दैनिक जागरण को लगा झटका, रामजी के तबादले पर श्रम विभाग ने लगाई रोक

कानपुर। “स्वघोषित चैम्पियन” दैनिक जागरण के मालिकान को ताजा झटका कानपुर श्रम विभाग से मिला है। सहायक श्रम आयुक्त आरपी तिवारी ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुरूप वेतन एवं बकाये की मांग करने वाले दैनिक जागरण कानपुर में कार्यरत कर्मचारी रामजी मिश्रा के सिलीगुड़ी स्थानांतरण पर फिलहाल रोक लगा दी है। श्री तिवारी द्वारा जारी आदेश में दैनिक जागरण प्रबंधन की ओर से रामजी मिश्रा का कानपुर कार्यालय से सिलिगुड़ी किए गए तबादले को अनुचित एवं अवैधानिक करार दिया गया है।

दैनिक जागरण वालों ने भी छापा लंबा-चौड़ा माफीनामा : ‘नंबर वन का हमारा दावा गलत था’

अमर उजाला लखनऊ अखबार में पिछले दिनों एक माफीनामा छपा था कि हमने गलती से खुद को नंबर वन बता दिया. ऐसा ही माफीनामा अब दैनिक जागरण पटना अखबार में छपा है. नंबर वन होने के फर्जी दावों पर कसी गई नकेल के कारण इन अखबारों को माफीनामा छापना पड़ रहा है.

जिस पत्रकार ने देह व्यापार का खुलासा किया, दैनिक जागरण ने उसे ब्लैकमेलर बता दिया… पीड़ित ने भेजा लीगल नोटिस

Ranjeet Yadav : मित्रों दैनिक जागरण के प्रधान संपादक / स्थानीय संपादक को मैंने लीगल नोटिस भेज दिया है. 15 दिनों के अंदर गलत ख़बर पर खेद प्रकाशित नही करेंगे तो मानहानि का मामला कोर्ट में किया जाएगा. गोरखपुर में बीते दिनों मैंने एक देह व्यापार को लेकर पोस्ट डाली थी. उस प्रकरण को मैंने बड़ी गंभीरता से उठाया था जिसे गोरखपुर पुलिस ने संज्ञान में लेते हुए कार्यवाही की और सभी अखबारों ने इस प्रकरण पर खबर लिखी. किन्तु दैनिक जागरण ने अपने खबर में मुझे ही ब्लैकमेलर बना दिया. उनकी खबर में क्या लिखा गया है, मैं बताता हूँ. साथ ही, मेरे मन मे उठे सवालों को भी आप जानिए.

दैनिक जागरण के कथित अवैध मुंगेर संस्करण की जांच एक माह में करने का आदेश जारी

मुंगेर (बिहार) : बिहार सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव सह द्वितीय अपीलीय प्राधिकार आतीश चन्द्रा ने मुकदमा संख्या- 424110108021700412 । 2 ए में मुंगेर के लोक प्राधिकार सह जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी केके उपाध्याय को दैनिक जागरण अखबार के मुंगेर के लिए प्रकाशित कथित अवैध ”मुंगेर संस्करण” के मामले में एक माह में जांच रिपोर्ट राज्य सचिव को प्रेषित करने का आदेश जारी किया है।

जांच करने पहुंचे श्रम अधीक्षक को दैनिक जागरण के मैनेजर ने गेट के अंदर ही नहीं घुसने दिया

कानून और नियम को ठेंगे पर रखता है दैनिक जागरण प्रबन्धक… गया के श्रम अधीक्षक के साथ दैनिक जागरण प्रबंधक ने की गुंडागर्दी… नहीं करने दिया प्रेस की जांच… पंकज कुमार दैनिक जागरण गया के वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं. इन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड मांगा तो प्रबंधन ने इन्हें परेशान करना शुरू कर दिया… पंकज ने बिहार के श्रम आयुक्त गोपाल मीणा के यहां एक आवेदन दिनांक 26.07.2017 को दिया था.. इसमें पंकज कुमार ने आरोप लगाया था कि गया सहित दैनिक जागरण बिहार के सभी चार प्रकाशन केंद्र में श्रम कानून के तहत मीडियाकर्मियों और गैर मीडियाकर्मियों को लाभ नहीं दिया जा रहा है. 90 प्रतिशत से अधिक पत्रकारों एवं गैर-पत्रकारों का प्राविडेंट फंड, स्वास्थ्य बीमा, सर्विस बुक समेत कई सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है. साथ ही माननीय सर्वोच्च्य न्यायालय द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड के तहत ग्रेड की घोषणा भी नहीं की गई है.

बिहार में दैनिक जागरण कर रहा अपने कर्मियों का शोषण, श्रम आयुक्त ने जांच के आदेश दिए

दैनिक जागरण, गया (बिहार) के पत्रकार पंकज कुमार ने श्रम आयुक्त बिहार गोपाल मीणा के यहाँ एक आवेदन दिनांक लगाया था. पिछले महीने 26 जुलाई को दिए गए इस आवेदन में पंकज ने आरोप लगाया था कि गया जिले सहित जागरण के बिहार के सभी चार प्रकाशन केंद्र में श्रम कानून के तहत मीडियाकर्मियों और गैर-मीडियाकर्मियों को कई किस्म का लाभ नहीं दिया जा रहा है. यहां 90 प्रतिशत से अधिक पत्रकार एवं गैर पत्रकारों का प्राविडेंट फंड, स्वास्थ्य बीमा, सर्विस बुक सहित कई सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है. साथ ही माननीय सर्वोच्च्य न्यायालय द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड के तहत सेलरी, पद और ग्रेड की जो घोषणा की जानी थी, उसे भी नहीं नहीं किया गया है.

मजीठिया पर आज आएगा कोर्ट का फैसला, जागरणकर्मियों ने बैठक कर एकजुटता दिखाई

आज माननीय सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेतन आयोग को लेकर फैसला आना है। इस वेतन आयोग के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने 7 फरवरी 2014 को अपना फैसला सुनाया था और अख़बार मालिकानों से स्पष्ट कहा था कि वर्कर की राशि एक साल में 4 किश्तों में दें, लेकिन मालिकान 20 जे का बहाना बनाते रहे और आज तक कर्मचारियों को फूटी कौड़ी भी नहीं दी। तरह तरह से परेशान किया सो अलग। जिन्होंने मजीठिया की मांग की, कंपनियों ने उनका तबादला किया। निलंबन और सेवा समाप्ति का फरमान सुना दिया सो अलग। बावजूद इसके वर्कर हारे नहीं और अपनी लड़ाई लड़ते रहे। इस लड़ाई का कल अंतिम दिन होगा, जब माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला आएगा।

इन दोनों बड़े अखबारों में से कोई एक बहुत बड़ा झुट्ठा है, आप भी गेस करिए

हिंदुस्तान और दैनिक जागरण अखबारों ने एक रोज पहले पन्ने पर लीड न्यूज जो प्रकाशित की, उसके फैक्ट में जमीन-आसमान का अंतर था. हिंदुस्तान लिख रहा है कि यूपी में सड़कों के लिए केंद्र ने पचास हजार करोड़ रुपये का तोहफा दिया वहीं दैनिक जागरण बता रहा है कि सड़कों के लिए राज्य को दस हजार करोड़ रुपये मिलेंगे. आखिर दोनों में से कोई एक तो झूठ बोल रहा है.

दैनिक जागरण आफिस में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम पढ़ना मना है!

अभिव्यक्ति की आजादी का झूठा ढिंढोरा पीटता है दैनिक जागरण… मीडिया वालों की खबर देने वाले पोर्टल भड़ास4मीडिया पर लगा रखा है प्रतिबंध… बड़े-बड़े लेखों और मंचों के जरिए दैनिक जागरण के संपादक-मालिक लोग हमेशा से आवाज उठाते रहते हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी पर कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए. ये लोग अपने मीडिया कर्मचारियों को भी नसीहत देते हैं कि तथ्य के साथ बातों को रखा जाए, लोकतंत्र में हर खंभे को सम्मान दिया जाए. लेकिन वास्तविकता कुछ और भी है. आज उस समय बहुत बुरा फील हुआ जब पत्रकारिता जगत की खबर देने वाले पोर्टल भड़ास4मीडिया के बारे में पता चला कि इस पर दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ऑफिस में पूर्णत प्रतिबंधित लगाया हुआ है.

शेम शेम दैनिक जागरण! मजीठिया मांगने पर संकट से घिरे वरिष्ठ पत्रकार का जम्मू कर दिया तबादला

दैनिक जागरण बिहार का अमानवीय शोषणकारी चेहरा…दैनिक जागरण के वरिष्ठ एवं ईमानदार पत्रकार पंकज कुमार का मजीठिया के अनुसार वेतन मांगने पर जम्मू किया तबादला…. वीआरएस लेने  के लिए जागरण प्रबंधन बना रहा है दबाव… बिहार के गया जिले में दैनिक जागरण के पत्रकार पंकज कुमार अपनी बेख़ौफ़ एवं निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. ये दैनिक जागरण के बिहार संस्करण के स्थापना काल से उससे जुड़े हुए हैं.

आइडिया चोरी करने और धमकाने के मामले में दैनिक जागरण पर हुआ मुकदमा

दैनिक जागरण वाले चोरी और सीनाजोरी के लिए कुख्यात हैं. ताजा मामला पटना का है. मानस कुमार उर्फ राजीव दुबे अपनी कंपनी चलाते हैं. उन्होंने बिल्डरों और आर्किटेक्ट्स पर आधारित ‘बिल्डकान’ नामक एक प्रोग्राम करने का इरादा बनाया. इसके लिए गल्ती से उन्होंने एक ऐसे आर्किटेक्ट (नाम- विष्णु कुमार चौधरी) की मदद ली जो दैनिक जागरण से भी जुड़ा हुआ था. उस आर्किटेक्ट ने सारा आइडिया दैनिक जागरण वालों को बता दिया.

दिल्ली की श्रम अदालत ने दैनिक जागरण पर ठोंका दो हजार रुपये का जुर्माना

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले से जुड़े दिलीप कुमार द्विवेदी बनाम जागरण प्रकाशन मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा श्रम न्यायालय ने दैनिक जागरण पर दो हजार रुपये का जुर्माना ठोंक दिया है। इस जुर्माने के बाद से जागरण प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है। बताते हैं कि गुरुवार को दिल्ली की कड़कड़डूमा श्रम न्यायालय में दैनिक जागरण के उन 15 लोगों के मामले की सुनवाई थी जिन्होंने मजीठिया बेज बोर्ड की मांग को लेकर जागरण प्रबंधन के खिलाफ केस लगाया था। इन सभी 15 लोगों को बिना किसी जाँच के झूठे आरोप लगाकर टर्मिनेट कर दिया गया था। गुरुवार को जब न्यायालय में पुकार हुयी तो इन कर्मचारियों के वकील श्री विनोद पाण्डे ने अपनी बात बताई।

दैनिक जागरण ने रैली की पुरानी तस्वीर छापकर मोदी को तेल लगाने का नया कीर्तिमान बनाया!

Deshpal Singh Panwar : दैनिक जागरण जैसा सबसे बड़ा कहलाने वाला अखबार अगर सबसे खराब हरकत करे तो पत्रकारिता कहां जाएगी.. वैसे तो सब जानते हैं कि ये अखबार जिसकी सरकार हो उसका पक्ष लेता है लेकिन जबसे मोदी सरकार आई है तबसे से तो ये मोदी सरकार की पब्लिसिटी में भाजपा को भी पीछे छोड़ गया है। बनारस में कल मोदी रोड़ शो कर रहे थे और ये अखबार सबको पछाड़ने की तैयारी कर रहा था… दैनिक जागरण के समझदार मीडिया साथियों ने 2014 की मोदी की तस्वीर लगाकर दिखा दिया कि हम सबसे आगे। बहुत खूब…

वरिष्ठ पत्रकार देश पाल सिंह पंवार की एफबी वॉल से.

दैनिक जागरण के मामले में जल्‍दबाज़ी के चलते कहीं गलत कंपनी तो फंस नहीं रही?

Abhishek Srivastava : हर जगह सर्वेक्षण करने वाली कंपनी का नाम RDI (Resource Development International) चल रहा है, चुनाव आयोग ने भी इसी के खिलाफ़ एफआइआर करने का निर्देश दे डाला है जबकि कंपनी के मालिकान सिर पकड़ कर बैठे हैं कि ये क्‍या हो गया। बहुत संभव है कि सर्वेक्षण करने वाली कंपनी का नाम RDI (Research and Developmenr Initiative) है जिसने 2015 के दिल्‍ली विधानसभ चुनाव में भाजपा को 45 सीटें दी थीं। कहीं ऐसा तो नहीं कि दैनिक जागरण के मामले में जल्‍दबाज़ी के चलते गलत कंपनी फंस रही है?

भोंपू को अख़बार न कहो प्रियदर्शन… जागरण कोई अख़बार है! : विमल कुमार

Vimal Kumar : दो साल की सज़ा या जुर्माना या दोनों एक साथ का प्रावधान है। ये लोग अदालत को मैनेज कर केवल जुर्माना देकर बच जाएंगे। जिसने विज्ञापन दिया उसे भी जेल की सजा हो। जागरण कोई अख़बार है, भोंपू को अख़बार न कहो प्रियदर्शन!

एक्जिट पोल छाप कर दैनिक जागरण फंसा, आयोग ने कहा- FIR दर्ज करो

भारत के चुनाव आयुक्त ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के 15 जिले के चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दैनिक जागरण के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में संपादकीय विभाग के मीडिया हेड के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करायें।

जागरण न्यूज़ पेपर के MD आशुतोष मोहन की गन्दी बात सुनिए

मुझसे जुलाई 2015 में छतरपुर की जागरण रीवा ब्यूरोशिप और एजेंसी के नाम पर इंदौर रीवा जोन जागरण के एमडी आशुतोष मोहन ने HDFC का 25000 का चेक लिया था, जो कि 28-07-15 को क्लीयर भी हो गया। बाद में इन लोगों ने किसी तरह का कोई पेपर न भेजा और ना ही कोई खबरें प्रकाशित की। आज करीब एक साल बाद तक पैसा वापस करने की बात ये लोग कहते रहे लेकिन पैसे लौटाए नहीं।