अब हिन्दू भी खतरे में है, हर आजादी पहरे में है : निदा फाज़ली

ग्वालियर। प्रख्यात शायर एवं फिल्मी गीतकार निदा फाज़ली देश के वर्तमान हालात पर व्यथित और चिंतित हैं। उनका कहना है कि आज देश के हालात ऐसे हो गए हैं कि यहां ‘अब हिन्दू भी खतरे में है, हर आजादी पहरे में है। असहिष्णुता के मुद्दे पर पूरे देश में हंगामा मचने की बात पर वे कहते हैं कि देश के हालात पहले भी खराब रहे हैं, लेकिन पहले खराब करने वालों को डर रहता था, उन्हें दण्डित किए जाने का, लेकिन अब डर नहीं रहा, यही बात ज्यादा चिंता जनक है।

उन्होंने कहा कि असहिष्णुता फैलाने वाले मुट्ठीभर लोग हैं, जो यह चाहते हैं, कि जैसे वे हैं, सब वैसे ही हो जाएं। वह शनिवार देर शाम यहां ‘डेटलाइन इंडिया‘ से बातचीत कर रहे थे। वह यहां 29 नवंबर रविवार को आईटीएम यूनीवर्सिटी एवं डेटलाइन इंडिया के संयुक्त आयोजन ‘इबारत‘ में शिरकत करने के लिए आएं हैं। उन्होंने कहा कि असहिष्णुता के मुद्दे पर बयान देने पर आमिर खान और शाहरूख खान का इसलिए विरोध हो रहा है, क्योंकि वे खान हैं। उन्होंने कहा कि आमिर और शाहरूख ने वही बात कही है जो देश के प्रेसीडेंट प्रणव मुखर्जी ने और अमेरिका के प्रेसीडेंट बराक ओबामा ने इंडिया से जाने के बाद कही थी। साहित्यकारों और कलाकारों ने भी अवार्ड वापसी करके प्रेसीडेंट की बात को ही दोहराया था।

उन्होंने एक शेर पढ़कर अपनी बात को आगे बढ़ाया। कहा कि-
हर लम्हा एक ताजा शिकायत है आपसे,
अल्लाह मुझको कितनी मुहब्बत है आपसे।

उन्होंने कहा कि शिकायत भी उसी से की जाती है, जिससे मुहब्बत होती है। शाहरूख, आमिर और देश के राईटर ने शिकायत करके अपनी मुहब्बत का और देश के प्रति वफादारी का सबूत पेश किया है।

उन्होंने कहा कि अगर असहिष्णुता की बात करना गद्दारी है तो इस तिरस्कार की हकदार कई बड़ी शख्सियत रही है, जिन्हें गद्दार कहने की हिम्मत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो बात प्रेसीडेंट मुखर्जी ने कही, बराक ओबामा ने कही, वही बात शाहरूख और आमिर के मुंह से सुनकर क्रोधित हो रहे हैं तो यही असहिष्णुता का पहला सबूत है।

उन्होंने कहा कि इस सब के बावजूद देश में अभी मैन-टू-मैन रिलेशन खराब नहीं हुए है। उन्होंने कहा कि गंगा कभी नहीं पूछती कि इस पानी से बुजू करेगा, या सूरज को अघ्र्य देगा, या चर्च की मूर्ति धोएगा। ये बस मुट्ठीभर लोग हैं जो वोट बैंक के खरीदे हुए हैं, जो चाहते हैं कि जैसे वो हैं वैस सब हो जाएं। उन्होंने कहा कि सच बोलना पाकिस्तान में भी खतरनाक है, और हिन्दूस्तान में भी।उन्होंने साहित्यकार कलबुर्गी की हत्या पर कही गई अपनी नज़्म के माध्यम से अपनी बात पूरी की-
 

अब हिन्दू भी खतरे में है
हर आजादी पहरे में है

अपनी तरह से सोचने वाला,
अपनी तरह से बोलने वाला
अपनी तरह से अपने घर का
दरवाजा खोलने वाला
अपनी तरह से लिखने वाला
पाकिस्तान की तरह
हिन्दुस्तान का अब हिन्दू भी खतरे में है

एक ही जैसा भोजन हो
एक ही जैसा आंगन हो
हुक्म है मुट्ठीभर लोगों का
वो हैं जैसे सब हों वैसे।

अवार्ड वापसी के सवाल पर उन्होंने कहा कि सिर्फ इनाम वापसी ही जरिया हो इससे सहमत नहीं। इनामों को वापस करने सेे क्या होगा, अखबारों में जीने मरने से क्या होगा।

राहुल आदित्य राय की रिपोर्ट. साभार- डेटलाइन इंडिया न्यूज पोर्टल

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