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मजीठिया : छोटे अखबारों के कर्मी आरटीआई के माध्यम से ब्योरा जुटाएं और केस करें

मजीठिया वेतनमान के लिए भले ही 20 हजार पत्रकार संघर्षरत हों लेकिन एक बड़ा वर्ग इस लड़ाई से दूरी बनाए हुए है. कारण उनके पास कोई सबूत नहीं कि वे अमुक प्रेस में कार्यरत हैं. जब कर्मचारी ही नहीं तो किस मुंह से हक की बात करें. ये वर्ग ऐसा है, जो भविष्य में बड़े प्रेस में बड़ी जिम्मेदारी निभाता है और शोषण की नीतियां बनाता है, इस चलन का खात्मा जरूरी है.

मजीठिया वेतनमान के लिए भले ही 20 हजार पत्रकार संघर्षरत हों लेकिन एक बड़ा वर्ग इस लड़ाई से दूरी बनाए हुए है. कारण उनके पास कोई सबूत नहीं कि वे अमुक प्रेस में कार्यरत हैं. जब कर्मचारी ही नहीं तो किस मुंह से हक की बात करें. ये वर्ग ऐसा है, जो भविष्य में बड़े प्रेस में बड़ी जिम्मेदारी निभाता है और शोषण की नीतियां बनाता है, इस चलन का खात्मा जरूरी है.

छोटे व मझोले प्रेस के कर्मचारियों को श्रम विभाग के माध्यम से कार्यरत कर्मचारी की सूची मांगनी चाहिए. ध्यान रहे, आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी मांगें और कार्यरत कर्मचारी के नाम से आरटीआई न लगाए. यह जानकारी मिलने के बाद गुमनाम पते से शिकायत कर उक्त कर्मचारियों के लिए पीएफ व ईएसआई की मांग करें. 

अब आप नियमित कर्मचारियों की सूची आरटीआई के माध्यम से मांगें. फिर कंपनी के आय-व्यय की जानकारी मांगें. आरटीआई के माध्यम से ही कर्मचारियों का पदनाम और वेतन पूछे. अब आपके पास सारी जानकारी उपलब्ध है जिससे कंपनी मुकर नहीं सकती. इसके बाद दो रास्ते हैं। लेबर कोर्ट में किसी के माध्यम से जनहित याचिका लगवा दें या गुमनाम रहकर श्रम विभाग में उक्त दस्तावेजों को लगाकर मजीठिया वेतनमान न देने की शिकायत करें तो नौकरी भी सुरक्षित काम भी हो गया.

कुछ समाचार पत्रों के मालिक चालाक होते हैं और अपने कर्मचारी को ठेका कर्मी बता देते हैं. ऐसे में ठेकेदार का नाम; ठेका अवधि; ठेका देने की प्रक्रिया आदि की जानकारी मांगनी चाहिए और मजीठिया वेतनमान ठेकेदार द्वारा न देने की शिकायत श्रम विभाग को करनी चाहिए, वो भी गुमनाम. दरअसल ऐसी प्रक्रिया हर ऐसे संस्थान के लिए अपनानी चाहिए, जो श्रम कानूनों का पालन न करें.

कुछ मालिक जानकारी मांगने पर कहते हैं, हमारे यहां कोई कर्मचारी नहीं. इसलिए रह-रह कर आरटीआई लगाएं, जिससे संस्थान को शक न हो. एक साथ जानकारी मांगने से बचें. एक जानकारी आने के बाद दूसरी आरटीआई लगाएं. संस्थान में जरूरी कर्मचारियों की क्षमता और मौजूदा कर्मचारियों की संख्या पूछनी चाहिए. 

लेखक एवं पत्रकार माहेश्वरी मिश्रा से संपर्क : [email protected]

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1 Comment

1 Comment

  1. Obaid Khan

    August 11, 2015 at 1:39 pm

    बहुत अच्छा जुगाड़ बताया आपने, लेकिन यह भी बताइए कि जो अखबार बाला मालिक अपने भर ही न कमा पाता हो 2.4 साथियों के काम कर रहा हो अगर वो भी मजेठिया की मांग किए तो मालिक 1 माह का भी वेतन 1 साल मे नही दे पाएगा। अखबार बन्द हो जाएगा तो साथी कहां जाएगें।

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