मरने के बाद कोई किसी को नहीं पूछता, सब ताकत के पुजारी हैं, यही जग की रीत है

Vimal Kumar : जब अर्जुन सिंह जिन्दा थे तो लेखक और पत्रकार उनके आगे पीछे घूमा करते थे लेकिन उनके मरने के बाद उनके नाम पर शुरू पुरस्कार समारोह में अब कोई नहीं झांकता. पिछले साल भी इस समारोह में कम लोग थे. इस बार तो और कम लोग. अज्ञेय जी के निधन के बाद में यही हुआ. अज्ञेय जी जब जीवित थे तो उनका जलवा था. लेकिन मरने के बाद सब भूल गए.

जन्मशती वर्ष में ओम थानवी और अशोक वाजपेयी ने उन्हें जरूर याद किया पर डॉ कर्ण सिंह जैसे लोगों ने क्या किया. मरने के बाद कोई किसी को नहीं पूछता. सब ताक़त के पुजारी हैं. यही जग की रीत है. मीडिया में भी कोई नहीं पूछता. कहां गए वो पत्रकार और लेखक जिनको अर्जुन सिंह ने उपकृत किया था. अर्जुन सिंह नहीं होते तो अशोक वाजपेयी भी कला संस्कृति के लिए उतना नहीं कर पाते. वैसे मैं अर्जुन सिंह की नेहरु गांधी परिवार के प्रति अंधभक्ति का विरोधी रहा हूं.

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार विमल कुमार के फेसबुक वॉल से.

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