जिंदगी ओएलएक्स ओला से लेकर ब्ला ब्ला तक…. तो गाइए, झिंगालाला… झिंगालाला…

Yashwant Singh : जिंदगी ओला ओएलएक्स से लेकर ब्ला ब्ला तक हो गई है.. कार बेचने के बाद पैदल होने का जो अदभुत अकल्पनीय सुख उठा रहा हूं, उसे शेयर करने का मन नहीं कर रहा है लेकिन कर ही देता हूं क्योंकि अपनी फिलासफी जोत से जोत जलाए रखने वाली रही है. दिल्ली नोएडा मेट्रो से आने-जाने में क्या खूब सुकून मिलता है. इतनी सस्ती और इतनी द्रुतगामी सेवा दिल्ली में कोई दूसरी नहीं. द्रुतगामी इसलिए कि दिल्ली की सड़कों पर कार के सागर में फंस कर चींटी माफिक खिसक रहे कार मालिकों के दयनीय चेहरे देखकर यही लगता है कि सबसे द्रुतगामी अपनी मेट्रो रानी.

उबेर और ओला की जंग के कारण अक्सर सौ से लेकर ढाई सौ रुपये तक के राइड कूपन फ्री मिलते रहते हैं और इनकी रुटीन की एसी कार राइड भी 5 रुपये प्रति किलोमीटर पड़ रही है. न ड्राइवर रखने का झंझट, न तनखा देने की चिंता, न मेंटनेंस की प्राब्लम और न सफाई रखरखाव का कोई सरोकार. खुद की कार न होते हुए भी हम तो कार वाले अब भी बने हुए हैं, पूरे ताव से. हिंहा से हुंहा तक कार ही कार, सिर्फ मोबाइल के एक बटन से कार हाजिर. दिल्ली शहर के बाहर हरिद्वार गया कुछ एकांत साधना करने, गंगा तट किनारे, तो ब्ला ब्ला कार पर एकाउंट बनाया और लगा तलाशने. कई जने मिल गए हरिद्वार जाने वाले. चुना मेरठ तक जा रहे एक साथी को. सोचा मेरठ में जर्नी ब्रेक कर अगले रोज हरिद्वार के लिए मेरठ से ब्ला ब्ला कार के सहारे निकल लूंगा. हुआ भी यही.

ब्ला ब्ला कार का कांसेप्ट है कि आपकी कार है तो आप ब्ला ब्ला कार डाट काम पर अपनी अगली यात्रा के बारे में डाल देते हैं कि फलां तारीख को फलां जगह से फलां जगह तक जा रहा हूं और मेरी कार में दो सीटें खाली हैं, इतने रुपये किराये देकर कोई भी चल सकता है, तो कोई कोई बे-कार मेरे जैसा आदमी मिल सकता है. कोई का मतलब ये है कि जो ब्ला ब्ला कार पर एकाउंट बनाए हुए हो और अपने को हर तरह से वेरीफाइ (मोबाइल नंबर, फेसबुक एकाउंट, आधार कार्ड आदि) कराए हुए है. ऐसे लोग ही राइड शेयर कर करा सकते हैं.

इसी तर्ज पर नोएडा के साफ्टवेयर इंजीनियर संदीप वाधवा की कार का साथ मिला और 120 रुपये देकर एसी कार का आनंद लेते, इन नए मिले / बने साथी से बतियाते गपियाते मेरठ जा पहुंचा. और हां, इनकी इजाजत लेकर बैग में रखा एक बीयर केन खोल लिया, सो यात्रा का आनंद डबल हुआ. मेरठ एक रात रुक कर अगले रोज हरिद्वार निकल गया, ब्ला ब्ला कार पर मेरठ हरिद्वार जाने वाली एक दूसरी कार को एप्रोच कर शेयर कर लिया. बता दें कि ब्ला ब्ला कार नान प्राफिट आर्गेनाइजेशन है और इसकी कोशिश पर्यावरण व फ्यूल बचाने और सामूहिकता-सामाजिकता की भावना डेवलप करने की है.

वाधवा जी की कार से जब मेरठ जा रहा था तो उनने बताया कि वे अक्सर नोएडा मेरठ आते जाते रहते हैं और अब तक आठ लोगों ने ब्ला ब्ला कार डाट काम के जरिए उनकी कार शेयर की है. सभी आठों लोग एक से बढ़कर एक उम्दा विचारों वाले मिले.. { इतना सुनकर मैंने अपनी पीठ चुपचाप ठोंक ली क्योंकि उनने मुझे भी उम्दा कैटगरी में रखा था, यह दुबारा उनसे पूछ कनफर्म करने के बाद किया 🙂 } उनने बताया कि हर बार की कार शेयर यात्रा बेहद आनंददायक रही, साथ ही कार तेल खर्च भी निकाल लिया.

तो साथियों, ओएलएक्स पर मेरा कार बेचना सफल रहा. लंबे समय तक कार के भीतर बैठकर दुनिया और जिंदगी को देखता रहा. अब सड़क पर आकर कार वालों से लेकर बेकार वालों तक को देखने समझने का फिर से मौका मिल रहा है और यह बड़ा आनंददायक है. हम जैसों के जीवन में रुटीन तोड़ना ही सबसे आनंददायक होता है, एक सा कुछ भी बोर करने लगता है. सो, तकनीक के इस दौर में पर्यटन के लिए कारों साधनों की कमी नहीं है, यह कार बेचने के बाद ज्यादा समझ में आया, बस, आपके ज्ञान चक्षु खुले रहने चाहिए.

ये सेल्फी साफ्टवेयर इंजीनियर वाधवा साहब के साथ तब की है जब उनने मुझे मेरठ पहुंचाया. मैं उन्हें 120 रुपये दे रहा था जो उनने ब्ला ब्ला कार पर मेंशन किया था कार शेयर का किराया, तो पहले वो लेने को राजी नहीं हो रहे थे लेकिन जब मैंने ब्ला ब्ला कार कांसेप्ट को जिंदा रखने के लिए कार तेल खर्च साझा करने की दुहाई दी तो वो मान गए. उनको 120 रुपये की जगह दो सौ रुपये दिए और कहा कि 80 रुपए ब्ला ब्ला कार वाले एनजीओ को मेरी तरफ से डोनेट कर दीजिएगा, इस नोबल कांसेप्ट के लिए. वाधवा जी मेरे फेसबुक फ्रेंड बन चुके हैं. इस तरह से एक नए और भ्रमणकारी मित्र से दोस्ती हो गई है.

अभी मैं नोएडा से बनारस के लिए ब्ला ब्ला कार पर एक साथी की तलाश की है. अब बताइए, फेसबुक पर कितने लोग नोएडा से बनारस कार से जाने वाले मिलेंगे और इसकी सूचना शेयर करेंगे? आपको ब्ला ब्ला पर दिल्ली से कोलकाता या गोवा तक कार से जाने वाले मिल जाएंगे. तो इस कानसेप्ट को प्रमोट करना चाहिए. हर कार मालिक को इससे जुड़ना चाहिए ताकि वो अगर उनकी कार में सीट कोई खाली हो तो किसी नए साथी को इच्छित किराया लेकर बिठा लें, और इस प्रकार अपने बढ़े हुए अहंकार रूपी बीपी को नार्मल कर चेहरे पर मुस्कान ला सकें. 🙂

एक रिकमेंडेशन आपके लिए. कभी कौशांबी मेट्रो स्टेशन के ठीक नीचे मेट्रो स्टेशन कैंपस में ही श्री रथ्नम साउथ इंडियन रेस्टोरेंट में जाइए. कार वालों के लिए पार्किंग की पर्याप्त जगह रेस्टों के ठीक सामने ही है. इस रेस्टोरेंट में पालक स्पेशल डोसा खाइए. आनंद आ जाएगा. रेस्टोरेंट में उपर नीचे इतनी जगह है, इतना साफ सुथरा सब कुछ है कि यहां घंटों मीटिंग करने या गपियाने का अलग ही आनंद है. इसी रेस्टो से सटा मैक्डी भी है जहां बर्गरबाज युवाओं युवतियों की अच्छी खासी भीड़ होती है. और हां, ठीक बगल में वेव सिनेमा है, फिलिम देखने का मूड भी फौरन बना सकते हैं. इतना प्लान करके जीना भी क्या जीना. फिलिम तो अचानक देख लेना चाहिए, या यूं कहिए दौड़ा कर देख लेना चाहिए, न तो देखने के लिए प्लानिंग करने के वास्ते दिमाग लगाने की जरूरत और न देखते हुए ही.

तो भइया, तकनालजी के कारण ओला ओएलक्स उबेर मेट्रो से जिंदगी ब्ला ब्ला हो गई है… ऐसे में हो जाए… झिंगा लाला… झिंगा लाला…

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. संपर्क : yashwant@bhadas4media.com


मूल पोस्ट…

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