पेंशन स्कीम को लेकर हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के रवैये की तीखी आलोचना की

जे.पी.सिंह

उत्तर प्रदेश सरकार के करीब 20 लाख कर्मचारी पिछले दिनों पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग के साथ हड़ताल पर चले गए थे लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दिया है. इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुरानी पेंशन स्कीम बहाली की मांग को लेकर राज्य कर्मचारियों की हड़ताल पर राज्य सरकार के रवैये की तीखी आलोचना की है. कोर्ट ने पूछा है कि बिना कर्मचारियों की सहमति के उनका अंशदान शेयर बाजार में सरकार कैसे लगा सकती है? कर्मचारी इससे असंतुष्ट हैं तो सरकार उनसे काम कैसे ले सकती है? कोर्ट ने तल्ख लहजे में पूछा कि नई पेंशन स्कीम अच्छी है तो इसे सांसदों और विधायकों पर क्यों नहीं लागू किया जाता?

यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने राजकीय मुद्रणालय कर्मियों की हड़ताल से काजलिस्ट न छपने के कारण न्याय प्रशासन को पंगु बनाने पर कायम जनहित याचिका पर दिया है. कोर्ट ने कहा कि सरकार लूट खसोट वाली करोड़ों की योजनाएं लागू करने में नहीं हिचकती और 30 से 35 साल की सेवा के बाद सरकारी कर्मचारियों को पेंशन नहीं देना चाहती. कोर्ट ने पूछा है कि सरकार को क्या कर्मचारियों को न्यूनतम पेंशन देने का आश्वासन नहीं देना चाहिए? सांसदों और विधायकों को जब बिना नौकरी के सरकार पेंशन दे रही है तो 30-35 साल नौकरी के बाद कर्मचारियों को क्यों नहीं दे रही? कोर्ट ने कहा है कि सांसद-विधायक वकालत सहित अन्य व्यवसाय भी कर सकते हैं फिर भी वे पेंशन पा रहे हैं.कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल से सरकार का नहीं लोगों का नुकसान होता है. कोर्ट में पेश कर्मचारी नेताओं को निर्देश दिया कि वे अपनी शिकायत व पेंशन स्कीम की खामियों का 10 दिन में ब्यौरा दें और सरकार इस पर विचार कर 25 फरवरी को हलफनामा दाखिल करे.

कोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा है कि पुरानी पेंशन की मांग मानने में क्या कठिनाई है. यदि नई स्कीम इतनी अच्छी है तो अन्य लोगों पर क्यों नहीं लागू करते. कर्मचारियों का अंशदान शेयर में लगाने के बाद पैसा डूबा तो कौन जिम्मेदार होगा. 2005 से नई पेंशन स्कीम लागू की गई है, जिस पर कर्मचारियों को गहरी आपत्ति है.

पुरानी पेंशन बहाली की मांग करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने छह फरवरी से प्रस्तावित कर्मचारी, शिक्षक एवं अधिकारियों की हड़ताल पर प्रतिबंध लगा दिया था.मुख्य सचिव ने सभी मंडलायुक्त और जिलाधिकारियों को आदेश दिया था कि हड़ताल पर जाने और दूसरे कर्मचारियों को हड़ताल के लिए बाध्य करने वाले कर्मचारियों पर ऐस्मा के तहत कार्रवाई करें. इसके साथ ही मुख्य सचिव ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया था कि केन्द्र सरकार द्वारा कर्मचारियों को पेंशन में दिया जाने वाला अनुदान राज्य सरकार भी देगी. हालाँकि हड़ताल खत्म हो गई है. राजकीय मुद्रणालय और राजकीय कार्यालयों में काम शुरू हो गया है.

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आदमी तो आदमी, अब कुत्ते भी मोदी का भाषण सुनते ही भोंकने लगते हैं :)… अबे ये कुत्ता तो मोदी को टीवी पर देखते ही भोंकने लगता है… ये जानवर हमसे कुछ कह रहे हैं, गौर से सुनिए जरा! जानवरों की अजब-ग़ज़ब दुनिया… हमारे इर्द-गिर्द मनुष्यों के अलावा भी ढेर सारे जीव-जंतु होते हैं लेकिन हम उनके प्रति बेपरवाह होते हैं, असंवेदनशील रहते हैं. यह वीडियो बस ये याद दिलाने के लिए है कि हम मनुष्यों पर अपनी मनुष्य जाति के अलावा ढेर सारे बेजुबानों की जिंदगियों के बारे में सोचने-करने का दायित्व है. इसलिए हर वक्त संवेदनशील रहें, इन जानवरों के लिए. पूरा वीडियो देखें और सोचें कि आपके जीवन में गैर-मनुष्यों के लिए कितनी संवेदनशीलता है, कितना स्पेस है.

Bhadas4media ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಸೋಮವಾರ, ಜನವರಿ 14, 2019

पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग
उत्तर प्रदेश सरकार के करीब 20 लाख कर्मचारी बुधवार को पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग के साथ हड़ताल पर चले गए थे . इन कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से पहले योगी सरकार ने इन सभी के खिलाफ एस्मा लगाने का ऐलान किया था ।कर्मचारी राज्य की नई पेंशन योजना का विरोध कर रहे हैं, जिसमें सरकार का हिस्सा 10 फीसदी से बढ़कर 14 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा गया है. वहीं योगी सरकार ने इस हड़ताल को गलत बताते हुए हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लगाने का फैसला किया था.

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली
उत्तरप्रदेश में एक अप्रैल, 2005 को या इसके बाद राज्य सरकार की सेवाओं में आने वाले अफसरों, कर्मचारियों और शिक्षकों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) यानी नई पेंशन स्कीम के तहत लाया गया है. इससे कर्मचारियों में गुस्सा है और वे पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर आंदोलन भी कर रहे हैं. पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों को कुछ नहीं देना होता था और रिटायर होने पर पेंशन के रूप में हर महीने खासी धनराशि मिलती थी. नई पेंशन योजना में कर्मचारियों के वेतन का 10 फीसदी धनराशि काटी जाएगी और उसमें सरकार का हिस्सा 14 फीसदी जमा कराकर रिटायर होने पर कुल धनराशि से पेंशन मिलेगी. इस बीच, इस धनराशि को शेयर या बांड आदि में लगाया जाएगा।

विधानपरिषद में सरकार का जवाब
उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को नयी पेंशन योजना (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) के तहत ही पेंशन मिलेगी. अगर केन्द्र सरकार इस योजना में कोई परिवर्तन या संशोधन करती है, तभी राज्य सरकार कोई बदलाव करेगी.विधानपरिषद में प्रश्नकाल में सदस्य जगवीर किशोर जैन के लिखित सवाल के जवाब में वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में एक अप्रैल 2005 से नयी पेंशन योजना (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) लागू है. प्रदेश सरकार के सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले पेंशन की व्यवस्था केन्द्र सरकार की पेंशन व्यवस्था पर आधारित है.

सरकार ने अपना योगदान बढ़ाया
हड़ताल के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने नई पेंशन में अपना हिस्सा 10 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसद कर दिया है. जबकि कर्मचारियों का हिस्सा 10 फीसदी ही कटेगा. सरकार द्वारा अपना हिस्सा चार फीसदी बढ़ाने से कर्मचारियों की पेंशन बढ़ जाएगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर स्वीकृति की मुहर लगा दी गई.

इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह कानून मामलों के विशेषज्ञ हैं.

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Bhadas4media ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಶನಿವಾರ, ಜನವರಿ 26, 2019

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