हैरान हूं कि इस चैनल के सम्पादक सतीश के सिंह हैं!

Mayank Saxena : ग़लती से Live India चैनल लगा लिया… सोचा 2 मिनट हेडलाइन सुन ही लेता हूं… हैरान हूं कि इस चैनल के सम्पादक सतीश के सिंह हैं। मैंने सतीश जी के नीचे, ज़ी न्यूज़ में तब काम किया है, जब वह बीजेपी का मुखपत्र भी नहीं था और न ही दलाली के मामले में लिप्त था। तब ज़ी न्यूज़ वाकई एक गंभीर चैनल था। लेकिन बात ज़ी की नहीं, लाइव इंडिया की…

कॉपी का स्तर इतना खराब है कि हेडलाइन तक ठीक से नहीं लिखी जाती। एंकर लिंक्स ठीक से नहीं लिखे गए हैं और एंकरिंग का मतलब सिर्फ चीख कर बोलना मान लिया गया है। (जबकि एंकर भी पुराने और अनुभवी हैं, मेरे जानने वाले हैं…6.30 का बुलेटिन)…साफ पता चल रहा है कि एंकर को हेडलाइन्स पढ़ने में दिक्कत है।

प्रोमोज़ भी गड़बड़ हैं, प्रोमो का काम दर्शकों को आकर्षित करना है, उसे पैकेज की तरह नहीं लिखा जा सकता और न ही कार्यक्रमों के नाम इतने बोरिंग होने चाहिए कि लोग देखें ही न। बुलेटिन के बीच में अचानक से एक इंटरटेनमेंट का पैकेज चल जाता है, जिसमें सलमान खान की एक ख़बर होती है…आनन-फानन में उसे हटाया जाता है। अगर संवाददाता, न्यूज़रूम में ही खड़ा है, तो उस से चीख कर बात करने का क्या मतलब है? पैकेजेस की लेखन और एडिटिंग की गुणवत्ता, केबल टीवी जैसी है।

हां, अगर कर्मचारियों को समय पर सैलरी नहीं मिलती है, तो ये सब ठीक है…जो चैनल उनके साथ कर रहा है…वही वो चैनल के साथ कर रहे हैं… एक सम्पादक के तौर पर मैं सतीश जी की इज़्ज़त करता हूं, उनके नीचे काम किया है तो पता है कि वह एक गंभीर एवम् क़ाबिल पत्रकार और सम्पादक रहे हैं…दुख है कि लाइव इंडिया में ये हाल है या फिर उनको वहां जाना पड़ा…

पत्रकार मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.

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