बालिकागृह रेप कांड की रिपोर्टिंग पर रोक को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया

Santosh Singh : मुजफ्फरपुर बालिकागृह रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के मीडिया के रिपोर्टिंग की तारीफ करते हुए कहा कि मुजफ्फरपुर बालिकागृह रेप मामले में रिपोर्टिंग पर लगा बैन गलत है और अभी से इस बैन को खत्म किया जाता है। पत्रकार की ओर से दलील दे रही वकील ने कोर्ट के सामने कहा कि इस मामले का मुख्य आरोपी खुद मीडिया घराने से ताल्लुक रखता है और उसके परिवार के कई लोग बड़े मीडिया हाउस से जुड़े हैं फिर भी मीडिया ने खबर उजागर करने से परहेज नहीं किया।

कशिश चैनल की रिपोर्टिंग पर आयी मीडिया रिपोर्ट को भी कोर्ट के सामने पेश किया गया। पूरी दलील सुनने के बाद कोर्ट ने बिहार के मीडिया की रिपोर्टिंग की तारीफ करते हुए कहा कि बैन पूरी तौर पर अनुचित है और पिछले सुनवाई में रिपोर्टिंग को लेकर जो गाइड लाइन जारी किया गया था, खास करके पीड़िता की पहचान किसी भी स्थिति में उजागर नहीं होनी चाहिए, उसका मी़डिया ख्याल रखें।

इतना ही नहीं, मीडिया पर बैन पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब वो खुद इस मामले की जांच की मॉनिटरिंग करेगी और साथ ही शेल्टर होम मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर पर सख्ती दिखाते हुए आइटी विभाग से उसकी संपत्ति की जांच करने का निर्देश दिया है।

वहीं कोर्ट ने पूर्व मंत्री के पति चंद्रशेखर वर्मा और मंजू वर्मा के अवैध हथियार की जांच करने का आदेश देते हुए बिहार सरकार द्वारा दिए गए साढ़े चार करोड़ रुपये अनुदान की भी जांच करने को कहा है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि एक एक पैसे का हिसाब बतायें जो शेल्टर होम को सरकार ने दिया है।

कोर्ट ने बिहार सरकार को आदेश दिया है कि जिन लड़कियों को ब्रजेश ठाकुर द्वारा संचालित शेल्टर होम से कहीं और शिफ्ट किया गया है, उसके बारे में हलफनामा दायर करें। साथ ही समाज कल्याण विभाग की पूरी भूमिका की जांच भी हो।

इस बीच जैसे ही मीडिया पर से बैन हटने की खबर आयी, सीबीआई के सूत्रों ने जानकारी दी कि छापामारी शुरू हो गयी है। चार लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। जल्द ही बड़ी गिरफ्तातारी सम्भव है। वहीं सीबीआई ने जांच में तेजी लाने के लिए 1987 बैच के सीनियर आईपीएस अधिकारी एके शर्मा की अध्यक्षता में 14 सदस्यीय टीम गठित की है जिसमें आईपीएस अधिकारी जेपी मिश्रा भी शामिल हैं जिनको हटाने को लेकर काफी बवेला मचा था।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से एक बार फिर लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा बढा है। इतना ही मेरे रिपोटिंग को लेकर सवाल खड़े करने वालों को सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जबाव मिल गया होगा।

कशिश न्यूज चैनल के संपादक संतोष सिंह की एफबी वॉल से.

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