दैनिक जागरण के मामले में जल्‍दबाज़ी के चलते कहीं गलत कंपनी तो फंस नहीं रही?

Abhishek Srivastava : हर जगह सर्वेक्षण करने वाली कंपनी का नाम RDI (Resource Development International) चल रहा है, चुनाव आयोग ने भी इसी के खिलाफ़ एफआइआर करने का निर्देश दे डाला है जबकि कंपनी के मालिकान सिर पकड़ कर बैठे हैं कि ये क्‍या हो गया। बहुत संभव है कि सर्वेक्षण करने वाली कंपनी का नाम RDI (Research and Developmenr Initiative) है जिसने 2015 के दिल्‍ली विधानसभ चुनाव में भाजपा को 45 सीटें दी थीं। कहीं ऐसा तो नहीं कि दैनिक जागरण के मामले में जल्‍दबाज़ी के चलते गलत कंपनी फंस रही है?

Nityanand Gayen : अब चूंकि आरडीआइ यानी रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक राजीव गुप्‍ता ने भी इस घटना से अज्ञानता जताते हुए अपना पल्‍ला झाड़ लिया है, तो सवाल उठता है कि क्‍या दि वायर ने तो जल्‍दबाज़ी में कहीं किसी गलत कंपनी को इस मामले में नहीं फंसा दिया।

Atul Chaurasia : जागरण डॉट कॉम के संपादक शेखर त्रिपाठी ने अपनी धक्कमपेल पत्रकारिता से जेल जाकर अपना इहलोक और परलोक दोनों सुधार लिया है. अब वो बाकी जिंदगी आराम से भगवा खेमें को अपनी इस उपलब्धि के सहारे जोतते रहेंगे. जागरण और भगवा के इस पावन प्रेम संबंध को अपना भी हैपी वैलेंटाइन है

पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव, नित्यानंद और अतुल चौरसिया की एफबी वॉल से.



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