मजीठिया वेतनमान : भोपाल के पत्रकार भी बुलंदी से उतरे मैदान में

भोपाल में आज मजीठिया इम्प्लीमेंटेशन समिति की मीटिंग आयोजित की गई, जिसमें पत्रिका, दैनिक भास्कर और नवदुनिया के कर्मचारियों ने सैकड़ों की संख्या में भागीदारी की। मीटिंग में याचिकाकर्ताओं के साथ साथ ही उन कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया जिन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं की है। 

पत्रिका से ऐसे कर्मचारियों की संख्या अधिक थी क्योंकि पत्रिका में हाल ही में जो इन्क्रिमेंट लगाया गया, उससे कर्मचारियों में नाराजगी थी। सबसे मजेदार बात तो यह रही कि पत्रिका मैनेजमेंट ने जिन कर्मचारियों को मीटिंग में जासूसी करने के लिए भेजा था उन कर्मचारियों का भी ह्रदय परिवर्तन वकीलों द्वारा तथ्यों के साथ दी गई दलीलों से हो गया और उन्होंने मंच पर खड़े होकर प्रतिज्ञा ली कि वे सच्चाई का साथ देंगे। 

जब पत्रिका के याचिकाकर्ताओं ने पूछा कि आप ऑफिस में अधिकारियों को क्या जवाब देंगे तो वे बोले कि हम कह देंगे कि हमारे पहुंचने से पहले ही मीटिंग खत्म हो गई थी। मीटिंग में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट परमानंद पांडे, कॉलिन गॉन्जालविज के साथ इंडियन एक्सप्रेस के वरिष्ठ साथियों ने सम्बोधित किया।

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Comments on “मजीठिया वेतनमान : भोपाल के पत्रकार भी बुलंदी से उतरे मैदान में

  • SUpreme Court (Rev. Ranjan Gogoi) aur Bhadas ka Sadhuwad…
    Sathiyon, Film Sholey ka dialogue yad dila raha hoon… “Ab ayega Maza…..bahut beimani kiya re…” (Last sentence apni taraf se joda hoon..
    Sathiyon, Ekjut rahein aur Himmat na harein… Chatukaron ko office se bahar “Pakad-2 ker Peetein”.
    Tabhi aise Tuchchey Logon ko seekh milagi….
    Jai Hind…

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  • खुश कर देने वाले समाचार है,हमे डरना या गभराना नहीं है। हर शहर, कसबो में एसे ही आयोजन कीया जाए,वकीलों से मीटींग आयोजित करें,नियुक्त कीए गए श्रम अधिकारी से मुलाकात करें और हमारा पक्ष रखें,और समय समय पर मुलाकात करते रहें।पांड़ेजी तथा गोन्जालवीस साहब से विनंती है आप बड़े शहरों में एक बार यदी सभीसे मीटिंग करें तो शायद अच्छे परिणाम मिल सकते है।और अन्य मित्रों से निवेदन है कीसीभी व्यकितको शारीरिक हानी न पहोंचाए वे हमारे ही भाई-बहन है वे परिणाम जब हमारे पक्षमें होगा तो वे लोग अपनेआप ही शर्मसार हो जाएगे और महत्वपूर्ण बात यह की कंपनी चाहती है की हम कानून हाथमे लें ताकी हमारा केस दुसरे कानूनी पचड़े में पड़े तो कृपया एसी बातों से बचें। और एसे लागों से तो बाद में भी निपटारा हो सकता है।

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