश्किल हो गया है। नेताओं और गुंड़ों, पुलिसियों, ठेकादरों की मनमानी का अनुमान लगाइए। मुझे नहीं लगता है कि अपनी पीठ खुद ठोंकने वाली इस खबर को सिंगल कॉलम से ज्यादा जगह देनी थी। असल में यह खबर भी सरकार का प्रचार ही है – देखो कितनी जल्दी कार्रवाई होती है। जहां नहीं हो रही है वह तो छपने से रही।

इससे वॉक करने वालों की मुश्किल का भी पता चलता है. कायदे से उस दंपत्ति का भी पक्ष लिया जाना चाहिए था कि उन्हें स्टेडियम में क्यों टहलना पड़ता था। वैशाली (गाजियाबाद) में टहलने की जगह (सुविधा) नहीं के बराबर है। अगर आप गाड़ी से पार्क नहीं जा सकते हैं या पार्क में गोल-गोल घूमना नहीं चाहते हैं तो टहलने लायक कोई जगह नहीं है। ना तो सड़कों के किनारे पैदल चलने लायक फुटपाथ है और ना साइकिल ट्रैक को इस लायक रहने दिया गया। पूरे मोहल्ले में बदूबदार नालियां खुली पड़ी हैं और जहां -तहां कूड़े का ढेर लगा है। किसी पार्क में लोग हंस रहे होते हैं तो कहीं जय श्रीराम का नारा लग रहा होता है। उसमें कौन घुसे?

तबादले से दिल्ली के प्रदूषण से मुक्ति मिली पर बाकियों का क्या होगा? जहां तक खबरों का सवाल है – बागपत वाली खबर टॉप पर क्यों नहीं हो सकती थी?



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One comment on “IAS दंपत्ति का भी पक्ष लिया जाना चाहिए था कि उन्हें स्टेडियम में क्यों टहलना पड़ता था!”

  • यात says:

    कुत्ता कहाँ गया तुम उन्ही का पक्ष ले रहे हो

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