नवतेज टीवी बंद, सेलरी के लिए मीडियाकर्मी एडीसीपी आफिस पहुंचे, देखें फोटो

नवतेज टीवी को बन्द कर दिया गया है. बताया जाता है कि एडिटर इन चीफ रोहित तिवारी और सीईओ अनुराग पांडेय भूमिगत हो गए हैं. मीडियाकर्मी इन्हें दो महीने दस दिन की सेलरी के लिए खोज रहे हैं पर ये लापता हो चुके हैं. गरीब पत्रकारों की 2 महीने 10 दिन की सैलरी मारने वाले नवतेज टीवी प्रबंधन के खिलाफ एकजुट मीडियाकर्मियों ने आज पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की.

नोएडा के सेक्टर 4 में हिंदी चैनल नवतेज टीवी का आफिस था. बताया जाता है कि बिना बुलाए, बिना कुछ जानकारी दिए सिर्फ एक व्हाट्सएप्प मैसेज के जरिये चैनल को बंद करने का तुगलकी फरमान सुना दिया गया. 2 महीने 10 दिन की सैलरी भी चैनल ने नहीं दी है. अप्रैल, मई और जून 10 तारीख तक के पैसे नहीं दिए गए. मैनेजमेंट ने पहले 27 मई को सैलरी देने की बात कही. उसके बाद अकाउंट नम्बर लेकर 10 जून तक अप्रैल और मई की सैलरी भेजने का दावा ठोका.

फिर आउटपुट हेड प्रेम शंकर के जरिये 16 जून से 20 जून तक सैलरी देने का मैसेज डलवाया. इसके बाद मीडियाकर्मियों ने मजबूरी में 16 जून को व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाया ताकि बातचीत होती रहे. HR नवीन जैन जी भी ग्रुप में एक्टिव रहे और बड़ी चालाकी से सैलरी देने की तारीख आगे बढ़ाते रहे.

20 जून हो जाने के बाद भी सैलरी नहीं दी गई. मैनेजमेंट की तरफ से 22 जून का नया लॉलीपॉप दे दिया गया. त्रस्त और ठगे हुए कर्मचारियों ने इकट्ठा होकर आज नवतेज टीवी के ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया और पुलिस अफसरों से मिले. ये कर्मचारी लेबर कोर्ट में केस करने की तैयारी कर रहे हैं.

ज्ञात हो कि नवतेज टीवी चैनल को सैनिटाइज करने के लिए 14 दिन के लिए बंद किया गया था. बाद में चैनल पर ताला ही लगा दिया गया.

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Comments on “नवतेज टीवी बंद, सेलरी के लिए मीडियाकर्मी एडीसीपी आफिस पहुंचे, देखें फोटो

  • Isha Pandey says:

    Nothing can be more shameful than this this. Employees worked amid corona terror risking their lives but this shameless channel has not given them their salary.

    Now, CEO and Editor-in-chief should die of shame. Condition of employees here is worse than those of migrant labourers. Now, my humble request to this channel is that please don’t telecast anything related to pain of migrant labourers as condition of your employees is even worse. your employees too are migrants just think about them. Show some morality.

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  • कुछ नहीं होता है, कुछ निचले पायदान वाले चैनल जो चते हुए सैलरी नहीं दे रहे है तो बंद होने के बाद कौन देता है,इतिहास गवाह है, न्यूज़ एक्सप्रेस, पी7,जनसंदेश,खबर भारती,भास्कर समाचार, श्री न्यूज,इत्यादि, लेबर कोर्ट जाइए या कहीं भी, पैसा नहीं मिलता,तारिक पे तारिक मिलेगी,थक हार कर खुद छोर दोगे,कुछ लोगो के मिल भी जाते है,जो चालक होते है,बाकी सब को पता ही होगा।और अगर नहीं पता तो पूछ लीजिएगा किसी पुराने सीनियर्स से।

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