विज्ञापन टारगेट पूरा न करने पर आईबीसी24 ने अपने कई स्ट्रिंगरों को कार्यमुक्त किया

म.प्र के भोपाल में आयोजित होने जा रहा स्वर्णशारदा कार्यक्रम को सफल बनाने का जिम्मा IBC24 न्यूज़ चैनल ने जिले के अपने स्ट्रिंगरों के कंधों पर डाल दिया है। सभी से कहा गया है कि एक एक लाख रुपये का टारगेट पूरा करना होगा। मतलब साफ है, अगर IBC24 में रहना है तो एक लाख रुपये का विज्ञापन लाकर देना होगा।

बीते दिनों इंदौर व भोपाल में परिवेश द्वारा मीटिंग आयोजित की गई। इसमें वत्सल श्रीवातस्व की अहम भूमिका रही। शिरीष मिश्रा द्वारा जिन स्ट्रिंगरों को नियुक्ति दी गई वह भोपाल नरेश की आखों में खटक रहे थे। उन्हें तत्काल मीटिंग में ही IBC24 के तमाम ग्रुपों से बाहर कर दिया गया क्योंकि वह IBC24 के लिए वसूली करने में ‘निकम्मे’ थे।

सूत्रों का कहना है कि नागदा से पीयूष, देपालपुर से यतनेश सेन, रतलाम से लालचंद राठौर, आगर मालवा से विजय बागडी को हटा दिया गया है। स्ट्रिंगरों को यह कह कर हटाया गया कि तुम्हारे काम का परफारमेंस ठीक नहीं है और तुम IBC24 के योग्य नहीं हो। लेकिन हटाए जाने का असली कारण तो सबको पता है।

भोपाल मीटिंग में नौशाद ने IBC24 से त्याग पत्र दे दिया था। 9 को इन्दौर में हुई मीटिंग में तय हुआ कि 25 या 28 मई को मीटिंग पुनः की जायेगी व जो एक लाख का विज्ञापन करने में असफल रहा उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा। इसी किस्म की मीटिंग जबलपुर में भी रखी गई है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.



भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप ज्वाइन करें-  https://chat.whatsapp.com/JYYJjZdtLQbDSzhajsOCsG

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate

भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849



Comments on “विज्ञापन टारगेट पूरा न करने पर आईबीसी24 ने अपने कई स्ट्रिंगरों को कार्यमुक्त किया

  • Shashikant Mukati says:

    आदरणीय संपादकजी

    यह खबर एक तरफा है और अधूरी जानकारी है। मैं भी इसी संस्था का एक कर्मचारी हूं और मीटिंग के अंदर उपस्थित था। स्वर्ण शारदा कोई पहली बार नहीं हो रहा है यह पिछले कई सालों से होता आ रहा है और देश के बहुत महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में से एक है।
    इस कार्यक्रम में प्रतिभावान बच्चों को सम्मानित किया जाता है।

    अब हम आते हैं असली मुद्दों पर जिन रिपोर्टरों को और स्टिंगर को निकाला गया है यह लोग एकदम निष्क्रिय थे। पिछले 3 महीने की रिपोर्ट के आधार पर इन्हें कंपनी ने कार्य से मुक्त किया है।
    आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि किसे जिले का रिपोर्टर पिछले 3 महीने से एक भी खबर नहीं भेज पा रहा था। क्या कोई भी कंपनी ऐसे व्यक्ति को अपनी संस्था में रखना पसंद करेगी। मेरा प्रश्न तो आप ही से है कि अगर आप किसी कंपनी के न्यूज़ हैड होते और कोई व्यक्ति दो-तीन महीने से कोई खबर नहीं भेज पा रहा था तो क्या आप उसे अपनी संस्था में जगा देते…..?
    आदरणीय आप से निवेदन है कि खबर को एकतरफा ना लिखें।
    आईबीसी के अंदर हर व्यक्ति को एक परिवार की तरह रखा जाता है और हर सुख दुख में कंपनी खड़ी रहती है।
    लेकिन साथ में कंपनी यह भी उम्मीद करती है कि हर व्यक्ति ईमानदारी से कार्य करें जब शब्द इमानदारी लिखा हो तो उसका मतलब सिर्फ पैसों से नहीं होता है कार्य से भी होता है जो लोग कार्य में समय की चोरी करते हैं वह भी बेईमान ही कहलाएंगे।

    अगर आप मीटिंग में उपस्थित होते तो शायद आप भी अपनी हंसी ना रोक पाते क्योंकि जब इन लोगों से पूछा गया कि आपने खबर क्यों नहीं भेजी तो जो उत्तर इन लोगों ने दिए थे वह चौथी पांचवी के बच्चों जैसे थे किसी ने कहा मेरे घर में शादी थी किसी ने कहा कि मेरी तबीयत ठीक नहीं थी ।
    उम्र के इस पड़ाव में आकर क्या इस प्रकार के स्क्यूज देना ठीक है।

    शशिकांत मुकाती
    इंदौर

    Reply
    • Sagar Tiwari says:

      भड़ास 4 मीडिया ने 100% सत्य खबर प्रकाशित की है यदि इस खबर में कोई त्रुटि होती तो प्रदेश हेड सहित नवागत संपादक अपनी सफाई देते नही फिरते, क्योंकि इन सभी को अपनी नौकरी बचाना है।

      मैं एक आम व्यक्ति हु जो प्रदेश ही सहित देश के लगभग सभी मीडिया संस्थानों के स्ट्रिंगरो और रिपोर्टरों के संपर्क में रहता हु, हाल ही रायपुर, इंदौर, भोपाल और जबलपुर में हुई मीटिंग का निष्कर्ष यह है कि अब संस्थान के जिम्मेदारों को खबर से नही पैसे की वसूली से मतलब है, और किस तरह से बाजार से पैसे की उगाई करना है यह हुनर भी नवागत संपादक और प्रदेश हेड द्वारा स्ट्रिंगरों को सिखाया गया है, साथ ही यह भी हिदायत दी गई है कि जो भी स्ट्रिंगर निर्धारित समय पर लूट की निर्धारित राशि संस्था को जमा नहीं करता है तो उसे तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा, इस बात का यह प्रमाण है कि दो राज्यों के पांच प्रमुख शहरों में हुई मीटिंग में जिन स्ट्रिंगरों ने यह काम करने से साफ मना किया है, उन्हे बाहर का रास्ता दिखाया गया है, ऐसे में संस्था का व्यक्ति(श्री मुकाती जी) सफेद झूठ बोलकर चैनल मालिक की बरसो की तपस्या को खाक करने में अपनी भूमिका निभा रहे है।

      मीटिंग को लेकर मेरे पास यह पुख्ता जानकारी है कि सरकारी तंत्र(जिला पंचायत सहित अन्य) में काम कर रहे मुख्य अधिकारियों को कैसे ब्लैकमेल कर राशि लूटनी है इसका प्रशिक्षण भी प्रदेश हेड और नवागत संपादक द्वारा मीटिंग में दिया गया है,

      यह पत्र पढ़ने के बाद शशिकांत मुकाती जी के साथ ही IBC 24 के किसी भी मेंबर के पास शायद कोई जवाब नहीं होगा, क्योंकि मेरे पास कई स्ट्रिंगरों के शपथ–पत्र भी मौजूद है जो समय आने पर उजागर किए जाएंगे।

      राशि की वसूली को लेकर IBC के स्ट्रिंगर की इंदौर में हुई मीटिंग में नीमच से विजित राव, झाबुआ से हरीश , मंदसौर से दीपक शर्मा, धार से अमित , रतलाम से लालचंद राठौर द्वारा सवाल किए जाने पर इन्हें अशोभनीय भाषा का उपयोग करते हुए जलील किया गया, जलील करने के पैमाने का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि मीटिंग में मौजूद स्ट्रिंगरों की आंखे नम हो गई, शायद उन्हें यह महसूस हुआ होंगा की जिस संस्था की प्रतिष्ठा को लेकर वह आज तक संघर्ष कर रहे थे उस संस्थान की बाग–डोर प्रदेश हेड और संपादक के रूप में वसूली भाई को दे दी गई है।

      IBC 24 के वसूली नामक स्वर्ण शारदा कार्यक्रम की पोल खुलने व स्ट्रिंगरो को निकालने पर संस्था के प्रमुखों द्वार मुकाती जी के माध्यम से अपनी नौकरी बचाने का प्रयास किया जा रहा है,

      IBC के नए दौर में हाल ही में हुई मीटिंग का यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अब खबरों से ज्यादा, वसूली अधिक ध्यान देने को कहा जा रहा है। शायद यही वजह होगी की आने वाले समय में कई स्ट्रिंगर खुद ही संस्था को छोड़ देंगे।

      संस्था के प्रदेश हेड और जिम्मेदारों द्वारा स्ट्रिंगर और रिपोर्टर के रूप में अपराधी प्रवत्ति के लोगो को पसंद किया जा रहा है, क्योंकि बीते महीनो में भोपाल और देवास के रिपोर्टर और स्ट्रिंगर पर अपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ है बावजूद इसके प्रदेश हेड द्वारा उन्हें निजी स्वार्थ के चलते संरक्षण दिया जा रहा है। जो इस बात को स्पष्ट करता है कि प्रदेश हेड को संस्था की ख्याति से कोई लेना–देना नही है।

      IBC के ईमानदारी का बजना बंद कीजिए
      शशिकांत मुकाती जी । ये ही सत्य हे।

      Reply
  • Sagar Tiwari says:

    भड़ास 4 मीडिया ने 100% सत्य खबर प्रकाशित की है यदि इस खबर में कोई त्रुटि होती तो प्रदेश हेड सहित नवागत संपादक अपनी सफाई देते नही फिरते, क्योंकि इन सभी को अपनी नौकरी बचाना है।

    मैं एक आम व्यक्ति हु जो प्रदेश ही सहित देश के लगभग सभी मीडिया संस्थानों के स्ट्रिंगरो और रिपोर्टरों के संपर्क में रहता हु, हाल ही रायपुर, इंदौर, भोपाल और जबलपुर में हुई मीटिंग का निष्कर्ष यह है कि अब संस्थान के जिम्मेदारों को खबर से नही पैसे की वसूली से मतलब है, और किस तरह से बाजार से पैसे की उगाई करना है यह हुनर भी नवागत संपादक और प्रदेश हेड द्वारा स्ट्रिंगरों को सिखाया गया है, साथ ही यह भी हिदायत दी गई है कि जो भी स्ट्रिंगर निर्धारित समय पर लूट की निर्धारित राशि संस्था को जमा नहीं करता है तो उसे तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा, इस बात का यह प्रमाण है कि दो राज्यों के पांच प्रमुख शहरों में हुई मीटिंग में जिन स्ट्रिंगरों ने यह काम करने से साफ मना किया है, उन्हे बाहर का रास्ता दिखाया गया है, ऐसे में संस्था का व्यक्ति(श्री मुकाती जी) सफेद झूठ बोलकर चैनल मालिक की बरसो की तपस्या को खाक करने में अपनी भूमिका निभा रहे है।

    मीटिंग को लेकर मेरे पास यह पुख्ता जानकारी है कि सरकारी तंत्र(जिला पंचायत सहित अन्य) में काम कर रहे मुख्य अधिकारियों को कैसे ब्लैकमेल कर राशि लूटनी है इसका प्रशिक्षण भी प्रदेश हेड और नवागत संपादक द्वारा मीटिंग में दिया गया है,

    यह पत्र पढ़ने के बाद शशिकांत मुकाती जी के साथ ही IBC 24 के किसी भी मेंबर के पास शायद कोई जवाब नहीं होगा, क्योंकि मेरे पास कई स्ट्रिंगरों के शपथ–पत्र भी मौजूद है जो समय आने पर उजागर किए जाएंगे।

    राशि की वसूली को लेकर IBC के स्ट्रिंगर की इंदौर में हुई मीटिंग में नीमच से विजित राव, झाबुआ से हरीश , मंदसौर से दीपक शर्मा, धार से अमित , रतलाम से लालचंद राठौर द्वारा सवाल किए जाने पर इन्हें अशोभनीय भाषा का उपयोग करते हुए जलील किया गया, जलील करने के पैमाने का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि मीटिंग में मौजूद स्ट्रिंगरों की आंखे नम हो गई, शायद उन्हें यह महसूस हुआ होंगा की जिस संस्था की प्रतिष्ठा को लेकर वह आज तक संघर्ष कर रहे थे उस संस्थान की बाग–डोर प्रदेश हेड और संपादक के रूप में वसूली भाई को दे दी गई है।

    IBC 24 के वसूली नामक स्वर्ण शारदा कार्यक्रम की पोल खुलने व स्ट्रिंगरो को निकालने पर संस्था के प्रमुखों द्वार मुकाती जी के माध्यम से अपनी नौकरी बचाने का प्रयास किया जा रहा है,

    IBC के नए दौर में हाल ही में हुई मीटिंग का यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अब खबरों से ज्यादा, वसूली अधिक ध्यान देने को कहा जा रहा है। शायद यही वजह होगी की आने वाले समय में कई स्ट्रिंगर खुद ही संस्था को छोड़ देंगे।

    संस्था के प्रदेश हेड और जिम्मेदारों द्वारा स्ट्रिंगर और रिपोर्टर के रूप में अपराधी प्रवत्ति के लोगो को पसंद किया जा रहा है, क्योंकि बीते महीनो में भोपाल और देवास के रिपोर्टर और स्ट्रिंगर पर अपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ है बावजूद इसके प्रदेश हेड द्वारा उन्हें निजी स्वार्थ के चलते संरक्षण दिया जा रहा है। जो इस बात को स्पष्ट करता है कि प्रदेश हेड को संस्था की ख्याति से कोई लेना–देना नही है।

    IBC के ईमानदारी का बजना बंद कीजिए
    शशिकांत मुकाती जी । ये ही सत्य हे।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code