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नभाटा और भास्कर जैसे अखबारों के धंधे का हिस्सा है पाखंड फैलाना

Deepankar Patel : लगता है नवभारत टाइम्स भी दैनिक भास्कर की श्रेणी में आ गया है… ऑडियंस इंगेजमेंट के मामले में ये संस्थान टॉप पर आते हैं, और देश भर में पाखण्ड फैलाते हैं। इस देश की मीडिया संविधान की मूल भावना को मूली की तरह समझती है. संविधान की मूल भावना इनसे हजम नहीं होती गंध मचाते रहते हैं. साइंटिफिक टेंपर को विकसित करना फंडामेंटल ड्यूटीज की श्रेणी में आता है।

Deepankar Patel : लगता है नवभारत टाइम्स भी दैनिक भास्कर की श्रेणी में आ गया है… ऑडियंस इंगेजमेंट के मामले में ये संस्थान टॉप पर आते हैं, और देश भर में पाखण्ड फैलाते हैं। इस देश की मीडिया संविधान की मूल भावना को मूली की तरह समझती है. संविधान की मूल भावना इनसे हजम नहीं होती गंध मचाते रहते हैं. साइंटिफिक टेंपर को विकसित करना फंडामेंटल ड्यूटीज की श्रेणी में आता है।

इन्हीं मीडिया संस्थानों के ऊपर जब सरकार का चाबुक चलता है तो इन्हें संविधान में वर्णित फंडामेंटल राइट याद आ जाता है। लेकिन फंडामेंटल ड्यूटीज निभाने में मीडिया हाउस अपना स्टैंड उलट लेते हैं. पाखण्ड फैलाना इनके धंधे का हिस्सा है। Navbharat Times Online के एडीटर जी को मैं जितना जानता हूँ वो वैज्ञानिक समझ रखते हैं। लेकिन नवभारत टाइम्स श्रीदेवी की मौत में मृत्यु योग बताने में लगा है। ऐसा लगता है कि दैनिक भास्कर जैसे अखबारों ने तांत्रिक भरती करने शुरू कर दिये हैं। देश की बुद्धि का गोबर कर रहे हैं सब…

पत्रकार दीपांकर पटेल की एफबी वॉल से.

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