संघ प्रमुख ने मांग की और ज्यादातर अखबारों ने बजा दिया भोंपू

यह नहीं बताया कि विजयादशमी पर पिछले पांच साल के भाषणों में नहीं था राम मंदिर का जिक्र

चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की मंदिर बनाने की मांग अंग्रेजी-हिन्दी के सभी अखबारों में लीड है। आइए, देखते हैं हिन्दी अखबारों ने इसे कैसे किस शीर्षक से छापा है और क्या विस्तार है। दैनिक भास्कर ने अपने स्तर पर ही इस खबर की राजनीति बता दी है। “भागवत की रामकथा, साल भर में बदला रुख” – फ्लैग शीर्षक के साथ अखबार ने यह भी बताया है कि संघ प्रमुख ने पिछले साल क्या कहा था और यह भी कि विजयादशमी के इस पंरापगत भाषण में पांच साल राम मंदिर का जिक्र नहीं हुआ। अब महीने में तीसरी बार मंदिर पर बात हो रही है। इससे पहले 19 सितंबर को कहा था, मैं नहीं जानता कि मंदिर के लिए अद्यादेश जारी किया जा सकता है कि नहीं लेकिन निर्माण शीघ्र शुरू होना चाहिए जबकि एक अक्तूबर को हरिद्वार मे कहा था कि, विपक्षी दल मंदिर निर्माण का खुलेआम विरोध नहीं कर सकते। संघ भाजपा मंदिर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और अब कानून लाने की बात कर रहे हैं।

नवोदय टाइम्स ने भी इस खबर को लीड बनाया है। शीर्षक है, “भागवत बोले, मंदिर के लिए कानून बनाए केंद्र”। उपशीर्षक है, “कहा – नई-नई चीजें पेश कर फैसले में रोड़े अटका रहे कुछ तत्व”। अखबार ने खबर की शुरुआत से पहले लिखा है, “संघ प्रमुख ने विजयदशमी के संबोधन में उठाए कई सवाल”। इस खबर के साथ एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का बयान नवोदय टाइम्स और राजस्थान पत्रिका में है। शीर्षक है, “संघ-भाजपा का बहुलतावाद में विश्वास नहीं : ओवैसी”। ओवैसी ने कहा है, आरएसएस और उनकी सरकार को कौन राम मंदिर बनाने के लिए कानून बनाने से रोक रहा है? यह देश को अधिनायकवाद में तब्दील करने का उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि, उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि किसी भी खास धर्म के लिए विशिष्ट कानून नहीं बनाया जा सकता है और यह संविधान का उल्लंघन होगा।

राजस्थान पत्रिका ने इसका शीर्षक लगाया है, “भागवत बोले धैर्य की परीक्षा न लें, कानून लाएं राम मंदिर बनाएं।” इसके ऊपर फ्लैग शीर्षक है, “चेतावनी:सुप्रीम कोर्ट में विवादित भूमि पर 10 दिन बाद सुनवाई”। पत्रिका ने बी असदुद्दीन ओवैसी के बयान के साथ जद (यू) के प्रधानमहासिचव केसी त्यागी और कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह का भी बयान छापा है। केसी त्यागी ने कहा है कि हम भागवत की बातों का समर्थन नहीं करते हैं। ….. हमें कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए जबकि कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि संघ ने साढ़े चार साल तक नाथू राम गोड्से की भक्ति की लेकिन चुनाव पास आते ही भागवत को भगवान राम याद आ रहे हैं। नवोदय टाइम्स ने खालिद राशिद फरंगीमहली का बयान भी प्रमुखता से छापा है। उन्होंने कहा है, देश में बच्चों को भी पता है कि राम मंदिर का मुद्दा चुनाव के समय ही हमेशा से उठता आया है। अब चूंकि कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए यह मुद्दा फिर से उठाया जा रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने भी ऐसा ही कहा है, यह खुली बात है कि जब भी आरएसएस और भाजपा भगवान राम की बात करते हैं तो समझ लेना चाहिए कि चुनाव नजदीक है।


नवभारत टाइम्स ने इसे लीड बनाया है। शीर्षक है, “चुनावों से पहले भागवत कथा, संसद के रास्ते जल्द बने मंदिर।” अखबार ने उपशीर्षक लगाया है, संघ प्रमुख ने सरकार पर बढ़ाया प्रेशर, 10 दिन बाद कोर्ट में है सुनवाई। अखबार ने नागपुर डेटलाइन से ‘भाषा’ की खबर छापी है और पहले पैरे में ही लिखा है, उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण स्वगौरव की दृष्टि से आवश्यक है और मंदिर बनने से देश में सद्भावना और एकात्मता का वातावरण बनेगा। दैनिक हिन्दुस्तान ने भी इसे लीड बनाया है। शीर्षक है, “कानून लाकर मंदिर बने : भागवत”। फ्लैग हेडिंग है, “संघ प्रमुख ने सरकार से अपील की, कहा – अयोध्या में राम मंदिर बनने से देश में एकता -सदभाव का माहौल बनेगा”। अखबार ने भागवत का एक कोट प्रमुखता से छापा है, भगवान राम किसी एक संप्रदाय के नहीं हैं। केंद्र सरकार किसी भी तरह कानून लाए। लोग यह पूछ रहे हैं कि उनके द्वारा चुनी गई सरकार है फिर भी राम मंदिर क्यों नहीं बन रहा है।

कट्टरपंथी ताकतें रोड़े अटका रही हैं – शीर्षक से दो कॉलम, चार लाइन में बड़े अक्षरों में लिखा है, संघ प्रमुख ने कहा, स्वास्थ की राजनीति करने वाली कुछ कट्टरपंथी ताकतें इसमें रोड़े अटका रही हैं। राजनीति के कारण मदिर निर्माण में देरी हो रही है। बिना वजह समाज के धैर्य की परीक्षा लेना हित में नहीं है। अखबार ने इसपर उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री, श्रीकांत शर्मा का बयान भी प्रमुखता से छापा है। उन्होंने कहा है कि राम मंदिर निर्माण का मुद्दा राजनीतिक नहीं बल्कि आस्था का विषय है। संसद के विकल्प के बारे में विचार करना चाहिए। जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास का बयान भी दैनिक हिन्दुस्तान ने प्रमुखता से छापा है। उनका कहना है कि सरकार के घोषणा पत्र में मंदिर निर्माण है। उसपर ध्यान केंद्रित कर संघ के विचारों का केंद्र सरकार पालन करे।

दैनिक जागरण ने भी इसे लीड बनाया है। शीर्षक है, “सरकार राम मंदिर के लिए कानून बनाए :भागवत”। उपशीर्षक है, सरसंघचालक ने कहा, “भूमि स्वामित्व पर शीघ्र निर्णय़ हो”। जागरण ने मुंबई डेटलाइन से राज्य ब्यूरो की खबर छापी है। अखबार ने एक बॉक्स में भागवत की फोटो के साथ उठाए सवाल शीर्षक से दो बिन्दु प्रकाशित किए हैं और उसके नीचे दो कॉलम में एक छोटी सी खबर है जिसका शीर्षक है, रक्षा उत्पादन में आत्म निर्भर हो देश। जो दो बिन्दु हैं उनमें पहला इस प्रकार है, राम मंदिर होने के सभी साक्ष्य होने के बावजूद वहां मंदिर निर्माण के लिए जमीन नहीं मिल पा रही। दूसरा मुद्दा है, न्यायिक प्रक्रिया में तरह-तरह की नई बातें पैदा करके निर्णय न होने देने का स्पष्ट खेल कुछ शक्तियां खेल रही हैं। अमर उजाला में खबरों के पहले पेज पर आज भरपूर विज्ञापन है। सिर्फ एक खबर लीड है और वह नारायण दत्त तिवारी के निधन की है। तथा इससे संबंधित अन्य खबरें बॉक्स में हैं।

अखबार के तीसरे पेज पर भी लगभग इतना ही विज्ञापन है। इसे भी पहले पेज जैसा बनाया गया है। इस पेज पर भागवत की खबर लीड है। शीर्षक है, राम मंदिर बनाने को कानून लाए सरकार : भागवत। उपशीर्षक है, संघ प्रमुख ने कहा, राजनीतिक दखल नहीं होता तो मंदिर बहुत पहले बन जाता। अखबार ने और यह भी कहा शीर्षक से एक कॉलम में उनकी दूसरी चार बातें भी छापी हैं। इसके साथ भागवत की एक कॉलम की फोटो है और उसके नीचे दो कॉलम में सबरीमाला मामले में जनभावनाओं का ख्याल नहीं रखा शीर्षक से चार लाइन की खबर छापी है। यह सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी है।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट। संपर्क : anuvaad@hotmail.com

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