लखनऊ के अखबार दबा कर बैठ गए ‘मुलायम धमकी’ वाला टेप, कहीं कोई खबर नहीं

Yashwant Singh : लखनऊ के अखबार दबा के बैठ गए मुलायम धमकी वाली न्यूज़। सिर्फ nbt lucknow में सिंगल कॉलम खबर है। दैनिक जागरण अमर उजाला हिंदुस्तान समेत सैकड़ों छोटे बड़े अखबारों के नपुंसक संपादकों को लानत भेजिए। शेम शेम। ये धमकी वाला टेप किन न्यूज़ चैनलों पर चला, किनपे नहीं चला, कृपया अवगत कराइए। और हाँ, अगर आपने अब तक इस टेप को अपने fb वाल पर शेयर नहीं किया तो अब कर लीजिये। चैनल वाले अखबार वाले ये टेप दबा के बैठे हुवे हैं। लग रहा बारगेनिंग चल रही है या डील हो चुकी है। ऐसे में हमको आपको इस लिंक को फैलाना होगा ताकि खबर दब ना सके और बारगेनिंग फेल हो सके। लिंक ये है: https://www.youtube.com/watch?v=qks3tJxKNsI

आशीष सागर : क्या करियेगा सर जी जब नंगो की सरकार हो और पत्रकारिता के बड़े बैनर पूंजीवाद के बुर्जुआ हाथो में थम गई हो तब ये घटना अतिश्योक्ति नहीं… जिन चैनलों ने अमिताभ ठाकुर की खबर चलाई उनमें समाचार प्लस, एबीपी न्यूज, इंडिया न्यूज़ आदि चैनल थे… लेकिन साथ ही बचाव में ये भी कहा कि हम नेताजी की आवाज की पुष्टि नहीं कर रहे….. प्रिंट अख़बार तो परचून की दुकान बन गए हैं… सुनिए नेताजी मुलायम सिंह कैसे आईपीएस सिविल डिफेन्स अमिताभ ठाकुर को धमका रहे है…. प्रिंट मिडिया में नवभारत टाइम्स के सिंगल कालम खबर के आलावा कही ये खबर नहीं छपी… अमर उजाला, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान तक में नहीं. सरकारी विज्ञापन के लिए किसी की हत्या भी हो जाये तो इन अखबारों को क्या गम है? सुनिए टेप: https://www.youtube.com/watch?v=qks3tJxKNsI

Vivek Singh : ये हमारे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मंत्री के पिताजी हैं जो भारत में फासीवादी ताकतों को रोकने के अगुवा हैं। जरा इन्हें इस टेप में सुनिए कि कैसे ये एक आईजी रैंक के आईपीएस अफसर को समझा रहे हैं कि अगर नहीं समझे तो उससे भी बुरा हाल करवा दूंगा। ऐसे रुकेगा अब हमाय उत्तर प्रदेश में फासीवाद। अब किस बुरे हाल की बात कर रहे हैं ये आप टेप सुन के खुद ही तय करें.. न समझ आए तो सीएम अखिलेश यादव के ट्विटर और फेसबुक पेज पर जाकर सवाल करें। सुना है वे सोशल मीडिया के सवालों का भी जवाब देते हैं… यहां क्लिक कर सुनें टेप: https://www.youtube.com/watch?v=qks3tJxKNsI

Kumar Sauvir : सीएम या रक्षा मंत्री से क्‍या। अपराधी हमेशा अपराधी ही रहेगा… मुलायम सिंह यादव ने साबित कर दिया कि अपराधी जन्‍मना होता है… मुझे तो अब शर्म आती है कि मैं उसी यूपी का रहने वाला हूं जहां लखनऊ है। एक किस्सा सुनाता हूं। बात तबकी है जब मायावती सरकार में सपा ने अपराधियों के खिलाफ जंग छेडी थी। मायावती ने तय किया कि उस दिन पूरी राजधानी जाम रहेगी। राजभवन, सचिवालय, मुख्‍यमंत्री कार्यालय और आसपास के इलाके को बैरीकेडिंग के बल पर मायावती की पुलिस ने चोक कर दिया था। हजारों की संख्‍या में पुलिस और सैकडों की तादात में सपा कार्यकर्ता मौजूद थे। एक हाथ भी बाहर निकला, तो पुलिस की लाठी बज गयी। लेकिन अचानक सायरन बजाती एक कार निकली। हड़बड़ाई पुलिस ने बैरीकेटिंग हटायी। कार राजभवन की ओर बढ़ गयी। पीछे सैकड़ों कार्यकर्ता। लो, हो गयी व्‍यवस्‍था ध्‍वस्‍त। यह कार मुलायम सिंह यादव की थी। एक जंगजू योद्धा का काफिला जिसने समाजवाद के लिए पूरी जीवन समर्पित कर दिया। मैं अभिभूत था मुलायम के इस प्रदर्शन से। नेता तो ऐसा ही होना चाहिए तो हमेशा नया सोचे और नया करे। ऐसा जो जनता पलक-पांवड़े बिछा दे। लेकिन आज मेरा दिमाग घिन्‍ना रहा है। मुझे शर्म आ रही है कि मुझे उस दिन वाले मुलायम को इतना सम्‍मान क्‍यों दिया। अपने आदर्श को लेकर घृणित स्‍खलन को महसूस करना शायद जीवन का कोई सर्वाधिक पतन से भी बढ कर है। मुलायम सिंह यादव मैं शर्मिदा हूं कि मैंने तुम्‍हारे चित्र को सम्‍मान दिया। सॉरी। अभी यशवंत सिंह ने मुझे मेरी पोस्‍ट पर कमेंट के तौर पर बताया कि आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को मुलायम सिंह यादव ने धमकी दी है। कितना शर्मनाक है यह मुलायम। तुम्‍हारे चरित्र से सर्वथा विपरीत। तुम आम आदमी के नेता माने जाते रहे हो। लेकिन आज मुझे तुमसे घृणा हो गयी। क्‍योंकि आज मैं खुल कर कहता हूं कि तुम अपराधी हो। रामवीर सिंह के यहां अमिताभ के साथ क्या हुआ था, मुझे नहीं पता। हो सकता है कि वहां अमिताभ की रामवीर के लोगों ने ऐसी की तैसी की रही हो। इसमें कोई खास बात नहीं है। अपराधी का चरित्र तो अपराध का ही होता है। चंद अपराधियों ने किसी सैनिक को घेर लिया। उसे थप्‍पड़ मार दिया। उसे लातों-घूसों से पीटा। इसमें कोई बात खास है ही नहीं। लेकिन जिस तरह अमिताभ से फोन पर पुरानी घटना के बारे में जिक्र किया और उससे ज्यादा बड़ी घटना कराने की धमकी दी, वह तो स्‍तब्‍ध ही करने वाला है। अच्‍छा, एक बात बताओ मुलायम चच्‍चा। तुम हो क्‍या। सिर्फ इतना ही ना, कि एक पार्टी के अध्‍यक्ष हो। दीगर बात है कि एक प्रदेश तक सीमित हो। तो रहो। गुंडई करते रहो। मुझे खूब खबर है कि जिस रामवीर की घटना को लेकर तुमने अमिताभ का जिक्र किया है, उस में तुम्‍हारे चंद गुंडों ने अमिताभ ठाकुर के साथ बेहद अभद्रता ही नहीं, बल्कि अपमान की पराकाष्‍ठा तक का प्रदर्शन किया था। हो सकता है कि तुम्‍हारे इशारे पर कुछ लोगों ने या अनजाने में अमिताभ ठाकुर की कुटम्‍मस किया हो। लेकिन उसके बाद चूंकि तुमने उस पर कोई भी टिप्‍पणी नहीं की, मामला डस्‍टबिन में डाल दिया। ऐसे में अब जरूरी है कि हम तुम्‍हारी व्‍यवस्‍था को इंगित करें जिसके चलते इस पूरे प्रदेश में अनाचार का पहली कदमपहली शुरू हुई थी। लेकिन एक पूर्व मुख्यमंत्री और रक्षा मंत्री के तौर पर तुम अमिताभ को अपनी गुंडागर्दी का प्रदर्शन कर रहे हो, तो यह घटिया कर्म है। मैं तुम्हारी भर्त्सना और निंदा करता हूँ।

पत्रकार यशवंत सिंह, आशीष सागर, विवेक सिंह और कुमार सौवीर के फेसबुक वॉल से.

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Comments on “लखनऊ के अखबार दबा कर बैठ गए ‘मुलायम धमकी’ वाला टेप, कहीं कोई खबर नहीं

  • डॉ.एस.पी.सिंह, आईएएस says:

    धनबल व बाहुबल, राजनैतिक लोकतंत्र के दो विकृत पहलू है | उत्तर प्रदेश में ४३% मंत्रीगण अपराधिक प्रष्ट भूमि के है | मंत्रियों द्वारा अधिकारीयों के गालिगलोच, अभद्रता , बहन- बेटियों के साथ वलात्कार के प्रयास, पत्रकार को जलाकर मारने व किसी माँ के साथ पुलिस द्वारा थाने में वलात्कार के असफल प्रयास के बाद जलाकर मारना आदि अब सामान्य सी बात होकर रह गयी है | पहले तो कोई अधिकारी या व्यक्ति इस सब का विरोध नहीं करता है और यदि कोई विरोध करने का साहस भी करता है तो उसको कलंकित करने के लिए वलात्कार या भ्रष्टाचार जैसे आरोप लगवा देने जैसे हथकंडे अपनाये जातें है |
    अमिताभ ठाकुर के साथ यह सब कुछ (विडियो टेप ) की घटना सभी आईएएस व आईपीएस अधिकारीयों के लिए खतरे की घंटी है | गंगोत्री गोमुख से ही बहती है, अब नीचे के राजनैतिक कार्यकर्ता जो पहले से ही बहुत उग्र थे, और भी अधिक उग्र हो सकतें है | क्या यह राजनीति का अपराधीकरण है या फिर अपराध का राजनीतिकरण,समझ नहीं आता है |अकसर राजनीतिक दल सार्वजनिक मंच से मुनादी पीटते हैं कि राजनीति का अपराधीकरण लोकतंत्र के लिए घातक है, परन्तु करते सभी यही सब कुछ है |संसद में १६२ सांसद अपराधिक पृष्टभूमि के है |14 फीसद सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले है , उ.प्र. के विधायकों की तो कुछ पूछिये नहीं |यूपी विधानसभा के 403 विधायकों की सूचीं में से लगभग 47 प्रतिशत विधायकों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज है।
    इस सब की बीच यह उम्मीद लगाना कि राजनैतिक सदाचार शीघ्र आ जायेगा, बेमानी होगा| आपराधिक छतरी सभी गुंडे, बदमाशों को अपनी छाया बड़ी चतुराई से छुपा लेने में सक्षम है |
    यह और भी दुर्भाग्य पूर्ण है जब सत्ता के शिखर पर बैठे लोग भूलवश या येनकेन में धमकी, गली गलोंच दे बैठते है, तो उनके कान कौन उमेठे | ऐसे मामलों में पुलिस से तो कुछ उम्मीद नहीं की जा सकती, परन्तु न्यायालय की सक्रियता से लोकतंत्र को मजबूत करने की उम्मीद जरूर की जा सकती है। वैसे इस प्रकार की धमकी भारतीय दंड संहिता की धारा ५०३ में दंडनीय अपराध है जिसमे ३-७ साल की सजा हो सकती है |
    मैं सभी जनसेवकों से इस प्रकार के कृत्य की न केवल निंदा अपितु विरोध जताने का आवाहन करता हूँ, जो सुनले, उसका आभार और जो न सुने वह अपनी बारी का इन्तजार करे |
    भवदीय
    डॉ. सूर्य प्रताप सिंह , आईएएस
    लखनऊ
    ११/०७/2015

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  • kunvar sameer shahi says:

    वाह संजय शर्मा के 4pm की भी बोलती बंद ….

    लखनऊ के अखबार दबा कर बैठ गए ‘मुलायम धमकी’ वाला टेप, कहीं कोई खबर नहीं
    आज बहुत तकलीफ हुयी की जब सुबह अखबारों को देखा की उसमे ‘मुलायम धमकी’ वाला टेप, कहीं कोई खबर नहीं थी ..सबसे जादा उम्मीद तो संजय शर्मा के ४पीएम से थी जिन्होंने हाल के कुछ दिनों में ही कई बड़ी खबरों को ब्रेक किया ..एक उम्मीद जगी की सच में साहस का परिचय दिया जा रहा है ..चाहे बाराबंकी कोठी में पत्रकार की माँ को जलने का मामला हो या फिर ..अमन मणि का केस सबको लीड बनाया इस अख़बार ने इतना ही नही गोंडा के बाहुबली मंत्री पंडित सिंह को भी नही छोड़ा ..लेकिन आज एक सवाल दिमाग में आया की आखिर संजय शर्मा जी की क्या मज़बूरी थी की उन्होंने इस समाचार को दबा दिया ….क्या इसका जबाब आप देंगे शर्मा जी …..हो सकता है आप का भी ..कोई बात नही फिर भी ..इस समाचार को दुनिया के सामने लेन वाले ..बड़े भाई यशवंत सिंह , कुमार सौबीर सर , ममता mam संपादक मल्हार मीडिया भोपाल , व अन्य उन सभी लोगो को प्रति हार्दिक आभार जिन्होंने अपने पत्रकारिता के धर्म का निर्वहन किया ..उम्मीद है की इस खबर को दबा कर सत्ता की चाटू कअरिता करने वाले ढोंगी संपादक ये जरुर समझेंगे की अब उनके हाथ में पत्रकारिता की कठपुतली की डोर नही रह गयी है ..उनके गंदे विचार अब उनको ही मुबारक हो …पत्रकारिता उससे कंही आगे निकल चुकी है …

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