हिंदुत्व के चूल्हे की राख भी ‘हिंदू’ है!

असित नाथ तिवारी

उत्तराखंड के हलद्वानी में देश के बड़ी ट्रक-बस निर्माता कंपनी अशोक लेलैंड की इकाई है। कंपनी ने श्रम आयुक्त को चिट्ठी लिख कर जानकारी दी है कि मांग नहीं होने की वजह से 14 दिनों के लिए सभी कर्मचारियों को छुट्टी दे दी गई है। जब आप छुट्टी पर भेजे गए अशोक लेलैंड के इन कर्मचारियों की फेहरिश्त पढ़ेंगे तो आपको इनमें कोई मुसलमान नहीं मिलेगा। परम हिंदुवादियों के चरम राज में छुट्टियों पर भेजे गए इन कर्मचारियों से मिलिए। ये बेहद परेशान लोग हैं। इनको नौकरी जाने का डर सताने लगा है।

22 अक्टूबर के बाद अगर बस-ट्रक की मांग नहीं बढ़ी तो फिर कंपनी क्या करेगी ? कर्मचारियों को छंटनी के लिए तैयार रहने को कह दिया गया है। इन कर्मचारियों का प्रोफाइल देखने पर हिंदुवादियों के चरम शासनकाल का सच सामने आता है। इनमें से कई सरस्वती विद्या मंदिर से पास आउट हैं और कइयों ने तो अपने फेसबुक पर खुद को RSS का सदस्य बताया है। कई लोग अभी तक ‘मैं भी चौकीदार’ के मुगालते में हैं।

यही हाल झारखंड के टमशेदपुर में ट्रक-बस बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी टाटा का है। सैकड़ों कर्मचारियों को यह कह कर बैठा दिया गया कि अभी बाजार में डिमांड नहीं है। प्रोडक्शन ना के बराबर हो रहा है। टाटा ने डिमांड कम होने का हवाला देकर जिन लोगों के रोजगार को टाटा-बाय बोला है उनकी फेहरिश्त में मुसलमानों की तादाद 10 से भी कम है। परम हिंदुवादियों के चरम राज में यहां भी हिंदुओं का ही रोज़गार छीना गया। मारूती के मानसेर इकाई से लेकर किर्लोस्कर-बॉश तक यही कहानी दुहराई गई है।

ऑटो, मैनुफक्चरिंग, टैक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया समेत देश के तमाम क्षेत्र में रोज़ाना सैकड़ों लोग नौकरियां गंवा रहे हैं। पिछले तीन सालों पर 6 लाख से ज्यादा लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई हैं। आंकड़ों की पड़ताल कीजिएगा को पाइएगा कि इनमें से 5 लाख से ज्यादा लोग हिंदू हैं। इससे पहले नोटबंदी के दौरान जितने लोगों की नौकरी गई उनमें से 90 फीसदी अभी भी बेरोजगार हैं। इनमें भी 90 फीसदी के करीब हिंदू ही हैं।

बड़े-बड़े ब्रांड के शो-रूम्स बंद हो रहे हैं। नामी कंपनियों ने अपना प्रोडक्शन या तो आधा कर दिया गया है या फिर बंद ही कर दिया है। इन कंपनियों के मालिकों का प्रोफाइल चैक कीजिए। ज्यादातर हिंदू मालिक ही निकलेंगे। कुछ जैन और सिख हैं। मुसलमान कंपनी मालिक दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पा रहे।

तो मतलब ये कि कंपनियां बंद हो रहीं है हिंदुओं की, नौकरियां जा रही हैं हिंदुओं की, शो-रूम्स बंद हो रहे हैं हिंदुओं के, पूंजी डूब रही है हिंदुओं की। ये सब कुछ हो रहा है परम हिंदुवादियों के चरम शासनकाल में। और आपको बताया जा रहा कि हिंदुओं को ख़तरा मुसलमानों से है। तो सच ये है कि हिंदुत्व की जो आग धधकाई गई है उसमें जल रही लकड़ी भी ‘हिंदू’ है और राख में तब्दील भी हिंदू ही हो रहा है।

लेखक असित नाथ तिवारी टीवी जर्नलिस्ट और एंकर हैं.

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