राणा यशवंत ने ‘इंडिया न्यूज’ चैनल को गुडबाय कहा

इंडिया न्यूज चैनल के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवन्त ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. कल ऑफिस में उनकी फेयरवेल पार्टी आयोजित की गई. जाते जाते उन्होंने अपने सहकर्मियों को एक थैंक्यू लेटर लिखा जो इस प्रकार है-

प्रिय साथियों

यशस्वी कवि केदारनाथ सिंह की कविता है – “लंबे दिन के बाद जब लौट कर आता हूं तो कुछ देर तक कमरे के दानव से लड़ना पड़ता है। पराजित कोई नहीं होता, पर समझौता भी कोई नहीं करता। शायद हम दोनों को यह विश्वास है कि हमारे बीच एक तीसरा भी है जो अजन्मा है”। यह जो तीसरा है, वो संभावना है, उम्मीद है, संघर्ष है, बड़े उद्देश्य हैं, औऱ इन सबका ध्येय भविष्य की उपलब्धियां है। इसी की खातिर आदमी एक जगह रहता है, बाहर जाता है, लौटता है औऱ फिर जाता है। कभी-कभार इस प्रक्रिया में पड़ाव बदल जाते हैं। मेरा भी बदल रहा है। बड़े मकसद के लिए पड़ाव बदलने पड़ते हैं, आगे के सफर पर निकलना पड़ता है।

पिछले 6 वर्षों से इंडिया न्यूज के लिए, आपसबों के साथ युद्धरत रहा। दफ्तर आने-जाने के नियम- सामान्य कम, असामान्य ज्यादा रहे। आपमें से कइयों को वक्त-वेवक्त जगाया, भगाया, बताया और कई दफा जो नहीं होता लग रहा था, उसको भी मुमकिन बनाया। ऐसा आपसबों की लगन, सामर्थ्य, प्रतिभा और कई मामलों में धैर्य के कारण ही हो पाया। मेरा सफर 14 जनवरी 2013 से आईटीवी नेटवर्क के साथ शुरु हुआ और आज मैं स्वंय के लिए एक नई राह चुन रहा हूं। लेकिन मैं आपके पास हमेशा, ठीक वैसे ही हूं, जैसे यहां काम करते हुए आपने मुझे पाया है। हां, अब वो हर छोटी-बड़ी शिकायतें, जिन्हें लेकर आप मेरे पास आते थे,उनको रखने की जगह बदल जाएंगी। बाकी कुछ नहीं।
पिछले 6 वर्षों में असाधारण सफलताओं और अद्भुत टीम-भावना के असंख्य उदाहरण बने। छोटी-सी टीम ने इतिहास के उस सबक को बार-बार दोहराया कि युद्ध संख्या से नहीं साहस और रणनीति से जीते जाते हैं। जीवन और जिजीविषा की खूबी ये है कि संघर्ष जितना बड़ा होता है, क्षमता का इम्तिहान उतना कड़ा होता है और फिर कामयाबी उतनी ही बड़ी होती है। इंडिया न्यूज को पिछले 6 साल में एक मकाम तक ले आने में आप सबों की मेहनत और लगन का बड़ा योगदान रहा है। कई साथी आज कहीं और चले गए, लेकिन उनकी भी दिन-रात की मेहनत चैनल की कामयाबी में शामिल है। जो जितने दिन अपने दे गया, उतने दिनों का उसका हिस्सा इस चैनल के जीवन में हमेशा बना रहेगा।
आप सबों के पेशेवर, निजी औऱ पारिवारिक जीवन में मैं दाखिल रहा। मेरी राय रही है कि लीडर को सबसे ज्यादा एक्सेसिबल और ऑर्डिनरी होना चाहिए, ताकि उससे कोई भी बात कही-सुनी जा सके। मैंने कोशिश यही की कि जिनती परेशानियां, मुश्किलें आपकी कम कर सकूं, करूं, ताकि आप संस्थान को अपना बेहतर दे सकें। आपकी खातिर संस्थान से जब-जब जो कहा, हर वाजिब रास्ता निकलता रहा। कई दफा कुछ नहीं कर सका तो उसकी भी वाजिब वजहें रही। इंडिया न्यूज मेरे जीवन में वही मायने रखेगा जैसा इंसान के लिए घर। वह कहीं रहे, पलटकर देखता रहता है. घरवाले पूछ-परख करते रहते हैं। काम करते हुए आप सबों के साथ, एक पेशेवर मगर, निजी औऱ जज्बाती रिश्ता भी बना। वह हमेशा बांधे रखेगा। एक बात औऱ जिसको अपने अंदर रख लिया, तो सच आधा ही रहेगा। पिछळे 6 वर्षों में कार्तिक जी ने जो सहयोग और सम्मान दिया, उसने मेरे कंधों पर जिम्मेदारियों का अहसास कहीं ज्यादा कराया। बहुत सारे मौकों पर चट्टान की तरह खड़े रहे और काम करने के मेरे दायरे को निर्बाध रखा। कई बार असहमतियों में भी मेरे लिए अपने मुताबिक करने की आजादी बनाए रखी। उनका इस बात के लिए भी शुक्रिया कि मुझे, आगे कुछ और करने के लिए उन्होंने आखिरकार इजाजत दे दी। संस्थान को चलाने में वरुण जी, दीपक जी, शिखा जी, नीरज सोनी जी के कंधे से कंधा मिलाकर अपनी पूरी ऊर्जा लगाई और इन सबका मेरे ऊपर एक भरोसा बना रहा।

संस्थान के भरोसे और पेशेवर रिश्ते का इससे अच्छा उदाहरण क्या हो सकता है कि मेरे इस्तीफा देने के इतने दिनों बाद भी मैं पूरे अधिकार से काम करता रहा, फैसले लेता रहा। यह मेल मैं जब लिख रहा हूं, आखिरी दिन औऱ आखिरी घंटे हैं, लेकिन आज भी सारे जरुरी काम किए, बैठकें कीं। जो कमाया है, उसी का ये सिला है। पीछे मुड़कर जब देखता हूं तो ईमानदारी से ये स्वीकार करता हूं कि इस पूरी यात्रा में आपसबों से बहतु कुछ सीखा है। यह मेरी थाती है, पाथेय भी। अगर कभी, किसी कारण से आपमें से किसी को मेरी किसी बात, फैसले या काम से कोई ठेस पहुंची हो तो उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूं। आप सबों के सफल भविष्य की कामनाओं के साथ.

आपका शुभेच्छु
राणा यशवंत


भड़ास4मीडिया से बातचीत में राणा यशवन्त ने इस्तीफा देने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा-

“आज इंडिया न्यूज़ में मेरा आख़िरी दिन था. फ़ेयरवेल पार्टी संस्थान की तरफ़ से रखी गयी थी. लम्बे समय से पत्रकारिता की मुर्दनी और कथित पतन के मौजूदा दौर में कुछ ऐसा करने की सोच रहा था, जिससे ज़मीन टूटे. बीमार होने के बाद इसपर गम्भीरता से काम किया. बहुत पहले इस्तीफ़ा दिया, लेकिन उसको स्वीकार करने और नोटिस पिरीयड के दौरान ज़िम्मेदारियों को सौंपने में वक़्त लगा. आज विदाई आयोजन में पूरा चैनल बना रहा और चलते हुए मैंने एक मेल सबको डाला. वो मेल भी दे रहा हूँ. थोड़ा घूमने-फिरने और तबियत बदलने के बाद कुछ नया करेंगे. जल्द बैठेंगे.”

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