चिटफंडिया ‘समृद्ध जीवन फाउंडेशन’ की मददगार बनी अखिलेश सरकार, निष्कासित मीडियाकर्मी संघर्ष की राह पर

पुणे से संचालित एवं पूरे देश में लूट का कारोबार फैला रखा ‘समृद्ध जीवन फाउंडेशन’ अब सेबी के डंडे से बचने के लिए राजनीतिक मदद तलबगार हो चुकी है। बताया जा रहा है कि राजनीति के घाट पर जुगाड़ बैठाने के लिए ही बसंत झा नामक प्राणी को संपादक की कुर्सी दी गई है। इस बीच समृद्ध जीवन फाउंडेशन से संचालित ‘मेसर्स प्रजातंत्र लाइव न्यूज पेपर, लाइव इंडिया’ (ब्रेनवर्क्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड) के खिलाफ नोएडा में डिप्टी लेबर कमिश्नर को पीड़ित-निष्कासित कर्मचारियों ने शिकायत पत्र दिया है। बताया गया है कि 30 अप्रैल 2015 से उनकी सेवाएं गैरकानूनी तरीके से समाप्त कर दी गई हैं। कंपनी ने उन्हें अप्रैल माह का अर्जित वेतन भी नहीं दिया है। 

चिटफंड कंपनी ‘समृद्ध जीवन फाउंडेशन’ के स्वामित्व में ‘लाइव इंडिया’ न्यूज चैनल, ‘लाइव इंडिया’ और ‘प्रजातंत्र लाइव’ नाम से अखबार प्रकाशित किए जाते हैं। बसंत झा इस चिटफंडिया मीडिया तंत्र के नए संपादक हैं, जिनकी हरकतों से इन दिनो मीडिया कर्मियों में भारी रोष है। कंपनी का पाप ढो रहे ये वही बसंत झा हैं, जिन्हें भास्कर रांची ने पैसे के गोलमाल में निकाल दिया था और मौर्या टीवी में तो एक लड़की का शोषण करने के कारण मारे-पीटे गए थे। इनमें इतनी हिम्मत कहां थी कि वह एक साथ 40-50 लोगों की नौकरी खा जाते। मजीठिया प्रकरण के जोर पकड़ते ही मालिकानों के साथ इनकी भी सेटिंग बैठ गई। उसने मालिकों को खुलकर आश्वस्त किया कि अखिलेश सरकार हमारे खिलाफ कुछ नहीं कर सकती है। हमने उसका मुंह बंद कर रखा है। 

लाइव इंडिया से निकाले जाने के विरोध में जब कर्मचारियों ने हंगामा किया तो लखनऊ सचिवालय के आदेश पर पुलिस की जिप्सी इस चिटफंडिये ग्रुप की सुरक्षा में लगा दी गयी। इसके पीछे हाथ अनिरुद्ध सिंह का बताया गया है, जो खुद को मुलायम सिंह का रिश्तेदार बताते हैं। उन्होंने हाल ही में इस चिटफंडिया समूह को ज्वॉइन किया है। इसके साथ ही नॉएडा के चिटफंडिया चैनल लाइव इंडिया में गार्ड  की संख्या भी बढ़ा दी गयी गई है। 

यहाँ संपादक के केबिन तक पहुंचने के लिए तीन जगह गार्ड लगाये गये हैं। साथ में मारुती पाण्डेय उर्फ़ ‘मारुती आठ सौ’ भी हैं, जो लाइव इंडिया की सेक्सी साइट का कथित संपादक हैं। उनके साथ दो और पत्रकार चौरसिया और मधुरेन्द्र भी हैं, जो इंडस्ट्री में एक पहचान तो रखते हैं पर इस फर्जी आदमी के साथ शायद सिर्फ मोटी सैलरी के लालच में जुड़े हुए हैं। उन्हें किसी बात से कोई मतलब नहीं है। प्रजातंत्र अख़बार के सारे कर्मचारियों को लगभग निकाल दिया गया। सिर्फ इस बिनाह पर कि उनको काम नहीं आता था। उनमें कई दिग्गज पत्रकार  राकेश थपलियाल, विमल झा, रास बिहारी शामिल हैं। निष्कासन के समय उनसे प्रबंधन का तो कोई मिलने को ही तैयार नहीं हुआ।

बस बहाना बना कर उन्हें मुंबई ट्रांसफर कर दिया गया। और भी लोग, जिनका या तो कॉन्ट्रैक्ट नहीं ख़त्म हुआ है या जो परमानेंट कंपनी के साथ जुड़े थे, उनका  ट्रांसफर कर दिया गया। बिना अपेक्षित देय के भुगतान के कहा गया कि आप मुंबई जाकर तीन दिन में ज्वॉइन करें। जब उन लोगों ने जाने के लिए खर्चे की मांग की तो मैनेजमेंट साफ़ मुकर गई। यहाँ तक कि अभी पिछले महीने की सैलरी भी सभी लोगों की रोक दी गई है, जिसके आने की उम्मीद कम ही है। अब इस क्रम में आखिर कोई कर्मचारी परेशान होकर कोई गलत कदम उठा ले तो कौन जिम्मेदार होगा। ये चिटफंडिये ग्रुप का मालिक महेश मोतेवार या सुप्रिया कांसे, जो कहने को सीईओ हैं, जिनसे बात करने पर कहा जाता है कि जैसा बसंत चाहते हैं, वैसा ही कीजिए।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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Comments on “चिटफंडिया ‘समृद्ध जीवन फाउंडेशन’ की मददगार बनी अखिलेश सरकार, निष्कासित मीडियाकर्मी संघर्ष की राह पर

  • are bhai ras bihari ji ne to usi din office chod diya tha jis din is ranchi ke dhokhebaaj kamine ne team ki meeting li thi uski aj …… fat rahi hai samne aa kar deal kyu nahi karta agar asal mard hai to delhi office me aakar sare stafff ka samna kyu nahi karta apne pitaji ke aanchal me sir kyu chupa ke baitha hai ye kamina. hamari salary isne abhi bhi rok rakhi hai samne aa jaye to sal bhi krban kar denge bas uski le lenge ek baar aa to jae wo. aur yaha ke kisi patrakar k samne wo …. barabar bhi nahi hai

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