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प्रधानमंत्री के हेलीकॉप्टर की जांच पर विवाद, खबर पहले पन्ने पर नहीं है

फर्जी छापों की खबर छपती है पर जांच नहीं होने देने की नहीं छपी

काला बक्सा और सफेद अटैची

आज हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर सिंगल कॉलम की एक छोटी सी खबर है, हेलीकॉप्टर की तलाशी के लिए मुअत्तल किए जाने पर विवाद। इस खबर का विस्तार पेज 12 पर होना बताया गया है। पर मेरे घर जो संस्करण आया है उसमें इस पन्ने पर विज्ञापन है। ऐसी कोई खबर नहीं है। चूंकि मुझे खबर मालूम है इसलिए मैंने ढूंढ़ा नहीं और आपके लिए प्रभात खबर डॉट कॉम की यह खबर पेश है। हालांकि, मैंने इस खबर का संपादन किया है छोटा भी।

चुनाव आयोग ने ओडिशा के संबलपुर में ‘एसपीजी सुरक्षा’ प्राप्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हेलीकॉप्टर की जांच को लेकर ‘दायित्व का समुचित निर्वाह न करने’ के आरोप में बुधवार की रात को एक आईएएस अधिकारी, मोहम्मद मोहसिन को निलंबित कर दिया। आयोग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, कर्नाटक कैडर के 1996 बैच के अधिकारी ने 16 अप्रैल को एसपीजी सुरक्षा से जुड़े, निर्वाचन आयोग के निर्देश का पालन नहीं किया। कांग्रेस ने मोहसिन के खिलाफ आयोग की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा है कि जिन नियमों का हवाला देते हुए उसने नौकरशाह को दंडित किया है उसके तहत प्रधानमंत्री के वाहन को जांच से छूट नहीं है।

पार्टी ने ट्वीट कर कहा, ‘वाहनों की जांच करने के अपने कर्तव्य का पालन करने के लिए चुनाव आयोग ने एक अधिकारी को निलंबित किया है। जो नियम बताये गये हैं उनमें प्रधानमंत्री के वाहन को जांच से छूट नहीं दी गयी है।’ इसने पूछा, ‘मोदी हेलिकॉप्टर में जो लेकर जा रहे हैं वह नहीं चाहते कि भारत के लोग उसे देखें।’ आम आदमी पार्टी ने भी ट्वीट कर मोदी पर तंज कसा। इसने पूछा, ‘प्रधानमंत्री के हेलिकॉप्टर की जांच करने वाला अधिकारी निलंबित। चौकीदार अपने ही संरक्षित प्रकोष्ठ में रहता है। क्या चौकीदार कुछ छिपाने का प्रयास कर रहा है।’

इसके साथ खबर यह भी है कि ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के हेलीकॉप्टर की मंगलवार को राउरकेला में निर्वाचन आयोग के उड़न दस्ता अधिकारियों ने जांच की थी। मंगलवार को संबलपुर में इसी तरह की जांच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के हेलीकॉप्टर की भी की गयी थी। पर उन्होंने भारी विरोध किया और एनडीटीवी ने भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों के हवाले से लिखा है बाद में फ्लाइंग स्क्वाड ने आखिरकार जांच नहीं की। वीडियो में एक सील बंद अटैची दिख रही है जो पर्याप्त बड़ी है। स्थिति बहुत स्पष्ट है – प्रधानमंत्री की जांच नहीं होनी चाहिए क्योंकि उन्हें एसपीजी की सुरक्षा मिली हुई है और धर्मेंनद्र प्रधान की नहीं हुई क्योंकि वे भाजपा नेता हैं।

यह सब इन तथ्यों (आरोपों) के बावजूद है कि – प्रधानमंत्री के हेलीकॉप्टर से कर्नाटक के चित्रदुर्ग में एक काला बक्सा उतरा जिसे लेकर कुछ लोग एक अलग गाड़ी से चले गए जो पीएम के काफिले का हिस्सा नहीं था। शक है कि इसमें नकद रहा होगा। (13 04. 2019)

चुनाव में काले धन का उपयोग रोकने के नाम पर सरकार और आयकर विभाग जो कर रहा है वह स्पष्ट रूप से पक्षपात पूर्ण है। यहां तक की टूटीकोरिन में चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद डीएमके उम्मीदवार कनिमोझी के घर पर छापा मारा गया। अखबारों में खबर छप गई। बदनामी करा दी गई। छापे में कुछ नहीं मिला या क्या बरामद हुआ यह ज्यादातर अखबारों में नहीं छपा। अगले दिन स्वीकार कर लिया गया कि कुछ आपत्तिजनक नहीं मिला। सूचना गलत थी। (16.04.19)

आरोप पुराने हैं कि भाजपा विरोधियों के यहां छापे डलवा रही है और भाजपा वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। चुनाव आयोग इस मामले में राजस्व सचिव को उनके तेवर (पत्र की भाषा) के लिए डपट चुका है। (10.04.19)

इसके बावजूद संबलपुर में नरेंद्र मोदी के हेलीकाप्टर की जांच करने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई। और खबर पहले पन्ने पर नहीं। आपके अखबार में कहां है, है कि नहीं देखिए और फिर कोई राय बनाइए। इस बीच सवाल यह भी है कि प्रधानमंत्री के हेलीकॉप्टर की जांच करने वाले अधिकारी को निलंबित करने में इतनी जल्दबाजी क्यों। क्या धर्मेंद्र प्रधान ने इसका लाभ नहीं उठाया? क्या अधिकारियों पर मुअत्तल किए जाने की कार्रवाई का असर नहीं होगा? यहां यह भी उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने कल्याण सिंह द्वारा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में राष्ट्रपति को पत्र लिखा है उस पर कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है।

इस मामले में हिन्दुस्तान टाइम्स के अलावा किसी और अखबार ने पहले पन्ने पर कोई खबर नहीं दी है (द टेलीग्राफ ने भी नहीं) इसलिए मैंने इसके अंदर के पन्ने देखे। अंदर एक पन्ने पर टॉप में सात कॉलम की खबर का शीर्षक है, आईएएस अफसर पर जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है चुनाव आयोग। आप समझ सकते हैं कि ज्यादातर मामलों में आयोग कार्रवाई के लिए रिपोर्ट का इंतजार करता है प्रधानमंत्री से संबंधित इस मामले में कार्रवाई के बाद रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

पेश है, इस खबर का हिन्दी अनुवाद। इसके बाद तय कीजिए कि यह खबर पहले पन्ने के लायक है कि नहीं और ढूंढ़िए कि किस अखबार में पहले पन्ने पर या कहां है। इंटरनेट पर दिल्ली ब्यूरो की यह खबर बताती है, उप चुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा ने दिल्ली में एक सवाल के जवाब में कहा, अधिकारी को मुअत्तल किया गया क्योंकि पहली नजर में यह पाया गया कि वे अपनी ड्यूटी निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार नहीं कर रहे थे। उन्होंने चुनाव आयोग के कतिपय निर्देशों का पालन नहीं किया।

सिन्हा ने आगे कहा, हालांकि एक वरिष्ठ अधिकारी को पूरे मामले का पता लगाने के लिए तैनात किया गया है और आयोग इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्ट शुक्रवार को आ सकती है। यह पूछे जाने पर कि आयोग के संज्ञान में यह घटना (कैसे या) किसके जरिए आई, सिन्हा ने सीधा जवाब नहीं दिया और पहले कहा, यह आयोग की जानकारी में लाया गया। फिर यह पूछे जाने पर कि किसके द्वारा, उन्होंने कहा, फील्ड अधिकारियों और सीओ (केंद्रीय पर्यवेक्षक) द्वारा।

बुधवार की रात चुनाव आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा था कि उसके संज्ञान में लाया गया है कि जनरल ऑब्जर्वर (सामान्य पर्यवेक्षक) ने निर्देशों का उल्लंघन किया है और यह भी कि यह तय है कि एसपीजी की सुरक्षा पाने वाले जांच से मुक्त रहेंगे। यह बताए जाने पर कि सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध सूचनाएं ऐसी छूट के बारे में नहीं बताती हैं, प्रवक्ता ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए समय मांगा था।

गुरुवार को प्रवक्ता ने रिपोर्टर्स के साथ एक सर्कुलर साझा किया गया जो चुनाव प्रक्रिया के दौरान सामान्य उड्डयन परिचालन, चार्टर्ड विमान परिचालन और हेलीकॉप्टर परिचालन के लिए सुरक्षा प्रक्रियाओं के बारे में नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो द्वारा जारी किया गया है। जब यह बताया गया कि इसमें एसपीजी का कोई उल्लेख नहीं है तो प्रवक्ता ने इसके पैरा 1 (i) का संदर्भ दिया जो व्यावसायिक हवाई अड्डों पर विमान में सवार होने से पहले की जांच को कवर करता है।

इस पैराग्राफ में कहा गया है, चुनाव प्रक्रिया के दौरान यात्रियों और उनके सामान की तलाशी व जांच से संबंधित सभी नियमों और प्रक्रियाओं का बगैर किसी अपवाद के सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। सभी यात्रियों (उन लोगों को छोड़कर जो नियमों के तहत मुक्त हैं) और सारे सामान (उन्हें छोड़कर जो नियमों के तहत मुक्त हैं) जो किसी विमान / हेलीकॉप्टर में चढ़ रहे हों / चढ़ाए जा रहे हों, कमर्शियल / चार्टर्ड विमान समेत में सवार होने से पहले काम कर रहे हवाई अड्डों के सुरक्षा जांच क्षेत्र से गुजरेंगे।

इससे पहले के पैराग्राफ में कहा गया है कि सुरक्षा प्रक्रिया का पालन नियंत्रित और अनियंत्रित हवाई अड्डों / हवाई पट्टी / हेलीपोर्ट / हेली फील्ड / वाटरड्रोम आदि में किया जाएगा। पर यह पैराग्राफ सवार होने से पहले की जांच की चर्चा करता है मौके पर निरीक्षण से संबंधित नहीं है। इसके अलावा, इस सर्कुलर का उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है और चुनाव से संबंधित निरीक्षण में सुरक्षा का मतलब यही है कि परिवहन के ऐसे साधनों का उपयोग चुनाव में गलत काम के लिए धन लाने-ले जाने के लिए नहीं किया जाए।

कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा है कि एसपीजी की सुरक्षा पाने वालों के काफिले की जांच करने पर कोई रोक नहीं है। पटेल ने ट्वीट किया, ऐसे मामले हैं जब चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने मौजूदा और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के काफिले की जांच की है। एसपीजी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति की तलाशी नहीं ली जा सकती है। प्रधानमंत्री के हेलीकॉप्टर की जांच करने वाले अधिकारी को क्यों निलंबित करना? क्या संदेश दिया जा रहा है? कुछ लोगों के लिए अलग कानून है?

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया है, एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं पर छापे का खेल खेलने वाले मोदी 15 मिनट की जांच से डर गए? चुनाव आयोग को अपने ही अधिकारी को हटाना पड़ा। क्या मोदी अपने हेलीकॉप्टर की जांच का विरोध कर रहे हैं क्योंकि कर्नाटक में उनके हेलीकॉप्टर में एक बड़ा बक्सा देखा गया था?

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट।

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