सहारा के कर्मचारियों ने मुंबई में गठित की यूनियन, नाम- ‘सहारा इंडिया कामगार संगठना’

हम सहारा इंडिया परिवार के पीड़ित कर्मचारी हैं जो मुंबई के गोरेगांव कार्यालय में कार्यरत हैं. सहारा के पीड़ित हम इसलिये हैं कि पिछले लंबे समय से हम आधी अधूरी तनख्वाह में निर्वहन कर रहे हैं और उसमें ६ महिनों का तनख्वाह बकाया है. सहारा इंडिया में पहली कर्मचारी यूनियन का गठन मुंबई में हो चुका है जिसका नाम सहारा इंडिया कामगार संगठना है. प्रबंधन के लाख दावों और झूठे आश्वासनों के बाद भूखे परिवार के दर्द ने हमें मजबूर कर दिया कि हम संगठन के तहत झूठ के पुलिंदों की खिलाफत करें. हमारे दर्द को दबाने के लिए मुंबई में प्रबंधन ने तथाकथित अधिकारियों की टीम खड़ी रखी है जो झूठे आश्वासन, धमकी देना और स्थानांतरण करने की बातें कहते हैं. लेकिन इस तानाशाही से पीड़ित करीब दो सौ लोगों का सब्र आखिरकार टूट गया और लोग गोरेंगाव पुलिस थाने में पहुंचे, चुंकि बातें तनख्वाह की थी इसलिए पुलिस ने हमारी शिकायत को श्रम आयुक्त के पास भेज दिया.

श्रम आयुक्त के कार्यालय के निर्देशों के अनुसार हमारी टीम ने काम शुरू किया और अपने ऊपर हो रहे अन्याय की आवाज़ को मुखर कर रहे हैं. सहारा इंडिया के प्रबंधन में तथाकथित वरिष्ठ श्रम कार्यालय में तलब किये गए थे जहां उन्होंने लोगों की बकाया तनख्वाह और हर महीने कम से कम अस्सी प्रतिशत तनख्वाह देने को कहा गया, लेकिन अफसोस पहली बार ही प्रबंधन फेल हो गया. अब अगली सुनवाई ७ सितंबर को है, जहां यह तथाकथित वरिष्ठों को जवाब देना है. इस दौरान हमारे संगठन को इन तथाकथित वरिष्ठों ने धमकी देना शुरू कर दिया है. जिसकी शिकायत हमने लाचार होकर गोरेगांव पुलिस थाने में किया है.

हमारे हालातों को भड़ास फॉर मीडिया बुलंद करता रहा है इसलिए धन्यवाद लेकिन मैं आपका ध्यान आकर्षित उन कर्मचारियों की तरफ करना चाहता हूं जिनकी तनख्वाह पंद्रह हजार के इर्द-गिर्द है और प्रबंधन उन्हें मात्र आधी तनख्वाह दे रहा है. आखिर सात हजार रूपये में और वह भी चार महीने में एक बार दिये जाने पर हम कैसे अपने परिवार का भरण पोषण करें यह सबसे बड़ा संकट था, जिसके लिए हमने अपने प्रबंधन से जुड़े सभी अधिकारियों को पत्र लिखा, बात की लेकिन मुंबई में बैठे झूठे तथाकथित वरिष्ठों ने हमें नौकरी छोड़ने की बात कही. हम उसके लिए भी तैयार थे लेकिन हमारी तनख्वाह, पीएफ, ग्रेच्युटी और आगे की सर्विस के बारे में कुछ बोलने से बचते रहे.

जब हम संख्याबद्ध होकर अपनी पीड़ा बताने गए तो उल्टा कारवाई करने की धमकियां मिलने लगीं. सहारा कामगार संगठन के अध्यक्ष के रूप में हम अब आरपार की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं. हम भूखों मर रहे हैं जबकि प्रबंधन के नाम पर एचआर हेड काशिनाथ झा को फोर्ड इको स्पोर्ट गाड़ी दी जा रही है, इससे गदगद झा कर्मचारियों को धमकी दे रहा है. इसी प्रकार सभी वरिष्ठ अय्याशी में लगे हैं कंपनी से यह  पेट्रोल, घर के बिजली बिल, फोन, मोबाईल बिल, खाने का खर्चा ले रहे हैं जो उनकी मोटी लाखों रूपए की तनख्वाह के अलावा है.. हमारी मांग है कि अब कर्मचारी तभी मानेगा जब मालिकों के परिवार का कोई हमारी बात सुने और उसपर कारवाई करे. हमने अपने पत्र में सचेत किया है कि सहारा इंडिया के मुखिया सुब्रत रॉय के छोटे बेटे सीमांतो रॉय विदेश भाग सकते हैं. जबकि हमारी वर्षों की मेहनत के बाद तनख्वाह से काटी गई पीएफ की रकम अब तक पीएफ अकाउंट में ही नहीं जमा की गई.

हमारे संगठन में सभी कर्मचारी दस वर्षों से ज्यादा समय से सहारा इंडिया के साथ जुड़े हैं. परिवार के नाम पर हमसे प्रबंधन छलावा कर रहा है जिसके तहत उसने कर्मचारी के हक पीएफ को डकार लिया और अब हमारी पूरी सर्विस को डकारने की फिराक में हैं. संगठन के सचिव वेदप्रकाश मिश्रा ने प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा है कि प्रबंधन के द्वारा किसी भी कर्मचारी को दी जा रही धमकियों से यदि माहौल बिगड़ता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी. हमें पता है कि प्रबंधन साम दाम दंड भेद के तहत रोज़ी और रोटी की इस लड़ाई को कुचलने के लिए अपने दल्लों के बल पर पूरी कोशिश में लग गया है.

संपर्क सूत्र

विशाल मोरे
एम्प्लोई कोड नंबर – २११४७
मोबाईल नंबर – ८०९७३३०६५६

वेद प्रकाश मिश्रा
एम्प्लोई कोड नंबर – २०१०२
मोबाईल नंबर – ९९८७५५५१३१ 

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