रोडवेज बस के कंडक्टर का हरामीपना… देखें वीडियो

Yashwant Singh :  बीते साल बाइस दिसंबर को आगरा एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए जा रहा था. नोएडा में सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित रोडवेस बस अड्डे पर बड़ौत डिपो की एक बस पर बैठ गया. यह बस वाया यमुना एक्सप्रेसवे ले जाने वाली थी. बस चल दी और परी चौक से ठीक पहले खराब भी हो गई.

पूरी भरी हुई बस के यात्रियों को नीचे उतार कर कंडक्टर दूसरी बसों को रोक कर बिठाने लगा. एक तो बसें रुकती ही नहीं थीं, दूसरे हम जैसे कई लोग ऐसे थे जो बस की बजाय अब साझे में ओला करके आगरा जाना चाहते थे. सो हम लोगों ने रिफंड मांगना शुरू किया. कंडक्टर रिफंड के नाम पर भड़क जाए और पीछे से आ रही रोडवेज की दूसरी बसों में बैठ जाने की नसीहत दे. अपने एक मित्र रोडवेज अधिकारी से कंडक्टर की बात कराई तो कंडक्टर थोड़े औकात में आया और रिफंड कर दिया.

नोएडा बस अड्डे से परी चौक तक का किराया काटा, तीस रुपये. आगरा तक का कुल किराया लिया था- दो सौ साठ रुपये. तीस काटकर दो सौ तीस रुपये वापस लौटाया. पर बाकी जिन-जिन ने रिफंड लिया, सबको साठ रुपये काटकर लौटाया. हम तीन यात्री मिलकर ओला किए और आगरा चल दिए. लेकिन ओला स्टार्ट होने से ठीक पहले देखते हैं कि जो रोडवेस बस खराब थी, वह चल गई और उसे लेकर ड्राइवर कंडक्टर बैक टू पैवेलियन यानि नोएडा बस अड्डे चले गए. सवाल कई हैं–

-बस खराब थी तो चल कैसे गई… अगर चल सकती थी तो सभी को कम से कम आगे परी चौक तक ले जाना चाहिए था जिससे वहां से सबको कोई न कोई साधन आराम से मिल जाता.

-नोएडा बस अड्डे से परी चौक का किराया तीस रुपये था तो बाकी यात्रियों को रिफंड करने के दौरान साठ साठ रुपये क्यों किराया लिया…

-दर्जनों यात्रियों को जिसमें महिलाएं बच्चे बुजुर्ग तक थे, सड़क पर यूं छोड़ देना और उनके साथ बुरा व्यवहार करना, रिफंड न करना.. यह कहां का शिष्टाचार है…

उम्मीद है यूपी शासन से जुड़े लोग इस पर एक्शन लेंगे. रोडवेज बस और उसके बदमाश कंडक्टर की फोटो शेयर कर रहा हूं. साथ ही एक वीडियो का लिंक भी दे रहा हूं जिसे बस खराबी से लेकर ओला वाली कार पर सवार होकर आगरा जाने के दौरान तैयार किया था. बस खराब होने से हम जो तीन अपरिचित लोग एकजुट हुए, उनमें से एक Guru Sharan भाई तो अपने एफबी मित्र भी बन चुके हैं, दूसरा भाई स्टूडेंट था, उसका नाम याद नहीं आ रहा, हालांकि वह भी एफबी लिस्ट में मेरे कनेक्ट है… हम तीनों ने मिलकर ओला किया, फिर मैंने पूरे घटनाक्रम पर एक बातचीत रिकार्ड की. इस वार्ता में रोडवेज बस के कंडक्टर के हरामीपने की चर्चा है.

वीडियो लिंक ये है… https://youtu.be/_5jaC6VlPx4

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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ओला, ब्ला ब्ला के बाद अब ओयो : नाश्ता और वाई-फाई समेत एसी कमरा सिर्फ 750 रुपये में!

Yashwant Singh : OYO ने सचमुच क्रांति कर दी है. होटल का शानदार एसी कमरा मात्र 750 रुपये में. हाल के दिनों में टेक्नालजी ने गजब की सुविधाएं मुहैया कराई है जिससे हम जैसे घुमंतूओं का जीवन बहुत स्मूथ हो गया है. ब्ला ब्ला, ओला से लेकर ओयो तक. गाड़ी, होटल सब कुछ बेहद सस्ते दरों पर और आपके एक क्लिक पर उपलब्ध. आज पहली बार ओयो की सुविधा यूज कर रहा हूं.

यकीन से कह रहा हूं कि ओयो के जिस कमरे को 750 रुपये में बुक किया (आफर और ओयो कैश का यूज करके), वह कमरा मैं 3000 रुपये देकर भी पाता तो लगता कि सस्ता ही रहा सौदा. ओयो वाले पच्चीस प्रतिशत आफ और पच्चीस प्रतिशत कैश बैक दे रहे हैं. इससे कमरा बेहद सस्ता पड़ रहा है.

ओयो की एक बड़ी खासियत ये है कि बजाए ये होटलों और कस्टमरों के बीच ब्रोकर बनने के, खुद के निजी होटल भारी मात्रा में खोल रहे हैं. इनके कमरे, टायलेट बेहद साफ-सुथरे, माडर्न लुक-फील वाले हैं. फ्री वाई फाई है. डीटीएच कनेक्शन युक्त फ्लैट स्क्रीन टीवी है. कुर्सी मेज ठीकठाक हैं. लॉबी है. दो आलमारियां. नाश्ता फ्री है. मतलब कि 750 रुपये में आपको क्या क्या चाहिए!

आप एप्प के जरिए अपने मोबाइल से ही रूम में बैठे बैठे खाने, नाश्ते, चाय, क्लीनिंग आदि के आर्डर दे सकते हैं, कोई फोन करने या घंटी बजाने का झंझट नहीं. सब कुछ आपके एप्प पर अपडेट होता रहेगा.

आपने OYO के एप्प न डाउनलोड किए हों तो जरूर करें और इसके जरिए जरूरत पड़ने पर किसी शहर में रूम बुक कर एक बार स्टे करें. डाउनलोड लिंक नीचे दे रहा हूं. इस लिंक पर क्लिक करके ओयो एप्प अपने मोबाइल में इंस्टाल करेंगे तो हजार रुपये का ओयो मनी भी आपको मिलेगा जिसे आप कमरा बुक करने के दौरान यूज कर सकते हैं, यानि एक दिन का स्टे लगभग मुफ्त. Try out the OYO Rooms App and get ₹1000 worth OYO Money. Download link: OyoRooms.com/YASHTNY8F 

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं…

Km Madhavi Badiya jaankari…..waise, aapne hotel kahan ki book ki hai?….all India level me kahi par v ye suvidha available hogi Na….

Yashwant Singh नोएडा गोल्फ कोर्स. नोएडा में ही इनके ढेरों होटल हैं.

Km Madhavi Aapne Bahut badiya jaankari Di ….OYO app installed karti Hun…. Shukriya

Kish Sharma वैसे ओयो व्यापार के तौर पर अभी सैकड़ों करोड़ के घाटे में चल रहा है।

Yashwant Singh लेकिन हम जैसे लोग इनके पक्के ग्राहक बन गए तो इनके लाभ में आते देर न लगेगी. ओला का सीन भी कुछ ऐसा ही था. अब तो ओला जबरदस्त फायदे में है.

Aryan Kothiyal OYO का ब्रांड एम्बेसडर हमारे यशवन्त भईया को ही होना चाहिये।

Yashwant Singh अच्छी चीजों का प्रचार करना चाहिए. ज्ञान बांटने से बढ़ता है. हम लोग बुरी बात हो या अच्छी बात, उसका ढिंढोरा पीटने से नहीं चूकते 🙂

Mukund Hari अपनी हाल की 6000 किमी लंबी सड़क यात्रा में ओयो का जमकर इस्तेमाल किया। हर जगह वैल्यू फ़ॉर मनी की तरह लगा। साथ में हर होटल में सुबह का नाश्ता भी किराये के साथ ही मिला यानि नो एक्स्ट्रा भुगतान।

Ravi Kumar Singh Oyo से बेहतर MMT को युज करें सर, उससे बेहतर प्रोपर्टी है उसको पास सारी, रेट में भी लास्ट टाइम बुकिंग पर बेहतर मिलेगा, कैश बैक में पूरे पोंइट युज कर सकते हैं.

Yashwant Singh ओके. जरूर ट्राई करूंगा.

Ravi Kumar Singh जी बेहतर है सर, कैश बैक सबसे बेहतर यही दे रहा है, एक बार यूज करके देखियेगा सर.

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जिंदगी ओएलएक्स ओला से लेकर ब्ला ब्ला तक…. तो गाइए, झिंगालाला… झिंगालाला…

Yashwant Singh : जिंदगी ओला ओएलएक्स से लेकर ब्ला ब्ला तक हो गई है.. कार बेचने के बाद पैदल होने का जो अदभुत अकल्पनीय सुख उठा रहा हूं, उसे शेयर करने का मन नहीं कर रहा है लेकिन कर ही देता हूं क्योंकि अपनी फिलासफी जोत से जोत जलाए रखने वाली रही है. दिल्ली नोएडा मेट्रो से आने-जाने में क्या खूब सुकून मिलता है. इतनी सस्ती और इतनी द्रुतगामी सेवा दिल्ली में कोई दूसरी नहीं. द्रुतगामी इसलिए कि दिल्ली की सड़कों पर कार के सागर में फंस कर चींटी माफिक खिसक रहे कार मालिकों के दयनीय चेहरे देखकर यही लगता है कि सबसे द्रुतगामी अपनी मेट्रो रानी.

उबेर और ओला की जंग के कारण अक्सर सौ से लेकर ढाई सौ रुपये तक के राइड कूपन फ्री मिलते रहते हैं और इनकी रुटीन की एसी कार राइड भी 5 रुपये प्रति किलोमीटर पड़ रही है. न ड्राइवर रखने का झंझट, न तनखा देने की चिंता, न मेंटनेंस की प्राब्लम और न सफाई रखरखाव का कोई सरोकार. खुद की कार न होते हुए भी हम तो कार वाले अब भी बने हुए हैं, पूरे ताव से. हिंहा से हुंहा तक कार ही कार, सिर्फ मोबाइल के एक बटन से कार हाजिर. दिल्ली शहर के बाहर हरिद्वार गया कुछ एकांत साधना करने, गंगा तट किनारे, तो ब्ला ब्ला कार पर एकाउंट बनाया और लगा तलाशने. कई जने मिल गए हरिद्वार जाने वाले. चुना मेरठ तक जा रहे एक साथी को. सोचा मेरठ में जर्नी ब्रेक कर अगले रोज हरिद्वार के लिए मेरठ से ब्ला ब्ला कार के सहारे निकल लूंगा. हुआ भी यही.

ब्ला ब्ला कार का कांसेप्ट है कि आपकी कार है तो आप ब्ला ब्ला कार डाट काम पर अपनी अगली यात्रा के बारे में डाल देते हैं कि फलां तारीख को फलां जगह से फलां जगह तक जा रहा हूं और मेरी कार में दो सीटें खाली हैं, इतने रुपये किराये देकर कोई भी चल सकता है, तो कोई कोई बे-कार मेरे जैसा आदमी मिल सकता है. कोई का मतलब ये है कि जो ब्ला ब्ला कार पर एकाउंट बनाए हुए हो और अपने को हर तरह से वेरीफाइ (मोबाइल नंबर, फेसबुक एकाउंट, आधार कार्ड आदि) कराए हुए है. ऐसे लोग ही राइड शेयर कर करा सकते हैं.

इसी तर्ज पर नोएडा के साफ्टवेयर इंजीनियर संदीप वाधवा की कार का साथ मिला और 120 रुपये देकर एसी कार का आनंद लेते, इन नए मिले / बने साथी से बतियाते गपियाते मेरठ जा पहुंचा. और हां, इनकी इजाजत लेकर बैग में रखा एक बीयर केन खोल लिया, सो यात्रा का आनंद डबल हुआ. मेरठ एक रात रुक कर अगले रोज हरिद्वार निकल गया, ब्ला ब्ला कार पर मेरठ हरिद्वार जाने वाली एक दूसरी कार को एप्रोच कर शेयर कर लिया. बता दें कि ब्ला ब्ला कार नान प्राफिट आर्गेनाइजेशन है और इसकी कोशिश पर्यावरण व फ्यूल बचाने और सामूहिकता-सामाजिकता की भावना डेवलप करने की है.

वाधवा जी की कार से जब मेरठ जा रहा था तो उनने बताया कि वे अक्सर नोएडा मेरठ आते जाते रहते हैं और अब तक आठ लोगों ने ब्ला ब्ला कार डाट काम के जरिए उनकी कार शेयर की है. सभी आठों लोग एक से बढ़कर एक उम्दा विचारों वाले मिले.. { इतना सुनकर मैंने अपनी पीठ चुपचाप ठोंक ली क्योंकि उनने मुझे भी उम्दा कैटगरी में रखा था, यह दुबारा उनसे पूछ कनफर्म करने के बाद किया 🙂 } उनने बताया कि हर बार की कार शेयर यात्रा बेहद आनंददायक रही, साथ ही कार तेल खर्च भी निकाल लिया.

तो साथियों, ओएलएक्स पर मेरा कार बेचना सफल रहा. लंबे समय तक कार के भीतर बैठकर दुनिया और जिंदगी को देखता रहा. अब सड़क पर आकर कार वालों से लेकर बेकार वालों तक को देखने समझने का फिर से मौका मिल रहा है और यह बड़ा आनंददायक है. हम जैसों के जीवन में रुटीन तोड़ना ही सबसे आनंददायक होता है, एक सा कुछ भी बोर करने लगता है. सो, तकनीक के इस दौर में पर्यटन के लिए कारों साधनों की कमी नहीं है, यह कार बेचने के बाद ज्यादा समझ में आया, बस, आपके ज्ञान चक्षु खुले रहने चाहिए.

ये सेल्फी साफ्टवेयर इंजीनियर वाधवा साहब के साथ तब की है जब उनने मुझे मेरठ पहुंचाया. मैं उन्हें 120 रुपये दे रहा था जो उनने ब्ला ब्ला कार पर मेंशन किया था कार शेयर का किराया, तो पहले वो लेने को राजी नहीं हो रहे थे लेकिन जब मैंने ब्ला ब्ला कार कांसेप्ट को जिंदा रखने के लिए कार तेल खर्च साझा करने की दुहाई दी तो वो मान गए. उनको 120 रुपये की जगह दो सौ रुपये दिए और कहा कि 80 रुपए ब्ला ब्ला कार वाले एनजीओ को मेरी तरफ से डोनेट कर दीजिएगा, इस नोबल कांसेप्ट के लिए. वाधवा जी मेरे फेसबुक फ्रेंड बन चुके हैं. इस तरह से एक नए और भ्रमणकारी मित्र से दोस्ती हो गई है.

अभी मैं नोएडा से बनारस के लिए ब्ला ब्ला कार पर एक साथी की तलाश की है. अब बताइए, फेसबुक पर कितने लोग नोएडा से बनारस कार से जाने वाले मिलेंगे और इसकी सूचना शेयर करेंगे? आपको ब्ला ब्ला पर दिल्ली से कोलकाता या गोवा तक कार से जाने वाले मिल जाएंगे. तो इस कानसेप्ट को प्रमोट करना चाहिए. हर कार मालिक को इससे जुड़ना चाहिए ताकि वो अगर उनकी कार में सीट कोई खाली हो तो किसी नए साथी को इच्छित किराया लेकर बिठा लें, और इस प्रकार अपने बढ़े हुए अहंकार रूपी बीपी को नार्मल कर चेहरे पर मुस्कान ला सकें. 🙂

एक रिकमेंडेशन आपके लिए. कभी कौशांबी मेट्रो स्टेशन के ठीक नीचे मेट्रो स्टेशन कैंपस में ही श्री रथ्नम साउथ इंडियन रेस्टोरेंट में जाइए. कार वालों के लिए पार्किंग की पर्याप्त जगह रेस्टों के ठीक सामने ही है. इस रेस्टोरेंट में पालक स्पेशल डोसा खाइए. आनंद आ जाएगा. रेस्टोरेंट में उपर नीचे इतनी जगह है, इतना साफ सुथरा सब कुछ है कि यहां घंटों मीटिंग करने या गपियाने का अलग ही आनंद है. इसी रेस्टो से सटा मैक्डी भी है जहां बर्गरबाज युवाओं युवतियों की अच्छी खासी भीड़ होती है. और हां, ठीक बगल में वेव सिनेमा है, फिलिम देखने का मूड भी फौरन बना सकते हैं. इतना प्लान करके जीना भी क्या जीना. फिलिम तो अचानक देख लेना चाहिए, या यूं कहिए दौड़ा कर देख लेना चाहिए, न तो देखने के लिए प्लानिंग करने के वास्ते दिमाग लगाने की जरूरत और न देखते हुए ही.

तो भइया, तकनालजी के कारण ओला ओएलक्स उबेर मेट्रो से जिंदगी ब्ला ब्ला हो गई है… ऐसे में हो जाए… झिंगा लाला… झिंगा लाला…

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. संपर्क : yashwant@bhadas4media.com


मूल पोस्ट…

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